Thursday, October 15, 2009

अपनी विजय गाथा के तुम खुद ही गीत बनाओ(चर्चा हिन्दी चिट्ठो की )

नमस्कार , आप सब को !
पंकज मिश्रा आपके साथ , आपकी आर्शीवाद के बल बूते , सुबह की हल्की हल्की हवाओं के बीच आप पढ़ रहे है हमारा ये ब्लॉग चर्चा हिन्दी चिट्ठो की ......
ब्लागजगत में चल रही है जोर शोर से तैयारिया दीपावली की .... तो आप भी कबूल कीजिये हमारी तरफ से दीपावली की शुभकामनाये ......
अब चलते है चर्चा की  तरफ ...

शरुआत हमारे ब्लागजगत के ताउश्री जी के ब्लॉग से ...कल हमारे ताउजी ने नए कलेवर में कविता पेश किये थे आप
यहासे पढ़ लीजिये .....

 

                                                           "हनन" द मर्डर

 

 

 

 

    ए परिंदे उंची उडान भर
    ये समूचा आकाश तेरा है
    पर ध्यान रहे
    और परिंदों का भी हक उतना
    जितना ये नभ तेरा है
    उनका भी ख्याल रख
    मत कर हनन उन सीमाओ का
    जहां दूसरे के अधिकार मारे जाते हों
   जिन्हे तू साधारण परिंदा समझ कर
   हडका रहा हो
   क्या पता ? उनमे से कोई बाज हो ?

(आभार सुश्री सीमा गुप्ता)

 

अब चलते है अगले ब्लाग पर जो की लिखा है हरी शर्मा" नगरी नगरी द्वारे द्वारे " पर ....इन्होने लिखा है --

क्यों हम कोई बड़ी खोज नहीं कर पाते और सारा दोष मध् दिया है बीबियों के ऊपर ....लिखते है कि
अगर कोलंबस शादीशुदा होता तो ये बहुत ही मुश्किल है कि उसने अमेरिका की खोज की होती
कारण बही हैं  जिनके कारण आप और हम ऐसा नहीं कर पाते. पत्नि उनसे ऐसे प्रश्न करती जब भी बो घर से निकलते   -
काफी मनोरंजक लिखे है आप भे पढ़ लीजिये ......

 

 

राजनीति थोथी राजनीति थोथी राजनीति में कोई दम नहीं यदि मान लो किसी तरह दम हो जाये तो ये इधर-उधर फैली खरपतवार उसे भी खा जाये खरपतवार का भी काम है बड़ा गदर ना इसकी कदर ना उसकी कदर चूस कर फेंक देMy Photo

कवि योगेन्द्र मौदगिल

चंद कागज के टुकड़ो में,

जिसको सहेज रखा है मैंने

अपनी डायरी में,

कभी-कभी खोलकर

देखता हूँ उनपर लिखे हर्फों को

जिस पर बिखरा है

प्यार का रंग,

रिश्ते बंद है आज चंद कागज के टुकड़ो में

जगमगाते खूबसूरत लग रहे नन्हें दिये,
लग रहा जैसे सितारे हों धरा पर आ गये,
झोंपड़ी महलों के जैसी मुस्कराहट पा गयी है।
दीपकों की रोशनी सबके दिलों को भा गयी है।।

"दिवाली आ गयी है" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

अलसायी पडी जिंदगी
सुखती रहती है टहनी पे,
जम्हाई लेती दुपहरी के रोशनदानो से
झुलसी हुई हवा का आना जाना लगा रहता है
दीवारे तपने लगती है अल्लसुबह से
भीतर ही भीतर
धाह मारती रहती है

ओम भाई

कौसल्या युप्रजा राम पूर्वा सन्ध्या प्रवर्तते।
उत्तिष्ठ नरशार्दूल कर्तव्यं दैवमाह्निकम्॥


