Thursday, February 11, 2010

“सन्तू गदहे की पूँछ टाँक रहा हैःएक बच्चा” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

अंक : 143

चर्चाकार : डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"

ज़ाल-जगत के सभी हिन्दी-चिट्ठाकारों को डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"

का सादर अभिवादन!

आइए “चर्चा हिन्दी चिट्ठों की” में कुछ महत्वपूर्ण चिट्ठों की ओर

आपको ले चलता हूँ!

सबसे पहले देखिए एक बच्चा कैसे आँखों पर पट्टी बाँधकर

सन्तू गदहे की पूँछ टाँक रहा है……

Taau.in
संतू गधे को नटखट बच्चे से बचाओ!

ताऊ रामपुरिया

संतू गधे को सूई चुभोकर परेशान करता शैतान बच्चा

आप मुझे शायद जानते ही होंगे, मैं ताऊ का संतू गधा हूं. वही संतू गधा जिसे ताऊ ने कुयें से जिंदा निकलवाया था.तब से ताऊ ने ही मेरी देखभाल की. मुझे पढाया लिखाया. मैं दो साल मुम्बई बालीवुड मे भी धक्के खा चुका हूं. फ़िल्मों का बडा शौकीन था. फ़िर ताऊ ने मुझे समझाया कि संतू देख अगर फ़िल्मों के चक्कर में रहा तो गधे का गधा ही रह जायेगा....कुछ पढ लिख ले जिससे आदमी बन जायेगा...अब ताऊ के लठ्ठ के डर के मारे मैं क्या बोलता कि गधा कभी आदमी बन सकता है क्या? सो मैं चुपचाप पढने लिखने लग गया... और (B.M.A.P) की डिग्री हासिल करली... वो कहानी तो अब मैं आपको बाद मे सुनाता ही रहुंगा...

अब देखिए समीरलाल (उड़न तश्तरी )
कथा और कविता के किस अन्दाज में
प्रस्तुत कर रहे हैं-
एक कहानी: एक कविता

जाने किस आहट से नींद खुल जाती है.कोई थकान नहीं, शायद नींद पूरी हो गई. खिड़की के बाहर झांकता हूँ. सफेद रात. जहाँ तक नजर जाती है, बरफ ही बरफ और रुई के फाहे की तरह गिरती लहराती बरफ अभी भी थमी नहीं है……

snowing

…..कहानी वो जो सोचने को मजबूर करे और कुछ नये भावों को जन्म दे. बस, बह निकले चन्द शब्द एक रुप ले:

एक अमर प्रेम,
एक रुढ़ीवादी समाज,
एक संस्कार
माँ बाप
का सम्मान,
धन लोलुपता,
मान्यतायें,
समर्पण………

प्रिंट मीडिया पर ब्लॉगचर्चा

हरिभूमि में 'अनवरत', 'आज का मुद्दा', 'सीधी खरी बात', 'चीरफाड़' तथा 'विस्फ़ोट' - 11 फरवरी 2010 को हरिभूमि समाचारपत्र के नियमित स्तंभ 'ब्लॉग की दुनिया से' में अनवरत, आज का मुद्दा, सीधी खरी बात, चीरफाड़ तथा विस्फ़ोट की पोस्ट्स

ताऊजी डॉट कॉम

फ़र्रुखाबादी विजेता (191) : सुश्री सीमा गुप्ता - नमस्कार बहनों और भाईयो. रामप्यारी पहेली कमेटी की तरफ़ से मैं समीरलाल "समीर" यानि कि "उडनतश्तरी" फ़र्रुखाबादी सवाल का जवाब देने के लिये आचार्यश्री यानि कि ह..

नुक्कड़

आशीष कुमार अंशु से बतकही करना चाहेंगे (अविनाश वाचस्‍पति) - 10 फरवरी से 16 फरवरी 2009 की यात्रा में हिन्‍दी ब्‍लॉगर मिलें बतकही ब्‍लॉग है आशीष कुमार 'अंशु' जी का और वे बुधवार को पहुंचे थे उदयपुर जहां से वे जायेंग..

