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Friday, October 30, 2009

सबसे तेज गधा सम्मेलन रिपोर्टम(चर्चा हिन्दी चिट्ठो की)

आज का चर्चा का ये अंक दर्पण शाह और पंकज मिश्रा दोनों की सम्मिलित प्रस्तुति है .....आशा है आपको बेहद पसंद आयेगी ...
सबसे पहले आपको ये बता दे कच्छा  और चढ्ढी में कोई फर्क नहीं होता ये  मै कल पढा .....अब ब्लागजगत में यही सब बताया जा रहा है ...........देखो आगे क्या क्या होगा राम जाने ....राम  नहीं भाई  लिखने वाले जाने ...और हां आप ये मत पूछियेगा कि उस ब्लॉग का लिंक दीजिये ......क्युकी मै दुगा नहीं ...का काहे ये जबरिया है ....तो सुन लीजिये हमतो ....जाने दीजिये किसी की कापी राइट है.........
अब चलिए गधा सम्मलेन में ...अरे नहीं भाई ....हमें तो न्योता न ही नहीं है अपणे ताउजी गए है ....गधा तो ले गए है लेकिन खुद रिपोर्टर की हैसियत से गए है.....पढ़ लीजिये रिपोर्ट .........

जलेबियां खत्म हो गई आते आते : सबसे तेज गधा सम्मेलन रिपोर्टम
image जैसे ही उज्जैन के निकट पहुंचे…तो भांति भांति के, बच्चे बुड्ढे और जवान गधेडे और गधेडियां  मिलने लगे.  रास्ते मे सांवेर नगर पार करते ही खimageबर मिली की बालीवुड के सितारे गधेडे और गधेडियां जैसे की सलमान खान . ऐश्वर्या , अभिषेक और  शाहिद कपूर भी … वहां पहुंच चुके हैं और रिपोर्टिंग के लिये आयोजक गण हमारा और रामप्यारी का ईंतजार कर रहे हैं.  हमने और रामप्यारी ने अपने अपने गधों को कहा कि जल्दी चलो भाई. तो बिचारे वो भी हमारी तरह शरीफ़ थे ..पूरे दम के साथ भाग लिये.

अब हमको चलना है. इस गधेडे और गधेडी की प्रेमलीला का क्या हुआ?  जलेबी नही मिलने पर इस गधेडी प्रेमिका ने इस गधेडे प्रेमी के साथ क्या बर्ताव किया..इसको अगली रिपोर्ट मे देखियेगा. और उसके बाद की रिपोर्टिंग होगी सीधे उज्जैन सम्मेलन स्थल से.

और हां अहमदाबाद से रिपोर्टींग करेंगे  सबसे तेज चैनल के  हमारे सहयोगी श्री संजय बेंगानी….जिनको हम नेट कनेक्शन मिलते ही तुरंत प्रसारित करेंगे…यह रिपोर्ट हम रामप्यारी के खिलौना लेपटोप से भिजवा रहा हूं सो क्वालीटी उतनी अच्छी नही है. कृपया सहयोग करें.

अब समीर जी को तो मै कुछ कहुगा ही नहीं जितना सामान बाधना हो बाध ले :) और निकल पड़े पुल के उस पार से: इलाहाबाद दर्शन पर ……….

imageतीन शर्ट, तीन फुल पेण्ट, एक हॉफ पैण्ट (नदी स्नान के लिए), एक तौलिया, एक गमझा (नदी पर ले जाने), एक जोड़ी जूता, एक जोड़ी चप्पल, तीन बनियान, तीन अण्डरवियरimage, दो पजामा, दो कुर्ता, मंजन, बुरुश, दाढ़ी बनाने का सामान, साबुन, तेल, दो कंघी ( एक गुम जाये तो), शाम के लिए कछुआ छाप अगरबत्ती, रात के लिए ओडोमॉस, क्रीम, इत्र, जूता पॉलिस, जूते का ब्रश, चार रुमाल, धूप का चश्मा, नजर का चश्मा, नहाने का मग्गा, बेड टी का इन्तजाम (एक छोटी सी केतली बिजली वाली, १० डिप डिप चाय, थोड़ी शाक्कर, पावडर मिल्क, दो कप, एक चम्मच), एक मोमबत्ती, माचिस, एक चेन, एक ताला, दो चादर,  एक हवा वाला तकिया

मैं इसलिये हाशिये पर हूँ क्यूँकि

मैं बस मौन रहा और

उनके कृत्यों पर

मंद मंद मुस्कराता रहा!! 

बेहतरीन चिट्ठों की एक बकवास चिट्ठा चर्चा.... (भारत एक गरीब देश है जहाँ अमीर लोग बसते हैं.... की तर्ज़ पर !!)

इतनी बकवास कि, अच्छा हुआ मेरा कोई दोस्त ब्लागर नही है वर्ना कहते हमने वो पढ़ा तो आप इसे भी पढ़ लीजिए... क्यूँ पढ़ लीजिये भाई ? कम से कम अभी साफ़ कह तो सकते हैं कौन सा ब्लौग? कौन सा चिट्ठा? कौन से मठाधीष? हम नहीं जानते जी आपको !! वैसे ही ब्‍लॉगिंग से स्‍तब्‍ध हैं सत्‍ताधारी. सत्ताधारी?????? कहाँ हैं सत्ताधारी, कहाँ है सरकार? मिल कर इसका नाम विचारें ! आइये इन्‍हें पहचानें !! कुछ तो करें..... चलो एक कविता ही सोचो..... सोचो बहुत दूर कही   पुल के उस पार  या कभी एक प्यारा सा गाँव, जिसमें पीपल की छाँव  या दहलीज के उस पार जहाँ से हमने कई बार देखा है समंदर कों नम होते हुए , ...से लौटकर झांकते हैं कि कहीं जिनको छोड़ के गये थे घर में वो तुम्हारे बच्चे और मेरे बच्चे हमारे बच्चों को पीट ने लग गए तो? और वह जीत गए तो? ह्म्म्म !! वैसे बच्चे आजकल के शोले ,हँसगुल्ले हँसने के लिए, जो हिंदी को हेय समझते हैं, भावनाओं के राग नहीं जानते, श्रीमद्भागवतगीता से उन्हें कोई लेना देना नहीं   लडेगा कौन इनसे सर पर कफ़न बांध कर ? लेकिन बेचारे जाएँ तो जाएँ कहाँ.... ह्म्फ़.... ह्म्फ़... बहुत हो गयी न ये बकवास ? बस !! !! इतनी मेहनत के बाद काश... एक गरम चाय की प्याली हो.

