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Friday, November 05, 2010

चर्चा हिन्दी चिट्ठो की तरफ़ से आप सभी को दीपावली की शुभकामनाये!- सादर, पंकज मिश्रा

नमस्कार! मै पंकज मिश्रा आपके साथ.image

सबसे पहले आप सब मेरे तथा मेरे परिवार की तरफ़ से दीवाली की शुभकामनाये स्वीकार किजिये..और इस दीपवली पर कम से कम पटाखे जलाईये प्रदुषण बचाइये, यह तो मै कह दिया बाकी आप जैसा सोचे करे.. smile_sad

अचानक प्रकट हुआ देखकर हैरान है आप सब ना? मै भी हैरान हु कि मुझे समय ने इतना मजबूर क्यु कर दिया है कि मै आप सबसे दूर रहने पर मजबूर हु, खैर चलिये ये अब बातें तो होती रहेगी आप सब चर्चा पर ध्यान दिजिये.

शुरुआत हमेशा की तरह आज भी गुरुदेव समीर लाल जी से ही होवेगी..समीर जी ने दीपवली के शुभ अवसर पर लिखा है कि-

और साथ मे है शुभम मिश्रा जी ब्लाग फ़ार वार्ता के लिये

जीवन की कड़वाहट हर ले
मीठा जाम कहाँ से लाऊँ?

दिल मेरा खुश होकर गाये
ऐसी शाम कहाँ से लाऊँ?

मन में जो उजियारा कर दे
वैसा दीप कहाँ से लाऊँ?

* छोटे बच्चों को स्वयं पटाखे जलाने को न दें। उनके साथ किसी वयस्क को अवश्य रहना चाहिए।

* पटाखों को कभी भी जेब में न रखें।

* पटाखों पर झुककर उन्हें नहीं चलाना चाहिए। पटाखों को कभी भी टिन के डिब्बे या कांच की बोतल में रख कर न जलाएं।

मन में जो उजियारा कर दे
तमन्ना- ए- चराग़- ए- दीवाली - हर आँगन बिखरे आलोक - ब्लॉग 4 वार्ता - शिवम् मिश्रा

अब आगे चलते है श्रीमान डा. अरविन्द मिश्रा जी के ब्लाग पर.

मिश्रा जी ने बताया है कि

बीन बैग्स पर बैठ कर बिग बास देखने का मजा ही कुछ और है!

वैसे हम सभी देखते है ऐसी वस्तुये लेकिन जानने की जागरुकता नही होती लेकिन आप इस लेख के माध्यम से जान सकते है कि-

imageबीन बैग एक पोर्टेबल सोफा है जिसे आप अपनी सुविधानुसार किसी भी तरह का आकार प्रकार दे सकते हैं ,वजन में फूल की तरह हल्का ,बस विक्रम वैताल स्टाईल में कंधे पर टांग लीजिये और जहां भी चाहिए धर दीजिये और पसर जाईये ...इसमें जो कथित "बीन"  है वह दरअसल इसे ठोस आधार देने के लिए इसमें भरा जाने वाला कृत्रिम बीन-सेम या राजमा के बीज जैसी पी वी सी या पालीस्टिरीन पेलेट होती हैं जो बेहद हल्की होती हैं! वैसे  तो बीन बैग्स के बड़े उपयोग है मगर हम यहाँ इसके बैठने के कुर्सीनुमा ,सोफे के रूपों  की चर्चा कर रहे हैं .हो सकता है कि इस तरह के बैग नुमा मोढ़े के आदि स्वरुप में सचमुच सेम या अन्य बीन की फलियाँ ही स्थायित्व के लिए कभी  भरी गयी हों मगर अपने अपने हल्के फुल्के रूप ये पाली यूरीथीन फोम जैसे हल्के पदार्थ के बीन -बीज/दाने  नुमा संरचनाओं से भरी हुई १९६० -७० के दशक में अवतरित हुईं -मगर ज्यादा लोकप्रिय नहीं हुईं ...और लम्बे अरसे के बाद फिर १९९० के दशक और फिर अब जाकर तो इनका तेजी से क्रेज बढ़ा है .

अब बात चल रही है बिग बास की तो चलिये बिग बांस के ब्लाग पर अर्थात ताऊ जी के ब्लाग पर.

आज बिग बास ने दिया है दीपवली की शुभकामनाये !

ब्लागर्स बिग बास की तरफ़ से दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं और साथ मे लिखते है कि-

भूलियेगा मत !

ब्लागर्स बिग बास

लौट रहे हैं

दीपावली की छुट्टियों के बाद ।

तो

मिलते हैं दीपावली की छुट्टियों क बाद

पराया देश पर राज भाटिया जी राम रतन धन का वीडियो लगाया है आप भी देख और सुन सकते है यहा क्लिक करके-

पर्व है त्योहार का तो खाने-पीने की बात भी होनी चहिये-शाही कोफ्ता बनाना सिखा रही है ममता जी मेरा ब्लाग पर.

