चंदा सकेल के मंदिर, धर्मशाला, मस्जिद बनाना तो आम बात है, लेकिन बिहार के मुजफ्फरपुर के सकरा थाना क्षेत्र के बरियार पुर गांव के ग्रामीणों ने चंदा करके एक पोलिस चौकी का निर्माण किया है. इसके निर्माण में तीन लाख रूपये खर्च हुए हैं. यहाँ पहले चौकी की जगह एक झोंपड़ी हुआ करती थी जिसमे पुलिस कर्मी अपनी ड्यूटी देते थे.बरसात के समय ये पुलिस कर्मी लोगों के मकान में शरण लेते थे. बिहार में विकास का दावा करने वाली नीतीश सरकार के लिए सोचने की बात है. अब मै ललित शर्मा ले चलता हूं आपको आज के ताजा तरीन चिट्ठों की चर्चा पर ............................

चर्चा करते हैं अनवरत पर दिनेश दिवेदी जी के लेख की .........बख्शीश तो एक पुरानी परमपरा है. जब डाकिया मनीऑडर लेकर आता था तो उसे बख्शीश देनी ही पड़ती थी. बिजली वाले, टेलीफोन वाले, और भी जितने भी वाले हैं वो भी बख्शीश ले ही जाते है..............तीन-चार मिनट बाद ही फिर घंटी बज उठी। वकील साहब ने फिर दरवाजा खोला तो वही सिपाही बाहर खड़ा था। उस से पूछा -भाई! अब क्या रह गया है। सिपाही बड़ी मासूमियत से बोला -हुकुम! अब तो आप हाईकोर्ट के जज हो जाएँगे। मैं पुलिस वेरीफिकेशन के लिए आया हूँ मुझे ईनाम नहीं मिलेगा? ..........फिर क्या हुआ यह काका जी ने नहीं बताया। इतना जरूर पता है कि वे वकील साहब हाईकोर्ट के जज ही न बने मुख्य न्यायाधीश हो कर सेवानिवृत्त हुए।
अलबेला खत्री जी ने कुछ लोगों का नाम लेकर उन्हें खुला निमंत्रण दिया है. लेकिन हमें छोड़ दिया, क्योंकि हमें तो सिगरी न्योता देना पड़ता.......हमारा परिवार भी बड़ा है, इस लिए भाई जी कन्नी काट गए.....लेकिन आप सब का भी निमंत्रण है.....वो कह रहे है......हुआ यों कि समीरलाल, राजीव तनेजा,सतीश पंचम इत्यादि मित्रों ने कुछ हास्य आलेख भिजवाये थे जो कि "लाफ्टर के फटके " का शेड्यूल समाप्त हो जाने के कारण काम नहीं आ
सके तब मैंने गुंजन म्यूजिक कम्पनी से बात की, आलेख दिखाए, रूप रेखा समझाई और भरोसा दिलाया कि हिन्दी ब्लॉग जगत में एक से बढ़कर एक कलम के धनी बैठे हैं जो कि खूब उम्दा हास्य कार्यक्रम लिख सकते हैं तो कम्पनी के सी एम डी श्री जसवंत जी तैयार हो गये और एक एक घंटे के एल्बम की रूप रेखा बन गई ।
सके तब मैंने गुंजन म्यूजिक कम्पनी से बात की, आलेख दिखाए, रूप रेखा समझाई और भरोसा दिलाया कि हिन्दी ब्लॉग जगत में एक से बढ़कर एक कलम के धनी बैठे हैं जो कि खूब उम्दा हास्य कार्यक्रम लिख सकते हैं तो कम्पनी के सी एम डी श्री जसवंत जी तैयार हो गये और एक एक घंटे के एल्बम की रूप रेखा बन गई ।
सूर्यकांत गुप्ता जी छत्तीसगढ़ी और हिंदी दोनों में लिखते हैं. इनकी भाषा बड़ी चुटीली होती है. बस थोड़ी सी चुटकी ली और आनंद रस की धार बहा देते है..........उमड़त-घुमड़त विचार चले आते हैं बादल की तरह और बरस कर चले जाते हैं देखिये.......मन में पीड़ा कब होती है? मैंने देखा है व अनुभव किया है कि प्रायः व्यक्ति अपने आप को दुखी तब पता है जब वह अपनी तुलना दूसरों से करता है यदि वह दूसरों को खुश रख अपने आप में ज्यादा ख़ुशी महशूस करे तो हो सकता है उसे दर्द का अनुभव ही न हो. पर क्या किया जाय हम सब इसी में उलझे रहते हैं और कहते हैं "उसकी कमीज मेरी कमीज से सफ़ेद क्यों?"
