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Wednesday, March 24, 2010

आज सान्ध्यकालीन विशेष चर्चा हिंदी चिट्ठों की------------------------ललित शर्मा

भगवान श्री राम का जन्मदिवस धुम-धाम से मनाया गया,आज कुछ चिट्ठों की फ़टाफ़ट चर्चा करते हैं, अब मै ललित शर्मा आपको ले चलता हुँ आज की चर्चा हिंदी चिट्ठों की पर---
सबसे पहले चर्चा करते हैं ताउ डॉट कॉम पर जहां वैशाखनंदन सम्मान प्रतियोगिता प्रारंभ हो चुकी है। आज प्रकाशित किया गया हैवैशाखनंदन सम्मान प्रतियोगिता में : श्री ललित शर्मा हमने वैशाखनंदन सम्मान पुरस्कारों की घोषणा की थी. जिसके लिये हमें बहुत से मित्रों की प्रविष्टियां प्राप्त हुई हैं. जिनकी भी रचनाएं शामिल की गई हैं उन्हें व्यक्तिगत रूप से सूचित कर दिया गया है. जैसा की हमने बताया था कि शामिल प्रविष्टियों का प्रकाशन ताऊजी डाट काम पर किया जायेगा. उसी घोषणा अनुसार आज से हम प्रतियोगिता में शामिल रचनाओं का प्रकाशन शुरु कर रहे हैं.-----
इधर गगन शर्मा जी कह रहे हैं कि सचिन इसीलिए कुछ अलग सा है.आई पी एल नामक क्रिकेट के तमाशे में सम्मिलित टीमों के नामों पर गौर किया है आपने? चलिए मान लेते हैं कि ऐसी हुल्लड़ भरी नौटंकियों में भाग लेना है तो नाम भी ऐसे, वैसे, कैसे, कैसे ही होंगे, लोगों को रोमांचित...काव्य मंजुषा पर अदा जी कह रही हैं 'नीम हकीम ख़तरा-ए-जान' .....शेफाली जी पास होऊँगी या नहीं..?? * * *एक कहावत पढ़ी थी... * *'नीम **हक़ीम** ख़तरा-ए-जान' *बचपन से इसका मतलब यही जाना कि जिसे आधा ज्ञान हो उससे खतरा होता है, अंतरजाल खंगाल डाला तो कहीं मिला: नीम हक़ीम ख़तरा जान----
मनोज जी कह रहे हैं देसिल बयना 23 : मार खाई पीठिया -- करण समस्तीपुरी जय हो ! जय हो !! भये प्रकट किरपाला..... दीन-दयाला कौसल्या हितकारी........... !!! बधाई हो रामनवमी का त्यौहार !!! अरे राम नवमी से याद आया......... ओह ! कहाँ गया उ दिन ! हाथ-पैर से होली का... रानी विशाल जी एक कविता लेकर आई हैं वो पल.....अब भी मेरे पास है कांपते हाथों से मेरे हाथों को लेकर हाथ में जो चाहते थे कहना तुम शब्द वो भी बह रहे थे समय की तरह आँसूओं के साथ....!! भीगते जज्बातों का वो पल.....जब छुपाई थी अपनी आँखों की नमी एक दूजे से हमने,...
यहां पर देखिए वरिष्ठ आर्टिस्ट श्याम निनोरिया कृत थम्ब इम्प्रेशन चित्र !! *आर्ट गैलरी पर प्रस्तुत है रायपुर वरिष्ठ के आर्टिस्ट श्याम निनोरिया जी के द्वारा निर्मित ग्रीटिंग कार्ड* श्री श्याम निनोरिया जी द्वारा निर्मित थम्प इम्प्रेशन पेंटिंग----अग्रदुत पर विष्णु सिन्हा जी लिख रहे हैं कनू सान्याल की आत्महत्या नक्सलियों को इशारा है कि उनका रास्ता गलत है नक्सली आंदोलन के जनक कनू सान्याल ने फांसी के फंदे पर लटकर अपनी इहलीला समाप्त कर ली। 78 वर्षीय कनू सान्याल वैसे तो बुढ़ापे के रोगों से पीडि़त थे लेकिन आत्महत्या उनके सिद्घांतों पर प्रश्रचिन्ह तो लगाता ही है..
कुसुम ठाकुर जी ने एक बहुत ही अच्छी कविता लिखी है यह सोच मैं हूँ हैरान " यह सोच मैं हूँ हैरान " बहुत कठिन है साथ में हँसना , और किसी की खातिर रोना , सँग सँग जीवन पथ पर फिर भी , चलना है आसान , यह सोच मैं हूँ हैरान । महल से न कम घर होगा , क्या सोची थी यह कब होगा ? जीवन की स...---कुमारेंद्र सेंगरज जी कह रहे हैं अबे यार! कल एक 'डे' सूना-सूना निकल गया ! ! !गनपत- क्या यार! क्यों शान्त-शान्त से बैठे हो? मुँहफट- कुछ नहीं यार! कल एक डे निकल गया और हमें कानों-कान खबर भी नहीं हो सकी। गनपत- कौन सा डे, बे? हम तो सारे के सारे डे, दिवस, त्यौहार अपनी डायरी में न...
