Wednesday, November 18, 2009

"कालकूट विष भी गले का आभूषण बन गया" (चर्चा हिन्दी चिट्ठों की)

अंक : 80
ज़ाल-जगत के सभी हिन्दी-चिट्ठाकारों को डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" का सादर अभिवादन!
आज की "चर्चा हिन्दी चिट्ठों की " की शुरूआत करते है-
आलोक स्तम्भ कालकूट विष भी गले का आभूषण बन गया - अनुचित वस्तु बड़ों को उचित हो जाती है और उचित वस्तु नीचों को दूषित हो जाती है । जैसे अमृत से राहू की मृत्यु हुई और विषपान से भगवान् शंकर क...
तसुव्वरात में लाऊँ तेरा सलोना बदन 
कहो मै कैसे भुलाऊँ तेरा सलोना बदन
 
मगन यूँ होके तुझे मैं निहारूँ, मेरे बलम
 
पलक-झपक मैं छुपाऊँ तेरा सलोना बदन...

उड़न तश्तरी .... काश!! आशा पर आकाश के बदले देश टिका होता!!
- काश!! आशा पर आकाश के बदले देश टिका होता!!
वैसे सही मायने में, टिका तो आशा पर ही है. जिन्दगी की दृष्टावलि उतनी हसीन नहीं होती जितनी फिल्मों में दिखती है. ...
.सीएम ओलंपिक संघ के अध्यक्ष ! प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के सामने आज अचानक प्रदेश ओलंपिक संघ का अध्यक्ष बनने का प्रस्ताव रखा गया जिसे मुख्यमंत्री ने एक तरह से स्वीकार कर लिया है और ऐसा माना जा रहा है कि बहुत जल्द ही उनको ओलंपिक संघ का अध्यक्ष बना दिया जाएगा ताकि छत्तीसगढ़ में २०१३ में होने वाले राष्ट्रीय खेल उनकी अगुवाई में हो। इसके पहले कल ही श्रीमती वीणा सिंह को वालीबॉल संघ का अध्यक्ष बनाने के साथ ओलंपिक संघ का भी अध्यक्ष बनाए जाने की बात खेल संघों से जुड़े...... 
और इस तरह राजा को भी विश्‍वास हो गया कि भूत होते हैं !! एक गांव में दो गरीब पति पत्‍नी रहा करते थे , किसी तरह दो जून का रूखा सूखा खाना जुटा पाते। पर्व त्‍यौहारों में भी पकवान बना पाना मुश्किल होता। अगल बगल के घरों से कभी कुछ मिल जाता तो खाकर संतोष कर लेते थे। पर एक दिन किसी के घर से मिले पुए को खाकर उनका लालच काफी बढ गया, इसलिए उन्‍होने घर पर ही पुए बनाने की सोंची। सामग्री की व्‍यवस्‍था में कई दिनों तक दोनो ने पूरी ताकत झोंकी ,
मिलते रहिये मिलाते रहिये
लोगों से बतियाते रहिये
शायद बात कोई बन जाये !

देखते रहिये दिखाते रहिये
सपनों को चमकाते रहिये
शायद कोई सच हो जाये !


सालिम अली-बर्ड मैन ऑफ इंडिया 10 साल का एक बालक दिन रात चिडियों को निहारा करता और उनकी गतिविधियों को नोट करता। एक दिन उस बालक ने एक अनोखी रंगीन गौरैया को देख...

उत्तर प्रदेश के दो बड़े नेता मुलायम सिंह और कल्याण सिंह जिस तरह यकायक
एक-दूसरे के खिलाफ खड़े हो गए
उससे उनकी राजनीतिक अवसरवादिता का ही पता चलता है। अब इसमे...