अदा जी पुछ रही है कहाँ है हमरा घर ?? 

जब 'इ' आये तो इनसे भी कैसे कहें कि बाथरूम जाना है.....इ अपना प्यार-मनुहार जताने लगे और हम रोने लगे.....इ समझे हमको माँ-बाबूजी की याद आरही है...लगे समझाने.....बड़ी मुश्किल से हम बोले बाथरूम जाना है....उ रास्ता बता दिए हम गए तो लौटती बेर रास्ता गडबडा गए थे ...याद है हमको

अड़बड़िया कड़बड़

ऊँची उनकी नाक
रस्ते नमन चलो

पूछे हैं वो

हाले कहन चलो

करनी है बात

जीभे कटन चलो

ना सुनें जो वो

चुपके निकल चलो।

चेतावनी रा चुंग्ट्या : कवि की कविता की ताकत

पग पग भम्या पहाड,धरा छांड राख्यो धरम |
(ईंसू) महाराणा'र मेवाङ, हिरदे बसिया हिन्द रै ||1||


गिरद गजां घमसांणष नहचै धर माई नहीं |
(ऊ) मावै किम महाराणा, गज दोसै रा गिरद मे ||3||
हमको हमारी खाक न मिली !

नापाक जिन्दगी को कोई पाक न मिली,
दिल-ए-गम को हमारे कोई धाक न मिली !image
दे पाये कहीं पर वास्ता, जिसके प्यार का,
बदकिस्मती कह लो कि वो इत्तेफाक न मिली !!

मुद्दतो से पाला था जहन में इक हसीं ख्याल,
कि लिखवाएंगे इक सुन्दर नज्म कभी तो!
ज्यूँ श्यामपट्ट, दिल टाँगे भी रखा सीने पर,
लिखने को मगर इक अदद चाक न मिली !

अनूप सेठी की कविता – रोना

बादलों का घुमड़ना और बरस पड़ना जैसा
सदियों पुराना जुमला भी रोने के मर्म को छू नहीं पाताimage
पर्वत का रोना इस तरह कि
बरसात में जैसे नसें उसके गले की फूल जाएं
कहना भी रोने को ठीक से बता नहीं पाता
रोना तो रोना
रोने के बाद का हाल तो और भी अजब है
कोई ईश्वर जैसे जन्म ले रहा हो
बारिश के बाद भी धुंधले सलेटी

क्या हुआ बेटा? ...पापा 'आपके साथ रहना चाहता हूँ'

दिनांक : २४-अक्तूबर-२००९

image प्रातः अलार्म के पांच बार बजाने के बाद, बिस्तर से उतरने का मन बनाया | लेटे-लेटे ही अपनी हथेलियों को देख "कराग्रे वसते लक्ष्मी, करमुले ..." मंत्र पढा, बच्चों का चेहरा देखा (मैं प्रातः सबसे पहले बच्चे का ही चेहरा देखता हूँ) | यहाँ तक तो सब कुछ सामान्य था पर एक चौकानेवाली बात हुई - आज मेरे बड़े लड़के 'अक्षत' ने पैर छू कर प्रणाम किया | मैंने समझा शायद मेरी धर्म पत्नी ने इसे ऐसा करने को कहा होगा, पर मैं गलत था | पूछा क्या हुआ बेटा? बालक का सरल सुलभ जवाब - पापा 'आपके साथ रहना चाहता हूँ मैं'

कुछ दीप कुछ ऎसे भी जगमागतए है
दुसरे दिन कुछ लपंट लोगो ने ओर उन सफ़ेद पोशो ने अपनी करतुत छिपाने के लिये उस लडकी के बारे पुछ ताछ शुरु कर दी, ओर अंट शंट बकना शुरु कर दिया, जब वो बातraj bhatiya jee घर मै लोगो के कानो मै पडी तो बुढिया ने कहा कि बिटिया तुझे इस घर स कोई नही निकाल सकता, लोगो को बक बक करने दो...
हां कुछ बाते लिखना भुल गया कि  कई समाज सुधारको ने , नारी संगठनो ने इन पर केस किया कि एक बुढे ने नाबालिग लडकी से शादी कर के हिदु समाज का मुंह काला कर दिया, पहली बीबी के होते हुये दुसरी बीबी से शादी की, लेकि उस परिवार का कहना है कि हमे हर जगह हमारे सच ने बचाया,
"एक असफल स्टिंग आपरेशन [व्यंग्य] - शक्ति प्रकाश"

आम आदमी : नमस्कार महोदय, मैं शक्ति..
पत्रकार : शक्ति? कपूर तो नहीं हैं ना? हैं हैं हैं ....बैठिये बैठिये, वो तो ऐसे भी पत्रकारों के सामने नहीं आ सकता (पिच्च..) पर आपने रेफरेन्स नहीं बताया?
आम आदमी : जी वो बबलू भाई....
पत्रकार : श्रीवास्तव ? बहुत तगड़ा रेफरेन्स लाये हैं भाई।
आम आदमी : जी वो बबलू भाई बिल्डर सैक्टर ग्यारह वाले|
पत्रकार : तो ऐसे कहिये ना, कैसा है अपना बबलुआ?
आम आदमी : जी अच्छे हैं, पर लगता है बहुत अंतरंगता है आपकी?

