Friday, November 20, 2009

"इंदिरा गांधी के फैसलों में होती थी हिम्मत" (चर्चा हिन्दी चिट्ठों की)


अंक : 82
ज़ाल-जगत के सभी हिन्दी-चिट्ठाकारों को डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" का सादर अभिवादन!
आज की "चर्चा हिन्दी चिट्ठों की "  की शुरूआत करते है-




बुरा भला इंदिरा गांधी के फैसलों में होती थी हिम्मत !! पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी एक निडर नेता थीं जिन्होंने परिणामों की परवाह किए बिना कई बार ऐसे साहसी फैसले किए जिनका पूरे देश को लाभ मिला और उनके कुछ ऐस...
20 साल बाद मिलावट प्रकरण में सजा दयपुर की एक अदालत ने बीस साल बाद हल्दी व मिर्च पाउडर में मिलावट करने के मामले में गुजरात की दो कम्पनियों एवं उनके मैनेजिंग डायरेक्टर तथा स्थानीय डिस्ट्रीब्यूटर के दो पार्टनर को दोषी मानते हुए कारावास व जुर्माने की सजा सुनाई है।  इस मामले में 3 मार्च व 30 मार्च 1989 को एक खुदरा दुकानदार के यहाँ से इंडिया सेल्स कॉर्पोरेशन की एगमार्क इंडिया ब्रांड की लाल मिर्च के दस किलो के पैक से लाल मिर्च और एगमार्क इंडिया स्पाइसिस नडियाद की हल्दी के दस किलो के पैक से .........

Gyanvani और एक कविता बुन ली एक कविता बुन ली पन्ना पन्ना खंगाले शब्दकोष सारे मिले नही फिर भी खो गए जो शब्द सारे दूर हाथ बांधे खड़े कैसे भांप ली ना जाने अव्यक्त होने की छटपटाहट दो शब्... 
आईये चलते है इन्टरनेट पर मौजूद अथाह शैक्षिक संसाधन (एडुकेशनल रिसोर्सिस) की खोज में ... इन्टरनेट पर पढाई करने के अथाह संसाधन मौजूद है , बस ढूढ़ने की जरूरत है | इ-बुक्स, विडियो, नोट्स, आर्टिकल्स तमाम संसाधन फ्री मौजूद है.... 
वंदेमातरम् की खिलाफत करने वाले मुसलमानों को उनके ही कौम की महिलाओं ने जता दिया है कि मां का अपमान करना उनको बर्दाश्त नहीं है। जो लोग वंदेमातरम् का विरोध कर रहे हैं और इसके खिलाफ फतवा जारी करने का एक घिनौना काम किया है, क्या अब उनमें इतनी हिम्मत है कि अपने ही कौम के मुस्लिम महिला फ्रंट के खिलाफ वो फतवा जारी कर सकें। वैसे भी वंदेमातरम् को लेकर मुस्लिम समाज में एका नहीं है, और जब किसी बात में एका न हो तो ऐसी बात का खुलकर विरोध करना हमेशा घातक होता है, अब लगता है कि जरूर फतवे का फरमान जारी करने वाले अकेले पड़ जाएंगे। अगर इन्होंने मुस्लिम महिला फ्रंट के खिलाफ कुछ किया तो आज बनारस की महिलाएं सड़कों पर आईं हैं कल पूरे देश की मुस्लिम महिलाएं सड़कों पर आ जाएंगी तो फतवे के नाम से राजनीति करने वालों को भागने की जगह नहीं मिलेगी।.... 
अंकल सैम, ड्रैगन और हम ! आखिरकार अंकल सैम ने अपनी वह असलियत वर्तमान चीन यात्रा के दौरान प्रकट कर ही दी, जिसकी आशंका कुछ तबको मे तब जताई गई थी, जब पिछ्ले वर्ष वे अमरीकी राष्ट्रपति बनने के कगार पर खडे थे। यह जान क्षोभ हुआ कि अपने यह अंकल सैम भी बिना रीढ के ही निकले। हाथी के दांत खाने के और, दिखाने के और, वाला मुहावरा पूरी तरह इन पर चरित्रार्थ होता है। उस वक्त यह बात भी दबी जुबान से जोर-शोर से उठी थी कि एक अश्वेत पृष्ठ भूमि के अंकल सैम क्या वह निष्पक्षता अपने कार्यकाल के दौरान दिखा पायेंगे, जिसकी अपेक्षा लोगो को भारत और अमेरिका के बीच तथाकथित मजबूत होते रिश्तों से एक अमेरिकी राष्ट्रपति से थी,......
बागड़ बिल्ला लेके बल्ला,
दिन रात करता रहता हल्ला....
कभी बिल्ली तो कभी चूहे को मारे,
उसकी मार से डरते सभी बेचारे....