आपातकालीन गर्भनिरोधक क्या कोई आपदा तो नहीं लाएगा? - गर्भनिरोधक की हर खोज ने स्त्री को कुछ और मुक्ति दी है, कुछ और विकल्प दिए हैं। जीवन जीने की शैली का चुनाव, बच्चे हों या न हों, हों तो कितने व कब, यह सब चुनाव ...
ज़िन्दगी---ज़िन्दगी के रंग कैसे- कैसे - उजासों की कतरन सांसों की धड़कन लम्हों की सिहरन अरमानों की थिरकन भोर की गुनगुन ज़िन्दगी को जीवंत करती सांझ का पतझड़ रात का खंडहर अहसासों का अकाल चेहरों का बांझ..

विरेन डंगवाल जी के नये कविता संग्रह
`स्याही ताल´ का लोकापर्ण नैनीताल फिल्म फैस्टविल में हुआ था।
प्रस्तुत है उसी संग्रह से एक कविता *प्रेम के **बारे **में...
Alag sa दादा जी, अब भाग लो (: - बहुत बार ऐसा हुआ है कि अकेले बैठे यादों की जुगाली करते अचानक कोई बात याद आ जाती है और बरबस हंसी फूट पड़ती है। ऐसा ही एक वाक्या है जो याद आते ही हंसी ला देता..  
बगीची
जब चूहे बोलेंगे खूब राज खोलेंगे (अविनाश वाचस्‍पति) - चूहे ने कंप्यूटर के आविष्कार के साथ ही माउस के नाम से कंप्यूटर नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया। इस पर इनका कब्जा अब भी बरकरार है। इस क्षेत्र में उनकी थोड़ी-स...
Bikhare sitare...! adhyaay 2..chhoot gayaa wo angnaa... - ( पिछली कड़ी: मेरा..मतलब पूजा तमन्ना का ब्याह गौरव के साथ हो गया....बेलगाम के छोटा से गाँव से निकाल मै लखनऊ पहुँच गयी...अभी गुह प्रवेश ही हो रहा था ,क...
अंधड़ !    सोच का दायरा ! - *आप लोगो ने भी अकसर यह सुना होगा कि फलां-फलां महत्वपूर्ण प्रोजक्ट मे तकनीकी जटिलताओ के कारण फलां फलां देश ने चीन, जापान, अमेरिका और युरोप के इन्जीनियरों की...

हाय….आंटीज..अंकल्स एंड दीदी लोग..या..दिस इज मी..रामप्यारी..
आज के इस खुल्ला खेल फ़र्रुखाबादी मे रामप्यारी और डाक्टर झटका आपका हार्दिक स्वागत करते है. और ...
रचनाकारमहावीर सरन जैन का आलेख : कबीर की साधना - [image: clip_image002] मध्‍य युग ने मोक्ष का अतिक्रमण कर, भक्‍ति की स्‍थापना की। भक्‍ति का प्रमाण एवं प्रतिमान बना - समस्‍त प्राणियों के साथ तादात्‍मय। ज...
- कविता भेजी हैं नासा ने मंगल से कुछ तस्वीरें कहा मंगल पर कभी हुया करती थी नहरें शायद कभी टकराया था केतू कोई और कर दिया था मंगल के दिल पर छेद् मगर मैं जान...
17 नवम्बर 2009 को राजस्थान पत्रिका,
जयपुर संस्करण के नियमित स्तंभ
’ब्लौग चंक’ में आरम्भ की एक पोस्ट
जाने क्यों जैसे-जैसे अपनी सरजमीं पर, छुट्टियों के लिए ही सही, वापस आने के दिन नज़दीक आ रहे हैं.... अपनी मिट्टी की याद उतनी ही दिल में गहरे तक उतरती जा .....



  • और मेरे हृदय की धक्-धक् पूछती है– वह कौन ....
    Author: कविता वाचक्नवी Kavita Vachaknavee |
    शब्दों का सफर मांझे की सुताई - [image: 2003102700040101] [image: 2003102700040102] मांझा की मज़बूती के बिना न तो पतंग ऊंची उड़ेगी और न ही तगड़े पेच लड़ेंगे। कि सी कार्य में सिद्धहस्त ...


