Sunday, November 08, 2009

"समय धीरे चलो..." (चर्चा हिन्दी चिट्ठों की)

अंक : 71
प्रस्तुतकर्ता : डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" 
ज़ाल-जगत के सभी हिन्दी-चिट्ठाकारों को डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" का सादर अभिवादन! 
आज की   "चर्चा हिन्दी चिट्ठों की " का प्रारम्भ मैं नारी ब्लॉगर्स के चिट्ठों से कर रहा हूँ-

समय धीरे चलो...यू.ऐ.ई का प्राकृतिक दृष्टि से सबसे खूबसूरत शहर अलेन जिसका इतिहास पांच हज़ार साल पुराना बताया जाता है.पुरातत्व के महत्वकी वजह से ही नहीं बल्कि यहाँ की जलवायु ,हरियाली ,पानी के प्राकृतिक झरनों और गरम पानी के चिकित्सकीय गुणों वाले प्राकृतिक सोते के कारण भी इस स्थान को खासा महत्व और प्रसिद्धि मिली हुई है. इस शहर में रहते हुए हमें १३ साल हो चुके हैं. मगर आज भी ऐसा लगता है जैसे कल परसों ही यहाँ आये थे.यहाँ रहने वाला हर प्रवासी यह जानता है कि यह उसका स्थाई निवास नहीं है.हमेशा एक अनिश्चितता में ही रहते हैं.आज हम यह कह नहीं सकते कि कल हम यहाँ रहेंगे या नहीं।
हम अपनी छवि में कैद हैं

