Tuesday, October 13, 2009

चर्चा का आज का ये अंक समर्पित है हमारे ब्लागजगत के महान व्यक्तित्व के धनी श्री समीर लाल "समीर " जी को ....

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नमस्कार , "चर्चा हिन्दी चिट्ठो की " के इस अंक में मै पंकज कुमार मिश्रा आप सबका तहे दिल से स्वागत करता हु , अभिनन्दन करता हु और आप लोगो की लम्बी ब्लागिंग यात्रा

समीर new

की कामना करता हु ....

 

चर्चा का आज का ये अंक समर्पित है हमारे ब्लागजगत के महान व्यक्तित्व के धनी श्री समीर लाल "समीर " जी को ....


 

 

चलिए सबसे पहले चलते है चर्चा के पहले पोस्ट पर , ये पोस्ट है श्री मान शरद कोकस साहब जी की और इन्होने लिखा है कि -पैसे sharadjee से क्या क्या तुम यहाँ खरीदोगे ...?

इनके अनुसार -सुबह देखा तो सारे अखबार विज्ञापनों से भरे हुए हैं । पुष्य नक्षत्र में दिनभर खरीदारी कीजिये ,सोना,चान्दी,हीरा,मूंगा,नीलम,ज्वेलरी,एलेक्ट्रोनिक सामान ,टीवी फ्रिज,कार,बाइक ,ज़मीन-ज़ायदाद। ऐसा कहा जा रहा है कि इस दिन यह सब खरीदने से घर में लक्ष्मी की कृपा बनी रहेगी इसलिये लोग बिना ज़रूरत भी अनाप – शनाप गैरज़रूरी सामान खरीद रहे है । और कुछ इसलिये भी कि उन्हे ज़रूरत का अहसास दिलाया जा रहा है । अरे ..आपके  घर में यह नये तरह का टीवी नहीं है ? कैसे आधुनिक हैं आप ? अरे आप अभी तक पुराने किस्म की ज्वेलरी पहन रही हैं ,आपको शर्म नहीं आती ? क्या भाईसाहब अभी तक वही पुराना स्कूटर ?

सही है शरद जी आजकल जो दीखता है वही बिकता है के तर्ज पर विज्ञापन हो रहा है...
ajay अब चलते है चर्चा के दुसरे पहलू पर , बात करते है ब्लागजगत में चल रहे संक्रमण के बारे में अजय झा जी के साथ .. अजय झा जी ने एक सकारात्मक मुदा उठाया है , और मै उनका समर्थन करता हु . ब्लागिंग में हास्य परिहास हो सकता है वो भी एक परिधी के अर्न्तगत और अगर हम उसके ऊपर जाने की कोशीश करते है तो वाद विवाद होना लाजिमी है ...
धान के देश के अवधिया जी को चिंता  है हिन्दी ब्लागिंग से कमाई ना होने की , उन्होंने अपनी व्यथा कुछ यु व्यक्त की -

हम तो नेट के संसार में आए थे कुछ कमाई करने के उद्देश्य से। हमने सुन रखा था कि नेट से भी कमाई की जाती है इसलिए सन् 2004 में स्वैच्छिक सेवानिवृति लेने के बाद हम लग गए इसी चक्कर में। बहुत शोध किया, डोमेननेम रजिस्टर कराया, होस्टिंग सेवा ले ली और कुछ अंग्रेजी लेख डाल कर खोल दिया अपना वेबसाइट। कुछ अंग्रेजी ब्लॉग्स भी बना लिया। एडसेंस पब्लिशर बन गये। बहुत सारे एफिलियेट लिंक्स डाल दिया अपने वेबसाइट्स में

अवधिया जी धीरज रखिये , गूगल के  घर देर है अंधेर नहीं  :)
tea अब आगे है मिथिलेश दुबे , आजकल ये दोस्त ब्लॉगर के खान पान पर बहुत ध्यान दे रहे है , पहले जलेबी , फिर समोसे और आज चाय और चटनी