    • नवोत्पल साहित्यिक मंच एक बात पूछना वह कभी नहीं भूलती...‘ कल आओगे न..!!! - [image: चिट्ठाजगत अधिकृत कड़ी] [नवोत्पल के ब्लॉग-संस्करण का शुभारम्भ कर रहा हूँ, अभिनव उपाध्याय जी की कविता से. दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविध्यालय में...
      झींगुर दास जब मैंने इस ब्लॉग पर काम करती मां को पोस्ट किया था, तभी से मेरे जेहन में यह था कि लोग झींगुर दास से भी मिलना चाहेंगे। उस रचना में बार-बार झींगुर दास का जिक्र हो रहा था। उस रचना की जो भी प्रतिक्रियाएं मिलीं, श्री गिरिजेश राव जी ने झींगुर दास की वर्तमान स्थिति के बेरे में जानना चाहा था। तो लीजिए मैं आज हाजिर हूं आपके समक्ष आज के झींगुर दास के साथ।--- मनोज कुमार लिए तीन पुश्त,उस मालिक की देहरी के
      मालिक भी परलोक गए
      बच्चे उनके परदेश में हैं
      अब झींगुर करेगा क्या,





    • शब्द-शिखर
      राजस्थान पत्रिका में 'शब्द-शिखर' की चर्चा - *''शब्द शिखर'' पर 7 नवम्बर 2009 को प्रस्तुत बाल-कविता 'करें सबका सम्मान' को प्रतिष्ठित हिन्दी दैनिक पत्र 'राजस्थान पत्रिका', जयपुर संस्करण के नियमित स्तंभ...
      कुमाउँनी चेली आजकल ज़रा बीमार हूँ - *इधर बहुत दिनों बाद बाज़ार जाना हुआ| जब से लौट कर आई हूँ, सांस लेने में बहुत तकलीफ हो रही है| सीने में भारीपन सा महसूस होता है, हर समय किसी अनहोनी की आशंक...

    • मुक्ताकाश....साहित्याकाश के शब्द-शिल्पी : बेनीपुरी - [तीसरी किस्त] पटना के श्रीकृष्ण नगर के २३ संख्यक मकान में हमारा निवास था और बेनीपुरीजी का भरा-पूरा परिवार १०८ संख्यक मकान में रहता था। इन दोनों संख्याओं के...
    • उनसे बेहतर उनकी यादे जो ख्वाबो में आती है मस्त फिजाओ तुम मुझे उनकी याद न दिलाओ
    • मेरे इस तड़फते दिल को तुम और न तडफाओ.......

      तुम्हें देखा तो वह लडकी याद आई जो फूलोंवाली फ्रॉक पहन
      बसंत का संदेशा देती थी आम्र मंजरों में कोयल की कूक बन मुखरित होती थी जेठ की दोपहरी में आसाढ़ के गीत...
      खूब लड़ी मर्दानी ... ... . बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी। खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।।  क्या आपको इन पंक्तियों में कोई त्रुटि दिखाई दे रही है?




      यहां वीरभद्र प्रकट हुआ था ----- वीरभद्रेश्वर मंदिर (ऋषिकेश)पिछली पोस्ट में मैने ऋषिकेश के वीरभ्रद्र क्षेत्र का इतिहास बताया था पर इस पोस्ट में यह बता दू कि क्यो इस क्षेत्र को वीरभद्र के नाम से जाना जाता है।
      एन सी घोष ने सन् 1973-75 के मध्य यहां ऐतिहासिक खुदाई की थी ,उससे पता चलता है कि इस स्थान पर 100 ई0 से लेकर 800 ई0  के बीच मानव सभ्यता व संस्कृति विघमान थी । खुदाई से  प्राप्त  वस्तुओ से पता चला कि वीर भद्र नामक नगर एक ऐतिहासिक एंव पौराणिक था । 
      जिस पर भद्र मित्रस्य द्रोणी घाटे खुदा हूआ था । जिसका तात्पर्य द्रोणी दून की ओर से इस घाट का रक्षक भद्रमित्र था । यहां का वीरभद्रेश्वर  मंदिर उत्तर कुषाण कालीन इण्टिकाओ से बना हुआ है जिसके भद्रपीठ पर शिवलिंग है । अठ्ठारह पुराणों में वर्णित कथा के अनुसार स्वंय वीरभद्र ने शिवलिग की स्थापना की थी ।
      वीरभद्र शिव का भैरव स्वरूप था जिसकी उत्पत्ति दक्ष यज्ञ के विध्वंस के फलस्वरूप हई  ।जिसे स्वंय शिव ने अपनी जटा पटक कर किया था ।इसके पीछे जो कथा मिलती है उसके अनुसार जब प्रजापति दक्षने महायज्ञ किया तो शिव को नही बुलाया ..