रेल दुर्घटनायें : एक नियमित नियति

image अब से एक दशक पहले रेलवे से जुडी सभी कमियों, कमजोरियों, दोषों ,अपूर्ण योजनाओं और नहीं पूरे किये जा सकने वाले सुधार उपायों के लिये बजट का नहीं होना या संस्धानों की कमी को ही जिम्मेदार ठहरा कर इतिश्री कर ली जाती थी । किंतु अब जबकि ये प्रमाणित हो गया है कि रेलवे न सिर्फ़ लाभ में बल्कि बहुत ही मुनाफ़े में चल रही है तो भी सुरक्षित यात्रा के अनिवार्य लक्ष्य को प्राप्त नहीं कर पाना बहुत ही अफ़सोसजनक बात है ।और बहुत बार ऐसी दुर्घटनाओके बाद जांच आयोगों की रिपोर्टों, समीक्षा समितियों की अनुशंसाओं से ये बात बिल्कुल स्पष्ट है कि भारतीय रेलवे न तो इन दुर्घटनाओं से कोई सबक लेती है और न ही भविष्य के लिये कोई मास्टर प्लान तैयार कर पाती है। इसे देख कर तो ऐसा ही लगता है कि रेलवे प्रशासन के लिये सुरक्षित यात्रा कोई मुद्दा है ही नहीं, सो उस पर क्यों सोचा, विचारा जाए।
प्रेतों का उत्सव [इस्पात नगरी से - १९]
image समुद्री डाकू का यह भूत हमसे मिलने बड़ी दूर से आया है।

अब बारी अतीत के झरोखे की

आज अतीत के झरोखे मे है  डा. अरविंद मिश्रा जी के ब्लॉग की कविता आजाद है या पराधीन भारत ?

सत्यमेव जयते को क्या हो गया है ,
महाकाव्य का अर्थ ही खो गया है
वोटों के खातिर जुटे हैं जुआड़ी ,
हुयी द्रोपदी आज जनता विचारी
हालत जो पहुँची है बद से भी बदतर,
कहाँ चक्रधारी कहाँ हैं धनुर्धर
................................................
अस्मिता खोता भारत ,महाभ्रष्ट भारत
आजाद है या पराधीन भारत
महाभारती का महाघोष भारत
करो या मरो मन्त्र फिर से लो भारत !
डॉ .राजेंद्र प्रसाद मिश्र

अब " नजर-ए-इनायत "

रामप्यारी का सवाल – 97-image
मेरा फोटोआनेवाले दो महीने महत्‍वाकांक्षी युवाओं के लिए बडे खास रहने चाहिए !!-युवा वर्ग पर किसी न किसी प्रकार के कार्यक्रम का दबाब बढता चला जाएगा। 2 , 3 , 8 , 9 , 10 , 17 , 18 , 19 , 29 , 30 नवम्‍बर तथा 1 , 6 , 7 दिसम्‍बर को यानि इन खास तिथियों को मंगल ग्रह अधिक प्रभावी रहेगा।

साधो यह हिजडों का गाँव-4--व्यंग्य-पद  (11) साधो अब मसखरे पलेंगे। व्यंग्य रखो अंटी में अपनी, मंचों पर चुटकुले चलेंगे। जो नैतिक हैं उन लोगों से, लंपट-पापी बहुत जलेंगे। सच्चे सदा रहेंगे वंचित, झूठे सुख में नित्य ढलेंगे

माइक्रो पोस्ट : सत् प्रेरणा और दुष्प्रवृत्तियाँ प्रत्येक मनुष्य के अंतःकरण में छिपी रहती है...--माइक्रो पोस्ट : सत् प्रेरणा प्रत्येक मनुष्य के अंतःकरण में छिपी रहती है और दुष्प्रवृत्तियाँ भी उसी के अन्दर होती है . अब यह उसकी अपनी योग्यता बुद्धीमत्ता और विवेक पर निर्भर करता है की वह अपना मत देकर जिसे

दोस्ती की एक अनोखी मिसाल है ये मूर्ती ---पिछली पोस्ट में मैंने एक जिज्ञासा को शांत करने का प्रयास किया था, इस सवाल के साथ की दिल्ली के नेहरु पार्क में लेनिन की मूर्ती क्यों स्थापित है. ज़वाब में बहुत सारे दोस्तों ने टिपण्णी की।

‘ये लड़का पूछता है, अख्तरुल-ईमान तुम ही हो?

खाए-अघाये लोग और 'आम-धन का खेल' !*जाहिर है कि यह बात उन लोगो के लिए कोई मायने नहीं रखती जो कामरेड के कहने पर दो किलो चावल के लिए पुलिस गश्ती दल के वाहन के नीचे विस्फोटक लगा कर उसे उड़ा देते है, यह बात उन लोगो के लिए

रिश्‍तों की अग्नि में ...मैं लकड़ी होता और कोई मुझे जलाता, तो जलकर मैं इक आग हो जाता, डाल देता कोई उन जलते हुये अं

दिखने वाली शायरी यादों के लिये (Visual Shayari Yadoon ke liye)-

हमने कई बार देखा है समंदर कों नम होते हुए !लोग किनारे की रेत पे जो अपने दर्द छोड़ देते है वो समेटता रहता है अपनी लहरें फैला-फैला कर हमने कई बार देखा है समंदर कों नम होते हुए जब भी कोई उदास हो कर आ जाता है

ब्लाग्जगत मे नये चिट्ठे -

हमारा खत्री समाजimage

 

 

[hindi.jpg]महफ़िल ए हिंदी

अब दिजिये इजाजत

नमस्कार

Friday, October 23, 2009

अब तक छप्पन.(चर्चा हिन्दी चिट्ठो की )

अंक : 56My Photo
प्रस्तुतकर्ता : दर्पण साह "दर्शन "


