Sunday, November 07, 2010

श्री खुशदीप सहगल के पिताजी का देहावसान-चर्चा हिन्दी चिट्ठो की ( पंकज मिश्रा )

नमस्कार, चर्चा हिन्दी चिट्ठो के साथ मै पंकज मिश्रा आपके साथ आपके चिट्ठो की चर्चा लेकर!

बडे दुखः की बात है कि श्री खुशदीप शहगल जी के 82 वर्षीय पिताजी का मेरठ के एक अस्‍पताल के आई सी यू में 5 नवम्‍बर 2010 की प्रात: बीमारी से निधन हो गया है। शोक-संतप्‍त परिवार के प्रति चिट्ठाजगत परिवार अपनी संवेदना व्‍यक्‍त करता है और परमपिता परमात्‍मा से दिवंगत आत्‍मा की शांति के लिए प्रार्थना करता है।

यह जानकारी प्राप्त हुई  है पिताजी ब्लाग के माध्यम से.

श्री खुशदीप सहगल के पिताजी का देहावसान

image यह दुखद सूचना 5 नवम्‍बर 2010 की सुबह 8 बजकर 16 मिनट पर स्‍वयं खुशदीप भाई ने मुझे देते हुए कहा था कि इसे 6 नवम्‍बर 2010 को प्रसारित करें ताकि दीपावली के दिन खुशियों में खलल न पड़े। सबकी खुशियों का ख्‍याल रखने वाले खुशदीप और उनका परिवार इस विपदा से अकेले ही जूझते रहे।

बी एस. पाबला जी ने अपने ब्लाग पर लिखा है कि-

खुशदीप सहगल को पितृ शोक

खुशदीप जी के पिताश्री को श्रद्धाँजलि अर्पित करते हुए परमपिता परमात्मा से दिवंगत की आत्मा को शांति और उनके शोक संतप्त परिजनों को यह आघात सहन करने की शक्ति देने की प्रार्थना।

सभी शुभचिंतक हिन्दी चिट्ठाकार इस दुखः की घड़ी में खुशदीप जी के साथ हैं।

ढेर सारी बधाई-ब्लॉग4वार्ता ने दीवाली मनाई------ललित शर्मा

जी हां श्री ललित शर्मा जी लिखते है दीपवली के शुभ अवसर पर.

नीचे कुछ चित्र उनके ब्लाग से,

image image

ताऊ डाट इन पर पहेलियो का सिलसिला जारी है और सिर्फ़ एक पायदान पिछे है शतक पूरा होने मे ,

कल शनिवार को ताऊ पहेली का ९९ अंक प्रस्तुत किया गया है.

ताऊ पहेली – 99

आज के लिये बस इतना ही क्युकि मै देख रहा हु गोलमाल-३

दिजिये इजाजत, धन्यवाद

Friday, November 05, 2010

चर्चा हिन्दी चिट्ठो की तरफ़ से आप सभी को दीपावली की शुभकामनाये!- सादर, पंकज मिश्रा

नमस्कार! मै पंकज मिश्रा आपके साथ.image

सबसे पहले आप सब मेरे तथा मेरे परिवार की तरफ़ से दीवाली की शुभकामनाये स्वीकार किजिये..और इस दीपवली पर कम से कम पटाखे जलाईये प्रदुषण बचाइये, यह तो मै कह दिया बाकी आप जैसा सोचे करे.. smile_sad

अचानक प्रकट हुआ देखकर हैरान है आप सब ना? मै भी हैरान हु कि मुझे समय ने इतना मजबूर क्यु कर दिया है कि मै आप सबसे दूर रहने पर मजबूर हु, खैर चलिये ये अब बातें तो होती रहेगी आप सब चर्चा पर ध्यान दिजिये.

शुरुआत हमेशा की तरह आज भी गुरुदेव समीर लाल जी से ही होवेगी..समीर जी ने दीपवली के शुभ अवसर पर लिखा है कि-

और साथ मे है शुभम मिश्रा जी ब्लाग फ़ार वार्ता के लिये

जीवन की कड़वाहट हर ले
मीठा जाम कहाँ से लाऊँ?

दिल मेरा खुश होकर गाये
ऐसी शाम कहाँ से लाऊँ?

मन में जो उजियारा कर दे
वैसा दीप कहाँ से लाऊँ?

* छोटे बच्चों को स्वयं पटाखे जलाने को न दें। उनके साथ किसी वयस्क को अवश्य रहना चाहिए।

* पटाखों को कभी भी जेब में न रखें।

* पटाखों पर झुककर उन्हें नहीं चलाना चाहिए। पटाखों को कभी भी टिन के डिब्बे या कांच की बोतल में रख कर न जलाएं।

मन में जो उजियारा कर दे
तमन्ना- ए- चराग़- ए- दीवाली - हर आँगन बिखरे आलोक - ब्लॉग 4 वार्ता - शिवम् मिश्रा

अब आगे चलते है श्रीमान डा. अरविन्द मिश्रा जी के ब्लाग पर.

मिश्रा जी ने बताया है कि

बीन बैग्स पर बैठ कर बिग बास देखने का मजा ही कुछ और है!

वैसे हम सभी देखते है ऐसी वस्तुये लेकिन जानने की जागरुकता नही होती लेकिन आप इस लेख के माध्यम से जान सकते है कि-

imageबीन बैग एक पोर्टेबल सोफा है जिसे आप अपनी सुविधानुसार किसी भी तरह का आकार प्रकार दे सकते हैं ,वजन में फूल की तरह हल्का ,बस विक्रम वैताल स्टाईल में कंधे पर टांग लीजिये और जहां भी चाहिए धर दीजिये और पसर जाईये ...इसमें जो कथित "बीन"  है वह दरअसल इसे ठोस आधार देने के लिए इसमें भरा जाने वाला कृत्रिम बीन-सेम या राजमा के बीज जैसी पी वी सी या पालीस्टिरीन पेलेट होती हैं जो बेहद हल्की होती हैं! वैसे  तो बीन बैग्स के बड़े उपयोग है मगर हम यहाँ इसके बैठने के कुर्सीनुमा ,सोफे के रूपों  की चर्चा कर रहे हैं .हो सकता है कि इस तरह के बैग नुमा मोढ़े के आदि स्वरुप में सचमुच सेम या अन्य बीन की फलियाँ ही स्थायित्व के लिए कभी  भरी गयी हों मगर अपने अपने हल्के फुल्के रूप ये पाली यूरीथीन फोम जैसे हल्के पदार्थ के बीन -बीज/दाने  नुमा संरचनाओं से भरी हुई १९६० -७० के दशक में अवतरित हुईं -मगर ज्यादा लोकप्रिय नहीं हुईं ...और लम्बे अरसे के बाद फिर १९९० के दशक और फिर अब जाकर तो इनका तेजी से क्रेज बढ़ा है .

अब बात चल रही है बिग बास की तो चलिये बिग बांस के ब्लाग पर अर्थात ताऊ जी के ब्लाग पर.

आज बिग बास ने दिया है दीपवली की शुभकामनाये !

ब्लागर्स बिग बास की तरफ़ से दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं और साथ मे लिखते है कि-

भूलियेगा मत !

ब्लागर्स बिग बास

लौट रहे हैं

दीपावली की छुट्टियों के बाद ।

तो

मिलते हैं दीपावली की छुट्टियों क बाद

पराया देश पर राज भाटिया जी राम रतन धन का वीडियो लगाया है आप भी देख और सुन सकते है यहा क्लिक करके-

पर्व है त्योहार का तो खाने-पीने की बात भी होनी चहिये-शाही कोफ्ता बनाना सिखा रही है ममता जी मेरा ब्लाग पर.

आलू को उबाल कर छील लें। किशमिश के डंठल तोड़कर धो लें और काजू के 5-6 टुकड़े कर लें। मावा और पनीर एक बर्तन में निकाल कर उसमें उबले हुये आलू तोड़ कर डाल लें और कार्न फ्लोर डाल कर अच्छे से मैश कर लें,ताकि मिश्रण चिकने आटे की तरह नजर आने लगे, अदरक का पेस्ट बना कर मिला दें. ये मिश्रण कोफ्ता बनाने के लिये तैयार है। नानस्टिक कढ़ाई में तेल डाल कर गरम कर लें। कोफ्तो के आटे से थोड़ा थोड़ा आटा निकाल लें, हथेली पर रखकर चपटा कर लें। सभी गोले तैयार होने के बाद गरम तेल में डालकर तल लें। कोफ्तो को धीमी आग पर ब्राउन होने तक तल लें। इसके बाद ग्रेवी बना ले। बाकी विधी और सामग्री की जानकारी ममता जी के ब्लोग पर जाकर प्राप्त करे.

जानकारी से भरा वेबसाईट धुधवा लाईव जिसकी चर्चा विविध भारती जैसे रेडियो प्रसारण पर हो चुकी है,,लेखक के के मिश्रा जी है और बता रहे है आज एक नयी जानकारी

आनुवंशिक कुरूपता !
imageभैंस ने जन्मा विचित्र बच्चालोग इसे कुदरत का करिश्मा मान सकते हैं। मेरे गांव और आसपास के तमाम लोगों ने इसे इसी नजर से देखा भी। कई अशिक्षित लोग उसको दैवीय चमत्कार मानकर प्रणाम तक करने लगे। था भी वह कुछ अनोखा ही। लखीमपुर-खीरी जनपद के मेरे कस्बे के पड़ोस के एक गांव कृपाकुण्ड में एक भैंस ने अजीबोगरीब से बच्चे को जन्म दिया। मंगरे लाल नामक ग्रामीण की भैंस...

 

ऐ बेटा, तनी डोरवा तो बंद कर दो...तनी राइस्वा तो लीजिये—काव्य मन्जुषा पर.

हम बस  इसी ठसक में जीते रहते हैं कि हम सोने की चिड़िया वाले देश के हैं....हमारी संस्कृति के आगे किसी की संस्कृति नहीं है.....लेकिन पारिवारिक मूल्य बहुत से देशों में, बहुत मज़बूत है...मसलन  कनाडा, इटली, फ़्रांस, मक्सिको, ethiopia वैगेरह वैगेरह ...दरअसल इन मूल्यों को दरकिनार किया ही नहीं जा सकता ..कारण स्पष्ट है 'मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है'...image

 

इन देशों में भी अपने बच्चों के प्रति माता-पिता का बहुत प्रेम देखने को मिलता है ...हाँ हमलोगों की  तरह अँधा प्रेम नहीं होता है...आखिर हर किसी को अपना जीवन जीना ही पड़ता है तो फिर समय से उसे जीवन की  सच्चाई से दो-चार करा देने में बुराई क्या है...और यही यहाँ के माँ-बाप करते हैं...१८ वर्ष का जब बच्चा हो जाता है, उसे दुनिया में संघर्ष करने के लिए प्रेरित करते हैं..

मीनू खरे जी ने लिखी है -आओ दिया जला दें

image इस दीवाली पर दीपों के बन्दनवार सजा दें
हर सूने मन के आंगन में आओ दिया जला दें.
सूनी गलियाँ सूनी सडकें सूने गलियारे हैं
सूना जीवन सूनी मांगें कितने अंधियारे हैं
आओ मिल इन अंधियारों को उजियारों का पता दें
हर सूने मन के आंगन में आओ दिया जला दें.
सुधि की तंग सुरंगों में चलो झांक हम आएँ
भूले बिछड़े संगी साथी सबको आज बुलाएँ
एक साथ सब मिल कर खाएं लड्डू खील बताशे
हर सूने मन के आंगन में आओ दिया जला दें.

काव्य मंजूषा पर से आज का दीपवली शुभकामना गीत…

तन का मंगल, मन का मंगल
विकल प्राण जीवन का मंगल
आकुल जन-तन के अंतर में
जीवन ज्योत जले
मंगल दीप जले
विष का पंक ह्रदय से धो ले
मानव पहले मानव हो ले
दर्प की छाया मानवता को
और ना व्यर्थ छले
मंगल दीप जले
आज अहम् तू तज दे प्राणी
झूठा मान तेरा अभिमानी
आत्मा तेरी अमर हो जाए
काया धूल मिले
मंगल दीप जले

 

आज बस इतना ही अगर आप सबका प्यार मुझे मिलेगा तो मै फ़िर हाजीर होऊगा॒!