नवी्न प्रकाश ले आए हैं----नया Mozilla Firefox 3.6.2 Finalसबसे अच्छे इंटरनेट ब्राउजर का नया संस्करण Mozilla Firefox 3.6.2 Final सबसे तेज ज्यादा सुरक्षित और ज्यादा भरोसेमंद । आपके कंप्यूटर के लिए एक बेहद जरुरी औजार । यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करें । पोर्टेबल वर्जन...--नुक्कड़ पर लिम्टी खरे जी कह रहे हैं--हमारा पहला अद्भुत और अकल्पनीय अनुभव है पाड्कास्ट *हमारा पहला अद्भुत और अकल्पनीय अनुभव है पाड्कास्ट * ** * इंटरनेट का इन्द्रजाल समझना बहुत ही मुश्किल है। इंटर नेट पर जहां तक आप सोच सकते हैं आप उससे कहीं आगे जा सकते हैं। इसके साथ ही साथ ब्लाग ने तो धूम मचा ...
विजय प्रकाश सिंह जी ले आए हैं राम - कृपानिधान ( राम नवमी के अवसर पर - एक दॄष्टिकोण ) प्रभु श्री राम पर कितना कुछ सब को पता है और कितना लिखा - पढ़ा जाता है इसे शब्दों मे बांधना एक साधारण मनुष्य के लिए अकल्पनीय है । दिन भर जाने अनजाने हम राम का स्मरण करते हैं । ऐसे मे मेरे जैसे एक साधारण व्य...
गोदियाल जी बता रहे हैं कूड़ा-करकट ! सर्वप्रथम सभी मित्रों को रामनवमी की हार्दिक शुभकामनाये ! * तजुर्बों से ही दुनिया सीखती है अक्सर, बड़े इत्मिनान से उन्होंने हमें बताई ये बात ! और हम थे कि हमें यह भी मालूम न था कि रात के बाद दिन निकलता है या...
अवधिया जी बता रहे हैं उपजा जब ग्याना प्रभु मुसकाना ... प्रभु की यह मुस्कान ही तो माया है रामनवमी पर विशेष राम ... दो अक्षरों का एक ऐसा नाम जिस पर संसार का प्रत्येक हिन्दू की अथाह श्रद्धा है। राम हिन्दुओं के आराध्य देव हैं और राम का नाम उनके लिये भवसागर से मुक्ति देने वाला मन्त्र है। गोस्वामी... कुलवंत हैप्पी बता रहे हैं-भारतीय की जान की कीमत ***(बाल-बुद्धि भारतियों पर कवि का कटाक्ष)* अरे - समझौता गाड़ी की मौतों पर - क्या आंसू बहाना था उनको तो - पाकिस्तान नाम के जहन्नुम में ही - जाना था मरने ही जा रहे थे - लाहौर, करांची - या पेशावर में मरते औ...
सजंय भास्कर जी कह रहे हैं--आजादी के इन महानायकों को हम भी याद करते हैं मेरा रंग दे बसंती चोला, माहे रंग दे। इन लाइनों को सुनने के बाद देश पर जान कुर्बान करने वाले भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरू की यादें ताजा हो जाती हैं। दो साल पहले भी एक फिल्म रंग दे बसंती के जरिए देश के युवा... दीपक मशाल लेकर आए हैं एक लघुकथा पूजा के लिए सुबह मुँहअँधेरे उठ गया था वो, धरती पर पाँव रखने से पहले दोनों हाथों की हथेलियों के दर्शन कर प्रातःस्मरण मंत्र गाया 'कराग्रे बसते लक्ष्मी.. कर मध्ये सरस्वती, कर मूले तु.....'. पिछली रात देर से ...
आरंभ पर संजीव तिवारी कह रहे हैं कैसे बने हमारी भाषाई पहचान? स्‍थानीय भाषा और बोली में ब्‍लाग संचालन को प्रोत्‍साहन देने के लिए समय समय पर पाठकों की टिप्‍पणियां और मेल प्राप्‍त होते रहते हैं. हमारे छत्‍तीसढ़ के एवं हिन्‍दी ब्‍लाग जगत के पूर्णसक्रिय  प्रख्‍यात मूंछों वाले ब्‍लागर ललित शर्मा जी नें हमें पिछले दिनों बतलाया था कि इस प्रकार के मेल उन्‍हें भी प्राप्‍त होते रहे हैं  दिनेश राय द्विवेदी जी लेकर आए हैं वे सूरतें इलाही इस देश बसतियाँ हैं -महेन्द्र नेह वे सूरतें इलाही किस देश बसतियाँ हैं, अब जिनके देखने को आँखें तरसतियाँ हैं* **यह मीर तकी 'मीर' का वह मशहूर शैर है जो अक्सर शहीद भगतसिंह और उन के साथियों के होठों पर रहा करता था।