आलू को उबाल कर छील लें। किशमिश के डंठल तोड़कर धो लें और काजू के 5-6 टुकड़े कर लें। मावा और पनीर एक बर्तन में निकाल कर उसमें उबले हुये आलू तोड़ कर डाल लें और कार्न फ्लोर डाल कर अच्छे से मैश कर लें,ताकि मिश्रण चिकने आटे की तरह नजर आने लगे, अदरक का पेस्ट बना कर मिला दें. ये मिश्रण कोफ्ता बनाने के लिये तैयार है। नानस्टिक कढ़ाई में तेल डाल कर गरम कर लें। कोफ्तो के आटे से थोड़ा थोड़ा आटा निकाल लें, हथेली पर रखकर चपटा कर लें। सभी गोले तैयार होने के बाद गरम तेल में डालकर तल लें। कोफ्तो को धीमी आग पर ब्राउन होने तक तल लें। इसके बाद ग्रेवी बना ले। बाकी विधी और सामग्री की जानकारी ममता जी के ब्लोग पर जाकर प्राप्त करे.

जानकारी से भरा वेबसाईट धुधवा लाईव जिसकी चर्चा विविध भारती जैसे रेडियो प्रसारण पर हो चुकी है,,लेखक के के मिश्रा जी है और बता रहे है आज एक नयी जानकारी

आनुवंशिक कुरूपता !
imageभैंस ने जन्मा विचित्र बच्चालोग इसे कुदरत का करिश्मा मान सकते हैं। मेरे गांव और आसपास के तमाम लोगों ने इसे इसी नजर से देखा भी। कई अशिक्षित लोग उसको दैवीय चमत्कार मानकर प्रणाम तक करने लगे। था भी वह कुछ अनोखा ही। लखीमपुर-खीरी जनपद के मेरे कस्बे के पड़ोस के एक गांव कृपाकुण्ड में एक भैंस ने अजीबोगरीब से बच्चे को जन्म दिया। मंगरे लाल नामक ग्रामीण की भैंस...

 

ऐ बेटा, तनी डोरवा तो बंद कर दो...तनी राइस्वा तो लीजिये—काव्य मन्जुषा पर.

हम बस  इसी ठसक में जीते रहते हैं कि हम सोने की चिड़िया वाले देश के हैं....हमारी संस्कृति के आगे किसी की संस्कृति नहीं है.....लेकिन पारिवारिक मूल्य बहुत से देशों में, बहुत मज़बूत है...मसलन  कनाडा, इटली, फ़्रांस, मक्सिको, ethiopia वैगेरह वैगेरह ...दरअसल इन मूल्यों को दरकिनार किया ही नहीं जा सकता ..कारण स्पष्ट है 'मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है'...image

 

इन देशों में भी अपने बच्चों के प्रति माता-पिता का बहुत प्रेम देखने को मिलता है ...हाँ हमलोगों की  तरह अँधा प्रेम नहीं होता है...आखिर हर किसी को अपना जीवन जीना ही पड़ता है तो फिर समय से उसे जीवन की  सच्चाई से दो-चार करा देने में बुराई क्या है...और यही यहाँ के माँ-बाप करते हैं...१८ वर्ष का जब बच्चा हो जाता है, उसे दुनिया में संघर्ष करने के लिए प्रेरित करते हैं..

मीनू खरे जी ने लिखी है -आओ दिया जला दें

image इस दीवाली पर दीपों के बन्दनवार सजा दें
हर सूने मन के आंगन में आओ दिया जला दें.
सूनी गलियाँ सूनी सडकें सूने गलियारे हैं
सूना जीवन सूनी मांगें कितने अंधियारे हैं
आओ मिल इन अंधियारों को उजियारों का पता दें
हर सूने मन के आंगन में आओ दिया जला दें.
सुधि की तंग सुरंगों में चलो झांक हम आएँ
भूले बिछड़े संगी साथी सबको आज बुलाएँ
एक साथ सब मिल कर खाएं लड्डू खील बताशे
हर सूने मन के आंगन में आओ दिया जला दें.

काव्य मंजूषा पर से आज का दीपवली शुभकामना गीत…

तन का मंगल, मन का मंगल
विकल प्राण जीवन का मंगल
आकुल जन-तन के अंतर में
जीवन ज्योत जले
मंगल दीप जले
विष का पंक ह्रदय से धो ले
मानव पहले मानव हो ले
दर्प की छाया मानवता को
और ना व्यर्थ छले
मंगल दीप जले
आज अहम् तू तज दे प्राणी
झूठा मान तेरा अभिमानी
आत्मा तेरी अमर हो जाए
काया धूल मिले
मंगल दीप जले

 

आज बस इतना ही अगर आप सबका प्यार मुझे मिलेगा तो मै फ़िर हाजीर होऊगा॒!

आप सभी को एक बार फ़िर दीपवली की शुभकामनाये.

………. महाराज आपको भी भाईpresent

चर्चा हिन्दी चिट्ठो की तरफ़ से आप सभी को दीपावली की शुभकामनाये!- पंकज मिश्रा

Friday, December 11, 2009

रुपा गधेडी पर डोरे डालने को शेर बना किश्शू गधेडा (चर्चा हिन्दी चिट्ठो की )

नमस्कार ..पंकज मिश्रा आपके साथ……आपके पोस्टो की चर्चा लेकर……और प्रणाम आज के युवा टिप्पणी कार श्री मान जी को जिनकी उमर ६८ साल बतायी गयी है..