आप सभी को एक बार फ़िर दीपवली की शुभकामनाये.

………. महाराज आपको भी भाईpresent

चर्चा हिन्दी चिट्ठो की तरफ़ से आप सभी को दीपावली की शुभकामनाये!- पंकज मिश्रा

Friday, April 16, 2010

मैंने अपने बॉस से ब्लागिंग शुरू करवाई ! पंकज मिश्रा ( चर्चा हिन्दी चिट्ठो की )

नमस्कार , मै पंकज मिश्रा - आप सब को प्रणाम !
जैसा कि आप कुछ दिनों से देख रहे है मै अपने इस चिट्ठा चर्चा पर ज्यादा समय नहीं दे पा रहा हु ! आप सबको ऐसा लगा होगा कि मै तो गायब ही हो गया लेकिन साहब जी ऐसी कोई बात नहीं है !
नई -नई नौकरी है और अभी पुरी तरह से मै यहाँ पर अपना व्यस्था भी नहीं बना पाया हु , रहने खाने का , इसीलिए कुछ कम नजर आ रहा हु आप सबके साथ !
लेकिन इन सब व्यस्तताओं के बावजूद भी मन में कही ना कही ब्लागिंग का भूत था और समीर जी की बात का असर भी
बात ये कि कम से कम किसी एक से एक ब्लॉग बनवाये !
तो अब आप सब जान लीजिये कि मै तो सीधे अपने बॉस को ही चुन लिया और उन्होंने हमारा ब्लॉग पढ़ने के बाद तुरंत ब्लॉग बनाने के लिए मुझसे बोले और मै आनन् फानन में उनका ब्लॉग अजनबी दुनिया
बनाकर तैयार कर दिया .

पेश है उनके ब्लॉग की पहले पोस्ट
हम सब अजनबी हैं के कुछ अंश .
३। इसके आगे जो सम्बन्ध दुनिया में सबसे करीबी है। वहां तो बात और गड़बड़ है।
पति पत्नी से वो भी शादी से १ साल बाद से जीवन के अंत तक यही सोचता है और शायद कबुही कभी आपने करीबी लोगों में बातें भी करता है । की यार न जाने में कुछ भी करलूं मेरी बीबी को मेरी ही बात समझ में नहीं आती। वहीँ पत्नी को आपने पति से साडी उम्र पति के कुछ आदतों को लेकर शिकायत रहती ही है जो वह अपनी सहेलियों के बीच में बोल पड़ती हेई। जैसे उनकी ऑफिस से आकर घर में कपडे कहीं भी रखने की आदत। इन्हें तो देखो बस मेरे ही हाथ का खाना पसंद नहीं आता। जब देखो दुसरे की ही तारीफ करते रहते हैं, में तो शादी से लेकर आज तक इनकी तारीफ सुनने को तरस गयी।
४। प्रेमिका को प्रेमी की देर से आने की आदत पसंद नहीं आती। प्रेमी को प्रेमिका का रोज कोफ्फे हाउस में जाने से मन करना नहीं भाता ।
५। भाई को भाई का अपनी जिंदगी के किसी पल में दखल पसंद नहीं आता।

तो साहब जी एक बात और भी है लोग अपने बॉस से छुप-छुप कर ब्लागिंग करते है और मै अपने बॉस से ही ब्लॉग बनवा दिया!
अगर आपको इसे कुछ साहस नजर आया हो तो मुझे यहाँ बधाई दे
और हां एक बात और मुझे टिप्पणी दे या ना दे लेकिन आज श्री दीपक जी के ब्लॉग - यहाँ परजाकर टिप्पणी अवस्य करे !
धन्यवाद

Wednesday, April 07, 2010

खुनी रेड हंट---कुछ टिप्पणियों की चर्चा----ललित शर्मा

बीते कल की सुबह 36 गढ के बस्तर क्षेत्र के ताड़मेटला के जंगलों में सुरक्षा बलों के लिए कहर बनकर आई, जिसमें नक्सली हमले मे 75जवान शहीद हो गये। इस कायरता पुर्ण घटना की सर्वत्र निंदा की जा रही है। सरकार अभी तक जागी नही है, प्रधानमंत्री सलाह कारों की सलाह पर कह रहे हैं कि सेना भेजने की कोई आवश्यक्ता नही है। मु्ख्यमंत्री इस घटना को कायरता की पराकाष्ठा कह रहे हैं, केन्द्रीय गृहमंत्री कह रहे हैं कि रणनीति में चूक हुई है, कुछ भी कहीं भी चूक हुई हो, लेकिन जवानों की जाने गई यह सत्य है, इस विषय पर कल रात से ही पोस्ट आनी प्रारंभ हो गयी थी। आज मै ललित शर्मा सिर्फ कुछ टिप्पणियों की ही चर्चा कर रहा हूँ............

सबसे पहले राजतन्त्र पर गिरीश पंकज जी की टिप्पणी पढ़िए.........
गिरीश पंकज Wed Apr 07, 11:24:00 AM 2010  
हत्यारों को पहचान पाना अब बड़ा मुश्किल है/ अक्सर वह विचारधारा की खाल ओढ़े मंडराते रहते है राजधानियों में या फिर गाँव-खेड़े या कहीं और../ लेते है सभाएं कि बदलनी है यह व्यवस्था दिलाना है इन्साफ.../ हत्यारे बड़े चालाक होते है/खादी के मैले-कुचैले कपडे पहन कर वे/ कुछ इस मसीहाई अंदाज से आते है/ कि लगता है महात्मा गांधी के बाद सीधे/ये ही अवतरित हुए है इस धरा पर/ कि अब ये बदल कर रख देंगे सिस्टम को/ कि अब हो जायेगी क्रान्ति/ कि अब होने वाला ही है समाजवाद का आगाज़/ ये तो बहुत दिनों के बाद पता चलता है कि/ वे जो खादी के फटे कुरते-पायजामे में टहल रहे थे/और जो किसी पंचतारा होटल में रुके थे हत्यारे थे./ ये वे ही लोग हैं जो दो-चार दिन बाद / किसी का बहता हुआ लहू न देखे/ साम्यवाद पर कविता ही नहीं लिख पते/ समलैंगिकता के समर्थन में भी खड़े होने के पहले ये एकाध 'ब्लास्ट'' मंगाते ही माँगते है/ कहीं भी..कभी भी..../ हत्यारे विचारधारा के जुमलों को/ कुछ इस तरह रट चुकते है कि/ दो साल के बच्चे का गला काटते हुए भी वे कह सकते है / माओ जिंदाबाद.../ चाओ जिंदाबाद.../ फाओ जिंदाबाद.../ या कोई और जिंदाबाद./ हत्यारे बड़े कमाल के होते हैं/ कि वे हत्यारे तो लगते ही नहीं/ कि वे कभी-कभी किसी विश्वविद्यालय से पढ़कर निकले/ छात्र लगते है या फिर/ तथाकथित ''फेक'' या कहें कि निष्प्राण-सी कविता के / बिम्ब में समाये हुए अर्थो के ब्रह्माण्ड में/ विचरने वाले किसी अज्ञातलोक के प्राणी./ हत्यारे हिन्दी बोलते हैं/ हत्यारे अंगरेजी बोल सकते हैं/ हत्यारे तेलुगु या ओडिया या कोई भी भाषा बोल सकते है/ लेकिन हर भाषा में क्रांति का एक ही अर्थ होता है/ हत्या...हत्या...और सिर्फ ह्त्या.../ हत्यारे को पहचानना बड़ा कठिन है/ जैसे पहचान में नहीं आती सरकारें/ समझ में नहीं आती पुलिस/उसी तरह पहचान में नहीं आते हत्यारे/ आज़ाद देश में दीमक की तरह इंसानियत को चाट रहे/ लोगों को पहचान पाना इस दौर का सबसे बड़ा संकट है/ बस यही सोच कर हम गांधी को याद करते है कि/ वह एक लंगोटीधारी नया संत/ कब घुसेगा हत्यारों के दिमागों में/ कि क्रान्ति ख़ून फैलाने से नहीं आती/ कि क्रान्ति जंगल-जंगल अपराधियों-सा भटकने से नहीं आती / क्रांति आती है तो खुद की जान देने से/ क्रांति करुणा की कोख से पैदा होती है/ क्रांति प्यार के आँगन में बड़ी होती है/ क्रांति सहयोग के सहारे खड़ी होती है/ लेकिन सवाल यही है कि दुर्बुद्धि की गर्त में गिरे/ बुद्धिजीवियों को कोई समझाये तो कैसे/ कि भाई मेरे क्रान्ति का रंग अब लाल नहीं सफ़ेद होता है/ अपनी जान देने से बड़ी क्रांति हो नहीं सकती/ और दूसरो की जान लेकर क्रांति करने से भी बड़ी/ कोई भ्रान्ति हो नहीं सकती./ लेकिन जब खून का रंग ही बौद्धिकता को रस देने लगे तो/ कोई क्या कर सकता है/ सिवाय आँसू बहाने के/ सिवाय अफसोस जाहिर करने कि कितने बदचलन हो गए है क्रांति के ये ढाई आखर जो अकसर बलि माँगते हैं/ अपने ही लोगों की/ कुल मिला कर अगर यही है नक्सलवाद/ तो कहना ही पड़ेगा-/ नक्सलवाद...हो बर्बाद/ नक्सलवाद...हो बर्बाद/ प्यार मोहब्बत हो आबाद/ नक्सलवाद...हो बर्बाद
आरम्भ पर अली जी की टिप्पणी.......... हर बार ऐसा ही होता है...फिर नये सिरे से स्यापा...फिर नक्सल उन्मूलन के हुंकारे...कुछ और बयान...धीरे धीरे रोते कलपते परिजनों के सुर डूब जायेंगे टीवी स्क्रीन में दौड़ती भागती सुर्ख़ियों के बीच...क्या पता कभी हमारी खुद की गिनती भी हो ७६...७७ ? संजीव भाई , वे राजनैतिक पौरुषहीनता और गलत रणनीतिक व्यूह रचना के शिकार हुय॓ हैं ! जमीनी हकीकतों से मुंह मोड़ने से क्या फायदा ? क्या यह कोई आमने सामने का युद्ध है जिसे वीर जवान जीत लेंगे ? मन में बहुत कुछ है पर ...अभी आहत हूं...हर मृत्यु एक गहरा ज़ख्म छोड़ जाती है मेरे अन्दर 
 
 
  • अमीर धरती गरीब लोग  पर कुछ टिप्पणियाँ 
  • PD said... मेरा मानना है कि जहाँ तर्क कि सीमा समाप्त होती है वहाँ हम कुछ ना कर पाने कि छटपटाहट गालियों कि सीमा शुरू करते हैं.. आज मेरा धैर्य चूकता नजर आ रहा है.. जी भर के गलियां देने का मन कर रहा है.. इसके आलावा कुछ और कर भी नहीं सकते हैं हम..
     
    खुशदीप सहगल said... अनिल भाई,
    हमारे पैरा मिलिट्री फोर्सेज के जवानों को सरकार ने सिटिंग डकस समझ लिया है...नक्सलवाद के तंदूर में भुनने के लिए छोड़ दिया है...तथाकथित मानवाधिकार कार्यकर्ता यही चाहते हैं न ये सिटिंग डकस चुपचाप भुनती रहे और आवाज़ भी न करें...
     

    डॉ महेश सिन्हा said... @#$%^&*()
     

    ललित शर्मा said... 
    बहुत ही कायराना कृत्य है,
    ये तथाकथित मानवाधिकारवादी मोमबत्तियाँ नही,
    दिये जला रहे होगें, 
    मैं तो इस घटना को
    सामुहिक हत्या मानता हुँ।
     
    एक बात मेरे दिल की आपके दिल तक पर 
     
    Anil Pusadkar said... आप जिन लोगों की बात कर रहें हैं उनमे से एक अरूंधति तो बस्तर जाकर सात दिनों का नक्सलियों की मेहमाननवाज़ी का आनंद ले चुकी है और बदले में उनकी तारीफ़ मे एक लेख भी लिख कर छपवा चुकी हैं।ये नही जलायेंगे मोमबत्ती अब।विदेशी फ़ंड पर मौज़ करने वाले इस देश मे मानवाधिकार की जब बात करते हैं तो बहुत गुस्सा आता है।
     
    ब्लॉग 4 वार्ता पर कुछ टिप्पणियाँ 
     
    'अदा' April 7, 2010 8:04 ऍम 
    शहीद जवानों को मेरी श्रद्धांजली ...
    बहुत दुःख की बात है...
     
