Tuesday, November 10, 2009

"शुरुवात: एक प्रयास" (चर्चा हिन्दी चिट्ठों की)

अंक : 73
ज़ाल-जगत के सभी हिन्दी-चिट्ठाकारों को डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" का सादर अभिवादन! 
"चर्चा हिन्दी चिट्ठों की " के डैश-बोर्ड पर आज कोई पोस्ट कतार में नही लगी थी। इसलिए उपस्थिति लगाने के लिए आपकी सेवा मे हाजिर हो गया हूँ!
आज की   "चर्चा हिन्दी चिट्ठों की " का आगाज हिन्दी चिट्ठाकारी के अग्र-दूत समीर लाल (उड़न-तश्तरी) की पहली और अद्यतन पोस्ट की चर्चा प्रस्तुत की जा रही है- 


(उड़न-तश्तरी) की पहली पोस्टः



कई ब्लाग हिंदी मे देख कर मन किया कि मेरा भी एक ब्लाग होना चाहिये. अब लिखूँ क्या...सोचा जहाँ तक मन की उडान जायेगी, वहाँ तक लिखता जाऊँगा और नाम रखा उडन तश्तरी. बस लिखने लगा अपने एक मित्र के बारे मे और लिख रहा था लिख रहा था... मगर ज्यादा ही लम्बा लिख गया, अब तो मेरी लेखनी आपको पढना ही पडेगी.प्रस्तुतकर्ता Udan Tashtari पर 3/02/2006 08:42:00 पूर्वाह्न 

(उड़न-तश्तरी) की अद्यतन पोस्टः

मंगलवार, नवंबर 10, 2009

चिट्ठाचर्चा और मैं..

कल रात वापस लौट आये दो दिवसीय मॉन्ट्रियल यात्रा से. कोई विशेष उल्लेखनीय कुछ भी नहीं. चाहें तो कहानी बनायें मगर अभी उद्देश्य कुछ और ही है.

शुक्रवार को मॉन्ट्रियल जाना पड़ा. वही ५.३० घंटे में ६०० किमी पूरा करने की आदत जिसमें आधे घंटे की कॉफी ब्रेक भी ली गई. एक बार आदत हो जाये तो कोई विशेष प्रयास नहीं करने होते. गाड़ी चालन में टोरंटो से मॉन्ट्रियल और वापसी भी आदत का हिस्सा सा ही बन गई है. बिना प्रयास ५.३० घंटे में जाना और उतने ही घंटे में वापस......

अब आज्ञा दीजिये!
अंत  में इतना ही कहूँगा ...आज का अंक आपको कैसा लगा? 
 अपनी राय बेबाक टिप्पणियों में दीजिये......
कल फिर आपकी सेवा में हमारे कोई साथी मजेदार चर्चाएँ लेकर उपस्थित होंगे.............................................
धन्यवाद ....नमस्कार ...........

24 comments:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

हिन्दी चिट्ठाकारी के नरेश समीर लाल जी को बधाई!

Babli said...

समीर लाल जी आपको बहुत बहुत बधाइयाँ!

Suman said...

nice

Arvind Mishra said...

अरे समीर लाल से शुरू हुए और समीर लाल पर ही खत्म !

Udan Tashtari said...

हा हा!! ये त मुन्ना भाई एम बी बी एस का कमरा हो गया...शुर हुआ नहीं कि खत्म!!

बस सिर्फ हम!! अकेले कैसे कटेगी हाय यह तन्हाई!!! :)

प्रवीण त्रिवेदी ╬ PRAVEEN TRIVEDI said...

सुन्दर चर्चा!

ताऊ रामपुरिया said...

ये बहुत बढिया किया शाश्त्रीजी, गैरहाजिरी नही लगने दी. आपने तो वही काम कर दिया कि गणेश जी ने पार्वती जी की परिक्रमा करके धरती की परिक्रमा जीत ली. सही है समीरजी पर शुरु करके वहीं खत्म. यानि संपुर्ण चर्चा कर दी.:) बहुत बधाई.

रामराम.

अजय कुमार झा said...

कौन कहता है जी आप अकेले हैं ...आप तो हमेशा डबले रहते हैं जी ..बधाई लिया जाए

Dipak 'Mashal' said...

Bahut bahut badhai Sam uncle.. arrrrrrrrrrr sorry Sameer ji... :)
jai Hind

Meenu Khare said...

समीर लाल जी को बहुत बहुत बधाइयाँ!

गिरिजेश राव said...

जे तो कोई बात न हुई।
एक से शुरू और उसी पर खत्म!
हम त अब तब्बे आइब जब खाली हमरे चरचा होई, हम का केहू से कम बानीं ?
;)

पी.सी.गोदियाल said...

शास्त्री जी, समीर जी की पहली पोस्ट से परिचित कराने के लिए आपका शुक्रिया, तो क्या ये जनाव शुरू से ही इतना सुन्दर लिखने लगे थे ?

MANOJ KUMAR said...

badhai.

दिगम्बर नासवा said...

शुक्रिया शास्त्री जी .......... समीर भाई की पहली पोस्ट पढ़ कर .........

अविनाश वाचस्पति said...

लघुता में प्रभुता है
उड़नतश्‍तरी जी की
पहली पोस्‍ट की दूरी
को लघुता प्रदान की
आभार।

राज भाटिय़ा said...

समीर जी आपको बहुत बहुत बधाइयाँ!

AlbelaKhatri.com said...

jai ho

अम्बरीश अम्बुज said...

badhiya laga...

P.N.SAXENA said...

सबसे बड़े ब्लॉगर की पोस्ट पढवाने के लिए आभार!

ममता राज said...

SAMEER LAL JI KO BADHAI.

http:badnam.blogspot.com said...

समीर जी शुरूआत से आज तक का सफर आपका प्रेरणा देने वाला है!

http://bhartimayank.blogspot.com said...

समीर भइया!
बहुत-बहुत शुभकामनाएँ!

डॉ. इन्द्र देव माहर said...

Sameer lal ji !
Aap likhate rahe Aur ham padhate rahen.
congratulation.

अल्पना वर्मा said...

Sameer ji ki pahali post padhwayee aap ne.
bahut bahut abhaar.
blogging mein ek lamba aur safal safar tay karne hetu bahut bahut badhaaayeeyan.

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