Monday, November 09, 2009

"हमें माफ कर देना प्रभाष जी..." (चर्चा हिन्दी चिट्ठों की)

अंक : 72
चर्चाकार : डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" 
ज़ाल-जगत के सभी हिन्दी-चिट्ठाकारों को डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" का सादर अभिवादन! 
आज की   "चर्चा हिन्दी चिट्ठों की " का आगाजअख़बार की बात पर प्रकाशित पोस्ट हमें माफ कर देना प्रभाषजी..से करता हूँ-

हमें माफ कर देना प्रभाषजी...जिस इंदौर शहर पर आप इठलाते थे और मैं इठलाता हूं। उस शहर ने अपने सपूत को अंतिम वक्‍त में याद नहीं किया। अरविंदजी ने भड़ासपर लिखा है कि शहर की गिने चुने पत्रकार ही आपकी अंतिम यात्रा में पहुंचे, ये सुनकर एक आघात सा लगा। इंदौर वही शहर है जब पिछले दिनों एक पत्रकार पर हमला हुआ था तो सभी पत्रकारसाथी सड़क पर उतर आए थे। और जब आज पत्रकारिता का वटवृक्ष जिसकी छाया तले कई लोंगों ने शीतलता का आनंद लिया है। वो वटवृक्ष नहीं रहा तो उसकी निर्जिव काया को कंधा देने तक कोई नहीं पहुंचा। इतना बेइमान तो नहीं था ये इंदौर शहर...। 
एक दूसरे के ढोल में छेद करते हुये बेसुरे हो चले - एक पते की बात, क्या होगा यदि आप नास्तिक हो जाएंगे ? या फिर निहिलिस्ट, या फिर वादी या गैरवादी? (इष्टदेव जी ने वादी और गैरवादी शब्द का इस्तेमाल....



गंगा सफाई – प्रचारतन्त्र की जरूरत  पिछली बार की तरह इस रविवार को भी बीस-बाइस लोग जुटे शिवकुटी घाट के सफाई कार्यक्रम में। इस बार अधिक व्यवस्थित कार्यक्रम हुआ। एक गढ्ढे में प्लास्टिक और अन्य कचरा डाल कर रेत से ढंका गया – आग लगाने की जरूरत उचित नहीं समझी गई। मिट्टी की मूर्तियां और पॉलीथीन की पन्नियां पुन: श्रद्धालु लोग उतने ही जोश में घाट पर फैंक गये थे। वह सब बीना और ठिकाने लगाया गया।
GULDASTE - E - SHAYARI
समंदर की लहरें मचलने लगी हैं, जीवन की रफ़्तार चलने लगी हैं, रुकते नहीं हैं कदम अब हमारे,........
शब्द-शिखर करें सबका सम्मान (बाल-कविता) - हम मानवता के पुजारी कभी न हम हिम्मत हारें आगे ही नित् बढ़ते जायें अपने प्राण देशहित वारें। हरदम रखें हौसला बुलंद देश की हम बनें तकदीर हमको कोई कम न समझे बदल ..
अंधड़ ! तांक-झांक, एस एम एस की निराली दुनियां मे! - *आप और हम, आज के इस तकनीकी युग मे कमप्युटर और ट्वीटर की दुनियां मे कुछ ज्यादा ही मस्त हो गये है। लेकिन हमारे पीछे साहित्यिक मनोरंजन की एक और दुनिया ..........
भारतीय नागरिक - Indian Citizen जिंदगी यूँ भी बसर होती है - ये भी भारत का नागरिक (वोटर है) जो डलाव से प्लास्टिक और लोहा बीनकर जीवन यापन करने की कोशिश कर रहा है. क्या इस नागरिक तक भारत के संविधान में दी हुई तमाम गार...
मानसी मेरे घर में उस बुढ़ापे के लिये कमरा नहीं - जनसता के वार्षिकी विशेषांक में मेरी एक ग़ज़ल प्रकाशित हुई है। ग़ज़ल तो पुरानी है पर ये ख़बर अच्छी लग रही है। ग़ज़ल एक बार फिर - *कहने को तो वो मुझे अपनी निशान...
नुक्कड़ इतनी कटुता...? इतनी घृणा...? - प्रभाष जोशी जी के निधन की खबर दिल्ली से प्रकाशित होने वाले एक तथाकथित राष्ट्रीय अखबार में नहीं छपी. इतनी कटुता...? इतनी घृणा...? अरे भाई, आदमी हमेशा के लिए...
Alag sa रामदेव जी, सारी सृष्टि का जन्म ही "वैसी" जगह से हुआ है तो? - वैसे ऐसे लोगों के खिलाफ़ कुछ कहना नहीं चाहिए जो लोगों की भलाई में जुटे हुए हों। पर कभी-कभी कुछ ऐसी बात हो जाती है कि मजबूर हो कर कहना ही पड़ता है। दो-एक दिन प...
गधा चिंतन एक बड़ी संज़ीदा ख़बर पढ़ी। गधे ख़त्म हो रहे हैं। कमजोर और बोझ ढोकर अपंग हो चुके गधों को अब यूथेन्सिया का इंजेक्शन देकर मारा जा रहा है। अब कुछ दिनों बाद शायद किसी गली नुकक्ड़ पर लतियाने के लिए खड़े न मिलें ! ऐसा हुआ तो कई कहावतें मर जाएंगी। गधा हमारी संस्कृति का अभिन्न अंग है। गधा खीझ और खु़शी दोनों की वज़ह बनता है। मसलन कोई आपको गधा नाम से पुकारे तो खीझ और विरोधी को पुकारे तो खु़शी। गधा हमारे अलग-अलग तरह के भावों को असरदार तरीके से उजागर करने का आसानी से उपलब्ध माध्यम है। गधे में हास्य है, ईर्ष्या है, उपहास है, सांकेतिक बुद्धिहीनता है, आंखफाड़ू आश्चर्य है, तो बदकिस्मती का ‘जिम्मेदार’ भी।.......




