Sunday, February 21, 2010

धमकियों के बाद-ब्लागर मिलन-दी्वानगी कभी दे्खी नहीं "चर्चा हिंदी चिट्ठों की (ललित शर्मा)

रविवार को ही ढेर सारे काम हो जाते हैं घर के. घर के काम करना भी जरुरी है. क्योंकि आखिर में घर वाले ही साथ देते हैं. देखिये ना हमारे जार्ज बाबु को, जब तक वो स्वयं भले चंगे थे तब तक तो उनका परिवार (पत्नी और बच्चे) कहीं नहीं दिखे. लेकिन जब उन्हें अल्जाइमर नामक बीमारी ने घेर लिया तो उनकी पत्नी लैला कबीर और पुत्र शान फर्नांडिस उनकी सेवा में हाजिर हो गये.1998 से मैंने भी जार्ज बाबु को करीब से देखा है. लेकिन उनकी कोठी पर उनके पत्नी और बच्चे को कभी नहीं देखा. हां उनके भाई लारेंस फर्नांडीज से मुलाकात हुयी दो-तीन बार. पिछली बार जब उनसे मिला था तो उनकी तबियत ठीक नहीं थी. फिर भी उन्होंने हमारे लिए समय निकाला और चर्चा की. ठीक से बोल भी नहीं पा रहे थे.बहुत याद करने के बाद बोलते थे. अब कई दिनों से उनसे भेंट नहीं हुयी है. कभी इस पर भी लिखेंगे.मै ललित शर्मा ले चलता हूँ आपको आज की चर्चा हिंदी चिट्ठों की पर.............. 
पहला चिटठा लेते हैं कुंमाऊनी चेली शेफाली पांडे जी का उन्होंने लिखा है आओ गरीब दिखें. अब गरीब कैसे दिखें यह भी चिंतनीय है. हमारे यहाँ तो हमने देखा है की गरीब दिखाने के लिए लोगों ने अपना नाम गरीबी रेखा की सूची में दर्ज करवा लिया है और उनकी बिल्डिंगों के सामने पीला बोर्ड लगा है गरीबी रेखा का पर...... शेफाली जी कहती हैं......वैसा मेरा भी यही मानना है कि इंसान को सदा गरीब दिखना चाहिए. इससे एक तो व्यक्तित्व से विनम्रता  टपक टपक कर बहती रहती है, और जाने अनजाने कई तरह के फायदे हो जाते हैं, आप फटे हुए बैग में लाखों रूपये भरकर बेंक से  पैसा लेकर बिना लूटे हुए  घर आ सकते है, डॉक्टर सैम्पल  की दवाएं फ्री में दे देता है, वह भी शर्म के साथ कि मैं बस सिर्फ़ इतनी ही सेवा कर पा रहा हूँ , राशन वाला १०० - २०० ग्राम राशन अतिरिक्त तोल देता है, आते जाते मुफ्त में लिफ्टगरीबी की दिखावट देखकर अपना जाली काटने वाला चाकू और ताले  तोड़ने वाला सब्बल भी छोड़ कर चला जाता है. मिल जाती है, कोई चंदा लेने वाला आपके नाम की रसीद नहीं काट सकता, चोर, चोरी करने आता है,
 
ओशो चिंतन पर राजेंद्र त्यागी जी कह रहे हैं दुःख की ईंटे हटा कर सुख की ईंटे रखिये. आगे क्या कहते हैं एक बानगी देखीय........आज तक का समाज दुख से भरा हुआ समाज है, उसकी ईंट ही दुख की है, उसकी बुनियाद ही दुख की है। और जब दुखी समाज होगा तो समाज में हिंसा होगी, क्योंकि दुखी आदमी हिंसा करेगा। और जब समाज दुखी होगा और जीवन दुखी होगा तो आदमी क्रोधी होगा, दुखी आदमी क्रोध करेगा। और जब जिंदगी उदास होगी, दुखी होगी, तो युद्ध होंगे, संघर्ष होंगे, घृणा होगी। दुख सब चीज का मूल उदगम है।यदि नये समाज को जन्म देना हो तो दुख की ईंटों को हटा कर सुख की ईंटें रखनी जरूरी हैं। और वे ईंटें तभी रखी जा सकती हैं जब हम जीवन के सब सुखों को सहज स्वीकार कर लें और सब सुखों को सहज निमंत्रण दे सकें। 
 