मुक्‍ति‍बोध जन्‍मदि‍न सप्‍ताह: अलगाव के खि‍लाफ मशाल हैं मुक्‍ति‍बोध  इंटरनेट युग में संपर्क और संबंध पेट नहीं भरते,मोबाइल की बातों से संतुष्‍टि‍ नहीं मि‍लती,आज हमें सभी कि‍स्‍म के अत्‍याधुनि‍क तकनीकी और संचार साधन चैन से जीने का भरोसा नहीं देते, बार बार अलगाव का एहसास परेशान करता है ,चि‍न्ता होने लगती है कि‍ आखि‍रकार हम कि‍स दुनि‍या में  जी रहे हैं। इस अलगाव से मुक्‍ति‍ कैसे पाएं और  इसका सामाजि‍क स्रोत कहां है ?......
९१ कोजी होम  बीकानेर के होटल हम सभी लोगो ने नास्ता किया ....मेरी दाढ़ी बढ़ चुकी थी ,पास ही के ही एकनाई की दूकान में गया ....यहीं बैठा सोचता रहा ...कोई दस वर्ष पहले ....मीरा फ़िल्म की शूटिंग करने इसी शहर में आया था । ड्राइवर ने भी नास्ता किया ... 



आज मिला वह बहुत अचानक बरसों बाद
वह ठिठका या मैं ठिठका था बरसों बाद
मटमैली -सी हंसी पुरानी, कंधे थोड़े झुक आए थे
उसने बढ़कर हाथ मिलाया बरसों बाद.....
1- सत्ता का सिंहासन कितना ही छोटा क्यो न हो...
2- थामे रखनी है अपने हाथों मे एक मशाल...
इंतज़ार की घड़ियाँ खत्म हुईं -आज की नायिका है विरहोत्कंठिताचलिए आपके इंतज़ार की घड़ियाँ खत्म हुईं ! मगर  नायिका तो आज की विरहोत्कंठिता ही है !प्रिय के पूर्व तयशुदा समय पर न आने और चिर प्रतीक्षित आगमन के विलंबित  होते जाने पर व्यग्रता और दुश्चिंताओं  से ग्रसित और व्यथित नायिका ही कहलाती है -विरहोत्कंठिता!....
हिन्दू विवाह याने कि पति और पत्नी के बीच जन्म-जन्मांतरों का सम्बंध हिंदू धर्म में विवाह कोसोलह संस्कारों में से एकसंस्कार माना गया है। पाणिग्रहण संस्कार कोसामान्य रूप से हिंदू विवाह के नाम से जाना जाताहै। अन्य धर्मों में विवाह पति और पत्नी के बीच एकप्रकार का करार होता है जिसे कि विशेषपरिस्थितियों में तोड़ा भी जा सकता है परंतु हिंदू विवाह ....
एक प्रयास ये कैसी बेबसी? प्यार, त्याग और समर्पण से घर संसार बनाया जाता है । ये शब्द कूट-कूटकर भर दिए जाते हैं बचपन से ही स्त्री के मन में । राधा भी इन्ही शब्दों और भावनाओं के साथ ज...
अंधड़ !  कभी मेरे शहर आना ! *क्योंकि तुम मानते हो कि शहर इक खुशनुमा जिन्दगी जीने का आधार है न ? तभी तो तुम्हे , शहरी जिन्दगी से इतना प्यार है न ?? मगर ये बात सम्पूर्ण सच नही, तुम्हे कैस...
नवगीत की पाठशाला ७- एक दीप जलाएं एक दीप जलाएं नव आगंतुकों के नाम। जिनकी किलकारियों से जीवन मिल। इस खंडहर घर को।। एक दीप जलाएं भाई-बहन के रिश्तों की। जिसमें बहन के प्रेम और समर्पण के साथ शाम...
GULDASTE - E - SHAYARI  ज़िन्दगी रोज़ नए रंग में ढल जाती है, कभी खुशियाँ तो कभी ग़मों की बाढ़ आती है, कभी छा जाए, बरस जाए, घटा बेमौसम, चमन में कभी बहार तो कभी उजाड़ आती है !..
मुझे कुछ कहना है  स्पेयरिंग फ्यू मोमेंट्स फा‍र चेतन भगत यूं तो पढ़ने को बहुत ज्यादा टाइम इन दिनों नहीं मिलता , फिर भी चेतन भगत की दो किताबें थीं जो मैं काफी समय से पढ़ना चाह रही थी तो इस बार दिल्ली जाना हुआ तो ...
अनिल पुसदकर के ढाबे की वाट लगाने का ज़िम्मेदार कौन ? जल्दी बताइये.......... - अनिल पुसदकरजी भयंकर मूडी आदमी हैं ये तो हम सब जानते ही हैं । बड़ी सुलझी किस्म के उलझे हुए पत्रकार और समाजसेवी हैं, ये भी हम जानते हैं लेकिन एक नई बा...
वीर बहुटीअस्तित्व [गतांक से आगे] पिछले अंक मे आपने पढा कि रमा को अपने पति की अलमारी से एक वसीयत मिली जिसमे उनके पति ने अपने 2 बेटों के नाम सारी संपति कर दी और छोटे...