    Udan Tashtari April 7, 2010 8:42 ऍम 
    शहीदों को श्रृद्धांजलि!! अति दुखद एवं अफसोसजनक घटना!!  

    विशेष टिप्पणी-चर्चा को देते हैं विराम---आपको राम राम

    Sunday, April 04, 2010

    कहने को आज़ाद हो गए किन्तु गुलामी जारी है----"चर्चा हिंदी चिट्ठों की"--- ललित शर्मा

    नित नेताओं अफ़सरों के एक से बढकर एक घोटाले और भ्रष्ट्राचार के कारनामे सामने आते हैं। जनता की गाढी कमाई को अपनी पैतृक सम्पत्ति समझ कर हजम करने का काम बरसों से चल रहा है। जब भी किसी अधिकारी के यहां छापा पड़ता है तो करोड़ों की बेनामी सम्पत्ति सामने आती है। लेकिन इनका कुछ भी नही होता। उल्टे एक कमाऊ अधिकारी होने का तमगा जरुर हासिल हो जाता है। कहतें है कि भ्रष्ट्राचार की जड़ें बहुत गहरी हैं, लेकिन मैं कहता हुँ कि भ्रष्ट्राचार एक उल्टा वृक्ष है जिसकी जड़ आसमान में और डालियाँ जमीन पर, इसे जमीन पर खड़े होकर जितना काटेगें उतना ही तेजी से बढता है।इसलिए उल्टा होकर ही इसकी जड़ों में मठा डाला जा सकता हैं। अब मैं ललित शर्मा आपको ले चलता हुँ आज के कुछ उम्दा चिट्ठों की चर्चा पर................

    लोगों का ईगो क्यों टकराता है आन बान और शान बस रखते इसका ध्यान बघारते हैं हम सभी अपना अपना ज्ञान (मैं भी वही कर रहा हूँ) पर एक बात खलती है हमें लोगों का ईगो क्यों टकराता है ब्लॉग जगत में देखा हमने किसी की भी पोस्ट हो, (भले ही वह आपको ...वैशाखनंदन सम्मान प्रतियोगिता में : श्री मनोज कुमार प्रिय ब्लागर मित्रगणों, हमें वैशाखनंदन सम्मान प्रतियोगिता के लिये निरंतर बहुत से मित्रों की प्रविष्टियां प्राप्त हो रही हैं. जिनकी भी रचनाएं शामिल की गई हैं उन्हें व्यक्तिगत रूप से सूचित कर दिया गया है. त...

    13 माह में 1200 पोस्ट हमारे ब्लाग राजतंत्र और *खेलगढ़* को मिलाकर 1200 पोस्ट का आंकड़ा पार हो गया है। ये पोस्ट हमने 13 माह के अंदर लिखी है। एक साल में ही हमने 1100 से ज्यादा पोस्ट लिख डाली थी। ब्लाग जगत से हमें एक साल में काफी प...कलयुग का आदमी  अब सोचता हूं क्यों न "कलयुग का आदमी" बन जाऊं कलयुग में जी रहा हूं तो लोगों से अलग क्यों कहलाऊं बदलना है थोडा-सा खुद को बस मुंह में "राम", बगल में छुरी रखना है ढोंग-धतूरे की चादर ओढ के चेहरे पे मुस्कान लाना ...

    कभी साथ बैठ गपियाओ , तो जाने --- मेरा मेरा करती है दुनिया सारी मोहमाया त्याग कर दिखाओ , तो जाने । दावत तो फाइव स्टार थी लेकिन भूखे को रोटी खिलाओ , तो जाने । रुलाने वाले तो लाखों मिल जायेंगे किसी रोते को हंसाओ, तो जाने । देवी देवता बसते ह... पं. माखनलाल चतुर्वेदी की यादें बिलासपुर जेल से*4 अप्रैल - जयंती विशेष* बिलासपुर में द्वितीय जिला राजनीति परिषद का अधिवेशन सन् 1921 में हुआ जिसकी अध्यक्षता अब्दुल कादिर सिद्धीकी ने की। स्वागताध्यक्ष यदुनन्दन प्रसाद श्रीवास्तव तथा सचिव बैरिस्टर ई. राघवे...

    बिल्कुल अपने बाप पर गया है लडकी - मम्मी ये पडोसी का लडका बार-बार मुझे पप्पी (किस) करके भाग जाता है। मम्मी (मुस्कुरा कर) - बडा शरारती है, बिल्कुल अपने बाप पर गया है। ------------------- ------- ---- ---------------------------------------... मौन मूर्खता को छिपाता है मौन रह कर लोगों को सोचने दो कि तुम मूर्ख हो या नहीं, मुँह खोल कर उन्हे समझ जाने का अवसर मत दो कि तुम वास्तव में मूर्ख हो! (Better to remain silent and be thought a fool, than to open your mouth and remove...

    दर कदम दर चल राही *रे राही ,रे राही रे* ** *ना कर अभिमान* ***दर कदम दर चल* ***नहीं तो* ***गिर तू जायेगा* ***ना सोच सीधे* ***सातवाँ आसमां पाने की* ***रे राही ,रे राही रे* ***धीरे चल* ***पायेगा तू हर आसमां* ***दर क... ये किस मोड़ पर ?..........भाग ३ गतांक से आगे ........................... अपने हालात के बारे में ना तो निशि किसी से कह सकती थी और ना ही सहन कर पा रही थी. उसे तो यूँ लगा जैसे स्वच्छंद आकाश में विचरण करने वाले पंछी को किसी ने घायल कर दिया ह...

    जनगणना मे यह जानकारी भी ली जानी चाहिये थी… जैसा कि सभी जानते है कि देश में जनगणना का काम एक अप्रैल से शुरु हो चुका है। इस बार इस जनगणना मे भरे जाने वाले फ़ार्म मे एक आम नागरिक के जीवन से समबन्धित बहुत सी बातों की जानकारी लेने का प्रयासकिया जा रहा है...कहने को आज़ाद हो गए किन्तु.. पिछले दिनों केन्द्रीय मंत्री जयराम रमेश ने हिम्मत का काम किया और पूरे देश को विचार के लिए एक रास्ता भी दिखा दिया. उन्होंने भोपाल के एक दीक्षांत समारोह के दौरान अपना गाउन को उतार फेंका और दो टूक कहा कि ''य...

    परिकल्पना ब्लॉग उत्सव का आगाज १५ अप्रैल से जी हाँ, मातृभाषा हिंदी को मृत अथवा मात्र भाषा कहने वालों की बोलती बंद करने का समय आ गया है। हिंदी चिट्ठाकारिता के इतिहास में पहलीवार ब्लॉग पर उत्सव की परिकल्पना की गयी है । यह उत्सव १५ अप्रैल २०१० से शुरू... कविता घर की बांदी अभी चंद रोज पहले मेरे एक शुभचिन्तक ने फोन कर मुझसे यह जानना चाहा क्या वाकई कविताओं से पेट नहीं भरा जा सकता। मैं अपने शुभचिन्तक को फोन पर बहुत ज्यादा विस्तार से जवाब तो नहीं दे पाया लेकिन यह सच ही है कि कवि...

    अजीब लड़की (२) मेरे कमरे में उसकी उपस्थिति मानो किसी कुर्सी मेज की तरह थी मैं उसे पूरी तरह उपेक्षा दे रही थी ..मैं अपनी पढ़ाई में कोई भी व्यवधान नहीं चाहती थी,हालाँकि खाने के समय वो चुप्पी तोड़ने की बहुत कोशिश करती, ऐसा..भिलाई के युवकों द्वारा निर्मित विश्व रिकॉर्ड की रजत जयंती: विशेष लेख-माला वैसे तो हर क्षेत्र में भिलाई अपने उद्भव के समय से ही विश्व कीर्तिमान बनाते आया है। कई कीर्तिमान टूट गए, कई कीर्तिमान आज भी अपने स्थान पर अटल हैं। इन्हीं कीर्तिमानों में से एक है* **भिलाई** **के** **दो** **...

    चलते चलते आज का चित्र 


    चर्चा को यहीं देते हैं विराम -- सभी को ललित शर्मा का राम-राम

    Wednesday, March 31, 2010

    ब्लॉगर्स सावधान--लिव इन रिलेशनशिप--ये किस मोड़ पर ? "चर्चा हिन्दी चिट्ठों की"

    पिछले साल एक मशीन बनाई गई थी ब्रह्माण्ड का रहस्य जानने के लिए, उसके बनते ही समाचार आने लगा था कि दुनिया पर खतरा मंडरा रहा है, प्रयोग असफ़ल होने पर दुनिया खत्म हो सकती है। इक बार मशीन खराब हो गयी थी दुबारा शुरु करने में 18 माह लगे। इस बिगबैंग प्रयोग के लिए मंगलवार को प्रोटोन्स का पहला सफ़ल कोलिजन रिकार्ड कर लिया गया। यह साईंस की दुनिया के लिए  एक बड़ी उपलब्धि है। अब मै ललित शर्मा आपको ले चलता हुँ आज के हिन्दी चिट्ठों की चर्चा पर------

    बैशाखनंदन सम्मान प्रतियोगिता मे  ताऊजी डॉट कॉम पर  वैशाखनंदन सम्मान प्रतियोगिता में : सुश्री शिखा वार्ष्णेय  प्रिय ब्लागर मित्रगणों, हमें वैशाखनंदन सम्मान प्रतियोगिता के लिये निरंतर बहुत से मित्रों की प्रविष्टियां प्राप्त हो रही हैं. जिनकी भी रचनाएं शामिल की गई हैं उन्हें व्यक्तिगत रूप से सूचित कर -----नर्वस 90 का शिकार धीमी गति से ब्लॉग लेखन करते करते 90 पोस्ट ले दे के लिख पाए हैं क्रिकेट के बेट्समेन की भांति हो गए हैं हम नर्वस नाइंटी के शिकार क्यों मन में उमड़ ही नहीं रहा है किसी भी किसम का विचार विषय अनेक हैं अनेक हैं...

    लिव इन रिलेशनशिप--एक गंवई देहाती चिंतन.....!! लिव इन रिलेशनशिप पर बहस चल रही है, इसमें हम भी अपनी देहाती, गंवई सोच के साथ सम्मिलित हो गये हैं अब यह बहस सार्थक है कि व्यर्थ अभी इस पर फ़ैसला समय करेगा। लेकिन फ़िर भी हम गाल बजाए जा रहे हैं। ---हम भी हो गए 420 420 कहलाना किसी को पसंद नहीं है। लेकिन इसका क्या किया जाए कि हर इंसान के जीवन में यह आकंड़ा कभी न कभी दस्तक दे ही देता है। कम से कम उस इंसान के जीवन में तो जरूर 420 का दखल होता है जो इंसान लेखन से जुड़ा ह.

