Thursday, October 29, 2009

.बाबा कायलदास प्रवचनम : खूंटे पै सम्मेलनम(चर्चा हिन्दी चिट्ठो की )

 

 

नमस्कार , चर्चाहिंदी चिट्ठो के इस अंक के साथ मै पंकज मिश्रा ......पिछले  सप्ताह आपको बताया था  कि इस सप्ताह हमारे अतिथि पोस्ट की शुरुआत श्री ताउजी करेगे लेकिन इसी समय अहमदाबाद में गधा सम्मलेन होरहा है .....और ताउजी वहा चले  गए है लाइव रिपोर्टिंग के लिए अतः इस सप्ताह का अतिथि पोस्ट कैंसिल हो गया है .....आप हर रोज गधा सम्मलेन की आँखों देखा हाल पढ़ सकते है ताउजी के ब्लॉग पर ....

अब चर्चा की शुरुआत भी ताउजी के ही ब्लॉग से…….बाबा कायलदास प्रवचनम : खूंटे पै सम्मेलनम…………………….

imageबाबा को सारा माहोल ऐसा लग रहा था कि बिना किसी प्रयास के ही कायलत्व को उपलब्ध होगये फ़ोकट मे ही यानि बिना तपस्या किये ही बाबा की समाधि लग गई. तत्वज्ञान की उपलब्धि के लिये कायल होना, फ़िर घायल होना और इसके बाद प्रथम सीढी है कायलत्व प्राप्ति और उसके बाद दूसरी सीढी है घायलत्व प्राति और अंतिम सोपान है परम तत्व यानि कायलम शरणम गच्छामि हो जाना.

बाबा कायलदास : वत्स ऐसा नही कहते. मन छोटा ना करो घायल दास.. आखिर मेरे बाद इस दुनियां को राह दिखाने वाले मेरे उतराधिकारी तो तुम ही हो...वत्स तुम्हारा संशय दूर करने के लिये आज इस पवित्र कथा का आयोजन यहां करवाओ. इसके श्रवण मनन से मन के सब क्लेश दूर हो जाते हैं वत्स... सुनो और सुनावो...सारे क्लेश भगाओ. अब जल्दी से कथा के लिये तैयारीयां शुरु करवाओ.
और बाबा घायल दास के चेलों ने फ़टाफ़ट कथा की तैयारी शुरु करदी..पंडाल.. शामियाना..माईक की व्यवस्था कर दी गई और आनन फ़ानन में गांव वाले भी भेंट पूजा की सामग्री ले कर कथा सुनने के लिये पण्डाल में हाजिर हो गये. कुछ चेले कथा के लिये प्रसाद रुपी सामग्री तैयार कराने मे जुट गये.

एक भाषा के भग्नावशेष
कहते हैं कि कुछ ही सालों में दुनिया भर में केवल आठ दस भाषायें बचेगी. ये मेंडारिन (चीनी), अंगरेजी, स्पेनिश, बांग्ला, हिंदी, पुर्तगाली, रूसी और जापानी आदि हैं। इनमें भी अंगरेजी तो सबके सिर पर सवार है ही. कुछ लोग कहते हैं कि इसमें बुरा क्या है, जितनी कम भाषायें उतना अच्छा संवाद. पर भाषा क्या केवल संवाद है ? भाषा संस्कृति भी है और इतिहास भी. जब कोई बज्जिका बोलता है तो वह बज्जि संघ की लोकतांत्रिक पम्पराओं को, आम्रपली के इतिहास को आगे बढा रहा होता है. जब कोई बनारस के घाट पर सुबह सुबह संस्कृत के वही मंत्र उच्चारित ( भले ही बिना उन्हें समझे, हाँ! समझने लगे तो फिर कहना ही क्या! ) करता है जो तीन हजार पहले उसके पूर्वज करते थे तो वह इतिहास के गौरवशाली पन्ने पलटता है और भाषाओं के उद्घाटित न होने से इतिहास के खो जाने का भय नहीं होता. एक भाषा की मौत के साथ वहाँ के जीवन की विशिष्टता और सांस्कृतिक धरोहरें भी काल कलवित हो जाती है. इजिप्ट का उदारहण देखे, वहाँ की भाषा के साथ वहाँ का इतिहास भी सहारा के रेत में खो गया
हासिल..image

मैं पूछता हूँ जिन्दगी से
तू, कब मुझको रास आएगी?...
मैं कब तलक नापता रहूँगा फासले
और कब तू ख़ुद पास आएगी ?...
कब सिखाएगी जीना?
ख़ुद को ही घूँट घूँट पीना
और कब ये तन्हाई
तेरे होने का एहसास दिलाएगी ?...
कब तलक रहूँगा मैं अजनबी ?