संक्षिप्त वाल्मीकि रामायण

उसकी लौ ने

खुशी से कहा

मैं साथ दूंगी

अपनी अन्तिम

सांस तक तुम्‍हारा

बस तुम विचलित

मत होना

सदा

राज भाटिया जी का लेख 1053

कही हमे जहर देने कि कोशिश तो नही यह??आज भटकते भटकते यहां गया, ओर इस खबर को एक बार नही कई बार पढा, ओर मुझे तो यही समझ मै आया कि अब जानवरो के बाद यह परिक्षण हम पर होगा, ओर करने वाले भी..... पुरी खबर आप यहा पढे ओर बताये क्या यह उचित है

जीने का ढंग
अपनी विजय गाथा के
तुम खुद ही गीत बनाओ
श्रम और आत्मविश्वास की
ऐसी धुन सजओ
अपने आप सुर बन जाते हैं
जो बस विजय गीत सुनाते हैं

निर्मला कपिला  जी

रिश्ता .......
एक अंतहीन झूठ .....
चिपक जाता है ,,
पैदा होते ही
....या
उससे भी पहले,
और निरंतर चलता रहा है ,


दर्पण साह "दर्शन"

लगा सोचने क्या यह रचना, किसी हृदय की वाणी है,
अथवा प्रेम-तत्व से निकली जन-जन की कल्याणी है,
क्या रचना आक्रोश मात्र के अतल रोष का प्रतिफल है
या फिर किसी हारते मन की दृढ़!

हिमांशु भाई

अजय झा जी का पहला लेख अमर उजाला पर , बधाई झा साहब

ajay ब्लोग की पिछली पोस्ट में ही बता चुका हूं कि कुछ गंभीर लिखने को प्रेरित होकर इस नये ब्लोग की शुरूआत की । वादे के अनुसार पहली पोस्ट लिखी जो कि बच्चों के बदलते मनोविज्ञान या कहूं कि शहरी बच्चों के बदलते मनोविज्ञान पर आधारित थी। आशा के अनुरूप आप सबने खूब स्नेह और मार्गदर्शन के साथ उस नये ब्लोग को प्रोत्साहित किया। मगर शायद अभी दीवाली का तोहफ़ा भी मिलना था

गुणगान हो रहा है, मालाएं पड़ रही हैं
हर शाख उल्लुओं की शक्लें उभर रही हैं
कुछ रीछ नाचते हैं, कुछ स्यार गा रहे हैं
जो जी हुजूर कुत्ते थे, दुम हिला रहे हैं।

हर लोमड़ी यहां पर अंगूर खा रही है, खा पाये जो न उसको खट्टा बता रही है ...

तासीर इस हुस्न का है ऐसा,
सब को है तसव्वुर तेरा,
खोए तेरे ही ख़याल में,
सब दिन रात रहते हैं... 


अम्बरीश अम्बुज

त्याग दिया वैदेही को
और जंगल में भिजवाया
एक अधम धोबी के कही पर
सीता को वन वन भटकाया
उस दुःख की क्या सीमा होगी
जो जानकी ने पाया
कितनी जल्दी भूल गए तुम
उसने साथ निभाया


अदा जी

म न भी ब्रह्र। नाद भी ब्रह्म। जो मन से नाद को मिलाए वही मन्ना डे। दरअसल, हवा की तरह संगीत का भी कोई सिरा नहीं होता। शिखर कहीं भी हो सकता है। शुरुआत में भी। आखिर में भी और बीच में भी। मन्ना डे को कुछ इस तरह समझना होगा..
संगीत में सुर दो तरह के होते हैं। विचलित और अविचलित। विचलित वे पांच सुर हैं, जो कोमल भी होते हैं और तीव्र भी। दो सुर- षड्ज और पंचम स्थायी होते हैं। अविचलित और अडिग। न कोमल। न तीव्र। मन्ना डे षड्ज और पंचम के मिश्रण हैं।

