आज खुशी की बात है कि संगीतकार ए आर रहमान को दो ग्रेमी अवार्ड मिले। आज सुरों के शहंशाह हैं तथा अपनी प्रयोग धर्मिता से भारतीय संगीत को विश्वस्तर पर पहचान दिलाई है। ग्रेमी अवार्डस मे भी अपने जय हो नामक गाने से परचम लहराया है और दो पुरस्कार जीत कर अपनी स्वर्णिम तिकड़ी पुरी कर ली है, हम इन्हे शुभकामनाएं देते है। इस पुरस्कार से यह साबित हो गया की आदमी अपने काम से पहचाना जाता है अब मै ललित शर्मा आपको ले चलता हुँ आज के हिन्दी चिट्ठों की चर्चा पर................ |
चर्चा का प्रारंभ करते हैं संजीव तिवारी जी की पोस्ट से......इन्होने पूछा है कि ![]() |
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मुम्बई पर कुछ धार्मिक कवितायें -सिटी पोयम्स मुम्बईमुम्बई केवल औद्योगिक नगरी नहीं है । यहाँ के लोगों की व्यस्तता देख कर ऐसा लगता है कि शायद इन लोगों के जीवन में धर्म-कर्म या पूजा -पाठ के लिये समय ही नहीं होगा । लेकिन ऐसा नहीं है ।मैने जब महालक्ष्मी मन्दिर ,सिद्धि विनायक और हाजी अली में लोगों की भीड़ देखी |
माइक्रो पोस्ट : मुम्बई मेरी हैआज दिनभर से टी.वी. में देख रहा हूँ मुम्बई मेरी है ..... मुम्बई हम सबकी है ... मैंने भी भारत देश की धरती पर जन्म लिया है इसीलिए डंके की चोट पर ऐलान कर रहा हूँ की मुम्बई मेरी है . जय हिंद महेन्द्र मिश्र जबलपुर. |
अब दिल्ली ब्लोग्गर बैठक नहीं होगी मगर ब्लोग्गर्स तो बैठेंगे ही ,वो भी इसी जी हां बिल्कुल ठीक पढ रहे हैं आप लोग , मेरे कहने का मतलब बिल्कुल स्पष्ट है कि, इस रविवार यानि सात फ़रवरी को प्रस्तावित दिल्ली ब्लोग्गर बैठक अब नहीं होगी । ब्लोग्गर बैठक नहीं होगी इसके कई कारण हैं जो मैं आगे बताऊंगा , मगर इससे पहले ये बताता चलूं कि राज |
"जुगाड़ों से चलने लगी जिन्दगी है!" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")*संशोधितकहीं है ज्वार और भाटा कहीं है, कहीं है सुमन और काँटा कहीं है, करीने से सजने लगी गन्दगी है!जवानी में थकने लगी जिन्दगी है!!जुगाड़ों से चलने लगी जिन्दगी है!!!कहीं है अन्धेरा कहीं चाँदनी है, कहीं शोक की धुन कहीं रागनी है, मगर गुम हुई गीत से नगमगी है! |
ब्लागर मीट के रोचक अनुभव:मुझे तो अब तक़ पता ही नही था कि नेताओं की तरह ब्लागर भी दो प्रकार के होते हैं।एक जबर्दस्त और दूसरा जबरदस्ती।इतना जबरदस्त ज्ञान हमको मिला रायपुर ब्लागर मीट के बाद समुद्र मंथन टाईप विचार मंथन से।मैं तो खुद को भाग्यशाली समझ रहा हूं |
"नमस्कार लिख्खाड़ानन्द जी!""नमस्काऽऽर! आइये आइये टिप्पण्यानन्द जी!""लिख्खाड़ानन्द जी, हम तो आपके लेखन के कायल हैं! लाज़वाब लिखते हैं आप! लोग आपको उस्ताद जी कहते और मानते हैं। क्या बात है आपकी! आज हम जानना चाहते हैं कि आखिर इतना अच्छा लिख कैसे लेते हैं जिसे |
गांधीजी अपना ब्लाग बनवाने ताऊ के पास आये!बापू की पुण्य तिथी पर सुबह ११ बजे आफ़िस में ही मौन श्रद्धांजलि देकर घर आगया. आकर खाना खाया और पूरे समय बापू के आदर्श और देशनाओं के बारे में ही मन में अनवरत मंथन चलता रहा. अचानक बापू आगये. मैने तुरंत खडॆ होकर बापू को कुर्सी पर बैठाया. बापू प्रसन्न चित |