चर्चा की शुरुआत करते है ताऊ के पोस्ट से जो कि लिक्खे है अरे सत्यानाशी ताऊ..मैने तेरा क्या बिगाडा था?

 

image                                                                                

रुपा गधेडी पर डोरे डालने को शेर बना किश्शू गधेडा

मोहल्ले के लौंडे लपाडे यानि किश्शू टाईप के लौंडे गधे तो घर के आसपास चक्कर काटा ही करते थे. कोई मौका ही ढूंढते रहते थे कि चम्पा भाभी उनको कोई काम बतादे और वो उसी बहाने रुपा से दो बातें ही करलें. और इनमे भी किश्शू गधे ने अपने थोबडे पर शेर का नकली चेहरा लगा रखा था.. लोगों को और खासकर जवान गधियों को आकर्षित और इंप्रेस करने के लिये..और गांव वालों मे एक दो लोग उसके जैसा जहीन किसी को नही मानते थे..क्योंकि उन मुर्खों के बीच एक दो शब्द अंग्रेजी के भी झाड लिया करता था. यानि अंधों मे काणा राजा था.. पर था निहायत और खालिश गधेडा ही.. पर चम्पा भाभी ने दुनियां देखी थी. इन लौंडो की क्या बिसात कि रुपकला की तरफ़ नजर भी उठा कर देख ले.

पी.सी.गोदियाल जी बता रहे है जोकर के बारे मे कविता के माध्यम से …लिखते है कि ..

godiyaal saahab   याद तो होगा आपको
वह सर्कस का जोकर,
तमाम कलाकारों के मध्य,
एक अजीबो-गरीब किरदार,
मकसद सिर्फ़ और सिर्फ़
दर्शकों को हंसाना,
उनका मनोरंजन करना,
और खुद की शख्सियत
सर्कस के जानवरों से भी कम ।

 

अपने शास्त्री जी कविता लिखने की मशीन है ….दिन भर मे दो कविताये तो जरूर रहती है फ़िर भी कुछ लोग कहते है शास्त्री जी कवित्त कहा है …लो पढ लो आज भी कवित्त…

"कोई नही सुनता पुकार" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

 image मानवाधिकार
कोई नही सुनता पुकार
आयोग है
राजनीति का शिकार
कहने पर प्रतिबन्ध
सुनने पर प्रतिबन्ध
खाने पर प्रतिबन्ध
पीने पर प्रतिबन्ध

ग्यान दर्पण नाम से जाहिर है तो काम भी बराबर है…आज फ़िर ग्यान की बातें ग्यान दर्पण पर कि namebench के साथ करें DNS Server सर्च---रतन सिह: शेखावत जी

image दरअसल बिना कोई तुलना करने वाले औजार के हम यह पता नहीं लगा सकते कि हमारी वर्तमान डीएनएस सेवा ठीक है या गूगल की | यदि हमें कोई एसा तुलना करने वाला औजार मिल जाए तो हम गूगल डीएनएस सर्विस व अपने इन्टरनेट सेवा प्रदाता की डीएनएस सर्विस की तुलना कर जो ज्यादा बढ़िया है उसे इस्तेमाल कर सकते है |

बबली जी जा रही है छुट्टी पर पूरे एक महिने के लिये और दे गयी है आपको और सबको अभी से नये साल की शुभकामनाये….बबली जी आपको भी हमारी तरफ़ से शुभकामनाये..

शरद कोकास बता रहे है आज पुरातत्ववेत्ता मे एक पुरातत्ववेत्ता की डायरी-दसवाँ -दिन – दो..

खून पीकर जीने वाली एक चिड़िया रेत पर खून की बूँदे चुग रही है….

sharad jee रवीन्द्र ने कहा “ कैसे होती थी ग्लेडियेटर्स की यह लड़ाई ?” मैने कहा चलो तुम्हे वहाँ का दृश्य दिखाता हूँ । जिस तरह हमारे यहाँ स्टेडियम होता है उस तरह का होता था यह एम्फिथियेटर बीच में यह अखाड़ा जिसे एरीना कहते हैं । जिस तरह क्रिकेट देखने के लिये भीड़ इकठ्ठा होती है उस तरह की भीड़ यहाँ उपस्थित है । ठीक वैसा ही उन्माद .. शोर । साइड की दीवार  के पास एक शेड है जहाँ ग्लेडियेटर के जोड़े लड़ने के लिये प्रतीक्षारत  हैं उसके दरवाजे से एरीना का दृश्य देखा जा सकता है । मैदान के एक ओर गाने और बजाने वालों का एक समूह बैठा है जब तक लड़ाई शुरू नहीं हो जाती यह वाद्य्यंत्रों से लोगों का मनोरंजन करता रहेगा । हर जोड़े में एक थ्रेसियन है और एक यहूदी या हब्शी अफ्रिका का रहने वाला । जोड़े के दोनो ग्लेडियेटर आपस में घर परिवार की बाते कर रहे हैं जबकि उन्हे पता है कि उनमें से एक को थोड़ी देर बाद मर जाना है ।