अब तक छप्पन....
आज जब चिट्ठा चर्चा करने की सोची और ब्लोगवाणी, चिट्ठाजगत में विचरण किया तो एक चीज़ जो मन में 'क्लिक' हुई  हर  पोस्ट पढने  पर,  वो था चारों ओर बदलाव, अजीब सा...
..अच्छा या बुरा ? पता नहीं !! पता करना भी नहीं, क्यूंकि कुछ चीजें अच्छी या बुरी नहीं होती केवल होती हैं . और निरंतर होती हैं, ये बदलाव केवल ब्लॉगजगत में ही नहीं (ब्लॉग जगत तो अपने आप में ही लेखन शैली में हुआ परिवर्तन है) अपितु हर जगह दिखा, हाँ हाँ ये सत्य है की परिवर्तन तो अपरिवर्तनीय है, पर परिवर्तन अबकी बार बहुत 'Loud' था, या शायद मुझे लगा आप लोग भी बताएं

दोहे बदल रहे हैं
तन की सीमा से भली मन की सीमा जान।
मन को वश में कर सके वही असल इन्सान।।
आशा की किरणें जगी भले अंधेरी राह।
नीरवता सुख दे जिसे गजब है उसकी चाह।।
अभिनय करने में यहाँ नेता बहुत प्रवीण।
भाषण, आश्वासन सहित खींचे चित्र नवीन।।
गीत बदल रहे हैं
बिक चुके इन्साफ ने जब फैसला उसका किया,
सुन के वो तो हँस दिया मुंसिफ मगर रोने लगा.
थक गया पढ़ के खबर, सच्चाइयों के क़त्ल की,
कल से कुछ उम्मीद कर वो आज फिर सोने लगा.
कलरव  बदल रहे है
नारी.......
त्याग और उत्तरदायित्वों से सराबोर
परंपरायें भी सिर चढ़ के बोलती हैं
हां तुम्हें नहीं मुंह मोड़ना
बरकरार रखना है अपनी परंपराओं को
बरबस ही कैसे बच सकती है
कलम बदल रही है.
पनीली आखों में है
खवाब कई ...
कोई संजो लेता ..
इन में संवरने वाला
थरथराते लबों पर
ठहरा है लफ्जों का सावन
कोई तो होता ..
इनमें भीगने वाला
यायावरी बदल रही है
हल्द्वानी से नैनीताल पहुंचने में हमें लगभग 11 बज गये। भाईसाब ने घर तक छोड़ने के लिये कहा पर मैंने मना कर दिया। रात का चौकीदार सीटी पे सीटी बजाये जा रहा था पर असली समस्या तो तब खड़ी हुई जब पड़ोस के सारे कुत्ते एक साथ इकट्ठा हो गये और भौंकना शुरू कर दिया।

साक्षात्कार बदल रहे हैं.
दुनियां मे सबसे निकृष्ट चीज क्या है?
ताऊ मन ही मन भुनभुनाते हुये बोला -- हुजुर निकृष्ट चीज भी कल सुबह आपकी पेशे खिदमत करुंगा. और ताऊ वहां से सोचते हुये निकल लेता है.
समालोचना बदल रही है

सच बात तो यह है कि ज्ञान का सपूर्ण स्त्रोत है ‘श्रीमद्भागवत गीता’। पर हमारे कथित धार्मिक ज्ञानियों ने उसका केवल सन्यासियों के लिये अध्ययन करना उपयुक्त बताया है। यही कारण है कि काल्पनिक फिल्मों के नायक और नायिकाओं को देवता के रूप में प्रतिष्ठत कर दिया जाता है।

व्यंग बदल रहे हैं
कार्टून:- देखा पट्ठे के दिमाग़ का कमाल !
मौन बदल रहा है

चुप सी रहा करती है
एकदम निःशब्द आँखें हैं
लाख निचोड़ लो,
नहीं मिलता एक भी सुराग
आवाज़ बदल रही है

ब्लांग जगत मै मेने कई ऎसे ब्लांगर देखे है जो खाम्खा मै दुसरो से पंगा लेते है, बिन बात दुसरे के बारे सही बात भी गलत बात सिद्ध करना चाहते है, अगर कोई टिपण्णी थोडी आलोचक ढंग से दे देते, टिपण्णी देने वाले या लेने वाले को तो कोई दिक्कत नही होती लेकिन किसी तीसरे को पता नही क्यो जलन होने लगती है.
धर्म बदल रहा है.

आज मौक़ा मेरा आया है
चलो तोड़ डालें उसका सर
चलो जला डालें उसका घर
उसका धर्म मुझसे अलग है

भक्त बदल रहे हैं

सूर्य षष्ठी व्रत की प्रमुख कथा 'भविष्योत्तर पुराण' में संगृहीत है. सतयुग में 'शर्याति' नाम के राजा की 'सुकन्या' नामक पुत्री थी। एक दिन जब राजा शिकार खेलने वन में गए थे तो सुकन्या ने सखियों के साथ भ्रमवश तपस्यारत 'च्यवन' ऋषि की दोनों आँखें फोड़ दी थीं । मिट्टी से शरीर के ढँक जाने से च्यवन ऋषि एक टीले की भांति लग रहे थे और उनकी दोनों आँखें जुगनुओं की तरह चमक रही थीं। सुकन्या समझ न सकी और उत्सुकतावश काँटों से उसने दोनों आँखें फोड़ दीं। इस पाप से राजा एवं उनकी सेना का मल-मूत्र स्तंभित हो गया। फिर राजा शर्याति पश्चातापवश अपनी कन्या के साथ ऋषि के पास पहुंचे और अपनी कन्या का दान उन्हें कर दिया।
आराध्य बदल रहा है.

