Monday, March 29, 2010

दुष्यंत और शंकुन्तला के बीच---लिव इन रिलेशनशिप--(चर्चा हिन्दी चिट्ठों की)--->>>>ललित शर्मा

पृथ्वी के पर्यावरण को बचाने के लिए एक घंटे का ब्लेक आउट कि्या गया, इससे पर्यावरण तो बचा कि नही ये तो पता नही, बेचारे पुरनदास गुरुजी का घर जरुर लुट गया, गर्मी में वे सब लाईट बंद करके सपरिवार बाहर  बैठे थे, लेकिन चोर भी ताक में थे वे भी बत्ती गुल होते ही घुस गए बाड़ी तरफ़ का दरवाजा खोल कर, गुरु जी के सामान पर हाथ साफ़ कर गए----मैं ललित शर्मा अब आपको ले चलता हुँ कुछ उम्दा चिट्ठों की चर्चा पर....................

बेनामी ब्लाग पर चल रही है एक सार्थक बहस---विवाह संस्था को अवैध घोषित किया जाय या कम से कम इसे मान्यता तो न दी जाय विवाह संस्था नारी शोषण का मूल है। अब स्थापित पुरुष प्रधान समाज ने यह एक ऐसा हथियार हजारो साल पहले ढूढ़ा जिसने मातृसत्तात्मक समाज को पितृसत्तात्मक बना दिया । बहुकाजी स्त्री को बर्बर शारीरिक बल के अधीन कर दिया गया और यौन शुचिता की बेड़ियों में उसके अस्तित्त्व को इस तरह कस दिया गया कि उसे निहायत प्राकृतिक विधानों पर भी आत्मघृणा होने लगी--------रहस्य गूढ़ नहीं!आयातित वस्तु बड़ी प्यारी लगती है. इम्पोर्टेड आईटम. हमारे विभाग के लोगों को आम जन मानस(मित्र गण) पहले कहा करते थे; कस्टम का माल नहीं पकडाया क्या? उसकी नीलामी नहीं हो रही है क्या? क्यों?
 
कविता ,तुम ही तो मिलाती हो रात के अंधेरों में सन्नाटों की साय साय मन में उठती है हाय हाय कहा हो, कहा हो ? पुकारता ,खोजता में मिल जाता हूँ खुदसे अक्सर तब नींद गहरी आती है सुबह भी चहकती है और नहीं मिल पाता जब खुद से तब खीज से भरा भरा थक...फिल्मी संस्कृति की प्रमुख चुनौतियां- 2 भारतीय सिनेमा में सांस्कृतिक संवाद का मूलाधार है आनंद। इसके तीन मुख्य तत्व हैं, ये हैं, भारतीय संस्कार, गाने और संगीत। ये तीनों ही तत्व मिश्रित संस्कृति का रसायन तैयार करते हैं।
 
पानी की मार बचपन में जब जाता था परीक्षा देने या जब जाते थे पिताजी घर के बाहर दूर किसी काम से तो माँ झट से रख देतीं थीं दरवाजे पर दो भरी बाल्टियाँ कहती थीं- शुभ होगा। आज जब निकलना चाहता हूँ घर के बाहर तो पत्नी झट से------ फेसबुक और ऑरकुट के दीवानों, ज़रा इधर भी नज़र डालो *[पुराने पन्नों से] साथियों .....मास्टरों और उधार का चोली दमन का साथ है अतः आशा है कि आप लोग मुझे साहिर साहब की इस रचना को उधार लेकर, इसका दुरुपयोग करने के लिए माफी प्रदान करेंगे .
 
रवि कुमार ने जीता एक लाख का खिताब--राष्ट्रीय ओपन शतरंज की अंतिम बाजी में मेजबान छत्तीसगढ़ के रवि कुमार ने रूपेश कांत के साथ २३ चालों में ही बाजी ड्रा खेलकर आधा अंक बटोरा और इसी के साथ खिताब और एक लाख की इनामी राशि पर कब्जा कर लिया। यह पहला ...छत्तीसगढ़ी लोक कला के धुरी 'नाचा' 'जुन्ना समय अउ अब के नाचा म अब्बड़ फरक होगे हे। जुन्ना नाचा कलाकार मन रुपिया-पइसा के जगह मान सम्मान बर नाचयं गावयं। गरीबी लाचारी के पीरा भुलाके कला साधना म लगे राहयं, कला के संग जिययं अऊ मरयं। 
 
अन्तर सोहिल = Inner Beautiful -यह वाक्या पढने से पहले कुछ हरियाणवी शब्दों के अर्थ समझ लेना जरूरी है। उडै = वहां उरेनै-परेनै = इधर-उधर सोन की खातर = सोने के लिये टोण लाग्या = ढूंढने लगा कितै भी = कहीं भी किस तरियां = किस तरह न...भिखारी  अपने देश में भिखारियों की संख्या दिन-व-दिन बढते जा रही है गली-मोहल्लों, चौक-चौराहों, गांवों-शहरों, धार्मिक स्थलों, लगभग हर जगह पर भिखारी घूमते-फ़िरते दिख जाते हैं और तो और रेल गाडियों में भी इनका बोलबाला है... 
 
