Wednesday, February 03, 2010

तेरा सत्यानाश हो-साला..कुछ भी करेगा”चर्चा हिंदी चिट्ठों की”(ललित शर्मा)

आज खुशी की बात है कि संगीतकार ए आर रहमान को दो ग्रेमी अवार्ड मिले। आज सुरों के शहंशाह हैं तथा अपनी प्रयोग धर्मिता से भारतीय संगीत को विश्वस्तर पर पहचान दिलाई है। ग्रेमी अवार्डस मे भी अपने जय हो नामक गाने से परचम लहराया है और दो पुरस्कार जीत कर अपनी स्वर्णिम तिकड़ी पुरी कर ली है, हम इन्हे शुभकामनाएं देते है। इस पुरस्कार से यह साबित हो गया की आदमी अपने काम से पहचाना जाता है अब मै ललित शर्मा आपको ले चलता हुँ आज के हिन्दी चिट्ठों की चर्चा पर................
चर्चा का प्रारंभ करते हैं संजीव तिवारी जी की पोस्ट से......इन्होने पूछा है कि 12 कब खत्म होगा पाबला वर्सेस अनूप का वाद हम का काहे भैया अब वकील लोग ही बता सकते हैं या दोनों पार्टियाँ बता सकती हैं. पब्लिक का बताएगी.कल ही मेरे एक नये ब्‍लॉगर साथी से मुलाकात हुई, उसने ब्‍लॉगजगत मे आते ही, प्रकाशित हो रहे, पढे जा रहे व पसन्द किये जा रहे पोस्टो को देखने के बाद कहा कि क्या हिन्दी ब्‍लॉगजगत मे कोई अदृश सत्ता की लडाई भी हो रही है ?, मैनें उन्हे कहा कि एसी कोई बात नही है, ऐसा तो साहित्यजगत मे भी होता आया है. हॉं यह फर्क जरूर है कि वहॉं लेखन के आधार पर लेखक को स्थापित करने के लिए युद्ध होते हैं. यहॉं लेखक के आधार पर उसके लेखन और विचार को स्थापित करने के लिये युद्ध होते हैं. उसने आगे कहा कि इससे प्राप्त सत्ता से क्या हो जायेगा? 
rajkumar soni अगली पोस्ट लेते है राजकुमार सोनी जी कि आप बहुत ही शानदार और धारदार लेखन कर रहे हैं. इन्हें सदी का महानालायक पोस्ट इतनी कडवी लगी के सीधा ही एक पोस्ट लिख मारी अमिताभ बच्चन जी के समर्थन में....... साला..कुछ भी करेगा .... मेरा यह मानना है कि मेरे जैसे कुछ और लोग होंगे जो सामने आएंगे और ‘दो-दो’ हाथ मारते हुए ‘सदी के सबसे बड़े कुंठित’ व्यक्ति का गाल और ‘दिमाग’ दोनों ठीक करेंगे। क्षमा करेंगे रविश जी। ‘दो-दो हाथ’ से मेरा आशय यह नहीं है कि मैं लोगों को शारीरिक क्षति पहुंचाने के लिए उचका रहा हूं। मेरा मकसद सिर्फ इतना है कि अमिताभ को जानने-समझने वाला व्यक्ति आपको ‘झंडु पंचारिष्ट’ या ‘केसरी जीवन’ का दो-दो डोज अवश्य देगा, क्योंकि न जाने क्यों मुझे लगता है कि बचपन में कायम हुई गलत संगति की वजह से आपको दिमागी तौर पर ‘दुर्बलता’ आ गई है। इससे पहले कि श्री एक हजार आठ सौ 40 रविश कुमार जी के लेख ‘सदी के महानालायक’ को लेकर कोई बात रखी जाए,
मुम्बई पर कुछ धार्मिक कवितायें -सिटी पोयम्स मुम्बईred laugh
मुम्बई केवल औद्योगिक नगरी नहीं है । यहाँ के लोगों की व्यस्तता देख कर ऐसा लगता है कि शायद इन लोगों के जीवन में धर्म-कर्म या पूजा -पाठ के लिये समय ही नहीं होगा । लेकिन ऐसा नहीं है ।मैने जब महालक्ष्मी मन्दिर ,सिद्धि विनायक और हाजी अली में लोगों की भीड़ देखी
माइक्रो पोस्ट : मुम्बई मेरी हैmahendra mishr1
आज दिनभर से टी.वी. में देख रहा हूँ मुम्बई मेरी है ..... मुम्बई हम सबकी है ... मैंने भी भारत देश की धरती पर जन्म लिया है इसीलिए डंके की चोट पर ऐलान कर रहा हूँ की मुम्बई मेरी है . जय हिंद महेन्द्र मिश्र जबलपुर.