राम उजागिर की दीवाली इस बार उजियारी नहीं रही -नरक चतुर्दशी को ही नरक गामी हो गया वो ! बेटे ने मुम्बई से आकर धूम धाम से तेरही आयोजित की -अभी कल ही तो तेरही थी उसकी ! मेरे मुंह से निकल पडा चलो गाँव का एक काला धब्बा तो मिटा ! उसकी मीठी मीठी बाते और विनम्रता भी याद आई तो कुछ मिश्रित विचार भी मन में आये ! मगर हठात उन्हें रोका ! जो गलत सो गलत ! मुझे जैसे कुछ याद हो आया ! मैंने लोगों से पूंछा कि वह तो लखनऊ जेल में था न ? पुष्टि में लोगों ने सिर हिलाया और याद भी दिलाई कि डायिजेपाम की गोली के नकली निकल जाने से वह अभी कुछ मांह पहले ही तो आजमगढ़ स्टेशन पर यात्री के होश आ जाने से भीड़ द्बारा धर दबोचा गया था ! तब वह मरा कैसे ? शायद जमानत पर छूट गया था -लाश बड़ी ही विकृत अवस्था में सुल्तानपुर में पायी गयी ! भाईयों ने लाश की शिनाख्त करके पंचनामा आदि करा कर बनारस में दाह संस्कार किया पूरे विधि विधान से ! "हूँ " मेरी सक्षिप्त प्रतिक्रिया थी ! एक काले युग का अंत तो हुआ !
आराधना बदल रही है.

राजा के गहरे दुःख से द्रवित होकर आकाश से एक ज्योतियुक्त विमान में ब्रह्मा की मानस पुत्री 'षष्ठी देवी' उतरीं एवं अपने स्पर्श मात्र से शिशु को जीवित कर दिया। राजा प्रसन्न हो गए एवं देवी की स्तुति करने लगे। तब से षष्ठी तिथि की पूजा की परम्परा आरम्भ हो गयी.

परिभाषा बदल रही हैं.
तुम कहते हो कि मुझे दिखता नही कुछ प्रेम के सिवा।
मैंने आज कुछ और भी देखा।
साइन बोर्ड इक दुकान का,
जिसपे लिखा था तुम्हारे नाम जैसा इक नाम.......

फलसफे बदल रहे हैं

ये कैसे सारी की सारी अवाज़ें जिंदा हुईं,
ये कैसे सारे पुराने दरख्त फिर हैं हरे,
ये कैसे उठ के खड़े हैं वो पुराने मंज़र,
ये कैसे आँख में पुरनम से ख़ाब फिर हैं भरे।

वास्तविकता बदल रही है

आज और दिनों की अपेक्षा मुख्य मार्ग वाले बाज़ार में कुछ ज्यादा ही भीड़ भड़क्का है | कुछ वार त्योहारों का सीज़न और कुछ साप्ताहिक सोम बाज़ार की वजह से | भीड़ में घिच -पिच के चलते हुए ऐसा लग रहा है जैसे किसी मशहूर मन्दिर में दर्शन के लिए लाइन में चल रहे हों | इतनी मंदी के दौर में भी हर कोई बेहिसाब खरीदारी को तत्पर | सड़क के दोनों तरफ़ बाज़ार लगा है | अजमल खान रोड पर मैं जैसे-तैसे धकेलता-धकियाता सरक रहा हूँ | भीड़ में चलना मुझे सदा से असुविधाजनक लगता है, पर क्या करें, मज़बूरी है | अचानक कुछ आगे खाली सी जगह दिख पड़ी | चार-छः कदम दूर पर एक पागल कहीं से भीड़ में आ घुसा है | एकदम नंग-धड़ंग, काला कलूटा, सूगला सा |


स्वप्न बदल रहे हैं .
इस बीच कुछ ऐसे बेहतरीन मित्र बन गये जिनकी तलाश मेरे स्वप्न में थीं। ब्लोग मेरे रोज़मर्या जीवन का हिस्सा बन गया। जब भी उदास हुआ और ब्लोग सफर किया तो उदासी भाग गई। थकान से टूटते शरीर की 'आरोमा थैरेपी' इसी ब्लोग ने की। विचारों के तूफान को यहीं शांत किया। अपनी अल्प मतिनुसार शब्दों के साथ यहीं खेला। हां, मुझे ब्लोग पर देख कइयों ने इसे बकवास कहा। क्यों टाइम पास करता है? इससे तुझे क्या मिल जायेगा? समय क्यों खर्च करता है? अरे दुनिया कितनी आगे बढ गई है, लोग पैसा कमाने की सोचते हैं, तू इसमे अपना समय बिगाड रहा है।


प्रेम बदल रहा है
तुम्हें देखती हूँ तो लगता है ऐसे
के जैसे युगों से तुम्हें जानती हूँ
अगर तुम हो सागर -२
मैं प्यासी नदी हूँ
अगर तुम हो सावन मैं जलती कली हूँ
पिया तुम हो सागर

विरह बदल रहा है
तुम तक पहुँचने से पहले
लड़खड़ा कर गिर गए कुछ शब्द
घायल शब्दों की झिर्री से
बिखर गयी चाहत
बह गए एहसास
कुछ अधूरे स्वप्न
मिलन की प्यास
उफ़ ......... इन घायल शब्दों को
बैसाखी भी तो नहीं मिलती
मित्र बदल रहे हैं
और मित्रता भी बदल रही है

शिक्षा बदल रही है
>तो इस प्रेम पुजारी ने इस वर्ष आई आई . टी की प्रवेश परीक्षा के लिए अपनी पाँचवे नंबर की प्रेमिका के शहर का सेंटर भरा था, विभिन्न परीक्षाओं के फॉर्म भरना उसकी एकमात्र हॉबी थी, पोलीटेक्निक, बी .टेक . ,बी .बी .ए. के .के सभी फॉर्म "ना काहू से दोस्ती ना काहू से बैर " वाले भाव से भरे हुए थे ,ये फॉर्म उसके और उसकी पुरानी गर्लफ्रेंड्स, जो शादी के पश्चात अपने - अपने पतियों के साथ विभिन्न शहरों में चली गईं थीं, के मध्य सेतु का काम करते थे. यूँ शादी की उम्र तो लव गुरु की भी हो चुकी थी, लेकिन हर कक्षा में दो - दो साल रहने के कारण वह अभी भी स्कूल में ही बना हुआ है कभी कभी यूँ ही पर्यटन के उद्देश्य से वह गर्मियों के मौसम में वह ठंडी जगह, और ठण्ड के दिनों में गर्म जगह का सेंटर भरता था.
शिक्षक बदल रहे हैं,
विद्यार्थी तो बदल ही रहे हैं,
लड़ा तूफ़ान से वो खुश्क पत्ता इस तरह दिन भर
हवा चलने लगी है चाल अब बैसाखियों वाली
बहुत दिन हो चुके रंगीनियों में शह्‍र की ’गौतम’
चलो चल कर चखें फिर धूल वो रणभूमियों वाली
{1222-1222-1222-1222}