पुलिस की करतूत सुमन की जुबानी....बप्पा महानिदेशक बेटवा घोटालेबाजपुलिस

पुलिस में भर्ती कराने के लिए पुलिस महानिदेशक ट्रेनिंग डी पि सिन्हा के पुत्र रितेश सिन्हा व बहुजन समाज पार्टी के सहारनपुर के नेता धूम सिंह के रैकेट का पर्दाफाश हुआ है। फिलहाल दोनों गिरफ्तार किए

गए हैं । उच्च स्तर के पुलिस अधिकारियों की छवि घोटालेबाज, भ्रष्टाचारी, रिश्वतखोर के रूप में आए दिन जनता के सामने प्रदर्शित होती रहती है। हमारी न्यायव्यवस्था के समक्ष अधिकांश वाद इन्ही भ्रष्टाचारियों के पर्वेक्षण में दाखिल होते है और उनके द्वारा लिखी गई बातें

वर्ष-2009 : हिन्दी ब्लॉग विश्लेषण श्रृंखला (क्रम-16)...

आईये पहले बात करते हैं रामपुरिया का हरियाणवी ताऊनामा यानि ताऊ डौट इन की । इंदौर निवासी श्री पी सी रामपुरिया का यह ब्लॉग वर्ष-२००९ के अद्भुत चिट्ठों में सर्वोपरि है , क्योंकि यह ब्लॉग अप्रत्यासित रूप से हिन्दी चिट्ठाकारी में अपना महत्वपूर्ण स्थान बना चुका है । वर्ष-२००९ में यदि सर्वाधिक पोस्ट प्रस्तुति की बात करें तो यह चिटठा सर्वाधिक अग्रणी चिट्ठों में से एक है यानि इस ब्लॉग पर वर्ष -२००९ में विश्लेषण के समय तक कुल २८९ पोस्ट डाले गए हैं जबकि वर्ष के सर्वाधिक सक्रीय चिट्ठों ( चिट्ठाजगत के अनुसार ) यथा- मानसिक हलचल, उड़न तश्तरी .... आदि पर डाले गए पोस्ट इस चिट्ठे पर डाले गए पोस्ट के आधे के आसपास है । प्रस्तुतीकरण ऐसी कि इस ब्लॉग पर जो एक बार भ्रमण कर लिया वह इस ब्लॉग का होकर रह गया । आंचलिकता की ओट से झांकते हुए ताऊ ने अपनी सम्मोहक भाषा शैली से पाठकों को वर्ष -२००९ में सर्वाधिक आकर्षित किया है । वर्ग पहेली इस ब्लॉग की सबसे बड़ी विशेसता है । मेरे व्यक्तिगत विश्लेषण के आधार पर इसे वर्ष के सर्वाधिक लोकप्रिय ब्लॉग होने की संज्ञा दी जा सकती है ।

परिकल्पना के विश्लेषण के आधार पर इस श्रेणी का दूसरा ब्लॉग है - हिन्दी ब्लॉग टिप्स । यह मूलत: तकनीकी चिटठा है और अपनी सम्मोहक शैली के साथ तकनीकी ज्ञान बांटने की दिशा में सर्वाधिक अग्रणी चिटठा होने का गौरव हासिल किया है । यह चिटठा वर्ष के सर्वाधिक चर्चित तकनीकी चिट्ठों में अग्रणी है । हिन्दी चिट्ठाकारी में इसे अद्भुत ब्लॉग इसलिए भी कहा जा सकता है कि इसके अनुसरनकर्ताओं की संख्या अन्य हिन्दी ब्लॉग की तुलना में सबसे ज्यादा यानी ६९४ है । ताऊ डौट इन के तरह इस ब्लॉग के भी सर्वाधिक पाठक हैं । सबसे बड़ी बात तो यह है कि यह चिट्ठा वर्ष -२००९ में काफी महत्वपूर्ण जानकारियों के साथ -साथ हिन्दी चिट्ठाकारों को मार्गदर्शन देने का काम किया है । यह चिटठा पूरे वर्ष तक चिट्ठाजगत की रैंकिंग में भी टॉप -४० चिट्ठों में से एक रहा है । इस ब्लॉग को मेरी कोटिश: शुभकामनाएं !