अब चलते चलते कार्टुनो पर नजर डालिए




अब देते हैं विराम आपको रामनवमी की शुभकामनाएं और ललित शर्मा का राम-राम

Wednesday, March 17, 2010

तबदीलियाँ तो वक्त का पहला उसुल है----शक्ति रुपेण नारी-- "चर्चा हिंदी चिट्ठों की"--ललित शर्मा

आज दिन भर हंगामा था मायावती के नोटों की माला को लेकर, बस इतने सारे नोट एक जगह पर देखने को पहली बार मिले वह भी चित्र में। अब इनसे गरीबों का विकास होगा, उनके लिए रोटी कपड़ा और मकान जुटाया जाएगा। अब यह ना पुछना कि कौन से गरीब? नव रात्रि पर्व मे मातृ शक्ति स्मरण करते हुए आज चर्चा मे सिर्फ़  मातृ शक्ति को ही स्थान दिया है----पंकज मिश्रा जी छुट्टी मे हैं इस लिए मै ललित शर्मा आपको ले चलता हुँ आज की चर्चा हिन्दी चिट्ठों की पर.....................
आज की चर्चा का प्रारंभ करते हैं उदयाचल से याने अरुणाचल से--यह सुरम्य वादियों का प्रदेश प्राकृतिक सौंदर्य लिए बहुत ही भाता है। प्रकृति की छटा अद्भुत है। अरुणाचल से ममता जी ने अपने ब्लाग पर जानकारी दी है तथा कुछ सुंदर चित्र भी लगाए हैं---अरुणाचल प्रदेश जिसे land of rising sun कहते है ये तो अब आप जानते ही है।  यूँ तो अरुणाचल प्रदेश सुनकर लगता है की ये भी उत्तर पूर्व (N E ) का एक छोटा सा राज्य होगा पर ऐसा नहीं है अरुणाचल प्रदेश काफी बड़ा है। हाँ पर जनसँख्या यहां की काफी कम है (शायद 1० -११ लाख )।
डॉ अमिता नीरव अपने चिट्ठे अस्तित्व पर सृष्टि के गर्भाधान का उत्सव गुड़ी पड़वा के विषय मे रोचक जानकारी दे रही हैं--फागुन के गुजरते-गुजरते आसमान साफ हो जाता है, दिन का आँचल सुनहरा, शाम लंबी, सुरमई और रात जब बहुत उदार और उदात्त होकर उतरती है तो सिर पर तारों का थाल झिलमिलाने लगता है। होली आ धमकती है, चाहे इसे आप धर्म से जोड़े या अर्थ से... सारा मामला आखिरकार मौसम और मन पर आकर टिक जाता है। इन्हीं दिनों वसंत जैसे आसमान और जमीन के बीच होली के रंगों की दुकान सजाए बैठता है.... अपने आँगन में जब गहरी गुलाबी हो रही बोगनविलिया, पीले झूमर से लटकते अमलतास और सिंदूर-से दहकते पलाश को देखते हैं, तो लगता है कि प्रकृति गहरे-मादक रंगों से शृंगार कर हमारे मन को मौसम के साथ समरस करने में लगी हैं।
उल्लास पर मीनु खरे जी बता रही हैं माँ जगदम्बा के नौ रुप--- कुसुम ठाकुर जी ने कोहबर पर बासंती पुजा के विषय मे जानकारी दी है----चैत्र शुक्ल पक्ष प्रतिपदा से विक्रम संवत शुरू होता है जिसे हिंदू नववर्ष या नव संवत्सर भी कहते हैं । आज चैत्र शुक्ल पक्ष का प्रतिपदा है और विक्रम संवत २०६७ का आरम्भ। आज के दिन ही बासंती या चैत्र नवरात्रा आरम्भ होता है और आज के दिन ही चैत्र दुर्गा पूजा की कलश स्थापना की जाती है । नौ दिनों तक धूम धाम से चलने वाली इस दुर्गा पूजा का भी विशेष महत्व है । 
संवेदना संसार पर रंजना जी कह रही हैं--आरक्षण-रक्षण किसका? नेताजी बहुतै खिसियाये हुए हैं.आजकल जहाँ देखिये वहां चैनल सब पर चमक रहे हैं और सबको चमका रहे हैं...एलान किये हैं कि उनका लाश पर महिला आरक्षण बिल पास होगा.....नेताजी फरमाते हैं .....वे महिलाओं के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि वो तो इतना चाहते हैं कि महिला आरक्षण का लाभ पढी लिखी फ़र फ़र उडती फिरती परकटी बलकटी उन महिलाओं को नहीं ,बल्कि यह उन महिलाओं को मिले, जो नरेगा के अंतर्गत बोझा ढ़ोने का काम करती हैं,जो अल्पसंख्यक समाज से आती हैं,जो अत्यंत पिछड़े वर्ग से आती हैं..संसद में जा राज्य व्यवस्था चलाने का अधिकार उन महिलाओं को मिलना चाहिए जो शिक्षा से वंचित हैं,पारिवारिक सामाजिक अधिकार से वंचित हैं..
डॉक्टर मीना अग्रवाल अपने ब्लाग टमाटर पर कुछ मुक्तक लेकर आई हैं। पहेली हूँ मुझे सुलझा के देखो नजदीक से अब आ के देखो,समर्पण में मुझे सीता के पाओ,मुझे हर रूप में दुर्गा के देखो,मुझे इसका गिला कब तक रहेगा,कोई किस दिन मुझे चिट्ठी लिखेगा,जो सुख था प्यार की उन चिट्ठियों में,मज़ा वो दूर-भाषी सुख न देगा। ब्लाग सोचा न था पर नेहा शर्मा गुड़ी पड़वा पर एक लेख लेकर आई हैं---गुडी पडवा...चैत्र मास का पहला दिन...जो की हिंदी कैलेंडर के नए साल का पहला दिन है....इसे महाराष्ट्र में नए साल के रूप में मनाया जाता है....इस दिन को शादी,नए काम शुरू करने,गहने और नयी संपत्ति खरीदने के लिए शुभ माना जाता है..
सुधिनामा पर साधना वैद्य जी लिख रही हैं शक्ति रुपेण नारी--- अपने सभी पाठकों को नवसंवत्सर की शुभकामनायें देते हुए चैत्र मास की प्रतिपदा के दिन मैं उस आदि शक्ति को नमन करती हूँ जिसने इस संसार के सारे दुखों का नाश कर मानव मात्र को भयमुक्त किया है और उसको समस्त सुखों का वरदान दिया है ! ‘असहाय’, ‘बेचारी’, ‘दयापात्र‘, ’अबला नारी’, ‘कमज़ोर जात’,’दासी’,‘बाँदी’,‘गोली’,‘गुलाम’इन सारे नामों को सलाम !रजनी भार्गव जी रजनीगंधा पर नीम पर लिख रही हैं--कागज़ पर कुछ टेढ़ी मढ़ी लकीरें,नक्शे पर नीली, हरी लकीरें,बच्चों के मन में गढ़ गई थीं,आज लकीरें सुलग रही थीं,बनती बिगड़ती बटोही सी,भटक रही थीं।
स्पंदन पर शिखा जी ने एक कविता सजाई है अहसास---गीली सीली सी रेत में,छापते पांवों के छापों में,अक्सर यूँ गुमां होता है,तू मेरे साथ साथ चलता है, सुबह की पीली धूप जब,मेरे गालों पर पड़ती है,शांत समंदर की लहरें,जब पाँव मेरे धोती हैं, उन उठती गिरती लहरों में अब भी, मुझे अक्स तेरा दिखाई देता है। किरण राजपुरोहित जी भोर की पहली किरण पर लिख रही हैं ---ओ! चित्रकार----ओ! चित्रकार-- रंगों संग चलने वाले --आकृतियों में ढ़लने वाले--भावों के साकार--- ओ! चित्रकार-- सृष्टि से रंग चुराकर---मौन को कर उजागर--     रचते हो संसार---ओ! चित्रकार
प्रतिभा की दु्निया पर प्रतिभा जी लिख रही हैं---कौन था मोड़ पर---वो याद ही तो थी जो एक रोज मोड़ पर मिली थी. घर के मोड़ पर. वो याद ही तो थी जो गुलमोहर के पेड़ के नीचे से गुजरते हुए छूकर गयी थी. एक कच्ची सी याद उठी साइकिल की पहली सवारी वाली भी. वो भी तो याद ही थी जो हर शाम के साथ झरती थी छत पर. छत, जिसके बनने में भी हाथ लगाया था भरपूर. वो याद ही थी उन दीवारों में बसी हुई।----काव्य तरंग पर रानी विशाल जी रच रही हैं काव्य---तबदीलियाँ तो वक्त का पहला उसुल है--- चलते चलते सुनिए गीत ----- ये समा समा है ये प्यार का------
सभी को नव संवत्सर एवं नवरात्रि पर की बधाई-अब देते हैं चर्चा को विराम- सभी को मेरा राम-राम