कभी आप बेहद उदास हैं, उदासी भी आपकी निजी है। मन करता है कि दुनिया को बता दें कि आप क्‍यों उदास हैं फिर लगने लगता है कि आपने तो दुनिया के सामने एक छवि बनायी थी कि आप बेहद सुखी हैं। उसका क्‍या होगा? हम अपनी छवियों में कैद हैं, कभी लगता है कि हम एक फोटो फ्रेम में कैद होकर रह गए है। जब फोटो खिचवाने जाओ, फोटोग्राफर कहता है कि जरा मुस्‍कराइए। हम मुस्‍कराने का प्रयास करते हैं और फोटो क्लिक हो जाती है। बरसो तक यही फोटो फ्रेम में चिपकी रहती है। हम भी उसे देख देखकर खुश होते रहते हैं कि वाह क्‍या हमारा चेहरा है? ...........
"चीं" बोल चुकी बीजेपी का ई-आंदोलन चुनावों में "चीं" बोलने वाला दल ई-आंदोलन की तैयारी में जुट गया है । इंटरनेट की बदौलत संसद में बहुमत पा जाने का सपना चकनाचूर होने के बाद भी लगता है बीजेपी की अकल पर पड़े ताले की चाबी कहीं खो गई है । संसदीय चुनाव के बाद हुए तीन राज्यों में भी मुँह की खाने के बावजूद पार्टी के होश ठिकाने पर नहीं आ सके हैं।.............
क्‍या कल के मैच में भारत की जीत की संभावना बनती है ??कल आसमान में मंगल और चंद्र की एक बहुत ही मजबूत स्थिति बन रही है , जिसका कल रात्रि साढे नौ बजे के आसपास उदय होगा और रातभर मंगल और चंद्र को आप एक साथ आकाश में चमकता देख सकते हैं। इसके कारण आज और कल का दिन युवाओं के लिए खासकर 24 वर्ष की उम्र से 36 वर्ष की उम्र तक के युवकों युवतियों के लिए बहुत ही निर्णायक होगा , इसलिए वे आज कल में किसी महत्‍वपूर्ण घटना से संयुक्‍त हो सकते हैं। अधिकांश के लिए यह घटना सुखद हो सकती है , पर कुछ के लिए तो कष्‍टकर होगी ही..............
"हिन्दी भारत" प्रभाष जोशी के न होने का अर्थ - प्रभाष जोशी के बिना पहला एक दिन "कोई हरकत नहीं है पंडित"। किसी बात को हवा में उड़ा देने के लिए हमारे प्रभाष जी का यह प्रिय वाक्य था। फिर कहते थे "अपने को ...
जातीय दबाव से दम तोड़ती ममता (नई दुनिया के सम्पादकीय पृष्ठ पर प्रकाशित)पिछले दिनों सगोत्रीय विवाह से नाराज एक पिता द्वारा अपनी पुत्री की नृशंस हत्या और उससे पहले क्रूररतम उत्पीड़न की खबर आई । राजधानी के महिपालपुर इलाके की इस घटना ने लोगों को दहला दिया । इसी संदर्भ में सवाल उठता है,कि क्या हिंदू विवाह अधिनियम के अंतर्गत सपिंड में विवाह करने की इजाजत नहीं है। परंतु ऐसा कोई नियम नहीं बना जिसमें यह लिखा गया हो कि सगोत्र विवाह करने पर जाति से बेदखल कर गांव से निकाल दिया जाएगा या जान से मार दिया जाएगा।.............
यादें 
ज़िन्दगी क्या है ?एक खेल है,
सुख और दुःख का मेल है,
याद करती हूँ सुख भीने पलों को,
भुलाने को दुःख खिलाती हूँ,
ह्रदय कमल के सुप्त शत दलों को !
अनब्याही बातों के ख्वाब
वो अपनी आदत से बहुत मजबूर है। अनब्याही बातें उसे बहुत परेशान करती हैं। सपनों को काढ़ने वाले धागों के लिए वह हमेशा पक्के रंगों की दुआ करती रहती है। किसी के दुख को पता नहीं कैसे अपने भीतर उतार लेती है। दो अलहड़ प्यार करने वालों को उसने बहुत पास से जाना था। बहुत प्यार, बेहइंतहा प्यार। जब एक संग होने का वक्त आया तो वक्त भी एक तरफ खड़ा हो कर जन्म देने वालों का फैसले को सुनने लगा। काफी देर तक तो वक्त ठहरा रहा, फैसला ठहरा रहा। आग का दरिया पार करने का जुनून था लेकिन आग के दरिया के किनारों पर खड़े हो कर मुहब्बत को उसमें ढूबते और बह जाने को वे दोनों देखते रहे। थक कर अपने अपने रास्तों पर चले गए। सपने काढ़ने वाले धागों के रंग पता नहीं कैसे निकले...........
कुमाउँनी चेली समझदार होते अस्पताल ... - कभी कभी मन करता है कि इन अस्पतालों की समझदारी पर बलिहारी जाऊं , इनकी प्रशंसा में स्तुतियाँ लिखूं , आरती गाऊं. इनकी समझदारी तो देखिये, जैसे ही किसी *शातिर * ...
सर्वाइकल कैंसर की वैक्सीन कितनी कारगर होगी? दिल्ली में कई सरकार और गैर-सरकारी अस्पतालों में कैंसर विभाग या महिला रोग और प्रसूती विभाग की दीवारों पर सर्वाइकल कैंसर को रोकने की वैक्सीन के पोस्टर लगे मिल जाते हैं जो कि एक कंपनी के अपने उत्पाद का विज्ञापन है। इसमें एक 22-25 साल की महिला इस वैक्सीन को लगवाने की वकालत कर रही है जिससे सर्वाइकल कैंसर को रोका जा सकता है। ...........
एक प्रयास  यादों के झरोखे से भाग २ ................... - ज़िन्दगी धीरे- धीरे ढर्रे पर आने लगी । दोनों ही अपनी- अपनी तरफ़ से उस दुखद पल को भुलाने की कोशिश करने लगे मगर कहीं एक चुभन शायद दोनों के ही दिलों में कहीं ...
ताऊ पहेली - 47
.................ताऊ पहेली के जवाब देने का समय कल रविवार दोपहर १२:०० बजे तक है.........
खुल्ला खेल फ़र्रुखाबादी (106) : रामप्यारी
हाय….आंटीज..अंकल्स एंड दीदी लोग..या..दिस इज मी..रामप्यारी.. आज से रामप्यारी शुरु कर रही है "खुल्ला खेल फ़र्रुखाबादी" यानि नो माडरेशन..नथिंग...सबके सामने रहेंगे सारे जवाब..नकल करना हो करिये..नो प्राबलम टू रामप्यारी....बट यू नो?..टिप्पणियों मे लिंक देना कतई मना है..इससे फ़र्रुखाबादी खेल खराब हो जाता है. लिंक देने वाले पर कम से कम २१ टिप्पणियों का कम से कम दंड है..अधिकतम की कोई सीमा नही है. इसलिये लिंक मत दिजिये..........