ज़िन्दगी

किimage सी ने ख्वाब भी बनाया
पलकों में भी बसाया
किसी के दिल की धड़कन भी बनी
ज़िन्दगी की आरजू भी बनी
उसे भी अपने दिल की धड़कन बनाया
उसके ख्वाबों को भी
अपनी आंखों में सजाया
उसकी हर चाहत को अपना बनाया
बस उसकी इक हसरत को
जो न अपनाया
उस इक कसूर की
सज़ा ये मिली

जिन्दगी के रंग पर पढिये ये कैसे माओवादी हैं जो राजधानी एक्सप्रेस में रोटी और कंबल लूटते हैं

image बुधवार की सुबह से ही खबरें आ रही हैं कि दिल्ली की केंद्र सरकार उच्च स्तरीय बैठक कर रही है। चिदंबरम साब पहले ही सेना और अर्धसैनिक बलों के माध्यम से लड़ाई लड़ने की तैयारी कर चुके हैं।
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि किस तरह से सरकार गरीबों पर गोलियां चलाकर गरीबी खत्म कर पाती है। और किस हद तक। सवाल यह भी है कि जिन आदिवासी इलाकों में आजतक सड़कें, रेल, पेयजल, स्वास्थ्य सुविधाएं, पुलिस व्यवस्था बहाल नहीं की जा सकी, वहां अब सरकार सेना को कैसे पहुंचाती है और इन इलाकों के लोगों के ऊपर गोलियां चलवाकर किस तरह से हिंसक आंदोलन को खत्म करती है।

 

दिखने वाली शायरी ताऊ के लिये (Visual Shayari Taau ke liye)

image002

जी.के. अवधिया ----

अधिकतर व्यक्तियों के मृत्यु निकट अनुभव निम्न क्रम में पाये गये हैं।
1. एक अत्यन्त अप्रिय ध्वनि/शोर सुनाई पड़ना (संदर्भः लाइफ आफ्टर डेथ)।
2. स्वयं के मरे हुये होने का ज्ञान।
3. सुखद भावनाओं, शांति और स्थिरता का अनुभव।
4. शरीर से बाहर होकर हवा में तैरते हुये आसपास के क्षेत्र को देखने का अनुभव।
5. नीले सुरंग, जिसके अंत में चमकदार प्रकाश या कोई उपवन हो, में तैरते हुये जाने का अनुभव।
6. मरे हुये लोगों या आध्यात्मिक चरित्रों से मुलाकात।
7. अलौकिक प्रकाश दिखाई पड़ना(प्रायः समझा जाता है कि वह प्रकाश उस देवता का रूप होता है जिस पर व्यक्ति का अटूट विश्वास होता है)।

मृत्यु निकट अनुभव……………………….

आज बच्चन जी की एक और कविता -तब रोक न पाया मैं आँसू !

तब रोक न पाया मैं आंसू !image

जिसके पीछे पागल होकर

मैं दौड़ा  अपने जीवन भर ,

अब मृगजल में परिवर्तित हो मुझपर मेरा अरमान हंसा

तब रोक न पाया मैं आंसू !

जिसमें अपने प्राणों को भर

कर देना चाहा अजर अमर ,

जब विस्मृति के पीछे छिपकर मुझ पर मेरा वह गान हंसा

तब रोक न पाया मैं आँसू

बिछोह की पीडा़ का टोटल रिकॊल - मदन मोहन का संगीत
image दूसरा गीत है, मुझे याद करने वाले, तेरे साथ साथ हूं मैं - जो फ़िल्म रिश्ते नाते के लिये मदनजी नें ही सुरों से संवारा है. ना जाने क्यों , हसरत जी का लिखा हुआ ये गाना संवेदनाओं के सभी बंधन तोड गया.ये गाना भी लताजी नें ही गाया है, और इसमें भी मुझे जयकिशन जी के कहीं कहीं दर्शन होते हैं(शायद आम्रपाली का गीत तुम्हे याद करते करते कुछ इसी जोनर का है)वैसे लताजी के बारे में बार बार क्या कहना? उनके अलावा और कोई ये गीत गा सकेगा - इतनी पीडा़ , उद्वेग और विरह की टीस की इतनी गहरी अभिव्यक्ति के साथ- यह संभव ही नहीं.और हसरत जी के बोल - एक एक शब्दों पर गौर करें और आहें भरने का हिसाब नहीं रख पायेंगे आप.
गज़ल

सुनहरे हर्फों को दिल पर मेरे आकर सजाये कौन
मेरी किस्मत मेरे माथे पे खुशियों की बनाये कौन
बहुत नाराज़ हो तुम भी बहुत नाराज़ मैं भी हूँ
चलो छोडो सभी शिकवे,मगर पहले मनाये कौन
उठे ऊपर अगरचे लौ बुझाने को लगे सब ही
मगर बढती हुई उसकी पिपासा को बुझाये कौन

लिखना हमारे होने का अहसास दिलाता है....