अदा जी और वाणी जी से बुढ़ापा घबरा रहा है. घबराना भी चाहिए. वैसे तो हमारा (मेरा और वाणी) का बुढ़ापा आने से रहा, अरे हम जैसों को बुढ़ापा कहाँ आता है, वो भी तो बेचारा घबराता होगा (मतलब हमें ऐसा लगता है...ये हमारी खुशफहमी भी हो सकती है :):))फिर भी अगर भूले भटके...बुढ़ापे को हमारे बिना दिल ना लगा...और आ ही जाए तो ...परवा इल्ले:):)कुछ सौन्दर्य प्रसाधन हम भी यूसिया लेंगे ...और नहीं तो का....और तब जो हमारे मन में जज्बा होगा.....आपको बताते हैं हम....ये देखिये....
दर्पण हिल उठे, घरवालों ने भृकुटी तानी थी
ब्यूटी क्वीन बनने की उसने अपने मन में ठानी थी  
खोयी हुई खूबसूरती की कीमत आज उसने पहचानी थी
दूर बुढ़ापा हो जाए इस सोच की मन में रवानी थी 
चमकी डोल्लर सत्तावन में खंडहर वो जो पुरानी थी
सौन्दर्य प्रसाधनों के मुख से हमने सुनी कहानी थी 
टोटा-टोटा बन जाए कल तक वो  जो नानी थी 
 
मित्र गिरीश बिल्लौरे जी ब्लाग जगत में काफी दिनों से हंगामा मचाये हुए हैं पोड कास्ट का. अब एक नया हंगामा लेकर आये हैं होली हंगामा आप भी सुनिए, 
वकील साहब दिनेश जी जोधपुर ब्लागर मिलन की मधुर यादें सुना रहे हैं और कह रहे हैं की समयाभाव  के कारण मुथा जी की कवितायेँ नहीं सुन पाए........वे अपनी डायरी साथ ले कर आए थे और कुछ कविताएँ सुनाना चाहते थे। हम भी इस बैठक को कवितामय देखना चाहते थे। उन्हों ने अपनी डायरी पलटना आरंभ किया। उन की इच्छा थी कि वे चुनिंदा रचना सुनाएँ। मैं ने आग्रह किया कि वे कहीं से भी आरंभ कर दें। मुझे अनुमान था कि हरि शर्मा जी के उन की माता जी को अस्पताल ले जाने के लिए समय नजदीक आ रहा था। तभी भाभी का फोन आ गया। हरिशर्मा जी ने उत्तर दिया कि मैं अभी पहुँच ही रहा हूँ। अब रुकना संभव नहीं था। समय को देखते हुए मूथा जी ने अपनी डायरी बंद कर दी। हम उन के रचना पाठ से वंचित हो गए।
 
राजू बिंदास जी सही मायने में नामरूप बिंदास ही हैं. मुझे इनका लेखन भाता है आज जार्ज और लाल मुनिया का किस्सा लेकर आये हैं और कह रहे हैं...... आइए आज आपको जॉर्ज शेपर्ड से मिलाता हूं. हमारी टीम के सबसे सीनियर मेंबर. अ जेंटिलमैन विद सिंपल लिविंग. नो कम्प्लेंस नो रिग्रेट्स एंड इंज्वाइंग लाइफ ऐज इट इज. एक अच्छे इंसान और अच्छे नेबर. सो एक दिन उनके पड़ोसी एक हफ्ते के लिए कहीं बाहर जा रहे थे. उन्होंने देखरेख के लिए जार्ज के घर लालमुनिया का अपना पिंजरा रख दिया. जार्ज और उनकी फैमिली ने लालमुनियाओं की अच्छे से देखभाल की. पड़ोसी खुश हुए और वो जार्ज के बेटे के लिए बज्जियों का एक जोड़ा ले आए. जार्ज के घर में इत्तफाक से एक पुराना पिंजरा था.
 
