Showing posts with label चर्चा हिन्दी चिट्ठों की” (ललित शर्मा). Show all posts
Showing posts with label चर्चा हिन्दी चिट्ठों की” (ललित शर्मा). Show all posts

Monday, March 29, 2010

दुष्यंत और शंकुन्तला के बीच---लिव इन रिलेशनशिप--(चर्चा हिन्दी चिट्ठों की)--->>>>ललित शर्मा

पृथ्वी के पर्यावरण को बचाने के लिए एक घंटे का ब्लेक आउट कि्या गया, इससे पर्यावरण तो बचा कि नही ये तो पता नही, बेचारे पुरनदास गुरुजी का घर जरुर लुट गया, गर्मी में वे सब लाईट बंद करके सपरिवार बाहर  बैठे थे, लेकिन चोर भी ताक में थे वे भी बत्ती गुल होते ही घुस गए बाड़ी तरफ़ का दरवाजा खोल कर, गुरु जी के सामान पर हाथ साफ़ कर गए----मैं ललित शर्मा अब आपको ले चलता हुँ कुछ उम्दा चिट्ठों की चर्चा पर....................

बेनामी ब्लाग पर चल रही है एक सार्थक बहस---विवाह संस्था को अवैध घोषित किया जाय या कम से कम इसे मान्यता तो न दी जाय विवाह संस्था नारी शोषण का मूल है। अब स्थापित पुरुष प्रधान समाज ने यह एक ऐसा हथियार हजारो साल पहले ढूढ़ा जिसने मातृसत्तात्मक समाज को पितृसत्तात्मक बना दिया । बहुकाजी स्त्री को बर्बर शारीरिक बल के अधीन कर दिया गया और यौन शुचिता की बेड़ियों में उसके अस्तित्त्व को इस तरह कस दिया गया कि उसे निहायत प्राकृतिक विधानों पर भी आत्मघृणा होने लगी--------रहस्य गूढ़ नहीं!आयातित वस्तु बड़ी प्यारी लगती है. इम्पोर्टेड आईटम. हमारे विभाग के लोगों को आम जन मानस(मित्र गण) पहले कहा करते थे; कस्टम का माल नहीं पकडाया क्या? उसकी नीलामी नहीं हो रही है क्या? क्यों?
 
कविता ,तुम ही तो मिलाती हो रात के अंधेरों में सन्नाटों की साय साय मन में उठती है हाय हाय कहा हो, कहा हो ? पुकारता ,खोजता में मिल जाता हूँ खुदसे अक्सर तब नींद गहरी आती है सुबह भी चहकती है और नहीं मिल पाता जब खुद से तब खीज से भरा भरा थक...फिल्मी संस्कृति की प्रमुख चुनौतियां- 2 भारतीय सिनेमा में सांस्कृतिक संवाद का मूलाधार है आनंद। इसके तीन मुख्य तत्व हैं, ये हैं, भारतीय संस्कार, गाने और संगीत। ये तीनों ही तत्व मिश्रित संस्कृति का रसायन तैयार करते हैं।
 
पानी की मार बचपन में जब जाता था परीक्षा देने या जब जाते थे पिताजी घर के बाहर दूर किसी काम से तो माँ झट से रख देतीं थीं दरवाजे पर दो भरी बाल्टियाँ कहती थीं- शुभ होगा। आज जब निकलना चाहता हूँ घर के बाहर तो पत्नी झट से------ फेसबुक और ऑरकुट के दीवानों, ज़रा इधर भी नज़र डालो *[पुराने पन्नों से] साथियों .....मास्टरों और उधार का चोली दमन का साथ है अतः आशा है कि आप लोग मुझे साहिर साहब की इस रचना को उधार लेकर, इसका दुरुपयोग करने के लिए माफी प्रदान करेंगे .
 