मन्ना डे

मेरे चारों बेटों को मौत दे दो

My Photoमिर्जापुर के बाशी गांव के किसान जीत नारायण और उनकी पत्नी प्रभावती चार बेटों दुर्गेश (16) सर्वेश (14)ब्रिर्जेश (11)और सर्वेश(10) के इलाज के लिए पैतृक संपत्ति भी बेच चुके हैं। अब उनके सिर पर लाखों रुपए का कर्जहै। कमाई का भी कोई जरिया नहीं बचा है। प्रभावती का कहना है कि उनके बेटे पांच—पांच साल तक आम बच्चों जैसे थे उसके बाद इस बीमारी ने उन्हें शारीरिक रूप से अक्षम कर दिया। पैरों पर खड़ा होना तो दूर अब तो इनका चलना—फिरना यहां तक कि हिलना—डुलना भी मुश्किल है। डॉक्टरों ने भी इनके ठीक होने की उम्मीद छोड़ दी है। मुझसे अब यह देखा नहीं जाता। इन्हें मौत देने से इनकी सारी तकलीफ खत्म हो जाएगी। जीत नारायण और प्रभावती को अब यह डर सता रहा है कि कहीं यह बीमारी उनकीबेटी को न लग जाए। बेटी की उम्र अभी चार साल है।

 

रामप्यारी का सवाल - 82

हाय….आंटीज..अंकल्स एंड दीदी लोग..या..दिस इज मी..रामप्यारी.. आज शाम के नये सवाल मे आपका स्वागत है. तो आईये अब शुरु करते हैं आज का “कुछ भी-कही से भी” मे आज का सवाल.
सवाल है : इस को पहचानिये?

विश्व रिकॉर्ड बनाने की ओर निशांत चौधरी


तीस वर्षीय निशांत चौधरी झुंझनूं जिले के मेहपालवास गांव से ताल्लुक रखते हैं। उनके पिता भामाशाह सम्मानित श्री दरिया सिंह सामाजिक सरोकारों में अहम भागीदारी निभाते रहे हैं। उनकी पत्नी राजबाला चौधरी हाल ही शिक्षा क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्यों के लिए राज्य स्तर पर सम्मानित हुई हैं। निशांत चौधरी का बेटा आर्यन नौ दिन की उम्र में पैन कार्ड धारक बनने वाले प्रथम बच्चे के तौर पर पहचान रखता है।
आर्यन का अपना डीमेट अकाउंट है और पिता की तरह सक्रिय रहने वाले आर्यन अपने नेत्र दान की घोषणा भी कर चुके हैं।

