आज का चर्चा का ये अंक दर्पण शाह और पंकज मिश्रा दोनों की सम्मिलित प्रस्तुति है .....आशा है आपको बेहद पसंद आयेगी ...
सबसे पहले आपको ये बता दे कच्छा और चढ्ढी में कोई फर्क नहीं होता ये मै कल पढा .....अब ब्लागजगत में यही सब बताया जा रहा है ...........देखो आगे क्या क्या होगा राम जाने ....राम नहीं भाई लिखने वाले जाने ...और हां आप ये मत पूछियेगा कि उस ब्लॉग का लिंक दीजिये ......क्युकी मै दुगा नहीं ...का काहे ये जबरिया है ....तो सुन लीजिये हमतो ....जाने दीजिये किसी की कापी राइट है.........
अब चलिए गधा सम्मलेन में ...अरे नहीं भाई ....हमें तो न्योता न ही नहीं है अपणे ताउजी गए है ....गधा तो ले गए है लेकिन खुद रिपोर्टर की हैसियत से गए है.....पढ़ लीजिये रिपोर्ट .........
जलेबियां खत्म हो गई आते आते : सबसे तेज गधा सम्मेलन रिपोर्टम
अब हमको चलना है. इस गधेडे और गधेडी की प्रेमलीला का क्या हुआ? जलेबी नही मिलने पर इस गधेडी प्रेमिका ने इस गधेडे प्रेमी के साथ क्या बर्ताव किया..इसको अगली रिपोर्ट मे देखियेगा. और उसके बाद की रिपोर्टिंग होगी सीधे उज्जैन सम्मेलन स्थल से. और हां अहमदाबाद से रिपोर्टींग करेंगे सबसे तेज चैनल के हमारे सहयोगी श्री संजय बेंगानी….जिनको हम नेट कनेक्शन मिलते ही तुरंत प्रसारित करेंगे…यह रिपोर्ट हम रामप्यारी के खिलौना लेपटोप से भिजवा रहा हूं सो क्वालीटी उतनी अच्छी नही है. कृपया सहयोग करें. |
अब समीर जी को तो मै कुछ कहुगा ही नहीं जितना सामान बाधना हो बाध ले :) और निकल पड़े पुल के उस पार से: इलाहाबाद दर्शन पर ……….
बेहतरीन चिट्ठों की एक बकवास चिट्ठा चर्चा.... (भारत एक गरीब देश है जहाँ अमीर लोग बसते हैं.... की तर्ज़ पर !!)
इतनी बकवास कि, अच्छा हुआ मेरा कोई दोस्त ब्लागर नही है वर्ना कहते हमने वो पढ़ा तो आप इसे भी पढ़ लीजिए... क्यूँ पढ़ लीजिये भाई ? कम से कम अभी साफ़ कह तो सकते हैं कौन सा ब्लौग? कौन सा चिट्ठा? कौन से मठाधीष? हम नहीं जानते जी आपको !! वैसे ही ब्लॉगिंग से स्तब्ध हैं सत्ताधारी. सत्ताधारी?????? कहाँ हैं सत्ताधारी, कहाँ है सरकार? मिल कर इसका नाम विचारें ! आइये इन्हें पहचानें !! कुछ तो करें..... चलो एक कविता ही सोचो..... सोचो बहुत दूर कही पुल के उस पार या कभी एक प्यारा सा गाँव, जिसमें पीपल की छाँव या दहलीज के उस पार जहाँ से हमने कई बार देखा है समंदर कों नम होते हुए , ...से लौटकर झांकते हैं कि कहीं जिनको छोड़ के गये थे घर में वो तुम्हारे बच्चे और मेरे बच्चे हमारे बच्चों को पीट ने लग गए तो? और वह जीत गए तो? ह्म्म्म !! वैसे बच्चे आजकल के शोले ,हँसगुल्ले हँसने के लिए, जो हिंदी को हेय समझते हैं, भावनाओं के राग नहीं जानते, श्रीमद्भागवतगीता से उन्हें कोई लेना देना नहीं लडेगा कौन इनसे सर पर कफ़न बांध कर ? लेकिन बेचारे जाएँ तो जाएँ कहाँ.... ह्म्फ़.... ह्म्फ़... बहुत हो गयी न ये बकवास ? बस !! !! इतनी मेहनत के बाद काश... एक गरम चाय की प्याली हो.
अदा जी पुछ रही है कहाँ है हमरा घर ??
जब 'इ' आये तो इनसे भी कैसे कहें कि बाथरूम जाना है.....इ अपना प्यार-मनुहार जताने लगे और हम रोने लगे.....इ समझे हमको माँ-बाबूजी की याद आरही है...लगे समझाने.....बड़ी मुश्किल से हम बोले बाथरूम जाना है....उ रास्ता बता दिए हम गए तो लौटती बेर रास्ता गडबडा गए थे ...याद है हमको
अड़बड़िया कड़बड़ऊँची उनकी नाक पूछे हैं वो हाले कहन चलो करनी है बात जीभे कटन चलो ना सुनें जो वो चुपके निकल चलो। | चेतावनी रा चुंग्ट्या : कवि की कविता की ताकत
गिरद गजां घमसांणष नहचै धर माई नहीं | |
हमको हमारी खाक न मिली !नापाक जिन्दगी को कोई पाक न मिली, मुद्दतो से पाला था जहन में इक हसीं ख्याल, | अनूप सेठी की कविता – रोनाबादलों का घुमड़ना और बरस पड़ना जैसा |
क्या हुआ बेटा? ...पापा 'आपके साथ रहना चाहता हूँ'
कुछ दीप कुछ ऎसे भी जगमागतए है
"एक असफल स्टिंग आपरेशन [व्यंग्य] - शक्ति प्रकाश"
आम आदमी : नमस्कार महोदय, मैं शक्ति..
पत्रकार : शक्ति? कपूर तो नहीं हैं ना? हैं हैं हैं ....बैठिये बैठिये, वो तो ऐसे भी पत्रकारों के सामने नहीं आ सकता (पिच्च..) पर आपने रेफरेन्स नहीं बताया?
आम आदमी : जी वो बबलू भाई....
पत्रकार : श्रीवास्तव ? बहुत तगड़ा रेफरेन्स लाये हैं भाई।
आम आदमी : जी वो बबलू भाई बिल्डर सैक्टर ग्यारह वाले|
पत्रकार : तो ऐसे कहिये ना, कैसा है अपना बबलुआ?
आम आदमी : जी अच्छे हैं, पर लगता है बहुत अंतरंगता है आपकी?
रेल दुर्घटनायें : एक नियमित नियति
प्रेतों का उत्सव [इस्पात नगरी से - १९]
अब बारी अतीत के झरोखे की
आज अतीत के झरोखे मे है डा. अरविंद मिश्रा जी के ब्लॉग की कविता आजाद है या पराधीन भारत ?
| सत्यमेव जयते को क्या हो गया है , |
अब " नजर-ए-इनायत "
रामप्यारी का सवाल – 97- |
ब्लाग्जगत मे नये चिट्ठे -
अब दिजिये इजाजत
नमस्कार
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