रवि कुमार ने जीता एक लाख का खिताब--राष्ट्रीय ओपन शतरंज की अंतिम बाजी में मेजबान छत्तीसगढ़ के रवि कुमार ने रूपेश कांत के साथ २३ चालों में ही बाजी ड्रा खेलकर आधा अंक बटोरा और इसी के साथ खिताब और एक लाख की इनामी राशि पर कब्जा कर लिया। यह पहला ...छत्तीसगढ़ी लोक कला के धुरी 'नाचा' 'जुन्ना समय अउ अब के नाचा म अब्बड़ फरक होगे हे। जुन्ना नाचा कलाकार मन रुपिया-पइसा के जगह मान सम्मान बर नाचयं गावयं। गरीबी लाचारी के पीरा भुलाके कला साधना म लगे राहयं, कला के संग जिययं अऊ मरयं। 
 
अन्तर सोहिल = Inner Beautiful -यह वाक्या पढने से पहले कुछ हरियाणवी शब्दों के अर्थ समझ लेना जरूरी है। उडै = वहां उरेनै-परेनै = इधर-उधर सोन की खातर = सोने के लिये टोण लाग्या = ढूंढने लगा कितै भी = कहीं भी किस तरियां = किस तरह न...भिखारी  अपने देश में भिखारियों की संख्या दिन-व-दिन बढते जा रही है गली-मोहल्लों, चौक-चौराहों, गांवों-शहरों, धार्मिक स्थलों, लगभग हर जगह पर भिखारी घूमते-फ़िरते दिख जाते हैं और तो और रेल गाडियों में भी इनका बोलबाला है... 
 
कोख में आतंकवाद दूर किसी आँगन में खिल रही थी एक कली.... नन्ही सी... प्यारी सी कली.. नहीं--नहीं!! कहाँ खिली वह कली..? खिलने से पहले ही मसल दी गयी वह नाज़ुक कली क्यों..?? क्योंकि वह कली गर खिल जाती तो माता... सुमन के भीतर आग है हार जीत के बीच में जीवन एक संगीत। मिलन जहाँ मनमीत से हार बने तब जीत।। डोर बढ़े जब प्रीत की बनते हैं तब मीत। वही मीत जब संग हो जीवन बने अजीत।। रोज परिन्दों की तरह सपने भरे उड़ान। यदि सपन जिन्दा रहे लौटेगी--
 
सदगुरु दांव बतईया खेले दास कबीर " मेरे गुरुदेव स्वामी चिन्मय योगी जी ने अपने गुरु भगवान श्री रजनीश ओशो से पुछा "भगवान् ,किसी व्यक्ति को सदगुरु मिल गया. सदगुरु ने पूजा ध्यान विधि बता दी .उसके बाद क्या सदगुरु की आवश्यकता नहीं है ?" अल्पना के ग्रीटिंग्स की एक प्रदर्शनी-आर्ट गैलरी रायपुर मे-27मार्च से 31 मार्च तक सृजनशील हाथ सृजन कार्य मे निरंतर लगे रहते हैं, यह एक साधना है, इस साधना से नई कृतियों का जन्म होता है, जिसमें सृजनकर्ता की वर्षों की मेहनत लगी रहती है। जब उचित समय आता है
 
हुआ हूँ फिर उपस्थित तेरे सम्मुख ,,,, ओ दयानिधे(प्रवीण पथिक) ,,,, अतृप्त इच्छाओ की ,,, अधबनी नौका लेकर ,,, हुआ हूँ फिर उपस्थित तेरे सम्मुख ,,,, ओ दयानिधे ,,,, टकटकी लगा रखी है ,,,, तेरी हर अनुग्रही क्रिया पर ,,,, की काश कोई द्रष्टि इधर भी हो ,,,, ओ समग्र नियन्ता ,,,, मेरी----- कैसा हो कलियुग का धर्म ??
प्रत्‍येक माता पिता अपने बच्‍चों को शिक्षा देते हैं , ताकि उसके व्‍यक्तित्‍व का उत्‍तम विकास हो सके और किसी भी गडबड से गडबड परिस्थिति में वह खुद को संभाल सके। पूरे समाज के बच्‍चों के समुचित व्‍यक्तित्‍व नि...
 
डार्लिंगजी :पुस्तक समीक्षा नर्गिस और सुनील दत्त की जोड़ी हमेशा हमारे लिए एक आयडियल जोड़ी रही है...लेकिन उनके मिलने की कहानी भी किसी फ़िल्मी कहानी से कम पेंचीदा नहीं है....जहाँ एक ओर बचपन से अपनी माँ के द्वारा नर्गिस सिनेमा-जगत में आ ----- दुष्यंत और शंकुन्तला के बीच कौन सा संबंध था?महाभारत संस्कृत भाषा का महत्वपूर्ण महाकाव्य (धर्मग्रंथ नहीं)। हालांकि महत्वपूर्ण धर्म ग्रंथ का स्थान ग्रहण कर चुकी श्रीमद्भगवद्गीता इसी महाकाव्य का एक भाग है। महाभारत बहुत सी कथाओं से भरा पड़ा है। 
 