इस श्रेणी का तीसरा ब्लॉग है -युनुस खान का रेडियो वाणी । यह विविध भारती मुंबई के उद्घोषक युनुस ख़ान का का हिंदी चिट्ठा है । इस ब्लॉग की सबसे बड़ी विशेषता है कि इसके माध्यम से संगीत को केंद्र में रखकर लोगों तक अपनी बात पहुँचाने का मंच प्रदान किया जाता है। इस ब्लॉग में संगीतकारों, यूनुस के पसंदीदा कलाकारों तथा संगीत से ही जुड़ी तमाम अद्भुत जानकारियाँ मौजूद हैं। वर्ष-२००९ में कई कलाकारों और संगीत से जुड़ी तमाम जानकारियों से हमें समय-समय पर रू-ब-रू कराता रहा है - ‘रेडियोवाणी’। प्रस्तुतीकरण और सज-सज्जा में यह ब्लॉग अद्भुत ही नहीं अद्वितीय भी है ।

इस श्रेणी का चौथा ब्लॉग है -शब्दों का सफर । अजित वडनेरकर का हिन्दी भाषा और शब्दों के ऊपर छवियुक्त चिट्ठा।शब्द की तलाश और व्युत्पत्ति को लेकर भाषा विज्ञानियों का क्या है ? ...उसे आसान भाषा में छोटे-छोटे आलेखों में सबसे साझा करने की कोशिश है श्री अजित वाडनेकर के इस ब्लॉग में ।यह कोशिश हिन्दी चिट्ठाकारी के लिए किसी वरदान से कम नही है । मेरा मानना है कि हिन्दी का सबसे समृद्ध और श्रमसाध्य ब्लॉग है यह । बहुत शोधपरक, उपयोगी और महत्वपूर्ण जानकारियाँ दी गई है इस ब्लॉग के माध्यम से इस वर्ष ।हिंदी में इतनी संलग्नता के साथ ऐसा परिश्रम करने वाला शायद ही कोई और चिट्ठाकार होगा , ऐसा मेरा मानना है ।

इस श्रेणी का पांचवा ब्लॉग है -हिमांशु का सच्चा शरणम जो गंभीर चिंतन पर आधारित हिन्दी ब्लॉग जगत में सर्वाधिक सक्रीय चिट्ठों में से एक है । इसकी लोकप्रियता का पैमाना भी अत्यन्त ही अद्भुत है । अपने बारे में हिमांशु का कहना है, कि चलते रहते हैं कि चलना है मुसाफिर का नसीब सोचते रहतें हैं किस ओर किधर के हम हैं । सहज शब्दों में सारगर्भित बातें करना इस चिट्ठे कि सबसे बड़ी विशेषता है । यह चिटठा वर्ष के सर्वाधिक लोकप्रिय चिट्ठों में से एक है ....आशा कि जा रही है कि आने वाले वर्ष में यह चिटठा एक नया मुकाम बनाने में अवश्य कामयाब होगा ।

इस श्रेणी का अगला चिट्ठा है -महाजाल पर सुरेश चिपलूनकर । राष्ट्र के पुनर्निर्माण के प्रति समर्पित यह ब्लॉग अपनी साफगोई के कारण वर्ष -२००९ में सर्वाधिक लोकप्रिय ब्लॉग की श्रेणी में अग्रणी रहा । यह ब्लॉग कई नए ब्लोगर के लिए आदर्श भी रहा है । एक ही ब्लॉग पर एक साथ सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक , फिल्मी और मनोरंजक आलेख कि प्रस्तुति इस ब्लॉग कि सबसे बड़ी विशेषता है । वैसे इनके हिन्दूवादी विचारों से कई चिट्ठाकार इनका विरोध करते हैं, किंतु उनका मानना है कि ब्लोग को एक विचारधारा पर रखकर ही आगे बढ़ा जा सकता है ।

इस श्रेणी का सातवाँ ब्लॉग है- कल्पतरु । कल्पतरू यानि कल्पनाओं का वृक्ष । ताऊ डोट इन के बाद वर्ष-२००९ में सर्वाधिक पोस्ट (२५३) डालने का सौभाग्य प्राप्त है इस ब्लॉग को । विवेक रस्तोगी का यह ब्लॉग बहुत कम समय में हिन्दी चिट्ठाकारी में अपनी सार्थक उपस्थिति के लिए जाना जाता है । सहज ढंग से मनोरंजक बातें करना इस ब्लॉग कि खास विशेषता है । साहित्य और संस्कृति कि बातें भी बड़े अनोखे ढंग से प्रस्तुत करने में महारत हासिल है इस ब्लोगर को ।

और ये है सोलहवीं नायिका ....अनुशयाना!

image नायिका भेद शास्त्र के एक लोकप्रिय लेखक हुए हैं भानुदत्त. उनके  अनुसार अनुशयाना वह नायिका है जो प्रिय मिलन में बाधा उत्पन्न हो जाने से imageउदास है और यह नायिका तीन प्रकार  की होती है !पहली तो वह जो वर्तमान के  मिलन स्थल के नष्ट हो जाने से दुखी हो जाती है और दूसरी  इस आशंका से की कालांतर में किसी भी कारण (जैसे किसी अन्य से विवाह के कारण )पूर्व प्रेमी से किसी उपयुक्त मिलन स्थल के अभाव के कारण मिलना न हो सकेगा ! और तीसरी अनुशयाना  नायिका वह जो किसी बाधा के समुपस्थित हो जाने से संकेत/ अभिसार /मिलन स्थल पर न पहुँच पाने की व्यथा से उद्विग्न हो गयी है !