Friday, January 15, 2010

कटी भी और लुटी भी नहीं ..कैसी किस्मत है-छुपे तीन ब्लॉगर पकड़ाये "चर्चा हिंदी चिट्ठों की"(ललित शर्मा)

कल मकर सक्रांति के पर्व के बाद आज सुबह कुछ ज्यादा ही ठंडक लिए हुए आई, साथ में सूर्य ग्रहण भी लेकर आई. पौष कृष्ण अमावश्या यानि आज १५ जनवरी को भारतीय समय के अनुसार उत्तराषाढ़ा नक्षत्र मकर राशि में कंकणाकृति सूर्य ग्रहण होगा जो सम्पूर्ण भारत में दिखाई देगा. सूर्य ग्रहण को खुली आँखों से नहीं देखने की चेतावनी वैज्ञानिकों ने जारी की है. खुली आँखों से देखने से दृष्टि खोने का भी खतरा बताया गया है. अब मैं ललित शर्मा ले चलता हूँ आपको आज की हिंदी चिट्ठों की चर्चा पर. 
 
सबसे पहले चलते हैं जिंदगी के मेले पर, यहाँ बी.एस.पावला जी एक नेट उपयोग कर्ताओं के लिए एक निहायत ही जरुरी जानकारी दे रहे हैं. आज इंटरनेट से ठगी-चोरी हो रही हैं. इनसे बचना जरुरी है.नकली पंजाब नेशनल बैंक ने यूज़र आई डी पासवर्ड जानने के लिए फेंका चारा: फंसने से मैं कैसे बचा? कल जब मैंने अपना ईमेल खाता लॉगिन किया तो पंजाब नेशनल बैंक से आई एक ईमेल दिखी। किन्हीं मुद्दों पर पिछले वर्ष दो तीन संदेश मैंने पंजाब नेशनल बैंक की वेबसाईट से, उसके निर्धारित ऑनलाईन फॉर्म से भेजे थे। मेरा एक खाता इस बैंक में भी है। नहीं तो आर्थिक नुकसान भी हो सकता है. 