उच्चारण

“मेरी पसन्दः मेरा पुराना गीत” - “गली-गाँव में धूम मची है…..” * * *गली-गाँव में धूम मची है,* * * *फागों और फुहारों की।।* ** ** * * *मन में रंग-तरंग सजी है,* * * *होली के हुलियार...

GULDASTE - E - SHAYARI

- हम जिए तो कुछ इस तरह से जिए.. के किसीको खबर न थी हमारी, ख़बर थी जिनको.. उन्होंने कभी ख़बर न ली हमारी !

लावण्यम्` ~अन्तर्मन्`

पापाजी , आपकी बिटिया , आपको सादर प्रणाम करती है और आपकी पुण्य तिथि पर : ११ फरवरी - - *स्वर कोकिला सुश्री लता मंगेशकर* * पँडित नरेन्द्र शर्मा की " षष्ठिपूर्ति " के अवसर पर , माल्यार्पण करते हुए * *लता जी ने ये गीत पहली बार सार्क के स्था पना के...

तेताला

इंटरनेशनल ब्‍लॉगर्स सम्‍मेलन : अब होगा देसी होली मिलन समागम : दूर होंगे समस्‍त गम - इन हिन्‍दी ब्‍लॉगरों के कारनामे जानने के लिए क्लिक करें उनके नाम पर। देखिए माउसरूपी चूहा जब काटता है तो क्‍या होता है कनिष्‍क कश्‍यप आशीष कुमार अशु..

Hindi Tech Blog

दिल्ली वालों ने नहीं सुनी ......... - मुझे एक पायरेटेड सॉफ्टवेयर की जरुरत है जो दिल्ली में नेहरु पैलेस में 100-200 रु में मिल जायेगा । इसके लिए दिल्ली के पाठको से निवेदन कर चुका हूँ । पर अभी..

कर्मनाशा

राह बस एक - खोजते - खोजते बीच की राह सब कुछ हुआ तबाह। बनी रहे टेक राह बस एक।

आदित्य (Aaditya)

जुगाड़ लगाओ.. पहुँच बढाओ.. - ये तसवीरें पूरी कहानी बयान कर रही है... मंझा आया!!

दिनेश दधीचि - बर्फ़ के ख़िलाफ़

तेरी हसीं निगाह का एहसानमंद हूँ...

पहली बार एक फ़िल्मी गीत की पंक्ति आप मेरे ब्लॉग पर देख कर कुछ हैरान तो होंगे. पर बुरा ही क्या है अगर यूँ मेरी बात आप तक पहुंचे ? बात यह है कि आज मुझे आप सब के प्रति अपनी कृतज्ञता के भाव को व्यक्त करना है. जैसा अक्सर ऐसे अवसरों पर होता है, मुझे भावुकतावश कोई सही शब्द नहीं सूझ रहे हैं. मुझे याद है जब पहली बार एक उड़न तश्तरी मेरे ब्लॉग पर उतरी, या जब डॉ. रूप चन्द्र शास्त्री 'मयंक' के सर्व-व्यापी स्वरूप का प्रेरक साधुवाद मिला, या केवल टी वी पर देखे गए अलबेला खत्री ने मेरी पोस्ट पर टिप्पणी की, या घुघूती बासूती से रचनाओं के माध्यम से परिचय हुआ या परिचित-अपरिचित पाठकों की टिप्पणियां मिलने लगीं या जब देश-विदेश से अपनी रचनाओं पर सकारात्मक प्रतिक्रियाएँ प्राप्त हुईं तो हर बार कृतज्ञता का यह भाव अधिकाधिक समृद्ध होता गया.