    सोनिया गाँधी का य़ू टर्न !!! सोनिया गाँधी राष्ट्रीय सलाहकार परिषद् क़ी अध्यक्ष बन गयी है!नयी बात ये है क़ी चार साल पहले उन्होंने इसी पद को त्याग दिया था और कहा था क़ी वे राजनीती में केवल सेवा करने आई है ,सत्ता सुख लेना उनका उद्देश्..मीना कुमारी --एक खूबसूरत अदाकारा --आज उनकी पुण्य तिथि है --
    आज वितीय वर्ष का क्लोजिंग डे है। इत्तेफाक देखिये , आज ही 5० और ६० के दशक की मशहूर अदाकारा ट्रेजिडी क्वीन मरहूम मीना कुमारी जी की भी पुण्यतिथि है।आज का लेख उन्ही की याद में समर्पित है। अभी कुछ दिन पहले फ...
    ओम प्रकाश जिंदल : उर्जा सर्जक लौह शिल्‍पी  किसान से सफल उद्योगपति, सुप्रसिद्ध समाजसेवी व कुशल राजनीतिज्ञ के रूप में स्व. ओम प्रकाश जिंदल (7 अगस्त 1930-31 मार्च 2005) ने जीवन की प्रत्येक कसौटी पर खरा उतर कर कमर्योगी-सा जीवन बिताया व कठिन परिश्रम, ...पहली फ़िल्म की रोशनी  आलोक धन्वा की यह छोटी सी कविता अपनी सादगी की वजह से मुझे अतिप्रिय है:जिस रात बांध टूटाऔर शहर में पानी घुसातुमने ख़बर तक नहीं लीजैसे तुम इतनी बड़ी हुई बग़ैर इस शहर केजहाँ तुम्हारी पहली रेल थीपहली फिल्म की रोशनी
    समान गोत्र में शादी करने वाले युवा दंपत्ति के अपहरण और हत्या के मामले में 5 लोगों को मौत की सजा
    करनाल शहर के सत्र न्यायालय ने कैथल शहर के नजदीक एक गांव में समान गोत्र में शादी कर लेने वाले एक युवा दंपत्ति के अपहरण और हत्या के मामले में पंचायत के 7 लोगों को दोषी करार दिया है। इनमें से 5 लोगों को मौत क...कृपया रास्ता सुझाये ---- शिवकुमार बटालवी, पंजाबी शायरी के शिखर पुरुष  रब्बी गिल के द्वारा गया हुआ गाना सुना था ---- इक कुड़ी जेदा नाम मोहब्बत........बार बार सुना.......इतना सुना कि मेरी कसेट ही ख़राब हो गयी. ये गीत लिखा किसने लिखा था --- शिवकुमार बटालवी, पंजाबी शायरी के शिख...
    परदे के पीछे पर्दानशीं है.............माइकल जैक्सन का भूत  हमारे पड़ोस के राज्य क्यूबेक में मुस्लिम औरतों के नकाब पहनने पर पाबन्दी लगा दी गयी है, जो एक अच्छी पहल है, यह हर तरह से अच्छी शुरुआत है, दिनों दिन बुर्के के भी फैशन में इज़ाफा ही हुआ है, बहुत अजीब से बुर्... डॉ. जमालगोटा का करम खोटा... बन गया वो बिन पेंदी का लोटा  अब डॉ. जमालगोटा का करम ही खोटा है तो भला कोई क्या कर सकता है? ये जहाँ भी जाते हैं गाली ही खाते हैं। पर बड़ी मोटी चमड़ी है इनकी, इसीलिये गाली खाकर भी मुस्कुराते हैं। पहले ये हकीमी करते थे किन्तु *"नीम हकीम खत...
    लघु कथा- पिछला टायर ! वित्तीय बर्ष की समाप्ति और ३१ मार्च को अधिकाँश बैंको में खाते समापने कार्य के तहत सार्वजनिक लेनदेन न होने की वजह से ३० मार्च को ही वेतन बाँट दिया गया था ! इसलिए सेलरी की रकम हाथ में होने की वजह से हमेशा प... ये किस मोड़ पर ? निशि की सुन्दरता पर मुग्ध होकर ही तो राजीव और उसके घरवालों ने पहली बार में ही हाँ कह दी थी . दोनों की एक भरपूर , खुशहाल गृहस्थी थी . राजीव का अपना व्यवसाय था और निशि को लाड-प्यार करने वाला परिवार मिला. एक ...
    ब्लॉगर्स सावधान !!! कुछ भी हो सकता है...खुशदीप बताते हैं कि पुराने ज़माने में हिंदुस्तान में किसी ने चाय का नाम तक नहीं सुना था...ईस्ट इंडिया कंपनी आई...अंग्रेज़ आए...लोगों को सड़कों-चौराहों-नुक्कड़ पर मुफ्त में जग भर भर के चाय पिलाई जाने लगी...खालिस ... प्रिये तुम प्रिये , यह खत नहीं है.यह मेरे हृदय में उठ रहे विचारों का ज्वार है,दिमागी तारों को हिला देनेवाली एक कंपन है,धमनियों में बह रहे रक्त-कणों का आवेग है,एक साथ कई भावनाओं के मिलने से बना एक शब्द है.इसलिये प्रि...
    विश्व मंच पर पहचान बना रही हैं भारतीय ललित कलाएं संजय द्विवेदी* देर से ही सही भारतीय ललित कलाएं विश्व की कला दुनिया में अपनी जगह बना रही हैं। शास्त्रीय संगीत और नृत्य से शुरुआत तो हुई पर अब चित्रकला की दुनिया में भी भारत की पहल को स्वागतभाव से देखा जा... लोक आयोग के पाले में मलेरिया विभाग में हुए बहुचर्चित घोटाले की जांच रिपोर्ट  छत्‍तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के मलेरिया विभाग में हुए बहुचर्चित घोटाले की जांच रिपोर्ट आखिरकार लोक आयोग के पास पहुंच गई है। इससे दोषी अफसरों के खिलाफ कार्रवाई की संभावना बढ़ गई है।मलेरिया विभाग में हुए घोटाल...
    खयालों के परिंदे इस लिए आज़ाद रखता हूँ --जफा की धूप में अब्र-ए-वफ़ा की शाद रखता हूँ इसी तरहा मोहोब्बत का चमन आबाद रखता हूँ छुपा लेता हूँ मै अक्सर तुम्हारी याद के आंसू यही थाती बचा कर अब तुम्हारे बाद रखता हूँ मै अपनी जिंदगी के और ही अंदाज़ रखता हूँ ...-न्यूज चैनल ............. फ़िजूल की बहस !!!-- आजकल "न्यूज चैनल" वाले भी फ़िजूल की बहस को तबज्जो देने में अपनी शान समझने लगे हैं या यूं समझ लें अपनी "टीआरपी" बढाने के चक्कर में फ़िजूल की बहस में उलझे रहते हैं, हुआ ये कि टेनिस खिलाडी "सानिया मिर्जा" और क्...

    स्वास्थ्य विभाग की ये कैसी सेवा? *एस. स्वदेश* हाल में कुछ खबरिया चैनलों पर ऐसा ही वाक्या फिर दिखा। नागपुर के सरकारी अस्पताल में पांच दिन का एक मासूम नवजात अस्पतालकर्मियों की लापरवाही से जिंदा जला और मर गया। दुर्गा काडे नाम की महिला ने 1...डेली न्यूज़ एक्टिविस्ट में 'तीसरी आँख' तथा 'राजतंत्र'  31 मार्च 2010 को डेली न्यूज़ एक्टिविस्ट के नियमित स्तंभ 'ब्लॉग राग' में तीसरी आँख तथा राजतंत्र की पोस्ट्स

    अब देते हैं चर्चा को विराम आपको ललित शर्मा का राम राम-------------

    Monday, March 29, 2010

    दुष्यंत और शंकुन्तला के बीच---लिव इन रिलेशनशिप--(चर्चा हिन्दी चिट्ठों की)--->>>>ललित शर्मा

    पृथ्वी के पर्यावरण को बचाने के लिए एक घंटे का ब्लेक आउट कि्या गया, इससे पर्यावरण तो बचा कि नही ये तो पता नही, बेचारे पुरनदास गुरुजी का घर जरुर लुट गया, गर्मी में वे सब लाईट बंद करके सपरिवार बाहर  बैठे थे, लेकिन चोर भी ताक में थे वे भी बत्ती गुल होते ही घुस गए बाड़ी तरफ़ का दरवाजा खोल कर, गुरु जी के सामान पर हाथ साफ़ कर गए----मैं ललित शर्मा अब आपको ले चलता हुँ कुछ उम्दा चिट्ठों की चर्चा पर....................

    बेनामी ब्लाग पर चल रही है एक सार्थक बहस---विवाह संस्था को अवैध घोषित किया जाय या कम से कम इसे मान्यता तो न दी जाय विवाह संस्था नारी शोषण का मूल है। अब स्थापित पुरुष प्रधान समाज ने यह एक ऐसा हथियार हजारो साल पहले ढूढ़ा जिसने मातृसत्तात्मक समाज को पितृसत्तात्मक बना दिया । बहुकाजी स्त्री को बर्बर शारीरिक बल के अधीन कर दिया गया और यौन शुचिता की बेड़ियों में उसके अस्तित्त्व को इस तरह कस दिया गया कि उसे निहायत प्राकृतिक विधानों पर भी आत्मघृणा होने लगी--------रहस्य गूढ़ नहीं!आयातित वस्तु बड़ी प्यारी लगती है. इम्पोर्टेड आईटम. हमारे विभाग के लोगों को आम जन मानस(मित्र गण) पहले कहा करते थे; कस्टम का माल नहीं पकडाया क्या? उसकी नीलामी नहीं हो रही है क्या? क्यों?
     
    कविता ,तुम ही तो मिलाती हो रात के अंधेरों में सन्नाटों की साय साय मन में उठती है हाय हाय कहा हो, कहा हो ? पुकारता ,खोजता में मिल जाता हूँ खुदसे अक्सर तब नींद गहरी आती है सुबह भी चहकती है और नहीं मिल पाता जब खुद से तब खीज से भरा भरा थक...फिल्मी संस्कृति की प्रमुख चुनौतियां- 2 भारतीय सिनेमा में सांस्कृतिक संवाद का मूलाधार है आनंद। इसके तीन मुख्य तत्व हैं, ये हैं, भारतीय संस्कार, गाने और संगीत। ये तीनों ही तत्व मिश्रित संस्कृति का रसायन तैयार करते हैं।
     
    पानी की मार बचपन में जब जाता था परीक्षा देने या जब जाते थे पिताजी घर के बाहर दूर किसी काम से तो माँ झट से रख देतीं थीं दरवाजे पर दो भरी बाल्टियाँ कहती थीं- शुभ होगा। आज जब निकलना चाहता हूँ घर के बाहर तो पत्नी झट से------ फेसबुक और ऑरकुट के दीवानों, ज़रा इधर भी नज़र डालो *[पुराने पन्नों से] साथियों .....मास्टरों और उधार का चोली दमन का साथ है अतः आशा है कि आप लोग मुझे साहिर साहब की इस रचना को उधार लेकर, इसका दुरुपयोग करने के लिए माफी प्रदान करेंगे .
     
    रवि कुमार ने जीता एक लाख का खिताब--राष्ट्रीय ओपन शतरंज की अंतिम बाजी में मेजबान छत्तीसगढ़ के रवि कुमार ने रूपेश कांत के साथ २३ चालों में ही बाजी ड्रा खेलकर आधा अंक बटोरा और इसी के साथ खिताब और एक लाख की इनामी राशि पर कब्जा कर लिया। यह पहला ...छत्तीसगढ़ी लोक कला के धुरी 'नाचा' 'जुन्ना समय अउ अब के नाचा म अब्बड़ फरक होगे हे। जुन्ना नाचा कलाकार मन रुपिया-पइसा के जगह मान सम्मान बर नाचयं गावयं। गरीबी लाचारी के पीरा भुलाके कला साधना म लगे राहयं, कला के संग जिययं अऊ मरयं। 
     
    अन्तर सोहिल = Inner Beautiful -यह वाक्या पढने से पहले कुछ हरियाणवी शब्दों के अर्थ समझ लेना जरूरी है। उडै = वहां उरेनै-परेनै = इधर-उधर सोन की खातर = सोने के लिये टोण लाग्या = ढूंढने लगा कितै भी = कहीं भी किस तरियां = किस तरह न...भिखारी  अपने देश में भिखारियों की संख्या दिन-व-दिन बढते जा रही है गली-मोहल्लों, चौक-चौराहों, गांवों-शहरों, धार्मिक स्थलों, लगभग हर जगह पर भिखारी घूमते-फ़िरते दिख जाते हैं और तो और रेल गाडियों में भी इनका बोलबाला है... 
     