अमिताभ बच्चन को ही नहीं हरिद्वार में गंगा स्नान को भी कांग्रेस राजनैतिक चश्मे से देख रही विधानसभा अध्यक्ष के आमंत्रण पर छत्तीसगढ़ के अधिकांश विधायक हरिद्वार की यात्रा पर गए। पहले मुख्यमंत्री ने आमंत्रित किया था तो कांग्रेस विधायक दल ने इंकार कर दिया था। क्योंकि उन्हें डर था कि मुख्यमंत्री के आ.----- विदेश में जन्मे, भारत में शिक्षा पा रहे बच्चे के मामले में न्यायिक क्षेत्राधिकार पर नए सिरे से विचार करने का फैसला सुप्रीम कोर्ट ने विदेश में जन्मे, लेकिन यहां शिक्षा पा रहे बच्चे के मामले में देश की अदालतों के न्यायिक क्षेत्राधिकार पर नए सिरे से विचार करने का फैसला किया है। शीर्ष कोर्ट ने एक ऐसे मामले पर आखिरी फैसला ह..
 
नर्सिंग होम में हंगामा श्रीगंगानगर के आदर्श नर्सिंग होम में इलाज के दौरान एक महिला की मौत के बाद उसके परिजनों ने नर्सिंग होम के अन्दर बाहर धरना देकर एक सामान उस पर अपना कब्ज़ा कार लिया। एक दिन एक रात के बाद पुलिस भारी सुर------ लुटा अपनी रिश्तेदारी में ~~~~ सारी उम्र कटी यूँ तो सिपहसालारी में मारा गया बेरहमी से मगर वो यारी में . इम्तहान तो था महज़ कुछ घंटों का पूरा साल निकल गया देखो तैयारी में . बहुत ढूढ़ा खोया था जो इकलौता बीज अंकुरित हुआ तो मिला इस क्य..
 
गणेश शंकर 'विद्यार्थी' पत्रकारिता के आदर्श पुरुष : बख्शी सृजनपीठ का कार्यक्रम--आदर्श पत्रकारिता को जीवंत बनाकर भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में हुंकार भरने वाले शहीद गणेश शंकर विद्यार्थी का बलिदान दिवस पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी सृजनपीठ कार्यालय सेक्टर-9 में विगत दिनो मनाया गया। उपस्थित पत...ताऊ पहेली - 67 प्रिय बहणों और भाईयों, भतिजो और भतीजियों सबको शनीवार सबेरे की घणी राम राम. ताऊ पहेली *अंक 67 *में मैं ताऊ रामपुरिया, सह आयोजक सु. अल्पना वर्मा के साथ आपका हार्दिक स्वागत करता हूं. जैसा कि आप जानते ही हैं क..------
 
लिव इन रिलेशनशिप : फ़ैसले पर एक दृष्टिकोण --- यूं तो अभी इस मुद्दे पर लंबित मुकदमें में न्यायालय का अंतिम फ़ैसला नहीं आया है , और जाने किन किन आधारों पर मीडिया में इस मुद्दे को लेकर तमाम तरह की खबरें , रिपोर्टिंग और सर्वेक्षण तक दिखाए समझाए जा रहे हैं । इस फ़ैसले को लेकर बहस, और फ़ैसले के बाद की-------  और इस बार फ्लाईट छूटी..(केरल यात्रा : संस्मरण -१) लीजिये ,एक अल्पान्तराल के बाद फिर हाजिर हूँ .इस बीच विभागीय कार्य  से केरल यात्रा कर आया .सोचा था कि इस बार यात्रा की अपनी परेशानियों जिनसे अपुन का  चोली दामन का साथ है से ब्लागर मित्रों को बिलकुल भी क्लांत नही करूंगा .घर में तो "जहाँ जाईं 
 