अब दिल्ली ब्लोग्गर बैठक नहीं होगी मगर ब्लोग्गर्स तो बैठेंगे ही ,वो भी इसी ajay-kumar-jha रविवार , यानि सात फ़रवरी को ही
जी हां बिल्कुल ठीक पढ रहे हैं आप लोग , मेरे कहने का मतलब बिल्कुल स्पष्ट है कि, इस रविवार यानि सात फ़रवरी को प्रस्तावित दिल्ली ब्लोग्गर बैठक अब नहीं होगी । ब्लोग्गर बैठक नहीं होगी इसके कई कारण हैं जो मैं आगे बताऊंगा , मगर इससे पहले ये बताता चलूं कि राज

"जुगाड़ों से चलने लगी जिन्दगी है!" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")Rupchand
*संशोधितकहीं है ज्वार और भाटा कहीं है, कहीं है सुमन और काँटा कहीं है, करीने से सजने लगी गन्दगी है!जवानी में थकने लगी जिन्दगी है!!जुगाड़ों से चलने लगी जिन्दगी है!!!कहीं है अन्धेरा कहीं चाँदनी है, कहीं शोक की धुन कहीं रागनी है, मगर गुम हुई गीत से नगमगी है!

anilPUSADKAR अब पता चल रहा है कि ब्लागर दो प्रकार के होते हैं,उन्हे ढोया जा सकता है और उन्हे दिखा कर बल-प्रदर्शन भी किया जा सकता है।
ब्लागर मीट के रोचक अनुभव:मुझे तो अब तक़ पता ही नही था कि नेताओं की तरह ब्लागर भी दो प्रकार के होते हैं।एक जबर्दस्त और दूसरा जबरदस्ती।इतना जबरदस्त ज्ञान हमको मिला रायपुर ब्लागर मीट के बाद समुद्र मंथन टाईप विचार मंथन से।मैं तो खुद को भाग्यशाली समझ रहा हूं
myphoto ब्लोगिंग तो मौज लेने के लिये होती है ... ब्लोगिंग फॉर्मूले
"नमस्कार लिख्खाड़ानन्द जी!""नमस्काऽऽर! आइये आइये टिप्पण्यानन्द जी!""लिख्खाड़ानन्द जी, हम तो आपके लेखन के कायल हैं! लाज़वाब लिखते हैं आप! लोग आपको उस्ताद जी कहते और मानते हैं। क्या बात है आपकी! आज हम जानना चाहते हैं कि आखिर इतना अच्छा लिख कैसे लेते हैं जिसे

गांधीजी अपना ब्लाग बनवाने ताऊ के पास आये!
बापू की पुण्य तिथी पर सुबह ११ बजे आफ़िस में ही मौन श्रद्धांजलि देकर घर आगया. आकर खाना खाया और पूरे समय बापू के आदर्श और देशनाओं के बारे में ही मन में अनवरत मंथन चलता रहा. अचानक बापू आगये. मैने तुरंत खडॆ होकर बापू को कुर्सी पर बैठाया. बापू प्रसन्न चित

khushdeep1 दिन भर हाथ में गिलास...खुशदीप
प्रोफेसर ने क्लास लेना शुरू किया...प्रोफेसर ने हाथ में एक पानी से भरा गिलास पकड़ रखा था...पूरी क्लास को गिलास दिखाते हुए प्रोफेसर ने सवाल पूछा कि इस गिलास का वजन कितना होगा...बच्चों से जवाब मिला...'50 ग्राम!' ...'100 ग्राम!' ...'125 ग्राम!'

पहुंचेंगे शिखर पर वो ..... swapna
मन जब उदास होता है ख़याल के पास होता हैजब दिल में दर्द उठता हैलब पे उच्छ्वास होता हैपहुंचेंगे शिखर पर  वो जिन्हें विश्वास होता है सच्चा प्रेम मिल जाए फिर मधुमास होता हैसुधि सा जो साथी होजीवन ख़ास होता है कलह प्रेमी मनुज का तोबस विनाश होता हैकुटिलता
सुख और स्वातन्त्र्य -3
भाग-१ व भाग -२ से आगे ...........चित्रगुप्त कहे जा रहा था -' अजमेर से अकबर ने अपनी सेना की दुर्दशा का हाल सुना तो तैयब खान , खुर्रम अजमत खान आदि को दुगुनी फ़ौज देकर भेजा | चंद्रसेन ने रामपुरा की पहाड़ियों की शरण ली और शाही फ़ौज अपने आपको विजयी समझकर लौट गई
हजार-पांच सौ के नोट बंद करने से भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा
एक दवाई दुकानदार का कहना है कि अगर हजार और पांच सौ के साथ साथ सौ रुपए के नोट भी बदं कर दिए जाने तो अपने देश में भ्रष्टाचार पर कुछ हद तक अंकुश लग सकता है। भ्रष्टाचार के साथ दो नंबर की काली कमाई में