    कोख में आतंकवाद दूर किसी आँगन में खिल रही थी एक कली.... नन्ही सी... प्यारी सी कली.. नहीं--नहीं!! कहाँ खिली वह कली..? खिलने से पहले ही मसल दी गयी वह नाज़ुक कली क्यों..?? क्योंकि वह कली गर खिल जाती तो माता... सुमन के भीतर आग है हार जीत के बीच में जीवन एक संगीत। मिलन जहाँ मनमीत से हार बने तब जीत।। डोर बढ़े जब प्रीत की बनते हैं तब मीत। वही मीत जब संग हो जीवन बने अजीत।। रोज परिन्दों की तरह सपने भरे उड़ान। यदि सपन जिन्दा रहे लौटेगी--
     
    सदगुरु दांव बतईया खेले दास कबीर " मेरे गुरुदेव स्वामी चिन्मय योगी जी ने अपने गुरु भगवान श्री रजनीश ओशो से पुछा "भगवान् ,किसी व्यक्ति को सदगुरु मिल गया. सदगुरु ने पूजा ध्यान विधि बता दी .उसके बाद क्या सदगुरु की आवश्यकता नहीं है ?" अल्पना के ग्रीटिंग्स की एक प्रदर्शनी-आर्ट गैलरी रायपुर मे-27मार्च से 31 मार्च तक सृजनशील हाथ सृजन कार्य मे निरंतर लगे रहते हैं, यह एक साधना है, इस साधना से नई कृतियों का जन्म होता है, जिसमें सृजनकर्ता की वर्षों की मेहनत लगी रहती है। जब उचित समय आता है
     
    हुआ हूँ फिर उपस्थित तेरे सम्मुख ,,,, ओ दयानिधे(प्रवीण पथिक) ,,,, अतृप्त इच्छाओ की ,,, अधबनी नौका लेकर ,,, हुआ हूँ फिर उपस्थित तेरे सम्मुख ,,,, ओ दयानिधे ,,,, टकटकी लगा रखी है ,,,, तेरी हर अनुग्रही क्रिया पर ,,,, की काश कोई द्रष्टि इधर भी हो ,,,, ओ समग्र नियन्ता ,,,, मेरी----- कैसा हो कलियुग का धर्म ??
    प्रत्‍येक माता पिता अपने बच्‍चों को शिक्षा देते हैं , ताकि उसके व्‍यक्तित्‍व का उत्‍तम विकास हो सके और किसी भी गडबड से गडबड परिस्थिति में वह खुद को संभाल सके। पूरे समाज के बच्‍चों के समुचित व्‍यक्तित्‍व नि...
     
    डार्लिंगजी :पुस्तक समीक्षा नर्गिस और सुनील दत्त की जोड़ी हमेशा हमारे लिए एक आयडियल जोड़ी रही है...लेकिन उनके मिलने की कहानी भी किसी फ़िल्मी कहानी से कम पेंचीदा नहीं है....जहाँ एक ओर बचपन से अपनी माँ के द्वारा नर्गिस सिनेमा-जगत में आ ----- दुष्यंत और शंकुन्तला के बीच कौन सा संबंध था?महाभारत संस्कृत भाषा का महत्वपूर्ण महाकाव्य (धर्मग्रंथ नहीं)। हालांकि महत्वपूर्ण धर्म ग्रंथ का स्थान ग्रहण कर चुकी श्रीमद्भगवद्गीता इसी महाकाव्य का एक भाग है। महाभारत बहुत सी कथाओं से भरा पड़ा है। 
     
    अमिताभ बच्चन को ही नहीं हरिद्वार में गंगा स्नान को भी कांग्रेस राजनैतिक चश्मे से देख रही विधानसभा अध्यक्ष के आमंत्रण पर छत्तीसगढ़ के अधिकांश विधायक हरिद्वार की यात्रा पर गए। पहले मुख्यमंत्री ने आमंत्रित किया था तो कांग्रेस विधायक दल ने इंकार कर दिया था। क्योंकि उन्हें डर था कि मुख्यमंत्री के आ.----- विदेश में जन्मे, भारत में शिक्षा पा रहे बच्चे के मामले में न्यायिक क्षेत्राधिकार पर नए सिरे से विचार करने का फैसला सुप्रीम कोर्ट ने विदेश में जन्मे, लेकिन यहां शिक्षा पा रहे बच्चे के मामले में देश की अदालतों के न्यायिक क्षेत्राधिकार पर नए सिरे से विचार करने का फैसला किया है। शीर्ष कोर्ट ने एक ऐसे मामले पर आखिरी फैसला ह..
     
    नर्सिंग होम में हंगामा श्रीगंगानगर के आदर्श नर्सिंग होम में इलाज के दौरान एक महिला की मौत के बाद उसके परिजनों ने नर्सिंग होम के अन्दर बाहर धरना देकर एक सामान उस पर अपना कब्ज़ा कार लिया। एक दिन एक रात के बाद पुलिस भारी सुर------ लुटा अपनी रिश्तेदारी में ~~~~ सारी उम्र कटी यूँ तो सिपहसालारी में मारा गया बेरहमी से मगर वो यारी में . इम्तहान तो था महज़ कुछ घंटों का पूरा साल निकल गया देखो तैयारी में . बहुत ढूढ़ा खोया था जो इकलौता बीज अंकुरित हुआ तो मिला इस क्य..
     
    गणेश शंकर 'विद्यार्थी' पत्रकारिता के आदर्श पुरुष : बख्शी सृजनपीठ का कार्यक्रम--आदर्श पत्रकारिता को जीवंत बनाकर भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में हुंकार भरने वाले शहीद गणेश शंकर विद्यार्थी का बलिदान दिवस पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी सृजनपीठ कार्यालय सेक्टर-9 में विगत दिनो मनाया गया। उपस्थित पत...ताऊ पहेली - 67 प्रिय बहणों और भाईयों, भतिजो और भतीजियों सबको शनीवार सबेरे की घणी राम राम. ताऊ पहेली *अंक 67 *में मैं ताऊ रामपुरिया, सह आयोजक सु. अल्पना वर्मा के साथ आपका हार्दिक स्वागत करता हूं. जैसा कि आप जानते ही हैं क..------
     
    लिव इन रिलेशनशिप : फ़ैसले पर एक दृष्टिकोण --- यूं तो अभी इस मुद्दे पर लंबित मुकदमें में न्यायालय का अंतिम फ़ैसला नहीं आया है , और जाने किन किन आधारों पर मीडिया में इस मुद्दे को लेकर तमाम तरह की खबरें , रिपोर्टिंग और सर्वेक्षण तक दिखाए समझाए जा रहे हैं । इस फ़ैसले को लेकर बहस, और फ़ैसले के बाद की-------  और इस बार फ्लाईट छूटी..(केरल यात्रा : संस्मरण -१) लीजिये ,एक अल्पान्तराल के बाद फिर हाजिर हूँ .इस बीच विभागीय कार्य  से केरल यात्रा कर आया .सोचा था कि इस बार यात्रा की अपनी परेशानियों जिनसे अपुन का  चोली दामन का साथ है से ब्लागर मित्रों को बिलकुल भी क्लांत नही करूंगा .घर में तो "जहाँ जाईं 
     
    संजीवनी हृदय तिमिर को  बींधतीतेरी रूह की सिसकती आवाज़जब मेरे हृदय कीमरुभूमि से टकराती हैमुझे मेरे होने का अहसास करा जाती हैजब तेरे प्रेम की स्वरलहरियाँ हवा केरथ पर सवार होमेरा नाम गुनगुना जाती हैंमुझे जीने का सबबसिखा जाती हैंजब  दीवानगी---- गीत --  देखो चन्दन वन बहक  गया ,जाने कितना कुछ महक गया ,अंगड़ाई ली अभिसारों ने ,मादक परिणय व्यापारों ने ,फुनगी पर चढ़ा पलाश यहाँ ,पिघले लोहे सा दहक गया //देखो ......छूटी पीछे बीती पीड़ा ,श्वांसों ने छेड़ी है वीणा ,जागे जीवन मे राग नए ,भोला मन फिर से
     