...ग़ज़ल यदि कहने लायक और जरा भी दाद के काबिल बनी है तो गुरूदेव के इस्लाह और डंडे से।
साथ में पाठशाला बदल रही है
 
एहसास बदल रहे हैं,
भावनाएँ बदल रही है
अभिव्यक्ति बदल रही है
जीवन की मुस्कान बदल रही है.



समाज बदल रहा है.
राजनीति बदल रही है
बचपन  बदल  रहा  है
भारत बदल रहा है...


 
अब आज का "अतीत के झरोखे की " प्रस्तुती
आज के अतीत के पोस्ट पढ़कर आप वाकई मस्त हो जायेगे , ये पोस्ट है ताउजी  की ताऊ द्वारा होली पर पोस्ट की छीछालेदर
मस्त है पूरी पढ़े
सबसे पहले सही जवाब लेकर आये "काका मौदगिल" :-
cartoon-03-kaka (1)
मैं तो बांसुरी बजाऊं रे.. बिना बांसुरी केAnup
हो जी रे खूटे पर बंध जाऊं रे बिना रस्सी के….
अब काका मौदगिल भांग का पौधा नही बतायेंगे तो कौन बतायेगा? उनको तो बिना छाने ही दो गोली भांग का नशा रहता है. इसी लिये खूंटे पर बंधे २ कविता रच लेते हैं और बिना बांसुरी के बहुत ही जोरदार तान छेडते हैं.
अब " नजर-ए-इनायत "
रामप्यारी का सवाल – 90-हाय….आंटीज..अंकल्स एंड दीदी लोग..या..दिस इज मी..रामप्यारी..
कब टूटेगी ये बेरी !-नमस्कार मित्रों ! फिर जम गयी है चौपाल। आज चौपाल में हम बात करेंगे हमारी बेरियों की। बेरी जो कब से जकर रक्खी हमें। हमारी संस्कृति को। हमारी अभिव्यक्ती को। जी हाँ ! हम कर रहे हैं, भाषिक बेरी का
स्वाभिमान का उदघाटन किया गया-सरकारी हैस्कुल करिम्बा के अई टी एवं हिन्दी विभाग संयुक्त रूप से तैयार किए गए स्वाभिमान नामक ब्लॉग का उदघाटन मन्नार्कड़ ब्लोक पंचायत के सदस्य श्री चामी मास्टर ने की । प्रस्तुत समारोह में करिम्बा ग्राम पंचायत के अध्यक्ष श्रीमती मेरी टीचर ने भी भाग ली ।
गुलाबी रंगत मौसम में भी है, माहौल में भी-
भारतीय ओबामा 'राहुल गाँधी' की फ़तेह-तीन राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस 3-0 से जीत दर्ज करने के बेहद करीब पहुंच चुकी है। महाराष्ट्र में वह बहुमत के करीब है,
हिन्‍दी चिट्ठाकारी : एक और नई चाल? भाग एक-हफ़्तावारी मित्रो, गयी दिवाली की अंग्रेज़ी तर्ज पर (विलेटेड) और छठ की ताज़ी शुभकामनाएं! दोस्‍तों, शिमला स्थित भारतीय उच्‍च अध्‍ययन संस्‍थान द्वारा आयोजित हिंदी अध्‍ययन सप्‍ताह के दौरान आखिरी दिन
पत्रकारों का टूटता भ्रम-क दौर था जब पत्रकार निजी न्यूज चैनलों में नौकरी के लिए लालायित रहा करते थे, किसी भी तरह किसी न्यूज़ चैनल की नौकरी पा लेना चाहते थे.
बेसुध की सुधि लेवे कौन?-कंकरीली - पथरीली राह पर; एक बटोही चलते - चलते थक गया, जो कुछ उसके पास था वह लुट गया, समय की तपिश में सब झुलस गया. नियति के प्रहार से हो क्षत - विक्षत; रिक्त झोली फैला कर वह पूछता, हे विधाता
महात्‍मा गांधी जी ने पत्र लिखा है, आप भी पढि़ए-प्‍यारे चेतन, एक भगत तो चेतन है । यह जानकर अच्‍छा लगा और इतना चेतन कि उसने मुझे ई मेल के इस क्रांतिकारी दौर में चिट्ठी लिखकर नि:संदेह एक क्रांतिकारी कार्य ही किया है। यह भारत की चेतनता है
डेज़ी तुम्हें आखिरी सलाम! तुम बहुत, बहुत याद आओगी!-पिछली जनवरी में मेरा भिलाई जाना हुआ था। दो रात और तीन दिन पाबला जी के घर रहना हुआ। वहीं उन की पालतू डेज़ी से भेंट हुई। वह उन के परिवार की अभिन्न सदस्या थी। दीवाली पर पटाखों से उत्पन्न धूंएँ और ध्वनि के प्रदूषण ने उसे बुरी तरह प्रभावित किया
पहली पोस्ट अमर उजाला में तो दूसरी दैनिक आज समाज में,, कैसे मानूं कि गंभीर लेखन कोई पसंद नहीं करता-मैंने जब ये नया ब्लोग बनाया था तो ...जैसा कि पहले ही कह चुका हूं कि सिर्फ़ एक ही मकसद था।सबकी शिकायत थी कि यहां ब्लोग्गिंग को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है और कोई गंभीर विषयों को नहीं उठा रह है
बालक-हर पल मांगे ध्यान तुम्हारा ध्यान न दो ,रो -रो घर भरे सारा नटखट बचपन को पहचानो बालक की जरुरत को जानो मै छोटा सा बालक हू माँ का आँचल ही पहचानू कदमो की आहात को जानू साँसों की खुशबु को पहचानू
लो आ गया विंडो 7-
आज का विचार : समय ही जीवन की आवश्यक संपत्ति है....-समय ही जीवन की आवश्यक संपत्ति है . दुनिया के बाजारों में से अभीष्ट वस्तुएँ समय और श्रम का मूल्य देकर ही खरीदी जाती है . प्रत्येक क्षण को बहुमूल्य मन जाए और समय का कोई भी अंश आलस्य-प्रमाद में नष्ट न होने पे इसका पूरा - पूरा ध्यान रखा जाए