संजीवनी हृदय तिमिर को  बींधतीतेरी रूह की सिसकती आवाज़जब मेरे हृदय कीमरुभूमि से टकराती हैमुझे मेरे होने का अहसास करा जाती हैजब तेरे प्रेम की स्वरलहरियाँ हवा केरथ पर सवार होमेरा नाम गुनगुना जाती हैंमुझे जीने का सबबसिखा जाती हैंजब  दीवानगी---- गीत --  देखो चन्दन वन बहक  गया ,जाने कितना कुछ महक गया ,अंगड़ाई ली अभिसारों ने ,मादक परिणय व्यापारों ने ,फुनगी पर चढ़ा पलाश यहाँ ,पिघले लोहे सा दहक गया //देखो ......छूटी पीछे बीती पीड़ा ,श्वांसों ने छेड़ी है वीणा ,जागे जीवन मे राग नए ,भोला मन फिर से
 
चलते चलते देखिए कार्टुन कोना----डब्बु जी---


Promoted By : ताऊ और भतीजाएवम कोटिश:धन्यवाद
Promoted By : लतश एवम शिल्कर, धन्यवादको पंकज
आभार

Saturday, January 30, 2010

एक नम्बर के कुत्ते अब्बू तुम्हारे-इक बुत बनाऊंगा“चर्चा हिन्दी चिट्ठों की” (ललित शर्मा)