 

 

 

दिव्य प्रकाश पर  है श्री मान विनय बिहारी सिंह जी और बता रहे है एक अनोखी बात-दो साल का बच्चा अद्भुत रूप से मेधावी

long nalis और एक नयी अद्भूत बात दुनाली ब्लॉग पर सबसे लम्बे नाखून

महफूज अली साहब बता रहे है ओ.के. (O.K.) को अंग्रेज़ी व्याकरण में संज्ञा (NOUN) के रूप में 1841 में दस्तावेज़ी रूप से दर्ज किया गया, विशेषण (VERB) के रूप में 1888  में और INTERJECTION के रूप में आधिकारिक रूप से सन 1890 में दर्ज किया गया.

कर रही थी मैं उसका इंतज़ार
उसके दीदार के लिए थी बेक़रार,
हर पल मेरी निगाहें उसे ढूंढ़ती रही,
बस उसके एक झलक के लिए तरसती रही !

बबली

दर बाहर कोई भेद ना रहा
साथ रह के काफी कुछ जान पाये हैं
ईश्वर की अबूझ माया
ये टोपीवाले दोपाये हैं


.कवि योगिन्द्र जी
ranjujiekdhaagapyaarka रंजना [रंजू भाटिया]

 

टकराकर वापस आती
प्रेम की सुखद अनुभूति
जो हो जाती है कभी
टुकड़े टुकड़े.....
कर जाती है मन को
अतृप्त गहरे तक व्यथित

डा०आशुतोष शुक्ल

मैं उसे अंतर तक समा लेती हूँ,
सांसों की ही तरह,
पर उसे,
मेरे अंतर में सिमटने से,
घुटन होती है----


ज्योत्सना जी

कुर्सी के सापेक्ष
आला अफ़सर हैं वे,
मानवीय सम्वेदनाओं के सापेक्ष
चपरासी भी नही.


मीनू खरे

हे माधव !!
क्या समझ पाए तुम राधा का संताप
तुम सर्वज्ञ दीनबंधु हर लेते हो हर पाप
किस दुविधा में डाला उसको, कैसा दिया यह ताप
यह अलौकिक प्रेम तुम्हारा, बन गया उसका शाप


अदा

आज का कार्टून 

12pf-1
 

"ये ब्लोगिंग में लाठी-बल्लम...?"

सshreesh ये इतना घमासान क्यूँ....? किसको साबित करना चाहते हैं..? किसके  बरक्श....? ये कौनसी मिसाल आप सब बना रहे हैं..? सब, सब पर फिकरे कस रहे हैं. आये थे, कुछ बांटने, ब्लॉग लिखने, कुछ सीखने, कुछ बताने,...., ये क्या करने लगे...? ये बार-बार ब्लोगिंग को गोधरा बनाने पर क्यूँ आमादा हैं, कुछ लोग. कोई ऐसी तो नयी बात नहीं कह रहे...धर्मों से जुड़ी ऐसी घृणित बातें तो पहले भी विकृत मन वाले कह गए हैं, इसमे इतना श्रम क्यूँ लगा रहे हैं...शर्म नहीं आती जब एक ब्लॉगर अपनी प्रोफाइल ही डीलीट कर लेता है. सबसे आधुनिक माने जाने वाले माध्यम पर भी आखिरकार हम एक डेमोक्रेटिक स्पेस नहीं ही रच पाए. क्या कहेगा कोई, "ये हिन्दी वाले...."

(भारतीय महिला सैनिक दस्ता )ATT00055

 

उस घर में,
बच्चे चाँद देखकर रोटी खाते.
गीदड़ के पेट भरने पे ही,
गिद्धों का जीवन आश्रित था.
"साले , ये ले..."