कोख में आतंकवाद दूर किसी आँगन में खिल रही थी एक कली.... नन्ही सी... प्यारी सी कली.. नहीं--नहीं!! कहाँ खिली वह कली..? खिलने से पहले ही मसल दी गयी वह नाज़ुक कली क्यों..?? क्योंकि वह कली गर खिल जाती तो माता... सुमन के भीतर आग है हार जीत के बीच में जीवन एक संगीत। मिलन जहाँ मनमीत से हार बने तब जीत।। डोर बढ़े जब प्रीत की बनते हैं तब मीत। वही मीत जब संग हो जीवन बने अजीत।। रोज परिन्दों की तरह सपने भरे उड़ान। यदि सपन जिन्दा रहे लौटेगी--
 
सदगुरु दांव बतईया खेले दास कबीर " मेरे गुरुदेव स्वामी चिन्मय योगी जी ने अपने गुरु भगवान श्री रजनीश ओशो से पुछा "भगवान् ,किसी व्यक्ति को सदगुरु मिल गया. सदगुरु ने पूजा ध्यान विधि बता दी .उसके बाद क्या सदगुरु की आवश्यकता नहीं है ?" अल्पना के ग्रीटिंग्स की एक प्रदर्शनी-आर्ट गैलरी रायपुर मे-27मार्च से 31 मार्च तक सृजनशील हाथ सृजन कार्य मे निरंतर लगे रहते हैं, यह एक साधना है, इस साधना से नई कृतियों का जन्म होता है, जिसमें सृजनकर्ता की वर्षों की मेहनत लगी रहती है। जब उचित समय आता है
 
हुआ हूँ फिर उपस्थित तेरे सम्मुख ,,,, ओ दयानिधे(प्रवीण पथिक) ,,,, अतृप्त इच्छाओ की ,,, अधबनी नौका लेकर ,,, हुआ हूँ फिर उपस्थित तेरे सम्मुख ,,,, ओ दयानिधे ,,,, टकटकी लगा रखी है ,,,, तेरी हर अनुग्रही क्रिया पर ,,,, की काश कोई द्रष्टि इधर भी हो ,,,, ओ समग्र नियन्ता ,,,, मेरी----- कैसा हो कलियुग का धर्म ??
प्रत्‍येक माता पिता अपने बच्‍चों को शिक्षा देते हैं , ताकि उसके व्‍यक्तित्‍व का उत्‍तम विकास हो सके और किसी भी गडबड से गडबड परिस्थिति में वह खुद को संभाल सके। पूरे समाज के बच्‍चों के समुचित व्‍यक्तित्‍व नि...
 
डार्लिंगजी :पुस्तक समीक्षा नर्गिस और सुनील दत्त की जोड़ी हमेशा हमारे लिए एक आयडियल जोड़ी रही है...लेकिन उनके मिलने की कहानी भी किसी फ़िल्मी कहानी से कम पेंचीदा नहीं है....जहाँ एक ओर बचपन से अपनी माँ के द्वारा नर्गिस सिनेमा-जगत में आ ----- दुष्यंत और शंकुन्तला के बीच कौन सा संबंध था?महाभारत संस्कृत भाषा का महत्वपूर्ण महाकाव्य (धर्मग्रंथ नहीं)। हालांकि महत्वपूर्ण धर्म ग्रंथ का स्थान ग्रहण कर चुकी श्रीमद्भगवद्गीता इसी महाकाव्य का एक भाग है। महाभारत बहुत सी कथाओं से भरा पड़ा है। 
 
अमिताभ बच्चन को ही नहीं हरिद्वार में गंगा स्नान को भी कांग्रेस राजनैतिक चश्मे से देख रही विधानसभा अध्यक्ष के आमंत्रण पर छत्तीसगढ़ के अधिकांश विधायक हरिद्वार की यात्रा पर गए। पहले मुख्यमंत्री ने आमंत्रित किया था तो कांग्रेस विधायक दल ने इंकार कर दिया था। क्योंकि उन्हें डर था कि मुख्यमंत्री के आ.----- विदेश में जन्मे, भारत में शिक्षा पा रहे बच्चे के मामले में न्यायिक क्षेत्राधिकार पर नए सिरे से विचार करने का फैसला सुप्रीम कोर्ट ने विदेश में जन्मे, लेकिन यहां शिक्षा पा रहे बच्चे के मामले में देश की अदालतों के न्यायिक क्षेत्राधिकार पर नए सिरे से विचार करने का फैसला किया है। शीर्ष कोर्ट ने एक ऐसे मामले पर आखिरी फैसला ह..
 