गूगल गणराज्य में प्रभाष जी के नायकत्व को चुनौती देने वाले तब भी पिछड़ गये थे प्रभाष जी के निधन से अब तक ब्लॉग जगत उनके शोक में संतप्त दिख रहा है . हर कोई अपने हिसाब से उन्हें याद कर रहे है . कुछ अखबारों की आलोचना में भी लगे हैं कि उनने प्रभाष जी के निधन को एकाध कॉलम में जगह देना  उचित नहीं समझा . अक्सर यही देखा है मैंने, मरने के बाद दिवंगत इंसान के प्रति लोगों की सहानुभूति बहुत बढ़ जाती है . आज ब्लॉग जगत में जो सहानुभूति की लहर चल रही है उस पर मुझे हंसी आ रही है .





रहस्मय चांदनी रात के सहयात्री रात को गौहाटी लौटते हुए रास्ते में नान्गपो से पांच किलोमीटर पहले हम लोगों की जीप खराब हो गई। कोई दस किलोमीटर पहले से ही वह धुंआ फेंकते हुए वह पहाड़ी रास्ते पर घोंघे की तरह रेंग रही थी लेकिन हममें से ज्यादातर नशे की उच्चतर अवस्था में लगातार चहक रहे थे इसलिए पता जरा देर से चला। असम और मेघालय दोनों राज्यों में उग्रवादी जितने सक्रिय थे उससे हजार गुना भयग्रस्त आती-जाती गाड़ियों के ड्राइवरों के दिमाग थे इसलिए अलग-अलग आकार प्रकार के बैग, कैमरे और स्टैंड टांगे आठ-नौ युवा लोगों के गिरोह को लिफ्ट मिलने का कोई सवाल ही नहीं था। ..........

काग़ज़ पर स्वीमिंग पूल .......नए खेल अधिकारी ने आज विभाग ज्वाइन करते ही पूरे खेल प्रांगण और विभाग का निरीक्षण किया, फिर चपरासी को सारी पुरानी फाइलें लाने का आदेश दिया........