अंधड़ ! गलत वो नहीं हम है ! - *वन्दे मातरम् , धरती माँ के नमन का गीत है, और दर्शाता, धरती के प्रति इंसां की प्रीत है ! जिसमे उसने, जन्म लिया, खेला, पला, बढा , और मिट गया, फिर उसी माटी का ...
Hasyakavi Albela Khatri जी हाँ ! हम जी रहे हैं एक funny मुल्क में.............. - बधाई हो ! हम जी रहे हैं एक funny मुल्क में जहाँ पिज़्ज़ा हमेशा समय पर पहुँचता है , लेकिन पुलिस , एम्ब्युलेंस और फायर ब्रिगेड हमेशा लेट होते हैं । ह...
Science Bloggers' Association
जिनका जन्म दिवस है आज, उनपर हम सबको है नाज़ (28) - सर चन्द्रसेखर वेंकट रामन Sir Chandrasekhara Venkata Raman प्रकाश विद्युत प्रभाव के बाद जिस खोज ने प्लांक की क्वांटम परिकल्पना (Quantum Hypothesis) की सर्वा...
शब्दों का सफप्रभाषजी की यादें… - वे [image: Prabhash Joshi]सिर्फ पत्रकार नहीं थे। यूं पत्रकार का व्यक्तित्व भी बहुआयामी होता है मगर बहुधा इस धंधे में आने के बाद समझदार पत्रकार खुद को लगा..
रामगढ़ से हिमालय रामगढ़ ( जिला : नैनीताल ) उत्तराखंड महादेवी वर्मा सृजन पीठ में आयोजित 'हिन्दी कहानी और कविता पर अंतरंग बातचीत' के दो दिवसीय आयोजन ( ३० एवं ३१ अक्टूबर २००९ ) से लौटा हूँ वहाँ के प्रवास में खूब चहल-पहल रही फिर भी इसी में अपने लिए तनिक एकान्त तलाशते हुए कुछ कवितायें बन गईं जिनमें से दो प्रस्तुत हैं -
रामगढ़ से हिमालय : दो चित्र 
Fulbagiya मेरा देश भारत - * * *“**इन्साफ़** **की** **डगर** **पे**,* *बच्चों** **दिखाओ** **चल** **के* *ये** **देश** **है** **तुम्हारा**,* *नेता** **तुम्हीं** **हो** **कल** **के॥* * **ज...
हिन्दी साहित्य संगम जबलपुर अक्षर साधक - *अक्षर साधक* *विद्या, विनय, विवेक विशारद,* *नोदक नर्तन, कला समर्पित . * *दर्पहीन, दरियादिल, दर्पण,* *नम्रभावमय, निश-दिन हर्षित .. * *यत्नशील, दृढ़ निश्चयी................
Gyan Darpan ज्ञान दर्पण क्या मृत्यु समय का मृत्युपूर्व पूर्वाभास होता है ? - कई बार कई बुजुर्ग व्यक्ति अपनी मृत्यु से सम्बंधित ऐसी बाते कहते है जिससे लगता है कि उन्हें अपनी मृत्यु के समय का पूर्वाभास हो गया है लेकिन उनकी बातों पर ये...
Gyanvani एक खुला ख़त अपनी दीदी के नाम ...अन्तिम किश्त - अब तक आपने पढ़ा ...एक खुला ख़त अपनी दीदी के नाम ..और ...एक खुला ख़त अपनी दीदी के नाम ...2 अब आगे ... ख़त कुछ ज्यादा ही लंबा हो गया है ...मगर कोई बात नही .....
स्वप्न(dream) हँस के गुजार दी कभी रो के गुजार दी - हँस के गुजार दी कभी रो के गुजार दी जिंदगी हमने तेरे,होके गुजार दी तुझको यकीन हो ना हो , लेकिन है सच यही हमने तो अपनी जिंदगी तुझपर निसार दी इश्क में तूफ़ान आ..
मनोरमा चेतना - कहीं बस्ती गरीबों की कहीं धनवान बसते हैं। सभी मजहब के मिलकर के यहाँ इन्सान बसते हैं। भला नफरत की चिन्गारी कहाँ से आ टपकती है, जहाँ पर राम बसते हैं वहीं रहमान...
Alag sa क्या बाप या अभिभावक अक्लमंद नहीं हो सकते ? - आप कहेंगे कि बार-बार विज्ञापनों का रोना ले बैठता हूं। पर इन्हें आप की अदालत में लाना जरूरी लगता है। सरकारी विज्ञापन तो वैसे ही माशा-अल्लाह होते हैं। "जागो ...
भारतीय नागरिक - Indian Citizen विजिलेंस वीक - मुफ्त का मुर्गा उड़ाया, बोतल वो पूरी पी गये. कार एसी में वो घूमे, रूम में जा फिर सो गये. नोट की गड्डी संभाली, हर चीज पाई ठीक. कुछ इस तरह निपटा गये, वो सतर्कता...
रायटोक्रेट कुमारेन्द्र 
त्रयोदशी संस्कार करवाने के पीछे के कारण - कल दीपक ने अपनी पोस्ट पर त्रयोदशी संस्कार की आवश्यकता को लेकर सवाल उठाया था। ऐसा ही सवाल हमारे मन में भी उठता है। सोचते हैं कि समाज का ये कैसा चलन है कि...
अंतर्मंथन
ज़रा गौर कीजिये, कहीं आप ग्लोबल वार्मिंग को बढ़ावा तो नही दे रहे --- -एक समाचार से पता चला की मांस (नॉन-वेज) खाने से हवा में ग्रीन हाउस गेसिज की मात्र बढ़ रही है, इसलिए ग्लोबल वार्मिंग हो रही है. यानि मांसाहारी लोग ग्लोबल वार्म...
मेरी डायरी सोचता हूँ - सोचता हूँ क्यों न तुम्हारा नाम खुसबू रख दूं, ताकि तुम्हें पुकार सकूं बेहिचक कहीं भी, कभी भी सबके बीच में. मैं कहूँगा खुसबू आ रही है. सब कहेंगे हाँ, आ र...
पराया देश यमुना एक नदी है या नाला ? आप ही बताये - आज एक समाचार पढ रहा था तो अचानक यहां मेरी नजर गई, जब इसे पढा तो बहुत कुछ सोचने पर मजबुर हो गया, क्या आप भी जानना चाहे गे इस परेशानी का कारण तो देर किस बात ...
गीत सुनहरे काले धन एवं नकली नोटों से छुटकारा - भ्रष्टाचार पूर्णत: खत्म - प्राय: सभी देशों की सरकारों का एक रोना साझा है. और वो भी अति भयंकर रोना! देश की अर्थ व्यवस्था में कला धन. यह काला धन बहुत से देशों को, बहुत सी सरकारों को ब...
chavanni chap (चवन्नी चैप) दरअसल :फेस्टिवल सर्किट में नहीं आते हिंदी प्रदेश - -अजय ब्रह्मात्‍मज कुछ समय पहले इंदौर में एक फिल्म फेस्टिवल हुआ था। वैसे ही गोरखपुर और लखनऊ में भी फेस्टिवल के आयोजन होते हैं। भोपाल से भी खबर आई थी। अभी दि...
मुक्ताकाश.... मेरा ठिकाना हो नहीं सकता...! - [आत्म-परिचय] तुम पूछते क्यों हो मुझसे पता मेरा ? मैं तो ख़ुद अपना ठिकाना ढूंढ़ता हूँ-- भई ! मुक्ताकाश हूँ, बादलों के शीश पर चढ़कर टहलता हूँ; मैं ज़मीं की नर्... 
ऐ क्या तू बोलती.... 