    चलते चलते देखिए कार्टुन कोना----डब्बु जी---


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    आभार

    Wednesday, March 24, 2010

    आज सान्ध्यकालीन विशेष चर्चा हिंदी चिट्ठों की------------------------ललित शर्मा

    भगवान श्री राम का जन्मदिवस धुम-धाम से मनाया गया,आज कुछ चिट्ठों की फ़टाफ़ट चर्चा करते हैं, अब मै ललित शर्मा आपको ले चलता हुँ आज की चर्चा हिंदी चिट्ठों की पर---
    सबसे पहले चर्चा करते हैं ताउ डॉट कॉम पर जहां वैशाखनंदन सम्मान प्रतियोगिता प्रारंभ हो चुकी है। आज प्रकाशित किया गया हैवैशाखनंदन सम्मान प्रतियोगिता में : श्री ललित शर्मा हमने वैशाखनंदन सम्मान पुरस्कारों की घोषणा की थी. जिसके लिये हमें बहुत से मित्रों की प्रविष्टियां प्राप्त हुई हैं. जिनकी भी रचनाएं शामिल की गई हैं उन्हें व्यक्तिगत रूप से सूचित कर दिया गया है. जैसा की हमने बताया था कि शामिल प्रविष्टियों का प्रकाशन ताऊजी डाट काम पर किया जायेगा. उसी घोषणा अनुसार आज से हम प्रतियोगिता में शामिल रचनाओं का प्रकाशन शुरु कर रहे हैं.-----
    इधर गगन शर्मा जी कह रहे हैं कि सचिन इसीलिए कुछ अलग सा है.आई पी एल नामक क्रिकेट के तमाशे में सम्मिलित टीमों के नामों पर गौर किया है आपने? चलिए मान लेते हैं कि ऐसी हुल्लड़ भरी नौटंकियों में भाग लेना है तो नाम भी ऐसे, वैसे, कैसे, कैसे ही होंगे, लोगों को रोमांचित...काव्य मंजुषा पर अदा जी कह रही हैं 'नीम हकीम ख़तरा-ए-जान' .....शेफाली जी पास होऊँगी या नहीं..?? * * *एक कहावत पढ़ी थी... * *'नीम **हक़ीम** ख़तरा-ए-जान' *बचपन से इसका मतलब यही जाना कि जिसे आधा ज्ञान हो उससे खतरा होता है, अंतरजाल खंगाल डाला तो कहीं मिला: नीम हक़ीम ख़तरा जान----
    मनोज जी कह रहे हैं देसिल बयना 23 : मार खाई पीठिया -- करण समस्तीपुरी जय हो ! जय हो !! भये प्रकट किरपाला..... दीन-दयाला कौसल्या हितकारी........... !!! बधाई हो रामनवमी का त्यौहार !!! अरे राम नवमी से याद आया......... ओह ! कहाँ गया उ दिन ! हाथ-पैर से होली का... रानी विशाल जी एक कविता लेकर आई हैं वो पल.....अब भी मेरे पास है कांपते हाथों से मेरे हाथों को लेकर हाथ में जो चाहते थे कहना तुम शब्द वो भी बह रहे थे समय की तरह आँसूओं के साथ....!! भीगते जज्बातों का वो पल.....जब छुपाई थी अपनी आँखों की नमी एक दूजे से हमने,...
    यहां पर देखिए वरिष्ठ आर्टिस्ट श्याम निनोरिया कृत थम्ब इम्प्रेशन चित्र !! *आर्ट गैलरी पर प्रस्तुत है रायपुर वरिष्ठ के आर्टिस्ट श्याम निनोरिया जी के द्वारा निर्मित ग्रीटिंग कार्ड* श्री श्याम निनोरिया जी द्वारा निर्मित थम्प इम्प्रेशन पेंटिंग----अग्रदुत पर विष्णु सिन्हा जी लिख रहे हैं कनू सान्याल की आत्महत्या नक्सलियों को इशारा है कि उनका रास्ता गलत है नक्सली आंदोलन के जनक कनू सान्याल ने फांसी के फंदे पर लटकर अपनी इहलीला समाप्त कर ली। 78 वर्षीय कनू सान्याल वैसे तो बुढ़ापे के रोगों से पीडि़त थे लेकिन आत्महत्या उनके सिद्घांतों पर प्रश्रचिन्ह तो लगाता ही है..
    कुसुम ठाकुर जी ने एक बहुत ही अच्छी कविता लिखी है यह सोच मैं हूँ हैरान " यह सोच मैं हूँ हैरान " बहुत कठिन है साथ में हँसना , और किसी की खातिर रोना , सँग सँग जीवन पथ पर फिर भी , चलना है आसान , यह सोच मैं हूँ हैरान । महल से न कम घर होगा , क्या सोची थी यह कब होगा ? जीवन की स...---कुमारेंद्र सेंगरज जी कह रहे हैं अबे यार! कल एक 'डे' सूना-सूना निकल गया ! ! !गनपत- क्या यार! क्यों शान्त-शान्त से बैठे हो? मुँहफट- कुछ नहीं यार! कल एक डे निकल गया और हमें कानों-कान खबर भी नहीं हो सकी। गनपत- कौन सा डे, बे? हम तो सारे के सारे डे, दिवस, त्यौहार अपनी डायरी में न...
    नवी्न प्रकाश ले आए हैं----नया Mozilla Firefox 3.6.2 Finalसबसे अच्छे इंटरनेट ब्राउजर का नया संस्करण Mozilla Firefox 3.6.2 Final सबसे तेज ज्यादा सुरक्षित और ज्यादा भरोसेमंद । आपके कंप्यूटर के लिए एक बेहद जरुरी औजार । यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करें । पोर्टेबल वर्जन...--नुक्कड़ पर लिम्टी खरे जी कह रहे हैं--हमारा पहला अद्भुत और अकल्पनीय अनुभव है पाड्कास्ट *हमारा पहला अद्भुत और अकल्पनीय अनुभव है पाड्कास्ट * ** * इंटरनेट का इन्द्रजाल समझना बहुत ही मुश्किल है। इंटर नेट पर जहां तक आप सोच सकते हैं आप उससे कहीं आगे जा सकते हैं। इसके साथ ही साथ ब्लाग ने तो धूम मचा ...
    विजय प्रकाश सिंह जी ले आए हैं राम - कृपानिधान ( राम नवमी के अवसर पर - एक दॄष्टिकोण ) प्रभु श्री राम पर कितना कुछ सब को पता है और कितना लिखा - पढ़ा जाता है इसे शब्दों मे बांधना एक साधारण मनुष्य के लिए अकल्पनीय है । दिन भर जाने अनजाने हम राम का स्मरण करते हैं । ऐसे मे मेरे जैसे एक साधारण व्य...
    गोदियाल जी बता रहे हैं कूड़ा-करकट ! सर्वप्रथम सभी मित्रों को रामनवमी की हार्दिक शुभकामनाये ! * तजुर्बों से ही दुनिया सीखती है अक्सर, बड़े इत्मिनान से उन्होंने हमें बताई ये बात ! और हम थे कि हमें यह भी मालूम न था कि रात के बाद दिन निकलता है या...
    अवधिया जी बता रहे हैं उपजा जब ग्याना प्रभु मुसकाना ... प्रभु की यह मुस्कान ही तो माया है रामनवमी पर विशेष राम ... दो अक्षरों का एक ऐसा नाम जिस पर संसार का प्रत्येक हिन्दू की अथाह श्रद्धा है। राम हिन्दुओं के आराध्य देव हैं और राम का नाम उनके लिये भवसागर से मुक्ति देने वाला मन्त्र है। गोस्वामी... कुलवंत हैप्पी बता रहे हैं-भारतीय की जान की कीमत ***(बाल-बुद्धि भारतियों पर कवि का कटाक्ष)* अरे - समझौता गाड़ी की मौतों पर - क्या आंसू बहाना था उनको तो - पाकिस्तान नाम के जहन्नुम में ही - जाना था मरने ही जा रहे थे - लाहौर, करांची - या पेशावर में मरते औ...
    सजंय भास्कर जी कह रहे हैं--आजादी के इन महानायकों को हम भी याद करते हैं मेरा रंग दे बसंती चोला, माहे रंग दे। इन लाइनों को सुनने के बाद देश पर जान कुर्बान करने वाले भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरू की यादें ताजा हो जाती हैं। दो साल पहले भी एक फिल्म रंग दे बसंती के जरिए देश के युवा... दीपक मशाल लेकर आए हैं एक लघुकथा पूजा के लिए सुबह मुँहअँधेरे उठ गया था वो, धरती पर पाँव रखने से पहले दोनों हाथों की हथेलियों के दर्शन कर प्रातःस्मरण मंत्र गाया 'कराग्रे बसते लक्ष्मी.. कर मध्ये सरस्वती, कर मूले तु.....'. पिछली रात देर से ...
    आरंभ पर संजीव तिवारी कह रहे हैं कैसे बने हमारी भाषाई पहचान? स्‍थानीय भाषा और बोली में ब्‍लाग संचालन को प्रोत्‍साहन देने के लिए समय समय पर पाठकों की टिप्‍पणियां और मेल प्राप्‍त होते रहते हैं. हमारे छत्‍तीसढ़ के एवं हिन्‍दी ब्‍लाग जगत के पूर्णसक्रिय  प्रख्‍यात मूंछों वाले ब्‍लागर ललित शर्मा जी नें हमें पिछले दिनों बतलाया था कि इस प्रकार के मेल उन्‍हें भी प्राप्‍त होते रहे हैं  दिनेश राय द्विवेदी जी लेकर आए हैं वे सूरतें इलाही इस देश बसतियाँ हैं -महेन्द्र नेह वे सूरतें इलाही किस देश बसतियाँ हैं, अब जिनके देखने को आँखें तरसतियाँ हैं* **यह मीर तकी 'मीर' का वह मशहूर शैर है जो अक्सर शहीद भगतसिंह और उन के साथियों के होठों पर रहा करता था।

    अब चलते चलते कार्टुनो पर नजर डालिए




    अब देते हैं विराम आपको रामनवमी की शुभकामनाएं और ललित शर्मा का राम-राम

    Sunday, March 21, 2010

    रविवार की छोटी चर्चा , पर खबरे बड़ी (चर्चा हिन्दी चिट्ठो की )

    नमस्कार ,
    मै पंकज मिश्रा आप सबका स्वागत करता हु अपने इस चर्चा ब्लॉग पर ..चर्चा में समय कम दे पा रहा हु क्युकी नौकरी पर समय ज्यादे दे रहा हु . खैर कोई बात नहीं दोनों की जरुरत के हिसाब से समयानुकूल मैनेज किया जाएगा !
    चलिए चर्चा की तरफ चलते है .
    आज ललित शर्मा का जनमदिन है

    रविवार को हमारे चर्चा परिवार के सदस्य श्री ललित शर्मा जी का जन्मदिन था ,शर्मा जी आपको हमारी तरफ से जन्मदिवस की ढेरो सारी शुभकामनाये ! ब्लॉग जगत के बाकी लोगो की तरफ से भी आपको शुभकामनाये मिली जिसके बारे में जी के अवधिया जी ने अपने ब्लॉग पर प्रकाश डाला है !
    जी के अवधिया जी ने बताया है कि
    केक नहीं काट रहे ललित जी आज अपने जन्म दिन पर..
    हमारे छत्तीसगढ़ में किसी के जन्मदिन मनाने के लिये आँगन में चौक पूरा (रंगोली डाला) जाता था, सोहारी-बरा (पूड़ी और बड़ा) बनाये जाते थे। बड़े उड़द दाल के होते थे, हाँ स्वाद बढ़ाने के लिये थोड़ा सा मूँगदाल भी मिला दिया जाता था। सगे-सम्बन्धियों तथा मित्र-परिचितों को निमन्त्रित किया जाता था। जिसका जन्मदिन होता था उसे टीका-रोली आदि लगाकर उसकी आरती उतारी जाती थी। वह स्वयं अपने से बड़ों के पैर छूता था और उससे कम उम्र वाले उसके पैर छूते थे। फिर प्रेम के साथ खा-पीकर खुशी-खुशी सभी विदा लेते थे। न कोई भेटं न कोई उपहार, भेंट-उपहार की प्रथा ही नहीं थी।

    और दूसरी तरफ सुमन जी ने लोकसंघर्ष पर आज बताया है कि
    भगत सिंह के वैचारिक शत्रु
    1930 में जब भगत सिंह जेल में थे, और उन्हें फाँसी लगना लगभग तय था, उन्होंने एक पुस्तिका लिखी, “मैं नास्तिक क्यों हूँ।” यह पुस्तिका कई बार छापी गयी है और खूब पढ़ी गयी है। इसके 1970 के संस्करण की भूमिका में इतिहासकार विपिन चंद्र ने लिखा है कि 1925 और 1928 के बीच भगत सिंह ने बहुत गहन और विस्‍तृत अध्ययन किया। उन्होंने जो पढ़ा, उसमें रूसी क्रांति और सोवियत यूनियन के विकास संबंधी साहित्‍य प्रमुख था। उन दिनों इस तरह की किताबें जुटाना और पढ़ना केवल कठिन ही नहीं बल्कि एक क्रांतिकारी काम था। भगत सिंह ने अपने अन्य क्रांतिकारी नौजवान साथियों को भी पढ़ने की आदत लगायी और उन्हें सुलझे तरीके से विचार करना सिखाया।

    अनिल पुसादकर जी ने सवाल किया है कि
    क्या आत्महत्या ही सारी समस्याओं का हल है?
    और लिखते है कि
    खैर इस बारे मे बहुत सी बातें पहले हुई होंगी और शायद होती ही रहेंगी तब-तक़,जब तक़ हम अपने बच्चों को उस स्थिती मे जाने के लिये ढकेलते रहेंगे।पता नही क्यों हम अपने बच्चों से ज़रूरत से ज्यादा अपेक्षा करने लगते हैं?क्यों हम उनसे हमेशा बेहतर और उससे भी बेहतर की उम्मीद करते हैं?मेरे भी घर मे दो बहुत ही छोटी क्लास के छात्र हैं।उनमे से एक क्लास थ्री की स्टूडेंट है मेरी भतीजी युति और दूसरा पी पी यानी के जी टू का स्टूडेंट है हर्षू।दोनो की ही मम्मी परीक्षा के समय बेहद तनाव मे रहती है और बच्चों को रिज़ल्ट खराब आया तो देखना,ये नही मिलेगा,वो नही मिलेगा कहकर धमकाते रहती है।मैने कई बार उन लोगों से कहा कि तुम लोग अपने मार्क्स बताओ फ़िर उनसे कुछ कहो।इस बात पर वे मेरे सामने तो कुछ नही कहती लेकिन बाद मे बच्चों को फ़िर से धमकी मिल जाती है बाबा को बताया ना तो देखना।

    पी सी गोदियाल जी ने गजब की कविता लिख मारी है आप भी पढ़िए
    साठ साल मे अकल न आई.....!
    महलों के सुख भोग रहे, हाथों मे जाम ठसे हुए है । सडकों की बदहाली से, लोग जाम मे फंसे हुए है ।।लूट-खसौट उद्देश्य रह गया, आज हर जन-नेता का।तथ्य को तोड-मरोडना, काम ये कानून के बेता का ॥धर्म-समाज मे हवा दे रहे, ये बे-फजूल के पंगो को । साठ साल मे अकल न आई, देश के भूखे-नंगो को ॥कत्ल-हिंसा,बलात्कार-व्यभिचार,इनका यही लेखा है।आजादी के इस कालखंड मे,देश ने क्या नही देखा है ।।