प्रोफेसर यशपाल विज्ञान संचार के सर्वोच्च पुरस्कार "कलिंग/कलिंगा पुरस्कार " से सम्मानित! प्रोफेसर यशपाल को विज्ञान संचार के सर्वोच्च पुरस्कार "कलिंग/कलिंगा  पुरस्कार " से सम्मानित  किया गया है! कभी उडीसा के मुख्य मंत्री रहे बीजू पटनायक  जी ने एक युग द्रष्टा की भूमिका अपनाते हुए इस पुरस्कार के लिए यूनेस्को को मुक्त हस्त से १९५२ मे ही एक बड़ी धनराशि दान कर दी थी -वे भारत के कलिंग फाउनडेशन ट्रस्ट के संस्थापक थे.विज्ञान संचार के क्षेत्र में किसी बड़े योगदान के लिए कलिंगा पुरस्कार प्रावधानित हुआ था -ऐसा काम जो आम लोगों की समझ में  विज्ञान को आसान कर सके !.....

वीआईपी सुरक्षा को लेकर उठे सवाल चंडीगढ़ के पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन [पीजीआई] में गंभीर अवस्था में लाए गए एक मरीज को, वहां एक समारोह के सिलसिले में गए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की सुरक्षा के चलते प्रवेश की अनुमति न मिलने से हुई मौत की घटना के बाद सवाल उठ रहे हैं कि क्या वीआईपी सुरक्षा एक आम आदमी की जान से अधिक महत्वपूर्ण है।..........

चिठ्ठी चर्चा : सपने में आना सपना मोबाइल का रिंगटोन देता है आज रविवार का दिन है और अवकाश के दिन बड़ी मुश्किल से आपके समक्ष आज की चिठ्ठी चर्चा प्रस्तुत कर रहा हूँ . विगत सप्ताह मेरी हिंदी चिठ्ठो की चर्चा के भाई पंकज मिश्र से मोबाइल पर हिंदी चिठ्ठाजगत के संदर्भ में काफी देर तक चर्चा हुई ..............

कवि और कविता - आशा बर्मन तू कहां खो गयी कविता रानी ? पहले तो तू बड़ॆ प्यार से भावों की राह चलाती थी।

अलंकारों से सुसज्जित हो, नित रूप नये दिलाती थी ॥ 

आख़िर अपराधी कौन? काफी दिनों से तबीयत ठीक सी नहीं चल रही थी,आसपास के डॉसे दवाई लेने के बावजूद भीआराम नही पड़ रहा थातब मै अपने घर से थोड़ी दूरीपर एक दूसरे डॉसे दवाई लेने चली गयीमेरा नंबरपाँचवा था तो मेरे पास उन मरीजों को देखने केअलावा और कोई काम भी नहीं था धीरे - धीरे तीसरा नंबर आया वो आदमी अपनी२५ -३० बरस की लड़की की दवाई लेने आया था देखने में दुबलापतला सा था औरकपड़े भी मैले से ही पहने हुए थे उसकी लड़की काफी कमज़ोर सी और उसे देख करऐसा लगता था की मानो शरीर का सारा खून खत्म ही हो गया हैl दवाई लेने के बाद वो आदमी अपनी बेटी को लेकर घर जाने लगा उसने लड़की को सीढियों से आराम से उतारा फ़िर अपने कंधे पर उसे बिठाकर ऐसे ही अपने घर ले जाने लगा क्योकि वो ख़ुद भी इतना कमज़ोर था कि ........

वंदे मातरम् विरोधी दारुल उलम के लोगों भारत छोड़ो इस्‍लामिक धर्म संस्‍था दारुल उलम ने हाल में फतवा जारी कर मुस्लिमों से वंदे मातरम् न गाने को कहा है। इस संस्‍था ने योग गुरु बाबा रामदेव के योग शिबिरों में मुस्लिमों को इसलिए जाने से मना किया है कि इन शिबिरों में दिनचर्या की शुरुआत वंदे मातरम् से होती है। वंदे मातरम् पर हाल के फतवे में केंद्रीय गृहमत्री पी चिदम्‍बरम तक को घसीटा गया कि उनकी हाजिरी में यह फतवा जारी किया गया, लेकिन गृहमंत्री के कार्यालय से यह बयान आया कि चिदम्‍बरम की हाजिरी में ऐसा कोई फतवा जारी नहीं हुआ था। यह संस्‍था चाहती क्‍या है?...............