ताऊ डाट इन पर ताऊ....वो जो हम मे तुम मे करार था  उसका क्या हुआ? करार तो हमेशा तोड़ने के लिए ही होते हैं. इस्लिएय यहाँ पढ़िए किससे, कब और क्या करार था. ताऊ-कल हमने एक पोस्ट लिखी थी...अरे ताऊ "गंभीर देवी तुमको जीने नही देगी और मुस्कान देवी तुमको मरने नही देगी. उस पर हमारे गुरुदेव समीरलाल जी ने यह कहा कि अपना गंभीर लेखन का नमूना भी चेप देते तो फ़ैसला देने में आसानी होती.आप सभी ने आपके सुझाव दिये जिसके लिये

कुम्भ का मेला प्रारंभ हो चूका है. जिसका नाम ही कुम्भ हैं यहाँ एक से एक नज़ारे देखने मिलते हैं. दुनिया के सभी रंग यहाँ समाये हुए हैं.कुंभ के मेले के हाईटेक साधु आये हुए है. साधू हाई टैक क्यों ना हों ये भी इसी समाज से ही आये हैं जिसमे हम रहते, अगर पढ़ लिख कर किसी व्यक्ति के मन में बैराग जग जाये तो सन्यास ले लेता है. एक हमारी पहचान के डॉक्टर हैं जो शहर के प्रशिद्ध बड़े हास्पिटल में अपनी सेवाएं आई.सी.सी.यु. हेड के रूप में दे रहे हैं. उन्होंने सन्यास ले लिया है. दो जोड़ी कषाय वस्त्रों के अलावा उनके पास कुछ भी नहीं है.अस्पताल प्रबंधन जो भी देता है स्वीकार कर लेते हैं तथा २४ घंटे कि सेवा देते हैं.


अमरेन्द्र नाथ त्रिपाठी अवधी भाषा में लिखते हैं.बड़ा अच्छा लगता है पढ़ कर. अवधी भारत में प्रचलित भाषा है और रामचरित मानस के माध्यम से घर-घर में पढ़ी जाती है. इसलिए अन्य भाषा-भाषी को भी समझ में आ जाती है.सबको खिचरी के तिउहार पै सबका सुभकामना देते हुए एक ललित निबंध लिख कर भारत के विभिन्न राज्यों में संक्राति मनाने के तौर तरीको से अवगत करा रहे हैं, ई गजब कै संजोग है कि कमोबेस यही समय पूरे भारत मा तिउहार मनावा जात है .हाँ अलग -अलग नाम भले हुवैं तिउहार कै , मसलन तकरीबन यही समय ( यकाध दिन आगे पीछे) जम्मू, हरियाणा, पंजाब मा 'लोहड़ी' मनाई जात है , 

अपने ब्लॉग ज्ञान दर्पण पर रतन सिंग जी सक्रिय रूप से तकनीकि जानकारियों के साथ राजस्थानी संस्कृति से भी परिचित करते रहते हैं.  आज लेकर आये हैं दुर्भाग्य का सहोदर -२ जब वह रणभूमि में उतरता है तो ऐसा लगता है जैसे कोई कुशल कथावाचक वीर रस के किसी किसी सरस छंद का मनोयोग से पाठ कर रहा हो ; जैसे कोई उलझी हुई समस्या वर्षों से प्रयास के बाद अपना ही हल निकलने जा रही हो ; जैसे ईश्वर का अचूक अभिशाप अपने दुर्दिनों के दुर्भाग्य को पीस डालने के लिए बाहें चढ़ा रहा हो | जब उसके तरकश के बाण निकलते थे तो एसा प्रतीत होता था जैसे मोहमाया से हरे भरे संसार पर क्रुद्ध होने के कारण प्रलय की आँखों में चिंगारियां निकल रही है ,


एक प्रतिभा से परिचय करा रहे हैं मोहन लाल गुप्ता जी.कर्मयोगी डॉ. अंजु सुथार अंजुम तखल्लुस से पहचानी जाने वाली डॉ। अंजु सुथार का जन्म 1 फरवरी 1974 को नागौर जिले के जसवंतगढ़ गांव में हुआ। पिता श्री बजरंगलाल जांगिड़ के राजस्थान सरकार के जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग में अधिकारी होने तथा उनका लगातार स्थानांतरण होते रहने के कारण डॉ. अंजु की विद्यालयी शिक्षा सुजानगढ़, डीडवाना, सरदार शहर, नावां, सांभरझील आदि स्थानों पर हुई। स्नातक एवं स्नातकोत्तर शिक्षा सोना देवी सेठिया कन्या महाविद्यालय सुजानगढ़ में हुई।

अजय कुमार झा जी रेल चला रहे है  दो लाईनों की पटरी पर, जो पूरे ब्लोग नगर से गुजरी हैआप भी अवलोकन करें, लाइफ लाइन जैसे ही कोई गाड़ी है जिसका इंतजार रहता है लोगों को,साथ ही कह रहे हैं कि मुझे बहुत खुशी है कि , अब ब्लोगजगत में कम अब कम से कम ये शिकायत तो किसी को नहीं होगी कि ,पोस्टें तो लिखी जा रही हैं , मगर चर्चा नहीं होती ।आप खुद देख पढ रहे हैं कि किस तरह से नित नई चर्चाएं, एक से बढ के एक अंदाज ,कलेवर,और शैली में आपके सामने प्रस्तुत हो रही  है.