ये किसके लिए लिखती हो ?
ये किसके लिए गाती हो ?
तुमने ऐसी टिपण्णी क्यूँ दी ?
उसने ऐसी टिपण्णी क्यूँ दी ?
इतना समय क्यूँ बिताती हो ब्लॉग पर ?
इससे क्या मिलने वाला है ?
ये कौन है ? वो कौन है ?

उबुन्टू लिनक्स : मोबाइल फ़ोन से इन्टरनेट कैसे जोड़े

[स्क्रीनशॉट-3.png]उबुन्टू इंस्टाल करने के बाद ब्रोडबैंड इन्टरनेट बिना किसी कॉन्फिगरेशन के चालू हो जाता है लेकिन यदि आप अपने मोबाइल से लिनक्स में इन्टरनेट चलाना चाहते है तो थोडी सी कॉन्फिगरेशन करनी पड़ेगी जबकि विण्डो एक्सपी में संबंधित मोबाइल का पीसी सोफ्टवेयर इंस्टाल करना पड़ता है | लिनक्स में यह बहुत आसान है

नखरेवाली

दिल फिर मचलने लगाimage
प्यार का चिराग चलने लगा
अभी आए, वो अभी चल दिए
हम फिर अकेले रह गए
उनकी इस अदा को देखकर
हम दीवाने हो गए

आइये इन्‍हें पहचानें (अविनाश वाचस्‍पति)

image

हाँकोगे तो हाँफोगे

विवाह के तुरन्त बाद ही मुझे एक विशेष सलाह दी गयी:

imageहाँकोगे तो हाँफोगे’

गूढ़ मन्त्र समझ में आने में समय लगता है| हर बार विचार करने में एक नया आयाम सामने आता है। कुछ मन्त्र तो सिद्ध करने में जीवन निकल जाते हैं।


 

इब खूंटे पै सम्मेलन रिपोर्ट : -

अभी एक सम्मेलन इलाहाबाद में संपन्न हुआ जिसकी चर्चा और लाइव टेलिकास्ट आप देख चुके हैं. आजकल एक गधा सम्मेलन अहमदाबाद मे चल रहा है. ताऊ को उसका बाकायदा  निमंत्रण मिला.  ताऊ इस सम्मेलन के उदघाटन सत्र से समापन सत्र तक वहां मौजूद रहेगा.  ताऊ द्वारा खींची गई  सम्मेलन की कुछ तस्वीरे देखिये  और पूरी रिपोर्ट का इंतजार किजिये.

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चित्र – १ सम्मेलन के उदघाटन सत्र में दौड लगाते गर्दभराज

 

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चित्र – २ दौड के उपरांत विश्राम मुद्रा में प्रतिभागी

 

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चित्र – ३ अपने संतू गधे को बेचकर चैन की नींद निकालता ताऊ

मै आपको बता दूं कि यह सम्मेलन बहुत ही सफ़लता पुर्वक चल  रहा है . जिनको भी शिरकत करनी हो..उनसे निवेदन है कि निमंत्रण पत्र के लिये अपना टिकट लगा लिफ़ाफ़ा पता करके भिजवायें.

 

नोट : इस सम्मेलन की अगली विस्तृत रिपोर्ट का इंतजार किजिये! 

 

आज तबियत नासाज होने की वजह से बाकी के कालम की चर्चानही कर पा रहा हु .....माफी
नमस्ते

28 comments:

Ratan Singh Shekhawat said...

हमेशा की तरह शानदार चर्चा :)

Udan Tashtari said...

बहुत उम्दा चर्चा...बस, हमारे आलेख के पहले आ गई वरना हम तो होते न यहाँ. :)

गिरिजेश राव said...

आप की चर्चा के माध्यम से ब्लॉगरी की विविधता और समृद्धि के जांने कितने आयाम एक साथ दिख जाते हैं। आभार।

तबियत नासाज न कराइए। थोड़ा ठहर कर चर्चा करिए - एक दिन के अंतराल पर ही सही। हमलोग तब भी लाभांवित होंगे। ऐसी भी क्या जल्दी है!