इन्द्रधनुष


कृतिदेव फान्ट में टाईप सामग्री को ब्लाग पर प्रकाशित करने के लिए कोई टूल बताएं

ब्लागर बंधुआे आप सब से एक मदद चाहिए, क्या आपलोग मुझे कोई एेसा
टूल बता सकते हैं जिसकी सहायता से मैं कृतिदेव फान्ट में टाईप सामग्री को
ब्लाग पर प्रकाशित करने योग्य फान्ट में कन्वर्ट का सकने में सक्षम हो सकुं।
आप सबके जवाब का इंतजार रहेगा।

मनोरमा जी!

आप निम्न लिंक को खोलकर

कृतिदेव को यूनिकोड में बदलकर

अपने ब्लॉग पर लगा सकती हैं-

http://technical-hindi.googlegroups.com/web/krutidev010-to-Unicode+converter06.htm?hl=en&gda=e2cC1loAAACiAhJpruFZt_

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डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक आपका

भाव सुमन
आनन्द ही आनन्द समाया है सतगुरु तुम्हारे चरणों में अनमोल वचन अब पाया है सतगुरु तुम्हारी वाणी मेंआनन्द ही आनन्द .......................मैं कैसे भुला दूँ नेह तेरातुमने ही मुझे अपनाया है दुनिया ने मुझे ठुकराया है सतगुरु ने ज्ञान जगाया है आनन्द ही आनन्द

एक प्रयास

my own creation

क्या पुकार पायेंगे तुझे!

तू नहीं, खुशबू नहीं, तेरे आने की आरज़ू नहीं,
क्या सूखे दरख्तों पे पत्ते आयेंगे कभी, ,…..

कार्टून : ... और आपकी ऑस्ट्रेलिया यात्रा की प्रायोजक है ये 'गोरा बनाने वाली क्रीम'


बामुलाहिजा >> Cartoon by Kirtish Bhatt

भारत ब्रिगेड

समीर लाल जी से बातचीत 02

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समीर लाल जी से बातचीत
समीर लाल जी का ब्लॉग: उड़न तश्तरी
मिसफिट पर भी सुनिए

कबाड़खाना

काफ़्का का ’द कासल’ - बारहवां हिस्सा - (पिछली किस्त से जारी) घर की दूसरी लड़की ओल्गा, ब्लॉन्ड है और साधारण स्वभाव की- खामोश और गम्भीर. ईसामसीह की तरह जो मनुष्यों के पापों के लिए सूली पर चढ़ा था, ओल्..

टूटी हुई बिखरी हुई

पांच किताबें: जिन्हें पढ़ने के बाद आप वो नहीं रहे, जो आप थे ! - किताबों से हमारा ऐसा रिश्ता है जिसकी मिसाल ढूंढें नहीं मिलती। हर इंसान, जों अक्षर बांच लेता है, उसकी दुनिया में किताबों का एक या दूसरी तरह का स्थान है। ...

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......आप जल्द ही बोरियत गति को प्राप्त हों. - बड़ा बवाल मचा हुआ है. पूरे भारत में दस-पंद्रह शब्द गूँज रहे हैं. शाहरुख़ खान, बाल ठाकरे, आई पी एल, माफी, महाराष्ट्र, उत्तर भारतीय, टैक्सी ड्राइवर, कराची, म...

नारी

ये पोस्ट केवल सार्वजनिक सूचना के लिये हैं । - जी मेल मे एक नयी सुविधा आयी हैं जीमेल ब़ज के नाम से जिसमे आप के सन्देश इत्यादि दुसरो को भी दिखाई दे रहे हैं । जो लोग इस सुविधा को नहीं चाहते हैं { यानी जो ...

सच्चा शरणम्

मुझे मौन होना है - मुझे मौन होना है तुम्हारे रूठने से नहीं, तुम्हारे मचलने से नहीं, अन्तर के कम्पनों से सात्विक अनुराग के स्पन्दनों से । मेरा यह मौन तुम्हारी पुण्यशाली वाक..