मुस्लिम कब्रिस्तान में प्रार्थना सभा भवन एवं कमरा निर्माण कार्य का भूमि पूजन, पंडित ने किए मंत्रोच्चार, शहर काजी ने पढ़ी फातेहा बदनावर.  नगर पंचायत बदनावर द्वारा जनभागीदारी से स्थानीय मुस्लिम कब्रिस्तान में लगभग 8.00 लाख की राशि से निर्मित होने वाले प्रार्थना सभा भवन एवं कमरा निर्माण कार्य का भूमि-पूजन संपन्न किया गया। भूमि-पूजन भाजपा नगर मंडल अध्यक्ष प्रजेन्द्र भट्टï, शहर काजी सलीमउल्ला एवं आलीम अख्तरअली के द्वारा किया गया। ...........

गलत टिप्पणियाँ करने के लिये हम भी बना सकते हैं नकली नाम से प्रोफाइल ... पर हम इतने नीच नहीं हैं कभी उम्दा सोच तो कभी महाशक्ति तो कभी निशाचर नाम से नकली प्रोफाइल बनाकर अपने ही ब्लॉग में अपने पक्ष वाली टिप्पणियाँ करना नीचता नहीं है तो और क्या है?

नकली प्रोफाइल बनाना कौन सा कठिन काम है? जिस किसी का नकली प्रोफाइल बनाना है उसके या उसके ब्लॉग के नाम के अंग्रेजी स्पेलिंग में थोड़ा सा परिवर्तन ही तो करना पड़ता है, और हो जाता है नया प्रोफाइल तैयार। हम भी बना सकते हैं नकली प्रोफाइल पर हम इतने नीच नहीं हैं।...........
मंगल चंद्र की यह युति धनु राशिवालों के लिए खासी बुरी और कुंभ राशिवालों के लिए खासी अच्‍छी रहेगी !! आज आसमान में मंगल और चंद्र की एक बहुत ही मजबूत स्थिति बन रही है , जिसका रात्रि साढे नौ बजे के आसपास उदय होगा और रातभर मंगल और चंद्र को आप एक साथ आकाश में चमकता देख सकते हैं। इसके कारण आज और कल का दिन युवाओं के लिए खासकर 24 वर्ष की उम्र से 36 वर्ष की उम्र तक के युवकों युवतियों के लिए बहुत ही निर्णायक होगा...............
ऐ लो कर लो बात ... आज बुध्धिमानोंकी बात : दो ज्ञानी बातें कर रहे थे ॥ पहलेने पूछा : चाँद और एफिल टावर दोनोंमेंसे दूर कौन ? दुसरेने कहा : सिंपल यार ,एफिल टावर .... पहलेने पूछा : वो कैसे ? दुसरेने कहा : छत पर जातो तो चाँद दिख जाता है एफिल टावर नहीं ...तो दूर कौन ??? 
करें सबका सम्मान (बाल-कविता)  हम मानवता के पुजारी, कभी न हम हिम्मत हारें। आगे ही नित् बढ़ते जायें, अपने प्राण देशहित वारें।......
"कुदाल से त्योरियां ~~" 
रोटियाँ उगाने के लिये
धरती के माथे पर
खींचते रहे तुम
अनगिनत लकीरें;
लहलहा उठीं रोटियाँ
अधजली; अधपकी और
पकी रोटियाँ...............
 

जान लें, हाल क्या है? अदालतों का मेरे नगर में संभाग का श्रम न्यायालय स्थापित है, उसी को औद्योगिक न्यायाधिकरण और केन्द्रीय औद्योगिक न्यायाधिकरण के भी अधिकार हैं। इस तरह एक अदालत में तीन अदालतें हैं। यहाँ लंबित मुकदमों की संख्या 4000 से अधिक है।....
खुल्ला खेल फ़र्रुखाबादी (107) : रामप्यारी - हाय….आंटीज..अंकल्स एंड दीदी लोग..या..दिस इज मी..रामप्यारी.. आज से रामप्यारी शुरु कर रही है "खुल्ला खेल फ़र्रुखाबादी" यानि नो माडरेशन..नथिंग...सबके सामने ...
मेरी भावनायें...एक व्यक्तित्व - एक व्यक्तित्व , एक शक्स .... मैं मिली, और मुझे लगा कि अगर मैंने इसे अपनी कलम में पनाह नहीं दी तो मेरे लेखन के साथ न्याय नहीं होगा ! नाम ? नाम पहचान का पहल...
दीवाने की कब्र खुदी तो-गज़ल 
लोग उसे समझाने निकले,  
पत्थर से टकराने निकले। 
बात हुई थी दिल से दिल की
गलियों में अफ़साने निकले।।...........