दर्पण शाह

धर्म जो आतंक की बिजली गिराता हो
आदमी की लाश पर उत्सव मनाता हो
औरतों-बच्चों को जो जिन्दा जलाता हो
हम सभी उस धर्म से
मिल कर कहें अब अलविदा
इस वतन से अलविदा
इस आशियाँ से अलविदा


निर्मला कपिला जी

जीवन का एक-एक पल
समय की तूलिका से
रच रहा अप्रतिम इतिहास
जब भी पलट कर देखता हूं
नित अधुनातन हो रहा
अतीत की एक-एक ईंट से


हेमन्त भाई

 

Himanshu हिमान्शु भाई  -मैं सोच रहा हूँ, तुमने उस क्षण को जी लिया…. फिर चल पड़े । मैंने उस क्षण को पकड़ लिया…. अटक गया । उस विशेष काल को विराट-काल से घुला-मिला दिया तुमने, मैंने उसे बाँध लेने की कोशिश की । क्या मैं समझता न था कि मनुष्य घड़ियों से कब बँधा है ?  घड़ियाँ हमेशा कुहुकती रही हैं, हँसती रहीं हैं उस पर । यद्यपि हम दोनों ने उस क्षण को विराट से लय कर देना चाहा, शाश्वत बना देना चाहा….तुमने उस क्षण-विशेष को सततता के सौन्दर्य में परखा…मैंने उस क्षण-विशेष की साधना से उसे ही सतत बना देना चाहा ।

संगीता पुरी जी -

11-12 अक्‍तूबर के मंगल चंद्र युति का युवा वर्ग पर प्रभाव ??

sangitapuri लेकिन आज का आलेख आज के ही मुख्‍य बात पर है , वह यह कि अभी यानि 12 अक्‍तूबर 2009 को 5:30 सुबह खास शक्ति वाले मंगल की अष्‍टमी के आसपास की शक्ति वाले चंद्र के साथ युति बन रही है। मंगल और चंद्र की इस स्थिति का उदय कल ही भारत के विभिन्‍न भागों में 11 बजे रात्रि के बाद हो चुका है और आज भोर में जबतक सूर्य का प्रकाश आसमान में फैल कर इन्‍हें धुंधला न कर दे , इसे मध्‍य आकाश में बिल्‍कुल साथ साथ देखा जा सकता है। ‘गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष’ की दृष्टि से ऐसा योग मंगल को महत्‍वपूर्ण बनाता है , जिसके कारण इन दो दिनों में लोग , खासकर युवा वर्ग विशेष प्रकार की उपलब्धियों और कार्यक्रमों से संयुक्‍त होते हैं।


अपूर्व  जी

[S6000173.JPG]  बचपन में, मेले से, लाया था एक मिट्टी की गुल्लक
रोज डालता था कुछ सिक्के, भरता था छोटी सी गुल्लक
भरते-भरते पैसे, जाने कब खाली कर दी उम्र की गुल्लक
कहते हैं सिकुड़ के माउस बराबर रह गयी है बेचारी दुनिया
इंटरनेट, केबल, मोबाइल्स ने खत्म कर दी हैं सारी दूरियाँ
हाँ, तेरा दिल ही छूट गया होगा शायद, नेटवर्क कवरेज से बाहर

आज हमारे दो पुराने ब्लागर ने नये चिट्ठे खोले है -

पहला है हमारे श्रद्धेय श्री पन्कज सुबीर जी का -

शिवना प्रकाशन (http://shivnaprakashan.blogspot.com/)
चिट्ठाकार: पंकज सुबीरशिवना प्रकाशन

दुसरा है हमारे बडे भाई अजय झा जी का

आज का मुद्दा (http://aajkamudda.blogspot.com/)
चिट्ठाकार: अजय कुमार झा

 

अब आज का नमस्कार ,

26 comments:

Udan Tashtari said...

धन्य हुए आपकी यह समर्पित पोस्ट देख कर. बहुत आभार इस उम्दा चर्चा के लिए.

हिमांशु । Himanshu said...

चर्चा सुन्दर रही । दो नये चिट्ठे भी आये, इस सूचना का आभार । चर्चा का फॉर्मेट भी निखर रहा है ।

दर्पण साह "दर्शन" said...