    शरद कोकाश जी ने बताया है कि
    मेहनतकश जंग लड़कियों को सिखाती है इंतज़ार करना


    गिरिजेश राव भईया का कुछ लिखने का मन नहीं कर रहा है फिर भी लिख दिए है यहाँ लिखने का मन कर रहा है पर समय की कमी बहुते खल रही है , फिर भी गिरिजेश जी ने लिखा है कि
    कुछ लिखना है लेकिन मन नहीं बन रहा इसलिए यह लिख दिया :)
    यह सारी बकवास इसलिए कर रहा हूँ कि रविवार है। मन नहीं लग रहा और जो लिखना है वह इतनी दक्षता की माँग कर रहा है कि कँपकँपी छूट रही है। ब्लॉग जगत के महारथी, अतिरथी, सारथी, रथविरती, व्रती, पैदल ... वगैरह सबने टिप्पणियों पर कुछ न कुछ अवश्य लिखा है। मुझे लगा कि मेरा यह संस्कार तो अभी तक हुआ ही नहीं ! इसलिए सम्पूर्ण ब्लॉगर बनने की दिशा में एक और पग बढ़ाते हुए यह लेख लिख रहा हूँ।
    उपर जो लिखा है वह इसलिए लिख पाया कि परोक्ष रूप से मुफ्त प्लेटफॉर्म उपलब्ध है। अगर इस काम के लिए पैसे अंटी से निकलते प्रत्यक्ष दिखते तो शायद न लिखता, संयम रखता। मुफ्त के प्लेटफॉर्म पर मुफ्त की सलाह देना अपराध नहीं एक कर्तव्य है - उसे मानने वाले की अंटी से हजारो नोट निकल जाँय तो भी।


    खुशदीप जी के ब्लॉग पर दो सौ पोस्ट पुरी हो गयी है आज - चलिए बधाई दे रहे है आपको
    मेरी डबल सेंचुरी और भगवान लापता...खुशदीप
    इस दौरान जो मैंने आपका बेशुमार प्यार कमाया, वही सबसे बड़ी पूंजी है...इस दौरान मेरे आइकन्स समेत बड़ों ने मेरा हौसला बढ़ाया, सुझाव दिए...रास्ता दिखाया...वहीं हमउम्र साथियों और छोटे भाई-बहनों ने भी मुझे भरपूर प्यार दिया...मैं किसी एक का नाम नहीं लेना चाहूंगा...सभी मेरे लिए सम्मानित हैं...हां गुरुदेव समीर लाल समीर का नाम इसलिए लूंगा कि उन्होंने ब्लॉगिंग के रास्ते पर पहले दिन से उंगली पकड़ कर चलना सिखाया...


    अजय भाई का मुदा -
    मालावती की माला से भी गंदा है ये ...इन पर भी थू थू थू
    खबर है कि पंजाब में सड रहा है सैकडों करोड का गेहूं । खबर ये है कि अब जबकि इस गेहूं की नई फ़सल भी लगभग तैयार है तो पता चला है कि पिछले दो सालों से तैयार और जमा गेहूं जो लाखों मीट्रिक टन है ॥वो अब सडने लगा है ...कारण भी तो सुनते जाईये ..उसे रखने के लिए सरकारों के पास जगह नहीं है ।गोदाम नहीं है ..वाह जिस देश में लाखों लोगों का पेट खाली है उस देश की सरकार के पास अनाज रखने के लिए जगह नहीं है और हालत ये है कि अब वो सडने के कगार पर है ।



    और अंत में एक जरुरी सूचना -

    बैशाखनंदन सम्मान पुरस्कारों की स्थापना : ताऊ रामपुरिया
    माननीय ब्लागर बंधुओं, आप सभी को गुडी पडवा (नव वर्ष) की हार्दिक शुभकामनाएं.
    नववर्ष के शुभारंभ के पावन अवसर पर हास्य व्यंग के लिये आज ताऊ डाट इन की तरफ़ से बैशाखनंदन सम्मान पुरस्कारों की स्थापना की घोषणा करते हुये हमें बहुत ही सुखद अनुभूति हो रही हैं.
    इस सम्मान का उद्देश्य ब्लाग जगत में हास्य व्यंग के लेखन को प्रोत्साहन देना और हास्य व्यंग्यकारों को सम्मानित करना है. हम जानते हैं कि एक स्वस्थ समाज की सुदृढ़ता के लिए ऐसे लेखन का बहुत महत्व है. इसके लिये समस्त सूचनाएं इस प्रकार हैं.
    सम्मान के बारे में:-
    1. बैशाखनंदन स्वर्ण सम्मान - 2010 (एक पुरस्कार)
    पुरस्कार स्वरुप सम्मान राशि रु. 5,100/= (पांच हजार एक सौ रुपिये)
    एवम प्रमाण पत्र
    यह पुरस्कार चुनी गई सर्वश्रेष्ठ रचना को दिया जायेगा.
    2. बैशाखनंदन रजत सम्मान - 2010 ( पांच पुरस्कार)
    पुरस्कार स्वरुप सम्मान राशि रु. 500/= (पांच सौ रुपये) प्रत्येकएवम प्रमाण पत्र
    3. बैशाखनंदन कांस्य सम्मान - 2010 (ग्यारह पुरस्कार)
    सभी को
    सुश्री सीमा गुप्ता की नई प्रकाशित पुस्तक "विरह के रंग" की एक प्रति -एवम प्रमाणपत्र



    ( यह चर्चा आफिस के पी सी से कर रहा हु अतः फोटो नहीं लगाया हु )
    धन्यवाद !

    Wednesday, March 17, 2010

    “ब्लॉग में अपार संभावनाएँ हैं” (चर्चा हिन्दी चिट्ठों की)

    अंक : 159
    चर्चाकार : डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
    ज़ाल-जगत के सभी हिन्दी-चिट्ठाकारों को
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"" का सादर अभिवादन!
    आइए पिछले 24 घण्टों की कुछ पोस्टों की चर्चा प्रारम्भ करता हूँ!
    तेताला

    ब्लॉग में अपार संभावनाएं हैं : कनिष्क कश्यप - [image: The Representative Voice of Hindi Blogs] ब्लॉगप्रहरी एक उम्दा सोच का रिज़ल्ट ही है, आज उस उम्दा सोच के धनी कनिष्क कश्यप से हुई भेंट वार्ता सादर...
    my own creation
    वही कहते हैं! - अब कोई और काम नहीं रह गया, हर पल तेरे ख्यालों में रहते हैं, खमदार(१) गेसुओं में खोये हुए, दिल की उलझने सुलझाते रहते हैं, ना जाने की इबरत(२) गजरे ने दी थी, बो...
    नवगीत की पाठशाला

    ३०- आँगन में बासंती धूप : अजय गुप्त - शिखरों से घाटी तक सोना सा बिखर गया, आँगन में बासंती धूप उतर आई है। खेतों से पनघट तक कोहरा ही कोहरा था, कहीं नहीं हलचल थी सब ठहरा-ठहरा था। हिम निर्मित चोली ...
    काव्यतरंग

    यह कैसी प्रतीक्षा.. - पल पल अविरल निर्बाध सदा भावो में बहता रहता है पग पग पर हर दम मखमल सा राहों में साथ वो रहता है कण कण में पृथ्वी के जिसका अस्तित्व समाहित है त्रण त...
    यशस्वी

    औली के बारे में कुछ - औली उत्तराखण्ड का एक भाग है। यह 5-7 किमी. में फैला छोटा-सा स्की रिसोर्ट है। इस रिसोर्ट को 9,500-10,500 फीट की ऊंचाई पर बनाया गया है। यहां बर्फ से ढकी चोटिय...
    नन्हें सुमन

    ‘‘प्यारी प्राची’’ - *** * *इतनी जल्दी क्या है बिटिया, * *सिर पर पल्लू लाने की।* *अभी उम्र है गुड्डे-गुड़ियों के संग,* *समय बिताने की।।* ** *(चित्र गूगल सर्च से साभार)* *मम्मी-प.
    JHAROKHA

    यकीन - ** * तुम्हारे यकीं का इंतजार करते करते अब थक चुकी हूं मैं फ़िर भी तुम्हें आया नहीं यकीं मुझ पर अब तक उससे तुम नहीं मेरा आत्म सम्मान टूटता है और मै..
    Hindi Tech Blog

    यूट्यूब विडियो डाउनलोड करने का औजार - यूट्यूब के विडियो डाउनलोड करने का एक आसान औजार ये सिर्फ विडियो डाउनलोड करने कि सुविधा तो देता ही है उसे कुछ मुख्य विडियो फोर्मेट में बदलने कि भी सुविधा इ...
    साहित्य योग

    "युवाओं से है मेरी पुकार...सरदार भगत सिंह की कुछ पक्तियों से...." - आज आप को मैं कुछ उन पक्तियों से परिचय कराता हूँ जब सरदार भगत सिंह जेल में अपनी मंगेतर के याद में गाया करते थे. आजीवन तेरे फिराक जुदाई विछोट्र, विरह, नामिल...
    ताऊजी डॉट कॉम

    फ़र्रुखाबादी विजेता (200) : श्री पी.सी.गोदियाल - नमस्कार बहनों और भाईयो. रामप्यारी पहेली कमेटी की तरफ़ से मैं समीरलाल "समीर" यानि कि "उडनतश्तरी" फ़र्रुखाबादी सवाल का जवाब देने के लिये आचार्यश्री यानि कि ह...
    समाचार:- एक पहलु यह भी
    मुबारक हो, आज नववर्ष है - आज सुबह से ही दोस्तों और परिचितों के एसएम्एस आने लगे थे. हर रोज की तरह कोई अच्छे दिन की बधाई दे रहा था तो कोई गुड मोर्निंग विश कर रहा था. कुछ मित्रो ने नवर..
    उच्चारण
    “स्लेट और तख़्ती” - *सिसक-सिसक कर स्लेट जी रही, तख्ती ने दम तोड़ दिया है। सुन्दर लेख-सुलेख नहीं है, कलम टाट का छोड़ दिया है।। **[image: slate00]**[image: patti1]** **[image...
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    दौर - ए - बाज़ार, न देखा जाए - बदल डालेंगे साथ आ, अगर तुझसे भी। सूरत-ए- हाल को बीमार, न देखा जाए॥ ब्लॉग पर बहुत दिनों बाद लौट रहा हूँ ....उम्मीद है सभी साथी बाखैरियत होंगे .... नयी ग़ज़...
    ज़िन्दगी
    तेरे पास - सुन तेरे चेहरे पर गुलाब सी खिली मधुर स्मित नज़र आती है मुझे जब तू दूर -बहुत दूर निंदिया के आगोश में स्वप्नों के आरामगाह में विचरण कर रहा होता है तेरे सीने...
    अंधड़ !
    अरे भाई जी, किसी ने ये सवाल भी पूछे क्या ? - *जहां तक माया की "माया" का सवाल है, हमारे उत्तराँचल में पूर्वजों के जांचे-परखे दो बहुत ख़ूबसूरत मुहावरे प्रचलित है, जो समय की कसौटी पर खरे भी उतरे है ! इनमे...
    simte lamhen
    शहीद तेरे नाम से... - बरसों पुरानी बात बताने जा रही हूँ...जिस दिन भगत सिंह शहीद हुए,उस दिन का एक संस्मरण... सुबह्का समय ...मेरे दादा-दादी का खेत औरंगाबाद जानेवाले हाईवे को सटक...
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    शहीद - ए - आजम भगत सिंह - 5 - शहीद - ए - आजम भगत सिंह - 5 देश प्रेम का ज्वार भरा था, रोम रोम अंगार भरा था . मन में शोले भड़क रहे थे, स्वतंत्रता को तड़प रहे थे . प्रचण्ड शक्ति संचित कर भाल...
    दिनेश दधीचि - बर्फ़ के ख़िलाफ़
    कब्रिस्तान में सूर्योदय - कोई नियम नहीं टूटा नहीं विच्छिन्न हुआ कोई वैधानिक प्रावधान एक मनभावन मुस्कान तो थी छतनार दरख्तों के होठों पर लेकिन बारिश से वह नम हो चुकी थी कुछ फीकी और कुछ ...
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    कबीरदासजी और छत्तीसगढ़ - साहेब बंदगी साहेब का स्वर यदि कभी सुनाई पड़े तो जान लीजिए कि कबीर पंथी आपस में एक दुसरे का अभिवादन कर रहे हैं। सत्यलोक गमन के पश्चात कबीर जी की वाणी का संग्...
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    सिर्फ़ मर्दो के लिये... एक चुटकला?? - इस चुटकले को सिर्फ़ हंसी ओर मजाक के तॊर पर ले, अगर किसी को पढने के बाद कॊई ऎतराज हो तो अपने लेपटाप पर, या अपने पीसी पर सारा गुस्सा उतारे, कृप्या मेरी टांग न..
    गत्‍यात्‍मक चिंतन
    क्‍या सचमुच हमारे सोने के चेन में उस व्‍यक्ति का हिस्‍सा था ?? - कभी कभी जीवन में कुछ ऐसी घटनाएं अवश्‍य घट जाती हैं , जिसे संयोग या दुर्योग का पर्याय कहते हुए हम भले ही उपेक्षित छोड दें , पर हमारे मन मस्तिष्‍क को झकझोर ह...
    भारतीय नागरिक - Indian Citizen
    रिलायन्स वाले ऐसे काटते हैं ग्राहकों की जेब से पैसे... - नमूना पेश-ए-खिदमत है... आप किसी जरूरी कार्य में व्यस्त हैं अथवा यात्रा कर रहे हैं. रिलायन्स के ही किसी अनजाने नम्बर से काल आती है. आप काल रिसीव कर लेते हैं...
    my own creation
    वही कहते हैं! - अब कोई और काम नहीं रह गया, हर पल तेरे ख्यालों में रहते हैं, खमदार(१) गेसुओं में खोये हुए, दिल की उलझने सुलझाते रहते हैं, ना जाने की इबरत(२) गजरे ने दी थी, बो...
    मुक्ताकाश....
    दुविधा की देहरी से... - [सच, वह सच कहता है !] साम्प्रदायिकता की बोतलों में संकीर्णता का लेबल चिपका कर कुंठाओं के कार्क लगा तुम मुझे भी उसमें बंद कर देना चाहते हो : मेरे लिए तो बड़ी ...
    काव्य मंजूषा