आज के लिए बस इतना ही-  बाकी कल !

18 comments:

Babli said...

बहुत ही बढ़िया, शानदार और ज़बरदस्त चर्चा रहा! मुझे कार्टून बेहद पसंद आया और बड़ा मज़ेदार लगा !

Udan Tashtari said...

बहुत उम्दा और विस्तृत चर्चा!! बधाई, शास्त्री जी. ऐसे ही जारी रहिये.

मनोज कुमार said...

ज़ाल-जगत के हिन्दी-चिट्ठा-चर्चाकार डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" का सादर अभिवादन! सदा की तरह आज का भी अंक बहुत अच्छा लगा।

Arvind Mishra said...

शाष्त्री जी निश्चय ही यह बहुत जिम्मेदारी का काम है -अच्छी चर्चा !

AlbelaKhatri.com said...

waah shaastriji !
din dar din
ank dar ank
lagaataar parishkaar karte jaarhe hain......
aapto sachmuch bahut anand kara rahe hain

हिमांशु । Himanshu said...

बेहतर चर्चा । चर्चा का रंगबिरंगा कलेवर लुभाता है ।

पी.सी.गोदियाल said...

Bahut Khoob !

अजय कुमार said...

सार्थक और सराहनीय

शिवम् मिश्रा said...

बहुत बहुत धन्यवाद आज की चर्चा में फिर से मेरे ब्लॉग को शामिल करने के लिए !
आपका आभारी हूँ !

गिरीश बिल्लोरे 'मुकुल' said...

आज की चर्चा रोचक सार्थक और सराहनीय है ।

वन्दना said...

bahut hi sundar charcha.........badhayi

Ratan Singh Shekhawat said...

रोचक चर्चा

अर्शिया said...

शानदार चर्चा चल रही है, चलाते रहिए।
--------
क्या स्टारवार शुरू होने वाली है?
परी कथा जैसा रोमांचक इंटरनेट का सफर।

Suman said...

nice

दिगम्बर नासवा said...

ACHEE CHARCHA JANAAB ....

शरद कोकास said...

बढ़िया चर्चा हो रहा है ।

विनोद कुमार पांडेय said...

बहुत बढ़िया चिट्ठा चर्चा..बधाई

Dipak 'Mashal' said...

फिर वही बात दोहराऊंगा, आपकी चर्चा के गुण गाऊंगा...
जय हिंद...

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