प्रोफेसर ने क्लास लेना शुरू किया...प्रोफेसर ने हाथ में एक पानी से भरा गिलास पकड़ रखा था...पूरी क्लास को गिलास दिखाते हुए प्रोफेसर ने सवाल पूछा कि इस गिलास का वजन कितना होगा...बच्चों से जवाब मिला...'50 ग्राम!' ...'100 ग्राम!' ...'125 ग्राम!' |
पहुंचेंगे शिखर पर वो ..... मन जब उदास होता है ख़याल के पास होता हैजब दिल में दर्द उठता हैलब पे उच्छ्वास होता हैपहुंचेंगे शिखर पर वो जिन्हें विश्वास होता है सच्चा प्रेम मिल जाए फिर मधुमास होता हैसुधि सा जो साथी होजीवन ख़ास होता है कलह प्रेमी मनुज का तोबस विनाश होता हैकुटिलता |
सुख और स्वातन्त्र्य -3भाग-१ व भाग -२ से आगे ...........चित्रगुप्त कहे जा रहा था -' अजमेर से अकबर ने अपनी सेना की दुर्दशा का हाल सुना तो तैयब खान , खुर्रम अजमत खान आदि को दुगुनी फ़ौज देकर भेजा | चंद्रसेन ने रामपुरा की पहाड़ियों की शरण ली और शाही फ़ौज अपने आपको विजयी समझकर लौट गई | हजार-पांच सौ के नोट बंद करने से भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगाएक दवाई दुकानदार का कहना है कि अगर हजार और पांच सौ के साथ साथ सौ रुपए के नोट भी बदं कर दिए जाने तो अपने देश में भ्रष्टाचार पर कुछ हद तक अंकुश लग सकता है। भ्रष्टाचार के साथ दो नंबर की काली कमाई में | तवायफ की मौतराज कुमार सोनी के बिगुल पर प्रकाशित ''घुंगरू टूट गए'' को पढ़ते ही मुझे अपनी पंद्रह बरस पुरानी एक सम्पादक द्वारा सखेद वापस रचना याद आ गई सोनी जी के प्रति आभार एवं उस आत्मा की शान्ति के लिए रचना सादर प्रेषित है चीथड़े में लिपटी बूढ़ी माँ मर गई कोई न रोया न |
काफ़्का का ’द कासल’ - तीसरा हिस्सा(पिछली किस्त से जारी)इन लघुतर देवताओं, खासतौर पर क्लाम की एक विशिष्टता है: वे लगातार बदलते रहते हैं - प्रोटीयस सरीखा यह सतत कायान्तरण अलौकिक के रहस्य को बनाए रखता है. क्लाम गांव में कुछ है, महल में कुछ; बीयर पीने से पहले कुछ है और बाद में कुछ और; जगा हुआ | ग़लत मैं भी नहीं तू भी सही है। मुझे अपनी तुझे अपनी पड़ी है।-दीक्षित दनकौरी -ग़लत मैं भी नहीं तू भी सही है।मुझे अपनी तुझे अपनी पड़ी है।न जाने क्या सहा है रौशनी ने,चराग़ों से बग़ावत कर रही है।अना बेची, वफ़ा की लौ बुझा दी,उसे धुन कामयाबी की लगी है।कमी अपनी इबादत में न देखी,समझ बैठा खुदा में ही कमी है।शराफ़त का घुटा | देश और देशवाशी !!!रात को एक टीस सी दिल के कौने में उठ रही थी! दिल के दर्द से अनजान था, आखिर कौन सी पीड़ा घुट रही थी!! जुबान से पूछा दिल मैं क्या दर्द है बता, ज़ुबां कुछ न कह पाई पर गम का वो गुब्बारा आखिर फूट पड़ा और आँख भर आई हाथ ख़ुद ब ख़ुद जुड़ गए और वतन को सलाम किया |