और अन्त में डॉ. श्रीमती अजित गुप्ता की पहली पोस्ट की चर्चा-
सोने का पिंजर आठवें विश्व हिन्दी सम्मेलन में भाग लेने का सुअवसर प्राप्त हुआ। अमेरिका को देखने से अधिक उसे समझने की चाह थी। मेरे घर से, मेरे परिवार से, मेरे आस-पड़ोस से, मेरे इष्ट-मित्रों के बच्चे वहाँ रह रहे थे। उनकी अमेरिका के प्रति ललक और भारत के प्रति दुराव देखकर मन में एक पीड़ा होती थी और एक जिज्ञासा का भाव भी जागृत होता था कि आखिर ऐसा क्या है अमेरिका में? क्यों बच्चे उसे दिखाना चाहते हैं? क्यों वे अपना जीवन भारत के जीवन से श्रेष्ठ मान रहे हैं? ऐसा क्या कारण है जिसके कारण वे सब कुछ भूल गए हैं! उनका माँ के प्रति प्रेम का झरना किसने सुखा दिया? वे कैसे अपना कर्तव्य भूल गए?
अब आज्ञा दीजिये!
अंत  में इतना ही कहूँगा ...आज का अंक आपको कैसा लगा?  अपनी राय बेबाक टिप्पणियों में दीजिये......
कल फिर आपकी सेवा में हमारे कोई साथी मजेदार चर्चाएँ लेकर उपस्थित होंगे.............................................
धन्यवाद ....नमस्कार ...........

20 comments:

M VERMA said...

बहुत अच्छा और संतुलित

Ratan Singh Shekhawat said...

बढ़िया चर्चा :)

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

आज की चर्चा में 27 चिट्ठाकारों की प्रविष्टियों को
शामिल किया गया है।
सभी को बहुत-बहुत बधाई!

हिमांशु । Himanshu said...

बहुत से प्रविष्टियों के लिंक मिले । चर्चा सुन्दर है । आभार ।

Suman said...

nice

MANOJ KUMAR said...

आज का अंक आपको कैसा लगा? अपनी राय बेबाक टिप्पणियों में दीजिये...... mera blog nahi tha is liye ... ok otherwise ati-uttam...sarvottam.

Babli said...

बहुत ही बढ़िया चर्चा रहा! बहुत बहुत शुक्रिया मेरी पोस्ट को शामिल करने के लिए!

संगीता पुरी said...

बहुत सुंदर चर्चा !!

श्याम सखा 'श्याम' said...

नया पन मिला यहां आकर -सार्थक प्रयोग बधाई- जय हिन्द-जय हिन्दी

रश्मि प्रभा... said...

khuli charcha.......katron me

अल्पना वर्मा said...

बढ़िया चर्चा,धन्‍यवाद .

rashmi ravija said...

अच्छी चर्चा रही...हमेशा की तरह कई महत्वपूर्ण चिट्ठों की जानकारी के साथ

शिवम् मिश्रा said...

शास्त्री जी, मेरे ब्लॉग को चर्चा में शामिल करने का बहुत बहुत धन्यवाद और आभार !
युही लगे रहिये !
शुभकामनाएं !

ताऊ रामपुरिया said...

बहुत सुंदर चर्चा शाश्त्रीजी, शुभकामनाएं.

रामराम.

पी.सी.गोदियाल said...

विस्तृत और बढ़िया चर्चा, शास्त्री जी !

pankaj vyas said...

charcha me shamil kiya, aapka abhar...

अजय कुमार झा said...

बहुत ही सुंदर और अद्भुत चर्चा रही शास्त्री जी ..

'अदा' said...

charcha acchi rahi..
badhai..

राज भाटिय़ा said...

अजी बहुत ही सुंदर चर्चा आप का धन्यवाद

प्रवीण त्रिवेदी ╬ PRAVEEN TRIVEDI said...

चर्चा सुन्दर है । आभार ।

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