Pehla comment mera....
Pehla comment Mera....

..Badhiya Pankaj bhai....
...Diwali aa rahi hai...
Aur kuch naye dost ban rahe hain....
....aur kya chahiye?

Ratan Singh Shekhawat said...

samir ji ko samrpit badhiaya charcha ! aabhar !

Arvind Mishra said...

इन्द्रधनुष बन उभरती चर्चा !

विनोद कुमार पांडेय said...

वाह, पंकज जी बहुत सुंदर प्रस्तुति चिट्ठा चर्चा...
धन्यवाद!!!

Meenu Khare said...

सबसे पहले समीर जी को नमस्कार और बधाई.निर्मला कपिला जी, दरपन जी और श्रीश प्रखर जी की रचनाएँ विशेष तौर पर अच्छी लगीं. महफ़ूज़ जी की पोस्ट भी ok लगी.

ओम आर्य said...

प्रस्तुति रोचक लगा........

ओम आर्य said...

आज की प्रस्तुति रोचक लगी .....धन्यवाद !

Mithilesh dubey said...

बहुत खुब पंकज जी। इस लाजवाब चिट्ठा चर्चा के लिए बहुत-बहुत आभार.........,,,,,,,,,,

श्रीश पाठक 'प्रखर' said...

आभारी हूँ पंकज जी का..ईमानदारी से कहूं तो मुझे तो सहसा विश्वास नहीं हुआ..ब्लोगिंग का पहला पुरस्कार है ये तो मेरे लिए...आभार...

अजय कुमार झा said...

पंकज जी मैं तो पहले ही जानता था.कि आप इसे बखूबी निखारेंगे..देखिये अब विशेषज्ञता बढती जा रही है..जारी रखें..शुभकामनायें

जी.के. अवधिया said...

चिट्ठों के लिंक्स और उद्धरण के साथ चिट्ठाकार का चित्र सचमुच चर्चा और और प्रभावशाली बना देता है।

बेहतरीन चर्चा के लिए धन्यवाद!

Nirmla Kapila said...

bahut बडिया होती जा रही है चिठा चर्चा बधाई हो।

रश्मि प्रभा... said...

shubhkamnayen

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

समीरलाल जी, शरद कोकास, अजय झा, अवधिया जी, मिथले दूबे, महफूज अली, रंजू भाटिया, अदा जी, निर्मला कपिला, हिमांशु जी,
हेमंत जी, संगीता पुरी जी,अपूर्व जी और डॉ.आशुतोष शुक्ल जी आदि सबको बधाई।
पंकज मिश्र जी को धन्यवाद!

अनूप शुक्ल said...

बढ़िया चर्चा। सुन्दर!

'अदा' said...

पंकज बाबू,
बहुत मनोहारी, सुखारी है चिटठा चर्चा तुम्हारी.....

Murari Pareek said...

बहुत सुन्दर चर्चा जिसको अच्छी जो अच्छा लगे वही पढ़ लो भाई वाह !!

दिगम्बर नासवा said...

SUNDAR CHARCHA HAI ......

Apoorv said...

इतनी चर्चा एक साथ? भाई पूरा डाइजेस्ट हो गया यह तो..आपका अथक परिश्रम झलकता है आपकी चर्चा के विस्तृत फ़लक से..बधाई..और शुभकामनाएं..दीवाली की भी एड्वांस मे :-)

सैयद | Syed said...

बेहतरीन चर्चा !!

Anil Pusadkar said...

बढिया रही आज की चर्चा।

पी.सी.गोदियाल said...

सुन्दर और मनोहारी चर्चा !

रंजना [रंजू भाटिया] said...

बहुत बढ़िया लगी यह चर्चा शुक्रिया

शरद कोकास said...

समर्पण के लिये सही व्यक्तित्व है समीर जी का इस प्रस्तुतिकरण हेतु धन्यवाद और बधाई ।

पसंद आया ? तो दबाईये ना !

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