अरे कमीने.....तेरा सत्यानाश हो.....दूध जलवा दिया तुने!!!आज धुप अच्छी खिली हुई हैं। चटाई लेकर मैं छत पर पंहुचा। आज आलू-मेथी की सब्जी और परांठे खाने कोमिले। सब्जी में लहसुन ज्यादा डल गया था परन्तु स्वाद भी बढ़ गया था। अख़बार खोला। एक खबर कहती है किआने वाले दिनों में दूध के भाव बढ़ जायेंगे । कभी मैं ५ रूपये लीटर | आप अपना ब्लॉग कहाँ और कैसे बेच सकते हैं ?सर्वप्रथम तो मैं आपको बता दूँ कि किसी ब्लॉग या वेबसाइट को बेचना इतना आसान नहीं । किसी ब्लॉग या वेबसाइट की कीमत कई बातों से जुडी होती है । बहुत से ब्लॉग या किसी वेबसाइट के मालिक ये सोचते हैं कि हम किसी वेबसाइट या ब्लॉग को बेच कर बहुत आसानी से पैसा कम सकते | बड़ा बाजीगर है वसंत !वसंतोत्सव में हम आज लेकर आयें हैं डा राम विलास शर्मा की कविता । वैसे कवि के रूप में कम शर्मा जी की ख्याति हिन्दी समालोचक के रूप में अधिक रही है । इन्होने "निराला की साहित्य साधना"तीन खंडो में लिखकर न केवल अपनी प्रखर |
सीमाए लांघता सरकारी धन का दुरुपयोग !बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और गरीबी पर अंकुश लगाने के लिए बहुप्रचारित दैनिक जीवन में सादगी (austerity ) अपनाने की कौंग्रेस की बात वहाँ ख़त्म हो गई दीखती है, जहां एक दिन राहुल भैया, पूरे गाजे-बाजे और बीच राह में कुछ छुटभैयों द्वारा प्रायोजित पथराव | खुल्ला खेल फ़र्रुखाबादी : 189 आयोजक उडनतश्तरीबहनों और भाईयों, मैं उडनतश्तरी इस फ़र्रुखाबादी खेल में आप सबका आयोजक के बतौर हार्दिक स्वागत करता हूं. जैसा कि आप जानते हैं कि अब से इस खेल के दिन मंगलवार और शुक्रवार निर्धारित कर दिये गये हैं. समय शाम 4:44 PM. रहेगा. आईये अब खेल शुरु करते हैं.नीचे का | स्वागत बसंत-- करण समस्तीपुरीस्वागत ! स्वागत !! स्वागत बसंत !!!हे प्रेमपुँज ! हे आश रूप !!ऋतुपति ! तेरी सुषुमा अनंत !!स्वागत ! स्वागत !! स्वागत बसंत !!!कानन की कांति के क्या कहने !किसलय-कली-कुसुम बने गहने !!अवनी सूचि पीत सुमन पहने !मानो, विधि की रचना जीवंत !!स्वागत |
रमई काका के जनम दिन पै यक कविता : '' धरती हमारि '' ...पढ़ैयन का राम राम !!!' अवधी कै अरघान ' की महफ़िल मा आप सबकै स्वागत अहै ..आज रमई काका कै जनम दिन आय .. काका कै जनम २ फरौरी १९१५ मा भा रहा .. अबहीं कुछ देरि पहिले काका जी के सुपुत्र सिरी अरुण त्रिवेदी जी से बात भै | रवि मन : मेरा नया ब्लॉग"रवि मन" यह है - मेरे नवेले ब्लॉग का सुनहरा नाम! इस पर मैं स्वरचित रचनाओं का प्रकाशन किया करूँगा! मैं "रवि मन" पर स्वागत करता - आप सभी मनमानों का, मन में भरकर सरस मिठास! मन से आइए और मन से पढ़िए - मेरी मन-भाती रचना - मुझको बता | अंग्रेजों के देश में यूं ही चलते फिरते उपजी एक हिंदी कविता और उसका English रूपांतरण-------->>>>दीपक 'मशाल'हो सकती थी सोनचिरइया मेरे भी जीवन में इकइन्द्रधनुष के सातों रंगा सकते थे मुझको भी दिखहोती कुछ ज्यादा ही रौशन रौशनी मेरे जीवन कीजो तुम थोड़े सस्ते होते तो सकता था मैं भी बिकऋतू वसंत की हो जाती कुछ ज्यादा ही सुन्दर सीमैं एकाकी इक मानव हूँ ये टूट भी जाता |