नर्सिंग होम में हंगामा श्रीगंगानगर के आदर्श नर्सिंग होम में इलाज के दौरान एक महिला की मौत के बाद उसके परिजनों ने नर्सिंग होम के अन्दर बाहर धरना देकर एक सामान उस पर अपना कब्ज़ा कार लिया। एक दिन एक रात के बाद पुलिस भारी सुर------ लुटा अपनी रिश्तेदारी में ~~~~ सारी उम्र कटी यूँ तो सिपहसालारी में मारा गया बेरहमी से मगर वो यारी में . इम्तहान तो था महज़ कुछ घंटों का पूरा साल निकल गया देखो तैयारी में . बहुत ढूढ़ा खोया था जो इकलौता बीज अंकुरित हुआ तो मिला इस क्य..
 
गणेश शंकर 'विद्यार्थी' पत्रकारिता के आदर्श पुरुष : बख्शी सृजनपीठ का कार्यक्रम--आदर्श पत्रकारिता को जीवंत बनाकर भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में हुंकार भरने वाले शहीद गणेश शंकर विद्यार्थी का बलिदान दिवस पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी सृजनपीठ कार्यालय सेक्टर-9 में विगत दिनो मनाया गया। उपस्थित पत...ताऊ पहेली - 67 प्रिय बहणों और भाईयों, भतिजो और भतीजियों सबको शनीवार सबेरे की घणी राम राम. ताऊ पहेली *अंक 67 *में मैं ताऊ रामपुरिया, सह आयोजक सु. अल्पना वर्मा के साथ आपका हार्दिक स्वागत करता हूं. जैसा कि आप जानते ही हैं क..------
 
लिव इन रिलेशनशिप : फ़ैसले पर एक दृष्टिकोण --- यूं तो अभी इस मुद्दे पर लंबित मुकदमें में न्यायालय का अंतिम फ़ैसला नहीं आया है , और जाने किन किन आधारों पर मीडिया में इस मुद्दे को लेकर तमाम तरह की खबरें , रिपोर्टिंग और सर्वेक्षण तक दिखाए समझाए जा रहे हैं । इस फ़ैसले को लेकर बहस, और फ़ैसले के बाद की-------  और इस बार फ्लाईट छूटी..(केरल यात्रा : संस्मरण -१) लीजिये ,एक अल्पान्तराल के बाद फिर हाजिर हूँ .इस बीच विभागीय कार्य  से केरल यात्रा कर आया .सोचा था कि इस बार यात्रा की अपनी परेशानियों जिनसे अपुन का  चोली दामन का साथ है से ब्लागर मित्रों को बिलकुल भी क्लांत नही करूंगा .घर में तो "जहाँ जाईं 
 
संजीवनी हृदय तिमिर को  बींधतीतेरी रूह की सिसकती आवाज़जब मेरे हृदय कीमरुभूमि से टकराती हैमुझे मेरे होने का अहसास करा जाती हैजब तेरे प्रेम की स्वरलहरियाँ हवा केरथ पर सवार होमेरा नाम गुनगुना जाती हैंमुझे जीने का सबबसिखा जाती हैंजब  दीवानगी---- गीत --  देखो चन्दन वन बहक  गया ,जाने कितना कुछ महक गया ,अंगड़ाई ली अभिसारों ने ,मादक परिणय व्यापारों ने ,फुनगी पर चढ़ा पलाश यहाँ ,पिघले लोहे सा दहक गया //देखो ......छूटी पीछे बीती पीड़ा ,श्वांसों ने छेड़ी है वीणा ,जागे जीवन मे राग नए ,भोला मन फिर से
 
चलते चलते देखिए कार्टुन कोना----डब्बु जी---


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आभार

14 comments:

M VERMA said...

शानदार और समग्र

'अदा' said...

बहुत अच्छे लिंक्स..
बहुत अच्छी चर्चा..
आभार..

श्यामल सुमन said...

कई लिंक्स के साथ में चर्चा बिल्कुल खास।
चर्चा भी बेहतर लगी अच्छा लगा प्रयास।।

सादर
श्यामल सुमन
09955373288
www.manoramsuman.blogspot.com

Suman said...

nice

मनोज कुमार said...

बहुत अच्छे लिंक्स|
बहुत अच्छी चर्चा!

वाणी गीत said...

बहुत सारे अच्छे लिंक्स मिले ...
अच्छी चर्चा ...आभार ...!!

डॉ. मनोज मिश्र said...

अच्छी चर्चा!

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

चर्चा अच्छी रही।

ताऊ रामपुरिया said...

बहुत सुंदर चर्चा.

रामराम.

वन्दना said...

bahut badhiya charcha rahi.

माधव said...

सर मै ब्लोग दुनिया से दो महीने के लिए दूर था , सो जो आपने अपने ब्लॉग में मेरी चर्चा की उस पर कोई कमेंट्स नहीं दे पाया . अपने ब्लॉग पर मुझे जगह देने के लिए आपका धन्यवाद

राज भाटिय़ा said...

आज तो बहुत नाईस हो गया लगता है जी, सुंदर चर्चा

संगीता पुरी said...

बहुत बढिया और विस्‍तृत चर्चा !!

Dr Satyajit Sahu said...

kya shandaar aap likhte hai

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