पावला जी धमकियों से परेशान हैं और धमकी देने वाले भी अपने ही लोग हैं क्या किया जाये बड़ी समस्या है. जब धमकियों से इतना अच्छा काम हो जाये तो धमकी देना भी जरुरी है....देखिये धमकिय क्या रंग लायी हैं और सबका फायदा हो गया.... समस्या का समाधान निकल आया......कई दिनों से ब्लॉगर साथी फोन कर के या मेल से धमकियाँ दे रहे थे कि अब आप अपने ब्लॉग बंद कर दें! आपमें अब वह माद्दा नहीं रहा कि किसी भी समय किसी भी उलझन को अपने शब्दों में ढाल कर बाकी साथियों की जिज्ञासा का समाधान कर सको। उलाहने तो पहले भी मिलते रहे हैं कि अब तकनीकी जानकारियाँ देना बंद क्यों कर दिया मैंने!ललित शर्मा जी ने तो अप्रत्यक्ष रूप से अपना गुस्सा जता दिया कि यहाँ कोई भी ऐसा ब्लॉगर नहीं है कि ब्लॉग की तकनीकी समस्याओं का समाधान कर सके? अब मैं उन्हें क्या बताता कि जो सक्षम माने जाते हैं वह सब मौज की चपेट में आ कर प्रस्थान करते चले गए या जा रहे।
राजतंत्र पर दीवानगी छाई हुए है राजकुमार ग्वालानी कह रहे है कि ऐसी दीवानगी कभी देखी नहीं. भैया अब फालतू दीवानों के चक्कर में मत पड़ा कीजिये.......हमारी सलाह है और अब पढ़िए राजकुमार जी क्या कह रहे हैं....... नेताजी स्टेडियम में मुख्यमंत्री एकादश और विधानसभा अध्यक्ष एकादश के बीच मैच प्रारंभ होने से पहले जब भारतीय टीम की खिलाडिय़ों ने मैदान का एक चक्कर लगाया तो सबके मुंह ने यही बात निकली कि हॉकी के एक प्रदर्शन मैच में इतने दर्शक। वास्तव में यह हॉकी खिलाडिय़ों के लिए सुखद और आश्चर्य जनक था कि हॉकी का एक प्रदर्शन मैच देखने के लिए दर्शक टूट पड़े थे। हॉकी खिलाडिय़ों का कहना है कि ऐसी दीवानगी उन्होंने पहले कभी नहीं देखी थी।
 
वाणी जी आज ज्ञान वाणी
पर बेचारे पतियों की खबर ले रही है..... बात पति की हो और खाने से शुरुआत ना हो .... पत्नी के हाथ का बना भारतीय, चायनीज , कांटिनेंटल ...हर तरह का खाना अपनी अंगुलिया चाट कर खाने के बाद पेट पर हाथ फेरते पतियों के मुंह से यही सुनने को मिलेगा ...खाना तो हमारी मां बनाती थी ...(वो चाहे जिंदगी भर पुए पकौड़ी बना कर ही खिलाती रही हों )......2 किलोमीटर जोगिंग कर के आये पत्नी और बच्चों के साथ बैडमिन्टन खेलते हुए अगर पिताजी का फ़ोन आ जाये तो फिर देखिये ....दुनिया जहां की दुःख तकलीफ एक साथ उनकी आवाज में समां जायेगी ....बरसों पहले पाँव की टूटी हड्डी का दर्द उभर कर सामने आ जाता है ....
 