 हिमानी दीवान जी अभिव्यक्ति पर २००८ से सजग हैं अभी मैंने इस ब्लॉग को सरसरी तौर पर ही देखा है एक पोस्ट के माध्यम से प्रश्न कर रही हैं कि  है हर शक्स यहाँ इतना परेशान क्यों है? वो मैं ही थी जो इस सोच में थी कि हर शक्स यहाँ इतना परेशान क्यों है लेकिन देखिये वो भी मैं ही हूँ जो इस सवाल के जवाब कि एक किश्त यहाँ लिख रही हूँ ....सुनी पढ़ी बातों से नही बल्कि खुद अनुभव करके ...या कहूँ कि "खुद परेशां होंके हम समझे हकीक़त फ़साने कि " हुआ यूँ कि नौकरी कि तलाश में भटकते हुए मैं एक न्यूज़ चैनल के दफ्तर पहुची ...चैनल का नाम न जाहिर करते हुए सिर्फ ये कहना काफी होगा.
डॉक्टर महेश सिन्हा जी हमारे रायपुर शहर के सक्रीय ब्लोगर हैं उन्होंने तीन नए ब्लोगरों की खोज की है. इससे हमारी ब्लोगर बिरादरी में बढ़ोतरी ही है.वो कहते हैं रायपुर में छुपे तीन ब्लॉगर पकड़ाये मिलिए आप भी इनसे  एक ईमेल मिलता है मुझे भेजने वाले का नाम अभिषेक  प्रसाद , रहें वाले बिहार के अभी हाल मुकाम रायपुर पहले मेरे ब्लॉग की तारीफ  की जाती है और फिर मिलने की इच्छा जाहिर की जाती है साथ ही यह सूचना मिलती है उनका एक गिरोह है जिसमे उनकी दीदी प्रज्ञा और जीजा राजीव भी शामिल हैं.

भैया विवेक रस्तोगी जी कल बहुत ही जोरदार फायर हो गये. उनके क्रोध की लपट हमारे तक भी पहुंची, हम भी देखने गए, हमारे पहुँचने से पहले अजय कुमार झा जी फायर ब्रिगेड ले कर पहुँच गए थे. आप भी देखिये उनकी नाराज इतनी कैसे बढ़ी कि उन्होंने एक पोस्ट ही लगा डाली.हम बहुत दिनों से देख रहे हैं कि सारे चिट्ठाचर्चा वाले चर्चाकार शायद हमसे नाराज हैं क्यों, क्योंकि हमें लगता है कि सब हमसे नाराज हैं, क्योंकि हमारे ब्लॉग की लिंक ही नहीं दी जा रही है। हमें लगता है कि यह हमें नहीं कहना चाहिये पर फ़िर भी आज पता नहीं क्यों फ़िर भी कह ही रहे हैं।

पूर्णिमा बर्मन जी एक रहस्य पर से परदा उठा रही हैं, कजरारी आँखों का रहस्य खोल रही हैं, पता नहीं कितने शायरों और कवियों जोर लगा लिया इनका रहस्य जान नहीं पाए.कजरारी आँखों की दुनिया कायल है उस पर अरबी सुरमें में डूबी धुआँ धुआँ आँखों का जवाब नहीं उस पर भी आँखें अगर क्लियोपेट्रा की हों तो दुनिया जहान के साथ सौदर्य., स्वास्थ्य और फैशन की दुनिया के सारे वैज्ञानिकों का जीना हराम हो जाना स्वाभाविक ही है।

 अरविन्द मिश्र जी ने संक्रांति में पतंग के खेल पर एक पोस्ट लिखी है उनके कहने का अंदाज ही निराला है.कटी भी और लुटी भी नहीं ..कैसी किस्मत है इस पतंग की?कल बनारस में भी जमकर पतंगबाजी हुई .वो मारा , ये काटा ,वो पकड़ा जैसी आदिम सी किलकारियों और हुन्करणों से वातावरण गुंजायमान होता रहा और मुझे भी बचपन की यादों में बार बार सराबोर करता रहा .मगर वे उल्लास और उमंग  की यादें  नहीं थीं, कुछ कारुणिक थीं  ....कारुणिक इसलिए कि मैं बचपन में कभी  भी पतंग उड़ा पाने में कामयाब नहीं हो पाया था ..और हर बार की मकर संक्रांति मेरी  उस असफलता ग्रंथि को कुरेद कर आहत कर जाती है .वैसे उस बाल्य पराजय के पीछे उन हिदायतों का भी बहुत बड़ा योगदान था जो पुच्छल्ले की तरह हमेशा मेरे साथ लगी रहती थीं.

पढ़िए वीर बहूटी  पर निर्मला कपिला जी कहानी संजीवनी जैसे ही मानवी आफिस मे आकर बैठी ,उसकी नज़र अपनी टेबल पर पडी डाक पर टिक गयी। डाक प्रतिदिन उसके आने से पहले ही उसकी टेबल पर पहुँच जाती थीपर वो बाकी आवश्यक काम निपटाने के बाद ही डाक देखती थी। आज बरबस ही उसकी नज़र एक सफेद लिफाफे पर टिक गयी जो सब से उपर पडा था।उसके एक कोने पर भेजने वाले के स्थान पर *वी* लिखा था। पहचान गयी,पत्र विकल्प का था। क्या लिखा होगा इस पत्र मे?वो सोच मे पड गयी। कभी पत्र लिखता नहीं है । टेलीफोन पर बात कर लेता है। अब तो चार महीने से न टेलीफोन किया

आज  के लिए महत्वपूर्ण पोस्ट है जानिए खंडग्रास सूर्यग्रहण की अवधि किस शहर में कितनीदिल्लीः11.53-3.11 बजे,चेन्नैः11.25-3.15 बजे,कोलकाताः12.07-3.29 बजे,पटनाः12.05-3.25 बजे तकअगरतलाः12.06-3.32 बजेहैदराबादः1129-3.15बजे,विशाखापत्तनमः 1144-3.22 बजेभोपालः11.41-3.14 बजे,भुवनेश्वरः 11.57-3.26 बजे,कानपुरः 11.55-3.18 बजेपुणेः11.18-3.06 बजे