तवायफ की मौत
राज कुमार सोनी के बिगुल पर प्रकाशित ''घुंगरू टूट गए'' को पढ़ते ही मुझे अपनी पंद्रह बरस पुरानी एक सम्पादक द्वारा सखेद वापस रचना याद आ गई सोनी जी के प्रति आभार एवं उस आत्मा की शान्ति के लिए रचना सादर प्रेषित है चीथड़े में लिपटी बूढ़ी माँ मर गई कोई न रोया न

काफ़्का का ’द कासल’ - तीसरा हिस्सा
(पिछली किस्त से जारी)इन लघुतर देवताओं, खासतौर पर क्लाम की एक विशिष्टता है: वे लगातार बदलते रहते हैं - प्रोटीयस सरीखा यह सतत कायान्तरण अलौकिक के रहस्य को बनाए रखता है. क्लाम गांव में कुछ है, महल में कुछ; बीयर पीने से पहले कुछ है और बाद में कुछ और; जगा हुआ

ग़लत मैं भी नहीं तू भी सही है। मुझे अपनी तुझे अपनी पड़ी है।
-दीक्षित दनकौरी -ग़लत मैं भी नहीं तू भी सही है।मुझे अपनी तुझे अपनी पड़ी है।न जाने क्या सहा है रौशनी ने,चराग़ों से बग़ावत कर रही है।अना बेची, वफ़ा की लौ बुझा दी,उसे धुन कामयाबी की लगी है।कमी अपनी इबादत में न देखी,समझ बैठा खुदा में ही कमी है।शराफ़त का घुटा
देश और देशवाशी !!!
रात को एक टीस सी दिल के कौने में उठ रही थी! दिल के दर्द से अनजान था, आखिर कौन सी पीड़ा घुट रही थी!! जुबान से पूछा दिल मैं क्या दर्द है बता, ज़ुबां कुछ न कह पाई पर गम का वो गुब्बारा आखिर फूट पड़ा और आँख भर आई हाथ ख़ुद ब ख़ुद जुड़ गए और वतन को सलाम किया
अरे कमीने.....तेरा सत्यानाश हो.....दूध जलवा दिया तुने!!!
आज धुप अच्छी खिली हुई हैं। चटाई लेकर मैं छत पर पंहुचा। आज आलू-मेथी की सब्जी और परांठे खाने कोमिले। सब्जी में लहसुन ज्यादा डल गया था परन्तु स्वाद भी बढ़ गया था। अख़बार खोला। एक खबर कहती है किआने वाले दिनों में दूध के भाव बढ़ जायेंगे । कभी मैं ५ रूपये लीटर

आप अपना ब्लॉग कहाँ और कैसे बेच सकते हैं ?
सर्वप्रथम तो मैं आपको बता दूँ कि किसी ब्लॉग या वेबसाइट को बेचना इतना आसान नहीं । किसी ब्लॉग या वेबसाइट की कीमत कई बातों से जुडी होती है । बहुत से ब्लॉग या किसी वेबसाइट के मालिक ये सोचते हैं कि हम किसी वेबसाइट या ब्लॉग को बेच कर बहुत आसानी से पैसा कम सकते

बड़ा बाजीगर है वसंत !
वसंतोत्सव में हम आज लेकर आयें हैं डा राम विलास शर्मा की कविता ।  वैसे कवि के रूप में कम शर्मा जी की ख्याति हिन्दी समालोचक के रूप में अधिक रही है ।  इन्होने  "निराला की साहित्य साधना"तीन खंडो में लिखकर न केवल अपनी प्रखर

सीमाए लांघता सरकारी धन का दुरुपयोग !
बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और गरीबी पर अंकुश लगाने के लिए बहुप्रचारित दैनिक जीवन में सादगी (austerity ) अपनाने की कौंग्रेस की बात वहाँ ख़त्म हो गई दीखती है, जहां एक दिन राहुल भैया, पूरे गाजे-बाजे और बीच राह में कुछ छुटभैयों द्वारा प्रायोजित पथराव