आज कल पद्म श्री को लेकर काफी चर्चाएँ मीडिया और ब्लाग दोनों पर आ रही हैं. सैफ अली खां को पद्म श्री देने पर विश्नोई समाज ने अपना मुखर विरोध दर्ज कराया है तथा विरोध प्रदर्शन करते हुए पद्म श्री वापस लेने की मांग की है. सैफ अली द्वारा हिरण का शिकार करने के बाद भी पद्म श्री से नवाजे जाने से झुब्ध विश्नोई समाज अब प्रदर्शन पर उतर आया है. अब मै ललित शर्मा आपको ले चलता हूँ आज की हिंदी चिट्ठों की चर्चा पर................
आज की चर्चा प्रारंभ करते हैं अदा जी की पोस्ट से वे पुछ रही है कौन है ??? बेनामी जी के लेखन से चकित हैं।आज कल ब्लॉग जगत में बेनामी जी   अपनी सही और सधी हुई बातों के लिए बहुत पसंद किये swapna जा रहे हैं...पहले दिन ही मुझे लगा कि ये ज़रूर मुफलिस जी हैं..उनसे मैंने पूछ भी लिया ...लेकिन ज़ाहिर सी बात है उनका जवाब ..'ऋणात्मक' था..हा हा हा..फिर मुझे लगा गिरिजेश राव हैं, उनसे भी पूछ लिया.. .उनका जवाब गोल-मोल था....आज गौतम राजरिशी की टिपण्णी देखी उनपर भी लोगों ने शक किया है... आज आप लोगों से पूछती हूँ कौन है ये 'बेनामी जी' ?? वैसे तो ये बेनामी ही रहे तो अच्छा है..क्यूंकि 'बेनामी' रह कर ये जो काम कर पा रहे हैं शायद 'नाम' के साथ नहीं कर पाते...मैं तो इनकी मुरीद हो ही गयी हूँ...आप लोग क्या कहते हैं...ज़रा अपने विचार दीजिये अखीर हैं कौन ये..? कोई महिला भी हो सकती हैं.. चलिए अब गेसियाइये  ज़रा.....हा हा हा
mithleshमिथलेश दुबे जी  आज कि पोस्ट में बड़ी  गंभीरता से कह रहे हैं कि शरीर दिखाने वाले कपडे पहनने को आजादी कतई नहीं माना जा सकता आजादीको परिभाषित करना बहुत मुश्किल है। हर इंसान अपनी बुद्धि  का सही उपयोग करते हुए आजादी की सीमा तय करता है। हर व्यक्ति स्वतंत्र रहना चाहता है,परंतु इसकी अधिकता कभी-कभी नुकसानदेह साबित होती है। आज बेटी-बेटे को समानता का दर्जा दिया जाता है, लेकिन समाज का माहौल देखते हुए लडकियों की सुरक्षा की दृष्टि से माता-पिता उनकी आजादी की सीमाएं तय कर देते हैं, जो कि किसी दृष्टि से गलत नहीं है। यही बात बेटों पर भी लागू होती हैं।उन्हेंभी अनुशासित करने के लिए समय-समय पर उनकी आजादी की सीमाएं तय करना बहुत जरूरी है। आजादी में संतुलन बहुत जरूरी है। मेरे विचार से आजादी का सही अर्थ है-सामंजस्य।
राजकुमार सोनी जी भी एक से एक पोस्ट लेकर आ रहे हैं ब्लाग जगत को समृद्ध करने के लिए इनके  rajkumar soniलेखन के तो हम कायल हैं आज लाये हैं  केमिकल लोचा . कोई सही तरीके से बताने को तैयार नहीं है कि ‘केमिकल लोचा’ शब्द की उत्पति कहां से हुई है, लेकिन समझा जाता है कि राजकुमार हिरानी की फिल्म लगे रहो मुन्ना भाई में संजय दत्त ने इस शब्द की महिमा को अपने तरीके से समझाने का प्रयास किया था। मोटे तौर पर केमिकल का मतलब रसायन और लोचा का अर्थ लफड़ा होता है। कुल मिलाकर ऐसा विवाद जिसमें कई तरह की रासायनिक क्रियाएं शामिल हो गई हों उसे केमिकल लोचे की श्रेणी में रखा जा सकता है।बताते हैं कि जब आरएसएस का जुलूस निकल रहा था तो निगम में पत्नी की जगह स्वयं ही आमद देने वाले एक पार्षद ने श्रीमती नायक को भारतीय संस्कृति का हवाला देते हुए यह सुझाव दिया था कि वे पथ संचलन करने वाले लोगों का स्वागत जरूर करें। आनन-फानन में फूल एकत्रित किए गए और फूल बरसाओ कार्यक्रम संपन्न हो गया।
sangiv tivari संजीव तिवारी जी ने काहिरा में महफ़ूज़ और तिल्दा का चांवल दोनों से मुलाकात की ये काहिरा पहुँच गए और उनको वहां हमारे छत्तीसगढ़ के तिल्दा के चांवल की खुशबु आ गई और महफूज भाई के रेस्तरां में भी पहुँच गए जम के आन्नद लिया.पिछले दिनों ब्लॉग जगत में अदा जी के घर के चित्रों को ब्लॉग में प्रस्तुत करने के संबंध में प्रकाशित एक पोस्ट पर सबने दांतो तले उंगली दबा ली थी और जिस प्रकार पाबला जी ने कनाडा यात्रा की वैसी यात्रा करने के लिए अनेक ब्लॉगर उत्सुक थे. कल पाबला जी हमारे पास आये तो हमने भी बिना पासपोर्ट वीजा के कनाडा यात्रा के गुर के संबंध में पाबला जी से पूछा पर वे बाद में बतलाता हूं कह कर टाल गए. हमने अपनी जुगत और जुगाड लगाई. इन दिनो हिन्दी ब्लॉगजगत में आभासी दुनिया के भूगोल पर बडी-बडी विद्वतापूर्ण पोस्टें आ रही है सो हमने भी इस आभासी दुनिया का सहारा लिया और उड चले तूतनखामीन और पिरामिडो के देश मिश्र की ओर.
sunitaji फ़र्रुखाबादी विजेता (185) : सुश्री सुनीता शानुनमस्कार बहनों और भाईयो. रामप्यारी पहेली कमेटी की तरफ़ से मैं समीरलाल "समीर" यानि कि "उडनतश्तरी" फ़र्रुखाबादी सवाल का जवाब देने के लिये आचार्यश्री यानि कि हीरामन "अंकशाश्त्री" जी को निमंत्रित करता हूं कि वो आये और रिजल्ट बतायें.प्यारे साथियों, मैं आचार्य हीरामन "अंकशाश्त्री" आपका हार्दिक स्वागत करता हूं और रामप्यारी पहेली कमेटी का भी शुक्रिया अदा करता हूं कि उन्होने मुझे इस काबिल समझा और यह सौभाग्य मुझे प्रदान किया. इससे पहले की मैं आपको रिजल्ट बताऊं आप सवाल का मूल चित्र नीचे देख लिजिये जिससे की यह सवाल का चित्र लिया गया था.
RATAN SINGH-2 रतन सिंग जी इतिहास से सम्बन्धी विषय पर बहुत ही बढ़िया कहानी लिख रहे हैं. सुख और स्वातंत्र्य -२ यमराज ने एक 'वाह ' भरी और चित्रगुप्त ने उसकी और उडती निगाहों से देखकर पुन: कहना शुरू किया -' ऐसे कठिन समय में जब इसके समक्ष भिनाय की जनता ने आकर पुकार कि वे उसके शासक मादलिया के अत्याचारों से त्राहि त्राहि कर रहे है तब ' क्षतात त्रायते ' के मन्त्र को चरितार्थ करता हुआ यह शक्ति व्यय की बिना चिंता किये भिनाय में आ धमका | मादलिया के यहाँ महफ़िल चल रही थी , शराब के दौर में मानवता निगली जा रही थी और अचानक इस चन्द्रसेन की तलवार चमक उठी | प्याले टूट गए , पैमाने लुढ़क गए , सूरा के साथ मादलिया के जुल्मों की कहानी भी सदा के लिए भूमि पर छितरा गयी |'