राजकुमार ग्वालानी said...

शानदार चर्चा

ताऊ रामपुरिया said...

बहुत मनोहारी और सुंदर चर्चा की आपने. बहुत शुभकामनाएं.

रामराम.

-ताऊ
(अहमदाबाद गधा सम्मेलन से)

Meenu Khare said...

मनोहारी सुंदर चर्चा.

ललित शर्मा said...

खुंटे पर चर्चा रही शानदार-जानदार-आभार

दिलीप कवठेकर said...

ये तो गलत है भाई. अभी अलाहाबद में भी कुछ ऐसा ही सन्मेलन हुआ था. ताऊ को उसकी भी रिपोर्टिंग करनी चहिये थी.

चलो, वो कमी यहां पूरी हो जायेगी.

अविनाश वाचस्पति said...

तबीयत का साज ठीक से बजाया कीजिए
सारा समय ब्‍लॉगिंग पर ही न बिताया कीजिए
हो जाएं नाराज जिनकी न हुई हो चिट्ठा चर्चा आज
पर अपने कंप्‍यूटर और इंटरनेट पर रहम खाया कीजिए।

दिलीप कवठेकर said...

चर्चा हिंदी चिठ्ठों की में संगीतपर भी चर्चा देखकर खुशी हुई.

धन्यवाद के पात्र है आप.आपका ये बढियां कंसेप्ट, जहां एक ही जगह इतना सारा, विविध रंगों मे रंगी हुई दुनिया के दर्शन होते हैं.लिंक के कारण हमें वहां पहुंचने के लिये मशक्कत से भी बच जाते हैं.

श्रीश पाठक 'प्रखर' said...

पंकज जी आपका काम तो इस हफ्ते बहुत ही रहा...पर फिर भी गुणवत्ता पर आंच नहीं आने दी आपने...बधाई....

वन्दना said...

bahut hi sundar charcha rahi............badhayi.
kai rachnayein to bahut hi badhiya rahi.

चंदन कुमार झा said...

पंकज भाई वाकई में मजेदार थी यह चर्चा ।

दिगम्बर नासवा said...

वाह भाई वाह ..... आज की चर्चा तो सारे रिकॉर्ड तोड़ गयी .......... मज़ा आ गया ..........

Arvind Mishra said...

पंकज, घोडे बेच के तो लोग सोते हैं मगर क्या गधे बेच कर ताऊ भी सो गए ? उन्हें जगाईए न जल्दी !

पं.डी.के.शर्मा"वत्स" said...

आज की चर्चा तो घणी मजेदार रही......बिल्कुल ताऊ की तरह :)

रश्मि प्रभा... said...

jaldi thik ho jaiye.......warna meri kalam charchit nahi hogi........

ज्ञानदत्त पाण्डेय| Gyandutt Pandey said...

वाह, हांकने/हांफने का मन्त्र प्रवीण ने दिया और फोटो मेरी चिपक गयी!

अम्बरीश अम्बुज said...

badhiya charcha..
baal katwa kar savera karne ka iraada to nek hai... tau ji!!!!

दर्पण साह "दर्शन" said...

Pankaj bhai aaj chittha charcha to behterin thi hi us par wo ubantu wala link de kar aapne badi kripa ki !!

waise aap bhi to bada technical gyaan rakhte hain....
main ubantu install karna chahta hoon kuch to jaankari doge na ji?

Apoorv said...

वाह, फिर एक खूबसूरत चर्चा के लिये बधाई, तबियत को क्या हुआ पंकज साहब, अब कैसी है?
स्वास्थ्य के लिये शुभकामनाएं!

जी.के. अवधिया said...

काबिले तारीफ़ चर्चा!

Nirmla Kapila said...

बहुत अच्छी चर्चा है बधाई

Vivek Rastogi said...

बहुत अच्छी चर्चा है...

'अदा' said...

हमतो तबियत से दिल का साज बजाते हैं
ब्लॉग्गिंग में जीते हैं ब्लॉग्गिंग में मर जाते हैं
पंकज बाबू पोस्ट पर घनी जुल्फों के बादल छाये हैं
बड़ी मुश्किल से बचते-बचते टिपण्णी देने आये हैं....

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

चर्चा में आये सभी चिट्ठाकारों को बधाई।

Suman said...

nice

Dipak 'Mashal' said...

:)

पसंद आया ? तो दबाईये ना !

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