डॉ. दराल साहब ने तो आज कमाल कर दिया...वैसे कमाल तो पहले ही कर चुके हैं लेकिन आज चित्रों को जो छटा दिख रही है अंतर मंथन पर देख के मन बाग-बाग हो गया, दिल गार्डन-गार्डन हो गया ....दिल्ली में महरौली बदरपुर रोड पर साकेत के करीब बना है , गार्डन ऑफ़ फाइव सेंसिज। दिल्ली टूरिज्म ने यहाँ १९-२१ फरवरी तक गार्डन टूरिज्म फेस्टिवल का आयोजन किया था । क्योंकि यही एक पार्क है जो हमने अभी तक नहीं देखा था , इसलिए शनिवार को हम पहुँच गए इस फूलों के मेले में।लेकिन द्वार से प्रवेश करते ही सारी थकान और परेशानी उड़न छू हो गई। कैसे --- आप भी देखिये ---
ताऊ पहेली पर तो हम जवाब देने जाते हैं लेकिन हमारे से पहले ही कोई जवाब दे जाता है.......हमारा नंबर ही नहीं आता विजेता बनने के लिए. लेकिन आज बिल्ली के भाग से छीका टूट ही गया और हमें विजेता घोषित कर दिया गया.......ताऊ पहेली - 62 : विजेता : श्री ललित शर्मा जम्मू और कश्मीर राज्य का एक जिला 'लद्धाख 'सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण स्थल है.उत्तर में चीन तथा पूर्व में तिब्बत की सीमाएँ हैं.यह देश के सबसे विरल जनसंख्या वाले भागों में से एक है.कारण साफ है यहाँ की अत्यंत शुष्क एवं कठोरजलवायु !वार्षिक वृष्टि 3.2 इंच तथा वार्षिक औसत ताप ५ डिग्री सें. है.मुख्य नदी सिंधु है.कुछ समय पूर्व यहाँ पर्यटन विभाग ने पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए 'सिंधु दर्शन' उत्सव प्रारंभ किया है.
वेब ब्लाग पर डॉ.अमर कुमार लिखते हैं.....गोरख जागा, मुंछदर जागा और मुंछदर भागा यह किस्सा गोरख जागा, मुंछदर जागा और मुंछदर भागा तक पहुँचाया, और धीरे धीरे ऎसे अड़चन आन पड़ी और ऎसी बान बनी कि हिरदय में एक छिन को लगता रानी केतकी की पूरी कहानी मेरे पन्नों पर कभी उतर कर न आ पावेगी । जिस घडी इसे पूरी करने की, ........साथ ही राजकुमार ग्वालानी जी के ब्लाग राजतंत्र के जन्म दिन पर कल हो जाएगी 1100 पोस्ट पूरीब्लाग जगत में हमारे ब्लाग राजतंत्र का एक साल 23 फरवरी को पूरा होने वाला है। इसी के साथ राजतंत्र और खेलगढ़ को मिलाकर हमारी 1100 पोस्ट भी पूरी हो जाएगी। इस समय जहां राजतंत्र 400 के करीब है, वहीं खेलगढ़ 700 के पार हो गया है। ......आपको .......बधाई ........