खुल्ला खेल फ़र्रुखाबादी : 189 आयोजक उडनतश्तरी
बहनों और भाईयों, मैं उडनतश्तरी इस फ़र्रुखाबादी खेल में आप सबका आयोजक के बतौर हार्दिक स्वागत करता हूं. जैसा कि आप जानते हैं कि अब से इस खेल के दिन मंगलवार और शुक्रवार निर्धारित कर दिये गये हैं. समय शाम 4:44 PM. रहेगा. आईये अब खेल शुरु करते हैं.नीचे का

स्वागत बसंत
-- करण समस्तीपुरीस्वागत ! स्वागत !! स्वागत बसंत !!!हे प्रेमपुँज ! हे आश रूप !!ऋतुपति ! तेरी सुषुमा अनंत !!स्वागत ! स्वागत !! स्वागत बसंत !!!कानन की कांति के क्या कहने !किसलय-कली-कुसुम बने गहने !!अवनी सूचि पीत सुमन पहने !मानो, विधि की रचना जीवंत !!स्वागत

रमई काका के जनम दिन पै यक कविता : '' धरती हमारि '' ...
पढ़ैयन का राम राम !!!' अवधी कै अरघान ' की महफ़िल मा आप सबकै स्वागत अहै ..आज रमई काका कै जनम दिन आय .. काका कै जनम २  फरौरी १९१५ मा भा रहा ..  अबहीं कुछ देरि पहिले काका जी के सुपुत्र सिरी अरुण त्रिवेदी जी से बात भै

रवि मन : मेरा नया ब्लॉग
"रवि मन" यह है - मेरे  नवेले ब्लॉग का सुनहरा नाम! इस पर मैं स्वरचित  रचनाओं का प्रकाशन किया करूँगा! मैं "रवि मन" पर स्वागत करता - आप सभी मनमानों का, मन में भरकर सरस मिठास! मन से आइए और मन से पढ़िए - मेरी मन-भाती रचना - मुझको बता

अंग्रेजों के देश में यूं ही चलते फिरते उपजी एक हिंदी कविता और उसका English रूपांतरण-------->>>>दीपक 'मशाल'
हो सकती थी सोनचिरइया मेरे भी जीवन में इकइन्द्रधनुष के सातों रंगा सकते थे मुझको भी दिखहोती कुछ ज्यादा ही रौशन रौशनी मेरे जीवन कीजो तुम थोड़े सस्ते होते तो सकता था मैं भी बिकऋतू वसंत की हो जाती कुछ ज्यादा ही सुन्दर सीमैं एकाकी इक मानव हूँ ये टूट भी जाता

अमीर किसान-गरीब किसान
हमारा देश किसानों का देश है कुछ वर्ष पहले तक एक ही वर्ग के किसान होते थे जिन्हे लोग 'गरीब किसान' के रूप में जानते थे जो सिर्फ़ खेती कर और रात-दिन मेहनत कर अपना व परिवार का गुजारा करते थे लेकिन समय के साथ-साथ बदलाव आया और एक नया वर्ग भी दिखने लगा जिसे हम
अमन की आशा , जी नहीं यहाँ न मैं ब्लॉग जगत की बात कर रहा हूँ , न महाराष्ट्र की
कुछ दिनो से टीवी में एक विज्ञापन आ रहा है , कुछ अलग सा.  "अमन की आशा" दरअसल यह एक प्रयास है , "टाइम्स ऑफ इंडिया" और पाकिस्तान के"जंग" समूह का दो देशों के बीच  मैत्री एवं सदभावना का . अच्छा प्रयास है की दो पड़ोसी अच्छे रिश्ते बना सकें . इस

हिमाचल के मणिकर्ण का श्रीराम मंदिर
हिमाचल का मणिकर्ण वह दिव्य स्थान है जो भगवान शंकर को अत्यधिक प्रिय है। पुराणों के अनुसार शिवजी तथा माता पार्वती ने अपने विवाह के पश्चात 11000 वर्षों तक यहां रमण किया था। भोले भंडारी को तो यह अलौकिक स्थान इतना प्रिय रहा कि उन्होंने काशी में भी अपने स्थान






  • कार्टून :क्या इस तरह होगी महंगाई कम !




  • हरिओम तिवारी द्वारा कार्टून कमंडल -

  • सपा:किसने, किसे निकाला?