निर्मल-आनन्द

क्या बेच रहे हैं शाहरुख़ ख़ान? - कल माई नेम इज़ ख़ान रिलीज़ होने वाली है। शाहरुख़ उम्मीद कर रहे होंगे कि यह फ़िल्म थ्री ईडियट्स से भी बड़ी ओपेनिंग लेगी और उस से भी बड़ी हिट साबित होगी। मुम्बई के ...

देशनामा

सरकार अब मौन है...खुशदीप - चलिए *सरकार की दुकान...* क्या खरीदना है...*पेट के लिए रोटी, हाथ के लिए रोज़गार, सिर के लिए छत...* सरकार की दुकान से जवाब मिलेगा....ये तो नहीं है...*सपने ..

अनुनाद

हमीं हम हमीं हम -

** ** हमीं हम हमीं हम रहेंगे जहाँ में हमीं हम हमीं हम ज़मीं आसमाँ में हमीं हम हमीं हम नफीरी ये बाजे नगाड़े ये तासे कि बजता है डंका धमाधम धमाधम हमीं हम ह..

श्री श्री १००८ बाबा समीरानन्द जी

दूसरों की मौज लेने से खुद के चेले और बच्चे बिगड जाते हैं : बाबा ताऊआनंद

बाबा ताऊआनंद प्रवचनमाला भाग - 5

प्रिय आत्मन,

जैसा कि आप जानते हैं कि हमने आजकल कुछ भी बोलना छोड दिया है. आज के समय मे किसी को कुछ समझाना " भैंस के आगे बीन" बजाने जैसा है. सो बेहतर यही है कि अपनी बीन ना बजाई जाये. और वैसे भी हम आजकल निजी प्रश्नों के उत्तर नही देते है. सिर्फ़ लोकहितकारी प्रश्न ही प्रश्नोत्तरी सभा में लिये जाते हैं.

भक्तों से मुक्त हस्त दान देने की अपील करते हुये बाबाश्री ताऊआनंद महाराज...
बांयी तरफ़ विराजमान हैं..बडे महाराज श्री श्री १००८ समीरानंद नंद जी महाराज
और दांयी तरफ़ विराजमान हैं अर्थ-प्रबंधक बाबा स्वामी महफूज़ानंद जी महाराज


हमारे परम भक्त ललित शर्मा ने एक बहुत ही सुंदर प्रश्न किया था जिसको लोकहित मे जानकर हम यहां जवाब दे रहे हैं. उन्होने पूछा है कि बाबाश्री, आज कल के बालक बहुत ही उदंडता करते हैं ऐसा क्यों?...........

अब आज की चर्चा यहीं पर समाप्त करता हूँ-

10 comments:

ताऊ रामपुरिया said...

बहुत जोरदार चर्चा शाश्त्री जी, आपकी श्रम शक्ति को नमन है.

रामराम.

पं.डी.के.शर्मा"वत्स" said...

लाजवाब चर्चा शास्त्री जी!!!
बहुत सारे अच्छे लिंक मिले....
आभार्!

दिगम्बर नासवा said...

लाजवाब चर्चा .... शास्त्री जी Pranaam ....

वन्दना said...

bahut hi badhiya charcha rahi.

Suman said...

nice

RaniVishal said...

acchi charcha....Aabhar!!
http://kavyamanjusha.blogspot.com/

डॉ. मनोज मिश्र said...

लाजवाब चर्चा ..

रावेंद्रकुमार रवि said...

क्योंकि दुलत्ती नहीं झाड़ रहा,
इसलिए यह गधा या तो पूरा गधा है
या बच्चे को बच्चा समझकर छोड़ रहा है!

--
कह रहीं बालियाँ गेहूँ की - "मेरे लिए,
नवसुर में कोयल गाता है - मीठा-मीठा-मीठा!"
--
संपादक : सरस पायस

मनोज कुमार said...

सादर अभिवादन! सदा की तरह आज का भी अंक बहुत अच्छा लगा।

Akanksha~आकांक्षा said...

लाजवाब और सारगर्भित चर्चा..बधाई.

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