......एक नम्बर के कुत्ते अब्बू तुम्हारे....
तुम गुलकन्द हो हमारी.....हम मीठे पान तुम्हारेYshvant mehta
.....१२० का तम्बाकू अब्बू तुम्हारे
तुम नदिया हो हमारी.....हम मछ्ली तुम्हारे
.....बेरहम मछुहारे अब्बू तुम्हारे
तुम खबर हो हमारी......हम अखबार तुम्हारे
.....कैचीं छाप एडिटर अब्बू तुम्हारे
तुम गज़ल हो हमारी.....हम सुर तुम्हारे
....बेवकूफ़ फ़नकार अब्बू तुम्हारे
तुम कविता हो हमारी......हम शिल्प तुम्हारे
....कचरा कवि अब्बू तुम्हारे
तुम शहनाई हो हमारी......हम तानपुरा तुम्हारे
....फ़टा हुआ ढोलक अब्बू तुम्हारे
तुम खुशबू हो हमारी.....हम परफ़्युम तुम्हारे
.....पसीने की बदबू अब्बू तुम्हारे
'' खिला गुलाब हँसाता है तेरी यादों को / हँसी के जिस्म में अफ़सोस ढल गया , जानां ! '' ......amarendra

'' तेरी निगाह की सूरत में पल गया , जानां !


मैं अपनी जीस्त में कितना बदल गया , जानां !
मुद्दतों बाद तेरी डरी - डरी 'कॉल' आयी 
म्हारे दिल का वो बच्चा उछल गया , जानां !
वो मुश्ते-ख़ाक थी,तुझ संग उड़ाई पुर्वा में
अब वक्ते-ख़ाक में चेहरा ही मल गया , जानां !
ख़ता की राह से हम दोनों बहोत दूर रहे
मंजिले-इश्क़ को क्यूँ कोई छल गया , जानां !
खिला गुलाब हँसाता है तेरी यादों को
हँसी के जिस्म में अफ़सोस ढल गया , जानां ! ''

“बादल घने हैं
कभी कुहरा, कभी सूरज, कभी आकाश में Rupchand बादल घने हैं।
दुःख और सुख भोगने को, जीव के तन-मन बने हैं।।
आसमां पर चल रहे हैं, पाँव के नीचे धरा है,
कल्पना में पल रहे हैं, सामने भोजन धरा है,

“पिल्लू”

जब तुम थे प्यारे से बच्चे,
मुझको लगते कितने अच्छे.

मैं गोदी में तुम्हें खिलाता,
ब्रेड डालकर दूध पिलाता,

दस वर्षों तक साथ निभाया,
आज छोड़ दी तुमने काया,
इक बुत बनाऊंगा ...खुशदीप
इक बुत बनाऊंगा तेरा और पूजा करूंगा अरे मर जाऊंगा प्यार अगर मैं दूजा करूंगा...इक बुत बनाऊंगा... (असली नकली, 1962)किसी पत्थर की सूरत से मुहब्बत का इरादा है.परस्तिश की तमन्ना है, इबादत का इरादा हैकिसी पत्थर की सूरत से...(हमराज,1967)ये दोनों गाने आज अचानक लब
क्‍या 'मितव्‍ययिता' का सही अर्थ यही है ??
मुझे वह समय पूरी तरह याद है , जब मैने मित्‍तव्‍ययिता शब्‍द को पहली बार सुना था। उस वक्‍त जाने पहचाने शब्‍दों पर ही लेख लिखने की आदत के कारण इस अनजाने शब्‍द पर लेख लिख पाना बहुत कठिन लग रहा था। घर आकर लेख लिखने की कई पुस्‍तकों में इस शब्‍द को ढूंढा ,