 कई महीनों की मेहनत के बाद हम भी एक पहेली जीत आये हैं. नहीं तो वहां बड़े बड़े खिलाडी हैं. हमें कौन जितने देता  है? लेकिन उसके यहाँ देर है अंधेर नहीं है. हमारा भी नंबर आ ही गया. तनि आप भी शुभकामना टिपिया दीजिए.फ़र्रुखाबादी विजेता ( 172) : श्री ललित शर्मा नमस्कार बहनों और भाईयो. रामप्यारी पहेली कमेटी की तरफ़ से मैं समीरलाल "समीर" यानि कि "उडनतश्तरी" फ़र्रुखाबादी सवाल का जवाब देने के लिये आचार्यश्री यानि कि हीरामन "अंकशाश्त्री" जी को निमंत्रित करता हूं कि वो आये और रिजल्ट बतायें.प्यारे साथियों, 
 चलते-चलते

कार्टून :- रहिमन पानी राखिये..



आज  चर्चा बहुत विलम्ब से हुयी. क्योंकि सरकारी अंतर्जाल में उलझ गए थे. थोडा थोडा सुलझा कर काम चलाये हैं. जैसे तैसे यहाँ तक  पहुच गए, देते हैं अब चर्चा को विराम, सभी भाई-बहनों को ललित शर्मा का राम-राम.





Tuesday, January 12, 2010

सावधान! ब्लागिंग की छवि की रक्षा के लिए मिसाईलें तैनात (चर्चा हिंदी चिट्ठों की)

पंकज मिश्रा जी ने चिट्ठों की चर्चा करने का आग्रह किया था जिसे स्वीकार करके सोमवार से चर्चा करने का मन बनाया ,लेकिन सोमवार को शास्त्री जी को चर्चा करनी थी इसलिए हम मंगलवार को आ गये बजरंग बली की जय बोलकर। अभी अभी मैने एक पोस्ट पढी है जिसमे ब्लागिंग की रक्षा के लिए एंटी गाईडेड मिसाईल लगाने की बात हो रही है, अब मै ललित शर्मा चर्चा प्रारंभ करता हुँ…………..

आज से हिंदी ब्लागिंग की स्वच्छ छबि की रक्षा करने हेतु सीमाओं पर एंटी गाइडेड मिजाइले तैनात
कल लिखा था की साजिशे करना छोड़ दो . अमर्यादित भाषा का उपयोग करना बंद करो . किसी की टोपी उछालना बंद करो ... बहुत हो गई . मेरा गुस्सा ललित जी समयचक्र पर बता दिए है..... गुरु ने ब्लागिंग से राम राम की तो वो सब कुछ नाम खोलकर लिखूंगा की बाबा हिल जाओगे...लखटकिया कन फटिया सतर्क हो जाओ और हिंदी ब्लागिंग जगत की बनती छबि को विश्व के समाने लज्जित मत करो . बहुत हो ...... जिस भाषा का खा रहो हो उस भाषा के चिथड़े चिथड़े करने की ठेकेदारी बंद करो .....हमारे गुरु ने पलायन नहीं किया है . आज बहुत समझाया है .और कई जने उन्हें समझा रहे है ..... ऐसे कुख्यात जनों को समझा रहा हूँ अपनी जद में रहो वरना हमने हिंदी ब्लागिंग की अस्मिता की और नव ब्लागरो की रक्षा करने के लिए आज से हिंदी ब्लागिंग की सीमाओं पर स्वच्छ छबि की रक्षा करने के लिए अपनी एंटी गाइडेड मिजाइले तैनात कर दी है ...जो हर दम मोर्चे पर तैनात रहेगी और ऐसे लालू चप्पू पर अपनी पल पल सतर्क निगाहें रखेगी ......सावधान .....सावधान....सावधान

समझदार पत्नी !एक बार एक पहाडी गाँव के नए-नए बने एक गरीब प्रधान जी के घर पर कुछ देर ठहरने का सौभाग्य मिला तो उनकी धर्म- पत्नी की बुद्धिमता की प्रशंसा किये बगैर नहीं रह सके ! आइये आपको भी सुनाते है ! प्रधान जी को चावल का गरम-गरम मांड पीने का शौक था!

माँमाँ संवेदना है, भावना है, अहसास है।माँ जीवन के फूलों में खुशबू का वास है।माँ रोते हुए बच्चे का खुशनुमा पलना है,माँ सहारा में नदी या मीठे पानी का झरना है।माँ लोरी है, गीत है, प्यारी सी थाप है,माँ पूजा की थाली है, मंत्रों का जाप है।माँ आखों का सिसकता हुआ

चमन को ऐसी बहार दे दो..