      अंत में इतना ही कहूँगा ...आज का अंक आपको कैसा लगा? अपनी राय बेबाक टिप्पणियों में दीजिये......
      कल फिर आपकी सेवा में हमारे कोई साथी कुछ और चिट्ठों की चर्चाएँ लेकर उपस्थित होंगे...........................अब आज्ञा दीजिये! नमस्कार !!





















































21 comments:

M VERMA said...

बहुत अच्छी चर्चा

Dipak 'Mashal' said...

शास्त्री जी, पीली पृष्ठभूमि, सुन्दर चित्र, रंगबिरंगी पंक्तियों और खूबसूरत चर्चा ने आज की पोस्ट को और भी जानदार बना दिया है.. आप की कल्पना की सराहना करनी होगी.. मसि-कागद को जगह देने के लिए शुक्रिया भी..
जय हिंद...

AlbelaKhatri.com said...

बहुत अच्छी चर्चा रही शास्त्री जी !
अभिनन्दन !

Ratan Singh Shekhawat said...

बहुत अच्छी चर्चा

MANOJ KUMAR said...

सार्थक शब्दों के साथ अच्छी चर्चा, अभिनंदन।

Udan Tashtari said...

विस्तृत शानदार चर्चा, शास्त्री जी!!

संगीता पुरी said...

विस्‍तार से सुंदर चर्चा .. अच्‍छे अच्‍छे बहुत सारे लिंक्स मिले !!

शरद कोकास said...

बहुत अच्छी चर्चा लगी यह शास्त्री जी ..कम जगह मे अधिक ब्लॉग्स का समावेश किया है आपने ।

हिमांशु । Himanshu said...

खूबसूरत चर्चा । सराहनीय़ । आभार ।

ताऊ रामपुरिया said...

शाश्त्रीजी, बडी ही लाजवाब चर्चा है. शुभकामनाएं.

रामराम.

ललित शर्मा said...

बहुत अच्छी चर्चा लगी यह शास्त्री जी ..कम जगह मे अधिक ब्लॉग्स का समावेश किया है आपने ।

श्रीश पाठक 'प्रखर' said...

सम्यक चर्चा....

दर्पण साह "दर्शन" said...

Adarniya Pankaj ji evm Dr. saa'b Idhar kuch dino se office ka net 'restricted' hone aur vyarth ki vyastata honme ke karan nahi aa pa raha tha...

...niyamat ab bhi nahi ho paaonga...
Asha hai kshama kareinge.

links abhi nahi dekhe.
fursat milte hi dekhta hoon....

Aapka
Darpan Sah 'Darshan'

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ said...

चर्चा के बहाने गागर में सागर भर दिया है। बधाई।

वन्दना said...

hamesha ki tarah sargarbhit aur shandar charcha rahi hai...........badhayi

दिगम्बर नासवा said...

अच्छी चर्चा रही शास्त्री जी .......

शिवम् मिश्रा said...

शास्त्री जी,विस्तृत शानदार चर्चा !!

एक बार फिर मेरे ब्लॉग कों चर्चा में स्थान देने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद !

Arvind Mishra said...

सुन्दर संकलन !

समयचक्र said...

बहुत अच्छी चर्चा,चर्चा में स्थान देने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद...

राज भाटिय़ा said...

शास्त्री जी आज की चर्चा बहुत चंगी लगी जी, बहुत सुंदर.
धन्यवाद

अम्बरीश अम्बुज said...

acchi charcha.. kai naye blog tak pahuncha..

पसंद आया ? तो दबाईये ना !

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