एक  ब्लागर मिलन हुआ बिलासपुर में, एक नयी कहावत शुरू हो गयी है. दो ब्लागर मिले तो मीत और तिन हुए तो मिलन और इससे अधिक हुए तो सम्मलेन....... तो भाई तीन ही थे इसलिए ये मिलन कह लायेगा......जब दुनिया का हर पांचवा ब्लाग लिखने लगेगा तो क्या होगा? जब दुनिया का हर पांचवा आदमी ब्लाग लिखने लगेगा तो बाप-बेटा भी लिखेंगे. बाप ने अगर बेटे को रात को कोई काम बताया और दुसरे दिन शाम को पूछा कि मैंने जो काम बताया था वो किया कि नहीं? तो बेटा बोलेगा कि "मैंने तो सुबह ही आपको पोस्ट लिख कर बता दिया था कि वह काम मुझसे नहीं हो सकता. अब आपने मेरा ब्लाग नहीं पढ़ा तो उसमे मेरी क्या गलती है". हां हा हा 
कल ब्लागर में बहुत लोगों  को परेशानी आ रही थी, सुबह अवधिया जी ने फोन करके बताया और रात को पावला जी परेशान थे उनकी पोस्ट नहीं हो रही थी. अब समाचार आया है कि ........तकनीकी खराबी के कारण एक करोड़ से ज्यादा ब्लॉग 110 मिनट तक बंद पड़े रहे।  इससे साढ़े पचास लाख पन्ने देखने से जो धंधा होता वह हो नहीं पाया। ‘ऑथेनटिक’ के संस्थापक और वर्ल्ड डॉट कॉम के मालिक मेट मुलीनवेग ने कहा है कि सरवर की समस्या के कारण ऑउटेग में दिक्कतों आने से यह गड़बड़ी हुई। अपने ब्लॉग पर उन्होंने लिखा कि अनियोजित और अवैध परिवर्तर्नों के कारण हमारे नेटवर्क में गड़बड़ी हुई है। ऐसी गड़बड़ी को पहले कभी महसूस नहीं किया गया। मेट ने कहा कि हम ऐसी व्यवस्था करने जा रहे हैं जिससे ऐसी गड़बड़ी दुबारा न हो।
 
विवेक रस्तोगी जी बाघ बचाओ मुहीम पर कह रहे हैं.......क्या हम इन १४११ बाघों के ऊपर लिखने से, बोलने से  इन १४११ बाघों को  बचाने में सफ़ल होंगे और इनकी संख्या बड़ा पायेंगे क्या गारंटी है कि हम इन १४११ बाघों को भी बचा पायेंगे, थोड़े सालों बाद फ़िर मीडिया केवल राग अलापेगा कि बाघ प्रजाति लुप्त हो गई और इन १४११ बाघों की कहानी बन जायेगी। कि आमजन ने क्या क्या नहीं किया था इन १४११ बाघों के लिये…  
अब अरविन्द मिश्र जी ने श्रीश जी के हड्काने से कविता ही लिख दी है......जी हाँ ,एक दिन श्रीश ने हड़का ही लिया मुझे ....बच्चों का आतप झेला नहीं जा सकता .कभी उन्होंने मुझे नवोत्पल पर  लिखने को आमंत्रित किया था और मैंने इस साहित्यिक मंच की सदस्यता भी स्वीकार कर ली थी मगर लिखने को वक्त नहीं निकाल पा रहा था या फिर उस ओर ध्यान ही नहीं जा पा रहा था ..बस ऐसे में स्नेहाक्रोश से लबरेज श्रीश भाई ने मुझे जो हडकाया कि मेरी रूह फ़ना हो गयी .....तभी से इसी उधेड़बुन में था कि कुछ तो लिखूं वहां -वचन बद्धता तो थी मगर उत्प्रेरण नहीं मिल रहा था -साहित्य सृजन कोई प्रमेय का सिद्ध करना नहीं है शायद ....  
 
गिरजेश राव जी ने फाग आग आंच प्रस्तुत कर दिया है....और खुशदीप जी ने तो कमाल ही कर दिया अपनी पोस्ट हिट करा ली.....अब ऐसा ही कुछ नुख्सा हमें भी अपनाना पड़ेगा.......जी हां, ठीक पढ़ा आपने...मुझे हर हाल में अपनी ये पोस्ट हिट करानी है...लेकिन मेरे पास लिखने के लिए आज कोई सॉलिड मुद्दा नहीं है...फिर...फिर क्या...जो फॉर्मूला कुछ और ब्लॉगर भाई अपना सकते हैं, वो मैं नहीं अपना सकता क्या...शाहरुख़ ख़ान...माई नेम इज़ ख़ान... को हिट कराने के लिए मार्केट-शास्त्र की हर ट्रिक आजमा सकते हैं, मैं नहीं आजमा सकता क्या........ ताऊ जी की पहेली में जोर आजमा रहे हैं...प्रिय बहणों और भाईयों, भतिजो और भतीजियों सबको शनीवार सबेरे की घणी राम राम. ताऊ पहेली *अंक 62 *में मैं ताऊ रामपुरिया, सह आयोजक सु. अल्पना वर्मा के साथ आपका हार्दिक स्वागत करता हूं. जैसा कि आप जानते ही.......
अब हो गया है समय चर्चा को विराम देने का .........
आप सभी को ललित शर्मा का राम-राम......... 