महक उठे हर शज़र का पत्ता
चमन को ऐसी बहार दे दो
जो आसमां को भी जगमगा दे
धरा को ऐसा सिंगार दे दो
जो नफरतों की मशाल बाले
अमन की कलियाँ कुचल रहे है
जो रहनुमा बन के गुल्शितान को
उजड़ने को मचल रहे है
तुम्हे कसम है मिटा दो उनको
गमे जिगर को करार दे
ग़ज़ल - इक ज़रा सी बात पर
इक ज़रा सी बात पर
आ गए औकात पर
आप भी हंसने लगे
अब मेरे जज़्बात पर
खूब रोया फिर हंसा
वो मेरे हालात पर
फिर ज़मीं प्यासी हुई
फिर नज़र बरसात पर
ज़िंदगानी वार दो
प्यार के लम्हात पर
जिम्मेदारी-- मनोज कुमार बॉस ने कल शाम ही कहा था ‘सुबह, .. शार्प एट टेन थर्टी तुम प्रजेंटेशन मुझे दिखाओगे।’ देर रात तक जागकर उसने अपने लैप टॉप पर प्रजेंटेशन के स्लाइड्स तैयार किए थे और इतना खुश था कि बॉस इसे देखेंगे तो उसका कैश अवार्ड तो पक्का ! उसी रोज़ दोपहर बाद
कल+आज= सुनहरा भविष्यकुछ लोगों को आपने अतीत से नफरत होती है, क्योंकि वह सोचते हैं कि अतीत को देखने से उनको उनका बीता हुआ बुरा कल याद आ जाएगा, किंतु मेरी मानो तो अतीत को इंसान नहीं संवार सकता परंतु अतीत इंसान को सीख देकर उसके आने वाले कल को जरूर सुधार सकता है।आपने
कालेज के सारे बच्चे फेल. पप्पू अकेला पास हो गया !!
नमस्कार , मै बोदूराम ..ताऊ पाठशाला का सबसे होनहार छात्र..आज कल पंकज मिश्रा को तो फुरसत है नहीं तो सोचा क्यों न मै ही अलख जगा दू ..बस ज्यादा समय नहीं लूगा .दो चार जोक मारुगा ,उतने में अप मर गए तो ठीक नहीं तो नमस्ते बोलकर खिसक जाउगा
भारतीय संस्कृ्ति में कलश का महत्व..............यदि हम किसी धार्मिक कृ्त्य, रीति रिवाज, परम्परा इत्यादि को बिना अर्थ अथवा उसके महत्व  को जाने हुए निभाते चले जाएं तो निश्चय ही यह हमारा अंधविश्वास माना जाएगा। मेरा मानना है कि जब तक धार्मिक प्रतीकों एवं मांगलिक कृ्त्यों तथा उनके विज्ञान को हम समझ न
BSPOrange संगीता पुरी जी की भूकम्प वाली भविष्यवाणियाँ तथा एक अन्जान विज्ञान का अनुमोदन
अभी थोड़ी देर पहले संगीता पुरी जी की भूकम्प आने की भविष्यवाणियों वाली पोस्ट देख रहा था तो मुझे अपनी उस पोस्ट का स्मरण हो आया जिसमें एक सपाट चिकनी दीवार तथा सूर्य की साफ रोशनी के सहारे, स्थान विशेष पर आने वाले भूकम्प की तीव्रता सहित, संभावित समय

रोक सको तो रोक लो: - महफूज़
अभी थोड़े दिन पहले कि ही बात है. मैं जिम से एक्सरसाइज़ कर के अपने दोस्त पंकज के साथ घर लौट रहा था. कडाके कि ठण्ड में भी मुझे बहुत गर्मी लग रही थी. उस दिन कार्डियो और बेंच प्रेस बहुत ज्यादा कर लिया था. मुझे बॉडी बिल्डिंग का बहुत शौक़
roop chand shastri “ठहर गया जन-जीवन” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”)
कुहरे की फुहार से ठहर गया जन-जीवन शीत की मार से काँप रहा मन और तन माता जी लेटी हैं ओढ़कर रजाई काका ने तसले में लकड़ियाँ सुलगाई गलियाँ हैं सूनी सड़कें वीरान हैं टोपों से ढके हुए लोगों के कान हैं खाने में खिचड़ी मटर का पुलाव है जगह-जगह जल रहे आग के अलाव है
ajay-kumar-jha फ़ूंफ़ां ब्लोग्गिंग बनाम गंभीर लेखकिंग
पिछले साल का अंत हिंदी ब्लोग्गिंग में जितना उठापटक वाला रहा था ,उससे ये तो अंदाजा था कि नये साल मेंबहुत कुछ और बहुत सारा होने वाला है, मगर ये गुमान कतई नहीं था कि समुद्र मंथन की तरह ब्लोग्गिंग मंथन भीशुरू हो ही जाएगा । और आजकल तो खूब म
फ़र्रुखाबादी विजेता (167) : श्री Aks

ताऊ रामपुरिया द्वारा ताऊजी डॉट कॉम -11 घंटे पहले पर पोस्ट किया गया
नमस्कार बहनों और भाईयो. रामप्यारी पहेली कमेटी की तरफ़ से मैं समीरलाल "समीर" यानि कि "उडनतश्तरी" फ़र्रुखाबादी सवाल का जवाब देने के लिये आचार्यश्री यानि कि हीरामन "अंकशाश्त्री" जी को निमंत्रित करता हूं कि वो...
girish गीत/ वो है अनुभूति इक सुन्दर....
गिरीश पंकज पर
* *पिछले दिनों लम्बे अंतराल के बाद मुंबई प्रवास पर था.(इसलिए सुधीजन बोर होने से बच गए.) अब फिर हाज़िर हूँ. * *मुंबई में महान गायक महेंद्र कपूर के जन्म दिन पर एक कार्यक्रम था. उनके पुत्र रोहन के ख़ास आग्रह...
ब्लाग जगत के बाबाओं को समर्पित आज का कार्टून!

अब चर्चा को देते हैं विराम-सबको राम-राम

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