  ख़ाक-ए-शायरी .....हिंदी शायरी इंग्लिश में...!!!क्या आपने कभी हिंदी की शायरी अंग्रेजी में पढ़ी हैं ??? क्या आप पेट पकड़ कर हंसने को तैयार है तो ठिठोली पर आपके लिए पेश है ख़ाक-ए-शायरी के अर्न्तगत...... शायरी की ख़ाक.....उप्प्स  मतलब अच्छी अच्छी शायरी
तेरी जीत में मेरी हार है-कैसे अपने दिल को मनाऊं मैं, कैसे कह दूं कि तुझसे प्यार है, तू सितम की अपनी मिसाल है, तेरी जीत में मेरी हार है। तू तो बांध रखने का आदी है, मेरी सांस-सांस आजादी है, मैं जमीं से उठता वो नग्मा हूं,
कुंठित ब्लागर, बिगड़ैल साँड़ और टिप्पू चच्चा में से कौन ज्यादा खतरनाक है?-हम कोई मगरुरवा त हैं नही की बिल मा घुस के बैठ जायेंगे. चच्चा अगर गलती कर देत हैं त माफ़ी मांग लेत है पर मुंह जोरी अऊर किसी का इज्जत नाही खराब करत हैं.
खुशदीप जी, आप सुझाये और हम न माने ऐसे तो हालात नहीं ...
जब चिट्ठा चर्चा बदल रही है और हम बदल रहे है तो फिर आपका टिपयाना क्यूँ नहीं बदलेगा भला ? है ना ? तो फिर टिपयाइए ना...
(टिप्पू चाचा सबको देख रहे हैं)
 
 

Saturday, October 17, 2009

ब्लाग जगत की मधुशाला(चर्चा हिन्दी चिट्ठो की)

sankranti

independance

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अंक –50 प्रस्तुत कर्ता -दर्पण शाह "दर्शन "


चर्चा परिवार के सदस्य---


HimanshuMy PhotoMy PhotoMy PhotoMy Photoनमस्कार ,चर्चा हिन्दी चिट्ठो के इस पचासवे अंक और इस मंच पर अपने पहले अंक में .
आज दीपावली के दिन का चर्चा मेरे नाम है तो मै सोचा क्यों न कुछ नया आयाम पेश किया जाय .....तो लीजिये प्रस्तुत है ब्लाग जगत की मधुशाला .....आपको पसंद आयेगी ऐसी आशा है ..
आप सभी को मेरे और पूरे चर्चा मंच की तरफ से दीपावली की शुभकामना ..
खुशी के बात यह है के हमारे और शास्त्री जी के बाद दो और हमारे ब्लागजगत के गंभीर लेखक श्री हिमांशु जी और श्री हेमत कुमार जी भी इस परिवार से जुड़ गए है .... जल्द ही सब अपने नियत समय के अनुसार चर्चा करेगे ......
धन्यवाद

//भागवत कथा बन मुरली आई साथ लिए कर में एकोहम,

जिनमें वह छलकाती लाई दिल की बात , कुछ मेरी कलम ।
अर्जुन के संग कर संगत उसके
सारथी कहलाए,
देखो कैसे नाच नचाता
समय चक्र -अगड़म बगड़म //1//

//ब्लॉग पथ में चलता हूँ मैं अनवरत, निरंतर,
किस पथ से जाऊं असमंजस में हूँ मैं दफ़ातन ,
अलग अलग राज बतलाते सब,
प्राची के पार जो जाना है,
पाल ले एक रोग नादां ,पा जायेगा मानसिक हलचल//2//

//लाल सुरा की धार लपट सी आँखों में हैं स्वप्न मेरे ,
फेनिल मदिरा है मत इसको कहना बिन पिए चलें ।
दर्द अदा है, इस मदिरा का
चिट्ठा चर्चा साक्षी है,
पीडा में आनंद अगर है तो चलो व्योम के पार चलें
//3//

//धर्मग्रन्थ सब जला चुकी है, जिसके अंतर का झोखा,
मंदिर, मसजिद, गिरिजे, गर लगते हैं तुमको धोखा।
पंडित, मोमिन, पादिरयों के ऊपर
भड़ास निकाल चुके,
कर सकती है आज तुम्हारा स्वागत मेरा '
झरोखा//4//

//बने पुजारी प्रेमी साकी, गंगाजल पावन पिया,
रहे जलता अविरत गति से मधु के प्यालों का ये दिया ।
'और लिखे जा, और पढ़े जा, इसी मंत्र का जाप करे,
मैं उन्मुक्त आवाज़ बन बैठूं, मंदिर हो यह
फुरसतिया//5//


//सब मिट जाएँ, bani rahegi प्राइमरी का मास्टर की paath -salla ,
सूखें सब रस, बने रहेंगे, किन्तु, हलाहल औ'
रांची हल्ला
धूमधाम औ' चहल पहल के स्थान सभी सुनसान बनें,
झगा करेगा अविरत महाशक्ति, जगा रहे
क़स्बा - मोहल्ला//6//