    सबने उसे बहुत सताया है... - कई दिन बाद वो घर आया है पर चेहरे से लगता वो पराया है दामन से उसके लिपटे, सो गए आधी रात उसने जगाया है यकीं नहीं उसे मेरी मोहब्बत का सबने उसे बहुत सताया...
    An Indian in Pittsburgh - पिट्सबर्ग में एक भारतीय

    आल इज वैल - कुछ न कुछ चलता न रहे तो ज़िंदगी क्या? इधर बीच में काफी भागदौड़ में व्यस्त रहा. न कुछ लिख सका न ज़्यादा पढ़ सका. इस बीच में बरेली के दंगे की ख़बरों से मन बहुत आहत...
    जीवन के पदचिन्ह
    गम है कि जिन्दा हूँ, वरना खुशियों से तो मर जाता - गम है कि जिन्दा हूँ, वरना खुशियों से तो मर जाता तनहाइयों ने थामे रखा, वरना जमाने में किधर जाता सौ बार हुआ क़त्ल रहा फिर भी धड़कता मेरा दिल माजी की थी चाहत...
    Science Bloggers' Association
    ENVIRONMENTAL MATTERS By- M.K. Bajpai - ENVIRONMENTAL MATTERS By – M.K.BAJPAI/Jhansi Today every living organism is suffering from the pollution hazards in one way or the other, human greed h.
    कामन 'वैल्थ' यूपी मैं?


    Posted by IRFAN
    प्रतिभा की दुनिया ...!!!

    वो कौन था मोड़ पर .... - वो याद ही तो थी जो एक रोज मोड़ पर मिली थी. घर के मोड़ पर. वो याद ही तो थी जो गुलमोहर के पेड़ के नीचे से गुजरते हुए छूकर गयी थी. एक कच्ची सी याद उठी साइकि...

    अब दीजिए आज्ञा!
    धन्यवाद!   नमस्कार!! 

    तबदीलियाँ तो वक्त का पहला उसुल है----शक्ति रुपेण नारी-- "चर्चा हिंदी चिट्ठों की"--ललित शर्मा

    ज दिन भर हंगामा था मायावती के नोटों की माला को लेकर, बस इतने सारे नोट एक जगह पर देखने को पहली बार मिले वह भी चित्र में। अब इनसे गरीबों का विकास होगा, उनके लिए रोटी कपड़ा और मकान जुटाया जाएगा। अब यह ना पुछना कि कौन से गरीब? नव रात्रि पर्व मे मातृ शक्ति स्मरण करते हुए आज चर्चा मे सिर्फ़  मातृ शक्ति को ही स्थान दिया है----पंकज मिश्रा जी छुट्टी मे हैं इस लिए मै ललित शर्मा आपको ले चलता हुँ आज की चर्चा हिन्दी चिट्ठों की पर.....................
    आज की चर्चा का प्रारंभ करते हैं उदयाचल से याने अरुणाचल से--यह सुरम्य वादियों का प्रदेश प्राकृतिक सौंदर्य लिए बहुत ही भाता है। प्रकृति की छटा अद्भुत है। अरुणाचल से ममता जी ने अपने ब्लाग पर जानकारी दी है तथा कुछ सुंदर चित्र भी लगाए हैं---अरुणाचल प्रदेश जिसे land of rising sun कहते है ये तो अब आप जानते ही है।  यूँ तो अरुणाचल प्रदेश सुनकर लगता है की ये भी उत्तर पूर्व (N E ) का एक छोटा सा राज्य होगा पर ऐसा नहीं है अरुणाचल प्रदेश काफी बड़ा है। हाँ पर जनसँख्या यहां की काफी कम है (शायद 1० -११ लाख )।
    डॉ अमिता नीरव अपने चिट्ठे अस्तित्व पर सृष्टि के गर्भाधान का उत्सव गुड़ी पड़वा के विषय मे रोचक जानकारी दे रही हैं--फागुन के गुजरते-गुजरते आसमान साफ हो जाता है, दिन का आँचल सुनहरा, शाम लंबी, सुरमई और रात जब बहुत उदार और उदात्त होकर उतरती है तो सिर पर तारों का थाल झिलमिलाने लगता है। होली आ धमकती है, चाहे इसे आप धर्म से जोड़े या अर्थ से... सारा मामला आखिरकार मौसम और मन पर आकर टिक जाता है। इन्हीं दिनों वसंत जैसे आसमान और जमीन के बीच होली के रंगों की दुकान सजाए बैठता है.... अपने आँगन में जब गहरी गुलाबी हो रही बोगनविलिया, पीले झूमर से लटकते अमलतास और सिंदूर-से दहकते पलाश को देखते हैं, तो लगता है कि प्रकृति गहरे-मादक रंगों से शृंगार कर हमारे मन को मौसम के साथ समरस करने में लगी हैं।
    उल्लास पर मीनु खरे जी बता रही हैं माँ जगदम्बा के नौ रुप--- कुसुम ठाकुर जी ने कोहबर पर बासंती पुजा के विषय मे जानकारी दी है----चैत्र शुक्ल पक्ष प्रतिपदा से विक्रम संवत शुरू होता है जिसे हिंदू नववर्ष या नव संवत्सर भी कहते हैं । आज चैत्र शुक्ल पक्ष का प्रतिपदा है और विक्रम संवत २०६७ का आरम्भआज के दिन ही बासंती या चैत्र नवरात्रा आरम्भ होता है और आज के दिन ही चैत्र दुर्गा पूजा की कलश स्थापना की जाती है । नौ दिनों तक धूम धाम से चलने वाली इस दुर्गा पूजा का भी विशेष महत्व है । 
    संवेदना संसार पर रंजना जी कह रही हैं--आरक्षण-रक्षण किसका? नेताजी बहुतै खिसियाये हुए हैं.आजकल जहाँ देखिये वहां चैनल सब पर चमक रहे हैं और सबको चमका रहे हैं...एलान किये हैं कि उनका लाश पर महिला आरक्षण बिल पास होगा.....नेताजी फरमाते हैं .....वे महिलाओं के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि वो तो इतना चाहते हैं कि महिला आरक्षण का लाभ पढी लिखी फ़र फ़र उडती फिरती परकटी बलकटी उन महिलाओं को नहीं ,बल्कि यह उन महिलाओं को मिले, जो नरेगा के अंतर्गत बोझा ढ़ोने का काम करती हैं,जो अल्पसंख्यक समाज से आती हैं,जो अत्यंत पिछड़े वर्ग से आती हैं..संसद में जा राज्य व्यवस्था चलाने का अधिकार उन महिलाओं को मिलना चाहिए जो शिक्षा से वंचित हैं,पारिवारिक सामाजिक अधिकार से वंचित हैं..
    डॉक्टर मीना अग्रवाल अपने ब्लाग टमाटर पर कुछ मुक्तक लेकर आई हैं। पहेली हूँ मुझे सुलझा के देखो नजदीक से अब आ के देखो,समर्पण में मुझे सीता के पाओ,मुझे हर रूप में दुर्गा के देखो,मुझे इसका गिला कब तक रहेगा,कोई किस दिन मुझे चिट्ठी लिखेगा,जो सुख था प्यार की उन चिट्ठियों में,मज़ा वो दूर-भाषी सुख न देगा। ब्लाग सोचा न था पर नेहा शर्मा गुड़ी पड़वा पर एक लेख लेकर आई हैं---गुडी पडवा...चैत्र मास का पहला दिन...जो की हिंदी कैलेंडर के नए साल का पहला दिन है....इसे महाराष्ट्र में नए साल के रूप में मनाया जाता है....इस दिन को शादी,नए काम शुरू करने,गहने और नयी संपत्ति खरीदने के लिए शुभ माना जाता है..
    सुधिनामा पर साधना वैद्य जी लिख रही हैं शक्ति रुपेण नारी--- अपने सभी पाठकों को नवसंवत्सर की शुभकामनायें देते हुए चैत्र मास की प्रतिपदा के दिन मैं उस आदि शक्ति को नमन करती हूँ जिसने इस संसार के सारे दुखों का नाश कर मानव मात्र को भयमुक्त किया है और उसको समस्त सुखों का वरदान दिया है ! ‘असहाय’, ‘बेचारी’, ‘दयापात्र‘, ’अबला नारी’, ‘कमज़ोर जात’,’दासी’,‘बाँदी’,‘गोली’,‘गुलाम’इन सारे नामों को सलाम !रजनी भार्गव जी रजनीगंधा पर नीम पर लिख रही हैं--कागज़ पर कुछ टेढ़ी मढ़ी लकीरें,नक्शे पर नीली, हरी लकीरें,बच्चों के मन में गढ़ गई थीं,आज लकीरें सुलग रही थीं,बनती बिगड़ती बटोही सी,भटक रही थीं।
    स्पंदन पर शिखा जी ने एक कविता सजाई है अहसास---गीली सीली सी रेत में,छापते पांवों के छापों में,अक्सर यूँ गुमां होता है,तू मेरे साथ साथ चलता है, सुबह की पीली धूप जब,मेरे गालों पर पड़ती है,शांत समंदर की लहरें,जब पाँव मेरे धोती हैं, उन उठती गिरती लहरों में अब भी, मुझे अक्स तेरा दिखाई देता है। किरण राजपुरोहित जी भोर की पहली किरण पर लिख रही हैं ---ओ! चित्रकार----ओ! चित्रकार-- रंगों संग चलने वाले --आकृतियों में ढ़लने वाले--भावों के साकार--- ओ! चित्रकार-- सृष्टि से रंग चुराकर---मौन को कर उजागर--     रचते हो संसार---ओ! चित्रकार
    प्रतिभा की दु्निया पर प्रतिभा जी लिख रही हैं---कौन था मोड़ पर---वो याद ही तो थी जो एक रोज मोड़ पर मिली थी. घर के मोड़ पर. वो याद ही तो थी जो गुलमोहर के पेड़ के नीचे से गुजरते हुए छूकर गयी थी. एक कच्ची सी याद उठी साइकिल की पहली सवारी वाली भी. वो भी तो याद ही थी जो हर शाम के साथ झरती थी छत पर. छत, जिसके बनने में भी हाथ लगाया था भरपूर. वो याद ही थी उन दीवारों में बसी हुई।----काव्य तरंग पर रानी विशाल जी रच रही हैं काव्य---तबदीलियाँ तो वक्त का पहला उसुल है--- चलते चलते सुनिए गीत ----- ये समा समा है ये प्यार का------
    सभी को नव संवत्सर एवं नवरात्रि पर की बधाई-अब देते हैं चर्चा को विराम- सभी को मेरा राम-राम

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