    ITNI SI BAAT -

    आये नाग न पूजे, भिम्भोरा पूजे जाय



    सूर्यकान्त गुप्ता द्वारा उमड़त घुमड़त विचार -पर
    संगवारी मन ल मोर जय जोहार. मैं हा ऊपर मा लिखे मोर राज के मिठ बोली के हाना (कहावत) ल एखर खातिर लिखे हंव के हमन घर मा आये नाग देवता के पूजा करेबर छोड़ के भिम्भोरा ल पूजे बर जाथन . कुदरत हा अपन खूबसू...
    होगे चर्चा के विराम-जम्मो संगवारी मन ला ललित शर्मा के राम-राम

    29 comments:

    जी.के. अवधिया said...

    वाह इतने सारे लिंक्स एक साथ!

    वाकई बहुत मेहनत करते हैं आप ललित जी!

    राजकुमार ग्वालानी said...

    ये चर्चा बड़ी है मस्त-मस्त

    Ratan Singh Shekhawat said...

    भाई वाह ललित जी ! आज भी हमेशा की तरह से चर्चा के झंडे गाड़ दिए | बढ़िया रही आज की चर्चा !

    Udan Tashtari said...

    बेहतरीन कवरेज के साथ हाजिर हैं ललित जी...मजा आ गया!

    अविनाश वाचस्पति said...

    ललित चर्चा लालित्‍य से परिपूर्ण।

    सतीश सक्सेना said...

    शुभकामनायें !

    HARI SHARMA said...

    शानदार चर्चा.

    महफूज़ अली said...

    वाकई बहुत मेहनत करते हैं आप......बढ़िया रही आज की चर्चा !



    नोट: लखनऊ से बाहर होने की वजह से .... काफी दिनों तक नहीं आ पाया ....माफ़ी चाहता हूँ....

    गिरीश बिल्लोरे 'मुकुल' said...

    ek sath zabardast post ke link
    shukriya ji

    Mithilesh dubey said...

    धासू रही चर्चा ।

    Saloni Subah said...
    This comment has been removed by a blog administrator.
    बी एस पाबला said...

    बने रहिस गा

    बी एस पाबला

    ताऊ रामपुरिया said...

    वाह गजब की वृहद चर्चा है. बहुत शुभकामनाएं

    रामराम.

    ताऊ रामपुरिया said...

    वाह गजब की वृहद चर्चा है. बहुत शुभकामनाएं

    रामराम.

    संजय भास्कर said...

    वाकई बहुत मेहनत करते हैं आप ललित जी!

    Dr Satyajit Sahu said...

    maza aa gaya lalit ji, apne blog ko aur taste de diya hai

    Mishra Pankaj said...

    शर्मा जी धन्यवाद , आज तो आपने कमाल की चर्चा किया है

    --
    Thanks&Best Regards,
    Pankaj Mishra

    डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

    ललित जी नमस्कार!
    चर्चा का सुन्दर विस्तार!

    Mishra Pankaj said...

    @Saloni Subah,

    This is not a advertise portal please do not do comment like this again !

    best Regards,
    Charcha Team

    रंजना said...

    बहुत ही बढ़िया चर्चा....आभार..

    दिगम्बर नासवा said...

    इतने सारे लिंक्स ... मजा आ गया...

    Suman said...

    nice

    मनोज कुमार said...

    शानदार चर्चा.

    डॉ. मनोज मिश्र said...

    शानदार ..

    'अदा' said...

    बहुते बढ़िया चर्चा रही..भाई..
    इतने सारे लिनक्स दिए हैं आपने...आपकी मेहनत दीखाई देती है..
    बहुत बधाई..!!

    HARI SHARMA said...

    फ़ौजी तेरा क्या खूब बताना
    हाय राम चर्चा का है जमाना

    सब पोस्ट पढो
    फिर सोच करो
    कुछ इसपे लिखो
    कुछ उसपे लिखो
    कोई कविता लिखे
    कोई गीत लिखे
    कोई गद्य लिखे
    कोई पध्य लिखे

    इन सबमे माथा खपाना
    हाय राम कैसा ये फ़साना

    पं.डी.के.शर्मा"वत्स" said...

    बिल्कुल फर्स्टक्लास क्लास चर्चा महाराज्!!

    AlbelaKhatri.com said...

    mazedar...........
    umda !

    अजय कुमार झा said...

    वाह सर जी , चर्चा एकदम कमाल जा रही है और ये कमाल आप ही कर सकते हैं
    अजय कुमार झा

    पसंद आया ? तो दबाईये ना !

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