अमीर किसान-गरीब किसानहमारा देश किसानों का देश है कुछ वर्ष पहले तक एक ही वर्ग के किसान होते थे जिन्हे लोग 'गरीब किसान' के रूप में जानते थे जो सिर्फ़ खेती कर और रात-दिन मेहनत कर अपना व परिवार का गुजारा करते थे लेकिन समय के साथ-साथ बदलाव आया और एक नया वर्ग भी दिखने लगा जिसे हम | अमन की आशा , जी नहीं यहाँ न मैं ब्लॉग जगत की बात कर रहा हूँ , न महाराष्ट्र कीकुछ दिनो से टीवी में एक विज्ञापन आ रहा है , कुछ अलग सा. "अमन की आशा" दरअसल यह एक प्रयास है , "टाइम्स ऑफ इंडिया" और पाकिस्तान के"जंग" समूह का दो देशों के बीच मैत्री एवं सदभावना का . अच्छा प्रयास है की दो पड़ोसी अच्छे रिश्ते बना सकें . इस | हिमाचल के मणिकर्ण का श्रीराम मंदिरहिमाचल का मणिकर्ण वह दिव्य स्थान है जो भगवान शंकर को अत्यधिक प्रिय है। पुराणों के अनुसार शिवजी तथा माता पार्वती ने अपने विवाह के पश्चात 11000 वर्षों तक यहां रमण किया था। भोले भंडारी को तो यह अलौकिक स्थान इतना प्रिय रहा कि उन्होंने काशी में भी अपने स्थान |
कार्टून :क्या इस तरह होगी महंगाई कम ! ![]() हरिओम तिवारी द्वारा कार्टून कमंडल - | सपा:किसने, किसे निकाला?![]() ITNI SI BAAT - |
आये नाग न पूजे, भिम्भोरा पूजे जाय![]() सूर्यकान्त गुप्ता द्वारा उमड़त घुमड़त विचार -पर संगवारी मन ल मोर जय जोहार. मैं हा ऊपर मा लिखे मोर राज के मिठ बोली के हाना (कहावत) ल एखर खातिर लिखे हंव के हमन घर मा आये नाग देवता के पूजा करेबर छोड़ के भिम्भोरा ल पूजे बर जाथन . कुदरत हा अपन खूबसू... |
होगे चर्चा के विराम-जम्मो संगवारी मन ला ललित शर्मा के राम-राम |
28 comments:
वाह इतने सारे लिंक्स एक साथ!
वाकई बहुत मेहनत करते हैं आप ललित जी!
ये चर्चा बड़ी है मस्त-मस्त
भाई वाह ललित जी ! आज भी हमेशा की तरह से चर्चा के झंडे गाड़ दिए | बढ़िया रही आज की चर्चा !
बेहतरीन कवरेज के साथ हाजिर हैं ललित जी...मजा आ गया!
ललित चर्चा लालित्य से परिपूर्ण।
शुभकामनायें !
शानदार चर्चा.
वाकई बहुत मेहनत करते हैं आप......बढ़िया रही आज की चर्चा !
नोट: लखनऊ से बाहर होने की वजह से .... काफी दिनों तक नहीं आ पाया ....माफ़ी चाहता हूँ....
ek sath zabardast post ke link
shukriya ji
धासू रही चर्चा ।
बने रहिस गा
बी एस पाबला
वाह गजब की वृहद चर्चा है. बहुत शुभकामनाएं
रामराम.
वाह गजब की वृहद चर्चा है. बहुत शुभकामनाएं
रामराम.
वाकई बहुत मेहनत करते हैं आप ललित जी!
maza aa gaya lalit ji, apne blog ko aur taste de diya hai
शर्मा जी धन्यवाद , आज तो आपने कमाल की चर्चा किया है
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Thanks&Best Regards,
Pankaj Mishra
ललित जी नमस्कार!
चर्चा का सुन्दर विस्तार!
@Saloni Subah,
This is not a advertise portal please do not do comment like this again !
best Regards,
Charcha Team
बहुत ही बढ़िया चर्चा....आभार..
इतने सारे लिंक्स ... मजा आ गया...
शानदार चर्चा.
शानदार ..
बहुते बढ़िया चर्चा रही..भाई..
इतने सारे लिनक्स दिए हैं आपने...आपकी मेहनत दीखाई देती है..
बहुत बधाई..!!
फ़ौजी तेरा क्या खूब बताना
हाय राम चर्चा का है जमाना
सब पोस्ट पढो
फिर सोच करो
कुछ इसपे लिखो
कुछ उसपे लिखो
कोई कविता लिखे
कोई गीत लिखे
कोई गद्य लिखे
कोई पध्य लिखे
इन सबमे माथा खपाना
हाय राम कैसा ये फ़साना
बिल्कुल फर्स्टक्लास क्लास चर्चा महाराज्!!
mazedar...........
umda !
वाह सर जी , चर्चा एकदम कमाल जा रही है और ये कमाल आप ही कर सकते हैं
अजय कुमार झा
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