ढोंगी बाबा सचिदानन्द निकला कातिल

image 28 नवम्बर की रात करीब 11 बजे बाबा कविता के घर पहुँचा और उसे समझाया। कविता के बार बार अपनी बात पर अडे रहने के बाबा ने पजले उसके सिर पर जोर से घूँसा जडा और बाद मे उसी की चुन्नी से उसका गला घोंट दिया।हत्या को लूट का मामला बनाने के लिये उसने उस के बाल बिखेर दिये और घर का सारा सामान भी बिखेर दिया।ुसके 2 मोबाईल फोन भी नष्ट कर दिये।। फिर कमरे को ताला लगा कर दूसरे दरवाजे से चला गया ।अगली सुबह छ: बजे बाबा अपने चेलों को साथ ले कर गाडी से कुरुक्षेत्र चला गया। इसके बाद वो जालन्धर और अमृतसर मे भी घूमा।। 7 दिस्मबर को जब वो नवां शहर लौटा तो पोलिस ने उसे दबोच लिया।जाँच के दौरान पोलिस लो पता चला कि  कविता का उस बाबा के पास काफी आना जाना था। बाबा कविता का भाई बना हुया था। पोलिस ने जब सबूत जुटाने शुरु किये तो सभी कडियाँ खुलती चली गयी।

An Indian in Pittsburgh - पिट्सबर्ग में एक भारतीय

image मौत का अब डर भी यारों
हो गया काफूर है
ज़िंदगी की बात ही क्या
ज़िंदगी जाने के बाद

 

जीवन में पुरूषार्थ और भाग्य.दोनों का ही अपना अपना महत्व है...............

image पांडवों की माता कुन्ती श्रीकृ्ष्ण से कहती है कि मेरा पुत्र महापराक्रमी एवं विद्वान है किन्तु हम लोग फिर भी वनों में भटकते हुए जीवन गुजार रहे हैं,क्यों कि भाग्य सर्वत्र फल देता है । भाग्यहीन व्यक्ति की विद्या और उसका पुरूषार्थ निरर्थक है ।
वैसे देखा जाए तो भाग्य एवं पुरूषार्थ दोनों का ही अपना-अपना महत्व है, लेकिन इतिहास पर दृ्ष्टि डाली जाए तो सामने आएगा कि जीवन में पुरूषार्थ की भूमिका भाग्य से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है। भाग्य की कुंजी सदैव हमारे कर्म के हाथ में होती है, अर्थात कर्म करेंगे तो ही भाग्योदय होगा। जब कि पुरूषार्थ इस विषय में पूर्णत: स्वतंत्र है ।

लड़की हंसते हुए देख रही है या देख के हंस रही है?

image

हमारे एक मित्र का एसएमएस मिला जिसमें एक जोक है। इसे हम यहां ब्लाग बिरादरी के लिए पेश कर रहे हैं।
एक सरदार अपने मित्र से: यार वह खुबसूरत लड़की मुझे काफी देर से हंसते हुए देख रही है।
मित्र- दोस्त पहले कंफर्म कर लो हंसते हुए देख रही है या देख के हंस रही है।

शत्रु मारते थे लड़कियों को लाइन और देते थे फाइन

 

चलते चलते

यादें और बातें

image यादें अंजानी
बातें, कही अनकही
यूं ही पड़ी रह जाती हैं ।
जैसे ओस की बूंदें
उतरी हों सुबह की रेशमी घास पर ।
झुर्झुरी सी होती है
जब भी कदमों के नीचे आती हैं।
या फिर बीती उम्र के सफ़ों पर
रोशनाई के कुछ कतरे ।
खामोश पडे पन्नों पर,
धूल कभी नहीं चढती ।
यादें और बातें,
दोनों बस वैसी ही तो रह जाती हैं

 

 

नमस्कार कल शास्त्री जी की बारी ....

Thursday, December 03, 2009

कभी खुशी कभी गम !! चर्चा हिन्दी चिट्ठो की !!!

नमस्कार ,  पंकज मिश्रा ..आपके साथ बीच मे लगभग बीस दिन आप सबसे दूर रहा..इसी बीच काफ़ी कुछ ब्लागजगत मे नया हो गया …..ताउ जी ने अपनी पहेली की पचासवी पोस्ट भी प्रकाशित कर दिये..अजय भाई की बुलबुल की तबियत के बारे मे भी सुना …शरद कोकाश जी के मित्र के लडके के देहान्त के बारे मे भी सुना …..

रही बात मेरी तो मै आप सबको बता दु मै अपने घर छुट्टी पर गया था …उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले…..सोचा था कि डा. अरविन्द मिश्रा जी से भी मिलकर अपने आप को धन्य करुगा…और जैसे ही घर जाने के लिये टिकट निकाला था सबसे पहले हेमन्त भाई को बताया था और यह तय हुआ था कि किसी एक दिन जौनपुर मे मुलाकात होगी …मगर नही हो सकी….अफ़सोस है इस बात का…डा. मिश्रा जी के यहा तय हुआ था कि बनारस मे सभी नजदिकी ब्लागर जिसमे मै,हिमान्शु भाई.और हेमत भाई शामिल थे भेट होना तय हुआ लेकिन दैविय गती मेरे जीजा जी के बडे भाई साहब का उसी दिन देहान्त होने की वजह से बैठक रद्द कर दी गयी …अब वापस फ़िर से आ गया हु अपने उसी जगह पर जहा से गया था..मन मे ढेर सारे अवसाद लिये हुए…लेकिन एक बात आज एक ट्र्क पर पढा जिन्दगी रही तो फ़ि मिलेगे!!!बस यही बात पढकर कुछ हिम्मत जगी है देखिये कब कहा और कैसे भेट होती है आप सबसे….