अब इजाजत दीजिये , आपका दिन शुभ हो !
~~~नमस्कार ~~~~

17 comments:

'अदा' said...

Pankaj Ji,
aapki chittha charcha kitna colourful kitna interesting hai
kahin Seema ji, Kahin Raji to kahin Jha ji ki photo setting hai...
bahut hi jyada badhiya hai sabkuch...
Har din ham hairaan ho jaate hai..
itna sab kuch kaise aap niptaate hain
blog jagat ko aap jod kar rakh rahe hain..
Mishra Ji aap sach much bahut accha kam kar rahe hain...

श्रीश पाठक 'प्रखर' said...

बिलकुल सुबह बेहतर कोलाज गढ़ दिया आपने ब्लागों का....

Arvind Mishra said...

जीवन के उजले स्याह रंगों को समेटे रंगारंग चर्चा !

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

"चर्चा हिन्दी चिट्ठों की" में दिन-प्रतिदिन निखार आता जा रहा है।
आप इसे नये आवरण के साथ नित्य-प्रति बहुत श्रम करके
प्रस्तुत करते हैं। सभी को बहुत अच्छा लगता है।
मेरा सुझाव है कि आप इसके लिए कुछ विद्वान लोगों की
टीम बना लें तो आपको सुविधा रहेगी।
आपके इस पुनीत यज्ञ में बहुत से लोग पूर्णाहुति देने को
समर्पित हो सकते हैं।
धनतेरस, दीपावली और भइया-दूज पर आपको ढेरों शुभकामनाएँ!

समयचक्र - महेंद्र मिश्र said...

दीपावली पर्व की हार्दिक ढेरो शुभकामना

हिमांशु । Himanshu said...

बहुत जम रहा है आपकी चर्चा का कलेवर ! कल की चर्चा पर टिप्पणी नहीं कर पाया- देख ली थी । रंग-रोगन भी खूब हुआ है चर्चा का ।

प्रविष्टियों का संयोजन बेहतर है, आभार ।

ताऊ रामपुरिया said...

वाह बहुत ही इस्टमैन कलर चर्चा रही आज की. बहुत बधाई और शुभकामनाएं.

रामराम.

दर्पण साह "दर्शन" said...

"मेरा सुझाव है कि आप इसके लिए कुछ विद्वान लोगों की
टीम बना लें तो आपको सुविधा रहेगी।
आपके इस पुनीत यज्ञ में बहुत से लोग पूर्णाहुति देने को
समर्पित हो सकते हैं।"

@ Roopchandra Shashtri 'Mayank' ji...
Apni vidwta ke baare main thodi (ya usse kahin zayada) shanka hai...
:)
Par Poornahuti ke liye tatpar hoon.

Pankaj ji aapki charcha ka hamesha intzaar rehta hai....
...Aur ye baat aap jaante hain.

अजय कुमार झा said...

पंकज जी सिर्फ़ इतना कहूंगा कि आप तो नित नया धमाका कर रहे हैं..और हम रोज दिवाली मनाते हैं ...वो भी होली के नये नये रंगों के साथ...धार बढती जा रही है। और सच कहूं तो मेरा मन तो बाग बाग है..जो अलख जगी था अब वो रंग ला रही है। मित्र आपको ,परिवार को एवम समस्त बंधु बांधवों और पूरे ब्लोग जगत को दीपावली की शुभकामनायें।

संगीता पुरी said...

सुंदर चर्चा करते हैं आप .. पढकर अच्‍छा लगा !!

रश्मि प्रभा... said...

nikhaar hai......


कामनाओं की वर्तिका जलानी है .....
कुछ दीये खरीदने हैं,
कामनाओं की वर्तिका जलानी है .....
स्नेहिल पदचिन्ह बनाने हैं
लक्ष्मी और गणेश का आह्वान करना है
उलूक ध्वनि से कण-कण को मुखरित करना है
दुआओं की आतिशबाजी ,
मीठे वचन की मिठास से
अतिथियों का स्वागत करना है
और कहना है
जीवन में उजाले - ही-उजाले हों

राज भाटिय़ा said...

बहुत सुंदर जी , आज पहली बार आया , आप ने तो बहुत अच्छा बना रखा है अपना यह ब्लांग भी.
धन्यवाद
आप को ओर आप के परिवार को दिवाली की बहुत बहुत बधाई

दिगम्बर नासवा said...

एक और लाजवाब चिट्ठा चर्चा ...........पंकज जी ......
आपको और परिवार को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ

Suman said...

nice

अम्बरीश अम्बुज said...

sundar chittha charcha... 10-15 dino se padh raha hun charchayein.. apna chittha dekh kar bahut khushi hui...

डा० अमर कुमार said...


टिप्पणी बाद में करूँगा,
पहले तो ऎसे सोणे सोणे कोड मुझे भी दे दे, ज़ालिम !
बढ़िया है पँकज बाबू, बस यह समझ लो कि बढ़िया है !

Meenu Khare said...

बहुत ही सुन्दर मनभावन चर्चा. आभार . दीपावली की शुभकामनाएँ.

पसंद आया ? तो दबाईये ना !

Followers

जाहिर निवेदन

नमस्कार , अगर आपको लगता है कि आपका चिट्ठा चर्चा में शामिल होने से छूट रहा है तो कृपया अपने चिट्ठे का नाम मुझे मेल कर दीजिये , इस पते पर hindicharcha@googlemail.com . धन्यवाद
हिन्दी ब्लॉग टिप्स के सौजन्य से

Blog Archive

ज-जंतरम

www.blogvani.com

म-मंतरम

चिट्ठाजगत