छह माह पहले आप ही ने तो यह कहा था .......
19 टिप्पणियाँ: Arvind Mishra ने कहा…आगे बढ़ते चलिए और इस जन्म को सार्थक करिए !स्वप्नदर्शी ने कहा…You can also visit my blog, I do write often about science, biotech and society and science often.बालसुब्रमण्यम ने कहा…यह बहुत अच्छा प्रयास
गर्भ में पल रहे शिशु को बना दूंगा अभिमन्यू
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में एक ऐसे सज्जन हैं जो यह दावा करते हैं कि गर्भ में पल रहे शिशु को वे अभिमन्यू बना सकते हैं। वैसे ये सज्जन लोगों को पिछले जन्म का राज बताने का भी काम करते हैं। अब तक करीब तीन सौ लोगों को ये पिछले जन्म की सैर कराने की बात कहते

Veer Bahuti
गज़ल इस गज़ल को भी आदरणीय प्राण भाई साहिब ने संवारा है।बेशक अभी गज़ल मे गज़ल जैसा निखार नहीं आया मगर सीखने की राह पर हूँ। आपसब के प्रोत्साहन से और भाई साहिब के आशीर्वाद से शायद कुछ कर पाऊँगी। तब तक पढते रहिये इन को । धन्यवाद्जो बनाये यूँ फसाने ये जवानी ठीक
मैंने कब कहा कि जिस पोस्ट में मैंने टिप्पणी नहीं की वह "व्यर्थ लेखन" या "निरर्थक पोस्ट" है
मैंने एक पोस्ट लिखा था "मैं टिप्पणी क्यों करता हूँ"। पोस्ट में मैंने सीधे सरल शब्दों में सिर्फ यह बताया था कि टिप्पणी करने के मेरे अपने क्या कारण हैं। पर वहाँ की कुछ टिप्पणियों
प्रीत का यह रूप
प्रीत का यह रूप मेरे अंतस को छू गया शायद आप भी पसंद करेंगे
रिकार्डतोड़ मिली टिप्पणियों की प्रस्तुति - आभार सहित
26 जनवरी को देश ने अपना गणतंत्र दिवस मनाया और हमने एक प्रकार का स्वतन्त्रता दिवस। एक पोस्ट लिखी थी जिसमें अब हमने टिप्पणी-द्वार बंद करने का निर्णय लिया था। आश्चर्य अपनी सबसे अच्छी समझी जाने वाली पोस्ट पर भी इतनी टिप्पणियां नहीं आईं जितनी इस एक पोस्ट पर

वसंतोत्सव में आज आठ दशक पूर्व मनाई गयी होली का दृश्य
साहित्य समय की सीमाओं में कभी नहीं बंधता . वह तो शाश्वत होता है . १९२४ की इस साहित्यिक रचना को आज के परिवेश में केन्द्रित कर देखें . क्या ७० वर्ष पूर्व की धड़कनें आज आपके चतुर्दिक फैले परिवेश में नहीं धड़क रही है ? आज की बात को सात दशक पहले ही रचनाकार ने

त्रिवेदी की फोल्डिंग और भटनागर की रजाई
डा. प्रदीप भटनागर उदयपुर पहुंच गए हैं लेकिन चंडीगढ़ की उनकी रजाई पराए की लुगाई की तरह पता नहीं कहां गुम हो गई है. अनिल त्रिवेदी अभी भी चंडीगढ़ में ही हैं और मेरी फोल्डिंग फिर उनके पास पहुंच गई है. जिंदगी की कुछ छोटी-छोटी बातें ऐसी होती हैं जो बार-बार याद

क्षणिकाएं
तुम मानो या ना मानोमुझे पता हैप्यार करती हो मुझेतुम स्वीकारो या ना स्वीकारोमुझे पता हैतुम्हारा हूँ मैंअश्क भी आते नहीदर्द भी होता नहीतू पास होकर भीअब पास होता नहीइक आती सांस के साथतेरे आने की आस बँधीऔर जाती सांस के साथहर आस टूट गयीतेरी पुकार में ही दम ना

एक सानिया सौ अफसाने
खबर आई है कि टेनिस सनसनी सानिया मिर्जा की सगाई टूट गई है। कुछ के लिए यह खबर राहत देने वाली हो सकती है। खुद सानिया के लिए भी। नहीं तो सानिया खुद इस बात का ऐलान क्यों करतीं। खैर।बात सानिया की हो और अफवाहें जन्म न ले संभव नहीं। शायद सानिया और अफवाहों का