दुसरी बात मै तहे दिल से धन्यवाद देना चाहता हु हमारे पिता समान श्री मान रूपचन्द शास्त्री जी को जिन्होने हमारे अनुपस्थिति मे इस मन्च को जगाये रखा …धन्यवाद शास्त्री जी ह्र्दय से!!!!!!

अब चलते है चर्चा की तरफ़…शुरुआत ताऊ जी के ही पोस्ट से करुगा…ताऊ ने एक पोस्ट लिखी थी  सांड तो लड अलग भये : बछडे भये उदास ठीक उसके बाद दो सांड पैदा हो गये थे..आज ताऊ जी ने एक सवाल किया है जवाब आप सबको देना है…ताऊ, करवा ले न्याय तेरे ब्लाग पंचों से ही.... !

imageहमने कहा कि - इसमे समझने जैसी कोई बात ही नही है. जैसे गीदड जब दूसरे गीदडों को हूआं..हूआं..हूआं..हूआं.. करते सुनता है तो उसकी भी इच्छा हो ही जाती है हुआं..हुआं... करने की, तो यह संभव ही नही है कि ब्लागर सम्मेलन हो और ताऊ उसमे जाये और रिपोर्टिंग नही करे? ऐसा हो सकता है क्या?
और जब हम रिपोर्टिंग करेंगे...फ़िर कोई ब्लडी.. हेल...कहेगा...फ़िर कोई खुल्ला या बंधा सांड..और सुर्पणखां ताऊ के पीछे दौडायेगा...

 

अब आगे चलते है डा. अरविन्द मिश्रा जी के ब्लाग पर ..मिश्रा जी ने लिखा है एक चतुर नायिका है विदग्धा!

नाimage यिका प्रत्यक्षतः तो प्रिय को मना कर रही है कि वे ना आये मगर मिलन के  इतने सुन्दर अवसर को हाथ से न जाने का चतुराई भरा संकेत निमंत्रण भी वह दे रही है -"आज तो मैं निपट अकेली ,डरी सहमी सी ,क्लांत सी हूँ " .प्रकारांतर से यह  मिलन का एक पावरफुल आमंत्रण ही तो  है ! प्रगटतः  उसके शब्द मिलन की मनाही कर रहे हैं, मगर सच में वह कह रही है ,

"आ जाओ न प्रिय  आज मिलन का सुनहरा मौका है  ..."

नायिका उपभेद में आगे हम क्रिया विदग्धा की भी चर्चा करेगें !

आगे है हिमान्शु भाई एक समुचित कविता लेकर …..क्या दूर सुहृद ! प्रियतम ! निराश चित्कार रहा अम्बर अन्तर (गीतांजलि का भावानुवाद)

निद्रा विरहित पट खोल सुहृद मैं तिमिर बीच झाँकता रहा
विस्मितMy Photo विस्फारित नयन खोल खोजता तुम्हारा पंथ कहाँ ?
कुछ भी न सूझ पड़ता आगे हो कहाँ तिमिर में मित्र प्रवर -
क्या दूर सुहृद ! प्रियतम ! निराश चित्कार रहा अम्बर अन्तर

मसि तममय किस सरि के तट पर, किस उद्वेलित वन-कोने मेंMy Photo
किस गहन धुंध में तुम विलीन हो गये स्वयं को खोने में
क्या मुझ तक आने का ताना बाना बुनते हो पंकिल कर -
क्या दूर सुहृद ! प्रियतम ! निराश चित्कार रहा अम्बर अन्तर ।

पी सी गोदियाल जी की बात भी जायज है …क्या इस देश में गरीब अब अपनी बेटी की शादी कर पायेगा ?

My Photoआज जिन खुले बाजार की ताकतों के बलबूते पर, वायदा कारोबारियों की मिलीभगत के चलते सोना आसमान चढ़ता जा रहा है उससे तो नहीं लगता कि आने वाले समय में इस देश में पहले ही बेरोजगारी और महंगाई की मार झेल रहा एक गरीब, अपनी बेटी के हाथ पीले कर पायेगा। आज के सोने के भावों पर नजर डाले तो अन्तराष्ट्रीय बाजार में सोना १२०० से कुछ अधिक डालर प्रति औंस( करीब तीन तोला यानि २८.३६ ग्राम) तक पहुँच गया है। इसे अगर भारतीय मुद्रा में देखे तो (१२००*४७/२.८३) करीब १९५००/- के आसपास तक सोना जा सकता है, जोकि अभी १८००० रूपये के ऊपर है। अब आप खुद सोचिये कि अगर एक गरीब व्यक्ति कुछ भी न करे और सिर्फ दो तोले सोने के साथ भी लड़के वालो को अपनी लडकी पकडाए तो ४० से ५० हजार रूपये तो उसे तब भी चाहिए।