//हरा भरा रहता हिन्द युग्म जग पर पड़ जाए पाला,
वहाँ मुहर्रम का तम छाए, यहाँ
रचनाकार की ज्वाला।
स्वर्ग लोक से सीधी उतरी वसुधा पर, दुख क्या जाने,
पढ़े मर्सिया दुनिया सारी, ईद मनाती
चोखेर बाला//7//


//बहुतों के सिर चार दिनों तक चढ़कर उतर गई हाला,
बहुतों के हाथों में दो दिन छलक झलक रीता प्याला ।
पर बढ़ती तासीर सुरा की,
मेरे अस्तित्व के,आरम्भ से ही,
और पुरानी होकर मेरी और नशीली
मधुशाला //8//

//स्वयं नहीं करता , औरों को, किन्तु दे देता tricks,
स्वयं नहीं छूता, औरों को, पर पकड़ा देता mouse clicks ।
यही कई अच्छे चिट्ठों से मैंने यहाँ पे सीखा है,
स्वयं नहीं लिखता , औरों को पर देता
हिंदी blog tips //9//


//बड़े-बड़े नाज़ों से मैंने पाली है साकीबाला,
किलत
परिकल्पना का ही इसने सदा उठाया है प्याला ।
सच शरणं ही रखना इस मेरी ज़िन्दगी को,
'
अर्श' , तुम्हारे हाथों में अब सौंप रहा हूँ कबाड़खाना//10//

//'मय' का करके मंथन दिया अब नाम गया उसको, 'मसिजीवी' ,
'मीना' को '
मनु-उवाच' दिया 'सागर' को नाम गया ' उड़नतश्तरी ' ।
क्यों न मौलवी चौंकें, बिचकें वीर बहुटी पंडित जी,
'मय-महिफल' अब अपना ली है मैंने करके
घुघूती बासूती//11//

//एक बरस में, एक बार ही जगती होली की ज्वाला,
एक बार ही लगती बाज़ी, जलती दीपों की माला ।
दुनियावालों, किन्तु,
कोई मेरे दिल से पूछो
दिन को होली, रात दिवाली, रोज़ मनाता
नौ दो गयारह //12//

सुन, कलकल़ , छलछल़ प्रखर दैनन्दिन गिरती प्यालों में हाला,
सुन,ताऊ मेरे चल वितरण करती मधु साकीबाला,
दुर नहीं शब्दों का दंगल, चार कदम अब चलना है,
चहक रही, मेरी रचनाएँ !, महक रही, ले, मधुशाला।।13।

मेंहदी रंजित मृदुल हथेली पर माणिक मधु का प्याला,
अंगूरी GULDASTE - E - SHAYARI डाले स्वर्ण वर्ण साकीबाला,
क्वचिदन्यतोअपि, जामा नीला डाट डटे पीनेवाले,
मुम्बई टाईगर से होड़ लगाती आज रंगीली मधुशाला।।14।

//अल्पना वर्मा कलम पकड़ कर , व्योम के पार चली
सेहर जी है कह रही कलम परम मित्र, प्रिय सखी मेरी..
सीमा गुप्ता बता रही है , भावनाए समझाने वाला
लाइन है अंतिम यह, कैसी है हमारी मधुशाला //15

ब्लागत में आज सभी ब्लॉगर ने दीपावली के इस शुभ अवसर पर अलग -अलग तरीके से शुभकामनाये पेश की है ....

कुछ लिक्स पंकज जी ने भेजा है ,मै नीचे दे दे रहा हु ........

दीपावली की शाम, और मेरे ब्लोग्गिंग के दो वर्ष पूरे ..यानि डबल बधाई.. अजय कुमार झा

दीपावली की रात घर में पकवान और मिष्‍टान्‍न न रखें .... घर में दरिद्दर वास करता है ?? संगीता पुरी

मकानों के इस जंगल में दीपावली……….Meenu Khare

दीवाली और दि‍ल की बात………Rajey Sha

शेयर बाजार का विश्लेषण - पिछली दीपावली से इस दीपावली तक, और इस दीपावली से अगली दीपावली तक.. आगे भविष्य में बाजार जगमग होगा।,,,,,,,,Vivek Rastogi

सफाई अभियान और लक्ष्मी का स्नेह,प्रकोप !…………रश्मि प्रभा

क्या सोच के पकड़ा था चोरों को सरकार खुश होगी,शाबासी देगी?सरकार मैने आपका नमक खाया है,ले अब धक्के खा….Anil Pusadkar

डकैत रत्नाकर ऋषि वाल्मीकि कैसे हुए?……….vinay bihari singh

-- शुभ दीपावली –नीर

एक दिये को दूजे दिये से ...sada

दीवाली पर एक ब्लॉगर भारतीय बच्चे का पटाखा मैनेजमेंट !………….पी.सी.गोदियाल

ऐसे मनाएं हम ये दिवाली...अम्बरीश अम्बुज

दीपावली क्यों मनाई जाती है?... अलग अलग मान्यताएँ हैं ...जी.के. अवधिया

"सर्वत्र" से संवाद…………….श्रीश पाठक 'प्रखर

तुम्हारे लौ भरे हाथ बहुत याद आतें हैं…………………ओम आर्य

एक पहल.......दीपावली पर्व पर ....!हेमन्त कुमार

"आप खुशियों से धरा को जगमगाएँ!" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

एक दीया गीतों पर रख दो ...Himanshu

दीवाली पर एक कविता - शब्‍द तुम्‍हारे दीप बनेंगे………….Dr. Smt. ajit gupta

गज़ल्…………..Nirmla Kapila

विचित्र दोहे………….श्यामल सुमन

अब दीजिये इजाजत फिर मिलेगे अगले चर्चा में कल के चर्चा हमारे दुसरे साथी द्वारा किया जाएगा ...
एक बार पुनः आप सभी को दीपावली की शुभकामना .........
दर्पण शाह :दर्शन :

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