जो कुछ गुल खिलाये थे गए साल ने !
हालत पे मेरी न दिल उनके पसीजे ,न शरमाया उन्हें मेरे इस फटे-हाल ने !सिद्दत से बड़ी हमने संजो के रखे है , जो कुछ गुल खिलाये थे गए साल ने !!यादों की गठरी को सीने पे रख कर,किया मजबूर चलने को हमें पातळ ने !क़दमों को अब तक संभाले हुए है, डगमगाया बहुत रास्तों के

अरे दीवानों मुझे पहचानो!!!
मैंने सोचा आज मैं भी जरा मौज ले लूँ!ना तो राजीव तनेजा जैसा कुछ कर रहा हूँ न ही कार्टूनिस्ट सुरेश शर्मा जैसा और न ही रचना सिंह जैसाआप तो बस इस ब्लॉगर को पहचानिएकोई हिंट, कोई बात, कोई पहचान नहीं बता रहा हूँ।आप बस नाम बताईए इनका और ब्लॉग बता सकें तो

रोज़ नए दर्द, संभालता हूँ मैं
हर पल,इक नया ,वक़्त ,तलाशता हूँ मैं॥जो मुझ संग,हँसे रोये,वो बुत,तराश्ता हूँ मैं॥मेरी फितरत ,ही ऐसी है कि,रोज़ नए दर्द,संभालता हूँ मैं॥परवरिश हुई है,कुछ इस तरह से कि,कभी जख्म मुझे, कभी,जख्मों को पालता हूँ मैं॥सुना है कि, हर ख़ुशी के बाद,एक गम आता है,

मैं पाबला जी को मैच नहीं कर सकता ...वे ... एक जुनूनी व्यक्ति लगते हैं
- ज्ञानदत्त पाण्डेय Gyandutt Pandeyकल एक टिप्पणी मिली अमैच्योर रेडियो के प्रयोगधर्मी सज्जन श्री बी एस पाबला की। मैं उनकी टिप्पणी को बहुत वैल्यू देता हूं, चूंकि, वे (टिप्पणी के अनुसार) एक जुनूनी व्यक्ति लगते हैं ...मैं पाबला जी को मैच नहीं कर सकता ...

प्रतिष्ठित समाचार पत्र हरिभूमि के दिल्ली संस्करण में प्रकाशित मेरी एक और नई व्यंग- नेताओं का अपमान नहीं सहेगा हिन्दुस्तान.
मेरी यह दूसरी व्यंग जिसे हरिभूमि में स्थान मिला जिसके लिए मैं चाचा अविनाश वाचस्पति जी का भी बहुत आभारी हूँ, जिनके आशीर्वाद से आज यह कवि एक व्यंग रचनाकार के रूप

व्यवस्था ने न्याय देने से अपने हाथ ऊँचे कर दिए हैं
देश भर की अदालतों में मुकदमे बहुत इकट्ठे हो गए हैं।  निर्णय बहुत-बहुत देरी से आ रहे हैं, पूरी की पूरी पीढ़ी मुकदमों में खप रही है। जजों को बड़ा आराम है। वे अपने निर्धारित काम के आँकड़े से दो-ढाई गुना काम कर दे रहे हैं। लेकिन किए जाने वाला काम ऐसा है
महाराष्ट्र में इन्टरनेट के जरिये दर्ज होगी प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज
आज एक खबर पढ़ी कि महाराष्ट्र में ई-कम्प्लेंट दर्ज होगी. अब व्यक्ति के लिए थाने जाने की आवश्यकता नहीं होगी, इन्टरनेट के जरिये ही प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज हो जायेगी तथा उसकी एक प्रतिलिपि मोबाइल पर उपलब्ध होगी. डीसीपी स्तर का अधिकारी शिकायत की जांच करेगा और
अब देता हुँ चर्चा को विराम-आपको ललित शर्मा का राम-राम

पसंद आया ? तो दबाईये ना !

Followers

जाहिर निवेदन

नमस्कार , अगर आपको लगता है कि आपका चिट्ठा चर्चा में शामिल होने से छूट रहा है तो कृपया अपने चिट्ठे का नाम मुझे मेल कर दीजिये , इस पते पर hindicharcha@googlemail.com . धन्यवाद
हिन्दी ब्लॉग टिप्स के सौजन्य से

ज-जंतरम

www.blogvani.com

म-मंतरम

चिट्ठाजगत