19 comments:

बी एस पाबला said...

बढ़िया, बेहतरीन

आभार

बी एस पाबला

जी.के. अवधिया said...

ये चर्चा भी तो कहीं किसी धमकी के बाद वाली तो नहीं है? :)

सुन्दर चर्चा!

खुशदीप सहगल said...

ललित भाई,
धीरे धीरे ब्लॉगवुड पर भी होली की मस्ती तारी होने लगी है...यही उम्मीद करता हूं कि होली के इन रंगों में ब्लॉगवुड की सारी कड़वाहट दूर हो जाए...

हां, जॉर्ज साहब के बारे में जो ख़बरें आ रही हैं, पढ़ कर मन दुखी हो रहा है...कभी आसमान छूने वालों की भी ऐसी हालत हो जाती है...हमें इससे सीख लेनी चाहिए...

जय हिंद...

Vivek Rastogi said...

वाह ललित भाई ताजे ब्लॉगों की चर्चा भी कर डाली ।

काजल कुमार Kajal Kumar said...

एक दम ताज़ा चर्चा.

रावेंद्रकुमार रवि said...

रोचक चर्चा!
--
कह रहीं बालियाँ गेहूँ की - "वसंत फिर आता है - मेरे लिए,
नवसुर में कोयल गाता है - मीठा-मीठा-मीठा! "
--
संपादक : सरस पायस

मनोज कुमार said...

सुंदर चर्चा। जार्ज जी वाला प्रसंग बहुत भाया। उनके लिये हम ७७ में मुज़फ़्फ़रपुर में चुनाव प्रचार करते थे तब वे ज़ेल में थे। फिर तो कई साल ऐसे ही साथ रहे। पर राजनीति है ही ऐसी चीज़ जो लोगों के तरह-तरह के चेहरे सामने ला देता है।

Suman said...

nice

ताऊ रामपुरिया said...

वाह बहुत सुंदर और एकदम ताजा चर्चा, आभार.

रामराम.

डॉ. मनोज मिश्र said...

बढ़िया.

दिगम्बर नासवा said...

सुंदर चर्चा ...

राज भाटिय़ा said...

मजे दार ओर धमाके दार, बहुत सुंदर लगी आप की यह चर्चा. धन्यवाद

Anil Pusadkar said...

nice.

Akanksha~आकांक्षा said...

..यथावत बढ़िया चर्चा..बधाई.

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

सुन्दर चर्चा!

'अदा' said...

Lalit ji,
fir aa gaye hain aapki tareef karne ka karein mazboori hai..
bahut hi badhiya aapki charcha lagi hamesha ki tarah...
Khushdeep ji ka fotu badhiya laga diye hain aap...ab blag jagat ke hero ka close-up dikha hai..ha ha ha
sabhi chitthe chun-chun kar daala hai aapne...
bahut hi badhiyaa..
dhnyawaad...mere budhaape ko bhi shamil kiya aapne...
aabhaar..

HARI SHARMA said...

बहुत चटपटी चर्चा
वैसे बुढापा खुद को बूढा समझो तो आता है
किसी ने क्या खूब कहा है -
उमर बढती है लेकिन दिल की हसरत कम नही होती
पुराना कुकर क्या सीटी बजाना छोड देता है

Shefali Pande said...

raam raam ...chitthe ko shamil karne ka shukriya ...

गिरीश"मुकुल" said...

अरे ई तो देक्खेच्च नईं रहिन
धन्यवाद ललित बाबू

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