इन से मिलो.. कुछ भी तुम कह ना पाओगे..



वर्तमान को तुमने सजाया है...भविष्य अब ऐसा ही पाओगे...
"क्यों, होता है ये सब" इंसानों को इंसानों से इतनी भी मायूसी क्यों? प्रेम मुफ़्त है इस दुनिया में,फिर भी ये कंजूसी क्यों? क्यों बारिश की बूँद नदारद, क्यों सूरज है आग भरा, .............
अक्सर बैठे तन्हाई में, सपनो को पुकार लेती हूँ,
कभी पंछी तो कभी पत्ते,कभी किरने उधार लेती हूँ, .............
ये प्यास है बड़ी 
"ये प्यास है बड़ी !" क्या आप बता सकते हैं "इस छोटे-से वाक्य में आपको कौन-कौन सी त्रुटियाँ दिखाई दे रही हैं ?" और "सही रूप में इस वाक्य का क्या विकल्प हो सकता है ?"
अब आप कुछ नये चिट्ठों को भी देख लें-





अब आज्ञा दीजिये!
अंत  में इतना ही कहूँगा ...आज का अंक आपको कैसा लगा?  अपनी राय बेबाक टिप्पणियों में दीजिये......
कल फिर आपकी सेवा में कुछ और चिट्ठों की चर्चाएँ लेकर उपस्थित हूँगा।
धन्यवाद ....नमस्कार ...........