शास्त्री जी जो बोल दे वह कविता बन जाती है और मेरे हिसाब से देखा जाये तो शास्त्री जी हर रोज एक-दो कविता लिखते पाये गये है आज शास्त्री जी ने लिखा है "मेरा भारत देश महान!" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

और साथ मे है जिन्दगी पर वन्दना जी लेकर यादों का सन्नाटा…प्रस्तुत है कुछ अंश……

image ललनाएँ सीता जैसी  हों, भरत-लखन से भाई हों, 

वीर शिवा जैसे प्रसून हों, कलियाँ लक्ष्मीबाई हों,

आजादी के परवानों का, गाँव-नगर में हो सम्मान।

अपनी कुटिया बन जाएगी सुन्दर विमल-वितान।।

यादों की सूनीMy Photo
पगडण्डी पर
जो कदम पड़ा
दूर -दूर तक
एक सन्नाटा ही
बिखरा पड़ा था
कहीं सूखे
पत्तों के नीचे
यादों का मलबा
दबा हुआ था

श्री मान रतन सिंह शेखावत जी ….जो भी जानकरी मिलती है तुरत फ़ुरत हम आप सबसे शेयर कर देते है ये नही कि जान गये तो दबा के रख ले आज बता रहे है एक्यूप्रेशर चिकित्सा पद्दति के बारे मे ……

इस पद्धति का विकास चीन में होने के कारण इसे चीनी पद्धति के रूप में जाना जाता है। लेकिन इसकी उत्पत्ति को लेकर काफी विवाद भी हैं। एक ओर जहां चीन का इतिहास यह बताता है कि यह पद्धति 2000 वर्ष पहले चीन में विकसित होकर सारी दुनिया के सामने आई। वहीं, भारतीय मतों के अनुसार आयुर्वेद में 3000 ई.पू. ही एक्यूप्रेशर में वर्णित मर्मस्थलों का जिक्र किया जा चुका है। वर्तमान में भारत और चीन के साथ ही हांगकांग, अमरीका आदि देशों में भी कई रोगों के उपचार में एक्यूप्रेशर चिकित्सा पद्धति काम में लाई जाती है।

प्राची के पार है दर्पण शाह और लिखते है एक नेनो सेकंड

बस एक मुकम्मिल image दर्द,
इस तरह कि,
कोई दर्द नहीं.
एक भंवर बना है दर्द का,
कि जिसमें खुद ही गुम है वो.
बाहर आता है,
दिखता है,
छुप जाता है.
कि जैसे था ही नहीं.
कि जैसे होगा ही नहीं.

पं.डी.के.शर्मा"वत्स" ने आज प्रस्तुत किया है मासिक राशिफल----दिसंबर 2009

मिथुन राशी:- इस महीने जिम्मेदारी बढ़ने से शुरुआत कुछ आर्थिक संकटों से भरी होगी। महीने के पहले 15 दिनों में भविष्य निर्माण संबंधी योजनाएं स्थगित होंगी। My Photoसाझे सौदे के लिए भी अभी धन खर्च करना उचित नहीं होगा। दूसरे सप्ताह के अंतिम दिनों में रोजगार प्राप्त जातकों को धन प्राप्ति अथवा पदोन्नति के प्रसंग पैदा होंगे।महीने के प्रथम अर्द्ध में परिवार में झगड़ा आपकी जिद करने की आदत के कारण हो सकता है। अत: वाणी पर और व्यवहार में नियंत्रण अवश्य रखें। नए दोस्तों से संबंध सोच-समझकर बनायें। उत्तरार्द्ध में शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगी संपत्ति का लाभ होगा। सट्टे के व्यापारी सचेत रहें अन्यथा अचानक आर्थिक हानि का सामना करना पड सकता है । विशेष तौर पर 8 से 13 तारीख तक सट्टा बाजार, शेयर मार्कीट इत्यादि से पूरी तरह से दूर रहें ।

अदा जी ने पुछा है अब कौन भला इनको सुलझाएगा ?

ये भांडा भी ,इक दिन फूट जायेगा
मत खेल अपनी साँसों से, इस तरह
कहीं दम निकल जाये, तो बहुत पछतायेगा,
और छुपे छुपे से हों, जब अक्स सारे
पूरा चेहरा भला कैसे नज़र आयेगा ?
जब गांठों के ढेर बन गए हों रिश्ते
अब कौन भला इनको सुलझाएगा ?

 

आज केलिये इतना ही अभी जबसे आया हु भरपुर आराम नही कर पाया हु….

आज इतने से काम चला ना बाप अपुन फ़िर वापस आयेगा बोले तो मुन्ना भाई का ब्लाग पढकर ऐसा बोलने लगा ..क्या मुन्ना भाई अमा ये रहा लिन्क मुन्ना भाई के ब्लाग का

ब्लाग चर्चा "मुन्ना भाई" की

अब नमस्कार !!!!

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