30 comments:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

आज 37 चिट्ठों की चर्चा की है। सभी चिट्टाकारों को बधाई!
कल और कुछ चिट्टाकारों की बारी भी आयेगी।

हेमन्त कुमार said...

गजब की बुनावट लिये प्रस्तुति के लिये मयंक जी को बधाई ।

Dipak 'Mashal' said...

sundar charcha, sabko badhai bhai....

Ratan Singh Shekhawat said...

ढेरों चिट्ठों को समेटती हुई बेहतरीन चर्चा | इतने चिट्ठों को शामिल करने के श्रम के लिए चिट्ठाकार का हार्दिक अभिनन्दन |

Arvind Mishra said...

चर्चा कौमुदी !

संगीता पुरी said...

इतने सारे चिट्ठों का बहुत सलीके से प्रस्‍तुतीकरण .. अपने चिट्ठे को भी यहां देखकर अच्‍छा लगा .. धन्‍यवाद !!

गिरिजेश राव said...

मेहनती और विषय विविधता के मामले में सजग चर्चा। चिट्ठों के अंशों को ही सँजो कर कथ्य प्रस्तुत कर दिया है। धन्यवाद।

Mishra Pankaj said...

धन्यवाद शास्त्री जी ....
आज मेरी चर्चा की बारी थी लेकिन मै थोडा व्यस्त था ,और आपने चर्चा करके मुझे धन्य कर दिया ....धन्यवाद आपका ...शास्त्री जी..

ललित शर्मा said...

bahut badhiya charcha-abhar-shastri ji

वाणी गीत said...

बहुत ही उम्दा चिटठा चर्चा ...बहुत सारे लिंक ऐसे मिले जिनको पढना व्यर्थ नहीं गया ..!!

श्यामल सुमन said...

एक बेहतर कोशिश आपके द्वारा। प्रशंसनीय प्रयास। साधुवाद।

सादर
श्यामल सुमन
09955373288
www.manoramsuman.blogspot.com

अजय कुमार झा said...

शास्त्री जी ....बहुत ही सुंदर और विस्तारपूर्वक की गयी चर्चा ..हमें खूब भाई...मजा आ गया॥

AlbelaKhatri.com said...

dhnyavaad shaastri ji !

aanand aa gaya........

Anil Pusadkar said...

बहुत ही बढिया रही चर्चा।

Dr. Smt. ajit gupta said...

आपने मेरे पोस्‍ट की चर्चा इस चिठ्ठा चर्चा पर की, इसके लिए आभार। बहुत ही मेहनत से तैयार ही गयी है पोस्‍ट। शुभकामनाएं।

Shefali Pande said...

shastree ji, thankx for adding my post...

अविनाश वाचस्पति said...

सुंदर सैंतीस चिट्ठों का दर।

कविता वाचक्नवी Kavita Vachaknavee said...

Thanks Shastri ji

Babli said...

बहुत बहुत धन्यवाद शास्त्री जी मेरा पोस्ट शामिल करने के लिए ! बहुत बढ़िया लगा चर्चा!

काजल कुमार Kajal Kumar said...

अच्छा है...नई जानकारियां मिलीं.

विनोद कुमार पांडेय said...

Shastri ji, behatreen dhang se parosa hai aapne chittha charcha...badhiya charcha..badhayi..

rashmi ravija said...

अच्छी चर्चा है..कई चिट्ठों की जानकारी मिली

पी.सी.गोदियाल said...

bahut khoob shashtree ji.

Suman said...

nice

पं.डी.के.शर्मा"वत्स" said...

शास्त्री जी हमरी बारी कब आएगी :)

सुनीता शानू said...

जैसा कहा कर दिखाया आपने। बहुत सुन्दर चिट्ठा चर्चा। बहुत से चिट्ठों को यहीं पर पढ़ा।

वन्दना said...

bahut hi badhiya rahi charcha........badhayi.bahut hi saleeke se prastut kiya hai.

गौतम राजरिशी said...

मेहनत से की गयी एक चर्चा...शास्त्री जी का शुक्रिया!

सुरेन्द्र "मुल्हिद" said...

qaabil-e-tareef charcha ke vishay ko chuna hai aapne shastri ji...

अल्पना वर्मा said...

मेहनत से की गयी बहुत सुन्दर चिट्ठा चर्चा.धन्‍यवाद

पसंद आया ? तो दबाईये ना !

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