ललित डोट कॉम पर पढ़िए....... बेटी मारने वाले बेटों को थाली में सजा कर घूम रहे हैं!!इस समय 16 फ़रवरी को बहुत ही ज्यादा शादियाँ थी, इतने निमंत्रण थे कि कहाँ ज़ाएं कहाँ ना जाएं, पेश-ओ-पेश की घड़ी थी। कुछ विवाह तो परिवार मे ही थे। एक आदमी क्या करे? बाकियों को तो शुभकामना संदेश भेजा और हम चल पड़े अपनी भतिजी की शादी में, जो 16 फ़रवरी की थी।............शरद कोकास जी एक सवाल पूछ रहे हैं......उसका जवाब किसी के पास है क्या?.........क्या हम सभी दोगले हैं ? दीपावली के समय की बात है । ( आप कहेंगे यह होली के समय मैं दीवाली की बात क्यों कर रहा हूँ ?, चलिये छोड़िये .. किस्सा सुनिये ) मैं घर से दूर किसी अन्य शहर में अपने मित्र के यहाँ था । पूजन के पश्चात मैने अपने मित्र से कहा चलो शहर की रोशनी देखकर आते हैं ।
अवधिया जी की पोस्ट बाघों के ऊपर है..........40000 हजार से 1411 ... कैसे बजा बाघों का 12बाघ!वही बाघ जिसका मुँह खोलकर बालक भरत, जी हाँ दुष्यन्त और शकुन्तला का महान पुत्र भरत जिसके कारण हमारे देश का नाम भारतवर्ष हुआ, ने उसके दाँत गिने थे!वही बाघ जो हमारा राष्ट्रीय पशु है!वही बाघ जिनकी संख्या एक सदी के भीतर 40000 हजार से 1411 हो गई।खुशदीप जी भी आज बाघों पर ही लिख रहे है......1411 बाघ बचाने की मुहिम @ बाघ, ब्लॉगर, पारसी क्या, पढ़े लिखे को फ़ारसी क्या...खुशदीप देश में बाघ लगातार घट रहे हैं...देश में ब्लॉगर लगातार बढ़ रहे हैं...क्या घोर कलयुग है जनाब...क्या ये बढ़ते हुए ब्लॉगर घटते हुए बाघों के लिए कुछ नहीं कर सकते...कर सकते हैं जनाब बिल्कुल कर सकते हैं...डार्विन की नेचुरल सेलेक्शन की थ्योरी कहती है विकास की,
पड़े वो जूते तेरी गली में , होली के तरही मुशायरे के ठीक पहले ही दिन देखिये किस प्रकार से प्रकाश पाखी हजामत बना रहे हैं निर्मल सिद्धू जी की ।आज से होली का तरही मुशायरा प्रारंभ हो रहा है । होली का माहौल तो बनने लगा ही है । हालांकि हमारे यहां तो इस बार बादल पानी का मौसम हो रहा है और उसके कारण कुछ होली का रंग बनने में देर लग रही है । खैर तो आज से हम चालू करते हैं होली का तरही मुशायरा ।...........प्रवीण शाह जी बता रहे हैं...........तलवारें खिंच गई हैं होमोसेक्सुअलिटी के मुद्दे पर फिर से एक बार . . . . . . किस ओर खड़े हैं आप?.मेरे भारतीय नागरिक मित्रों,जुलाई २००९ में दिल्ली हाईकोर्ट ने एक फैसला दिया जिसमें माननीय न्यायालय ने धारा ३७७ को संविधान के खिलाफ बताया और इस प्रकार SODOMY को अपराध बताने वाले कानून को खारिज कर दिया।अब यह मामला मुल्क के सर्वोच्च न्यायालय में है,
गोदयाल जी ने दिखाया नजारा !छवि गूगल से साभारकभी-कभी,घर की ऊपरी मंजिल की खिडकी से,परदा हटाकर बाहर झांकना भी,मन को मिश्रित अनुभूति देता है।दो ही विकल्प सामने होते है,या तो चक्छुओ कोअपार आनन्द मिलता है,या फिर, कान कटु-श्रुति पाता है ॥ऐसे ही कल रात को,मैने भी अपने घर कीऊपरी मंजिल की.......परिकल्पना पर .......जब फागुन में रचाई मंत्री जी ने शादी..."परिकल्पना फगुनाहट सम्मान-2010 " हेतु नामित रचनाकारों क्रमश: श्री ललित शर्मा, अनुराग शर्मा और वसंत आर्य की रचनाओं की प्रस्तुति के अंतिम चरण में हम आज प्रस्तुत कर रहे है मुम्बई, महाराष्ट्र से प्रेषित श्री बसंत आर्य की -------
यहाँ पर दिया गया संवाद सम्मान........संवाद सम्मान 2009 - इस बार एक ऐसे व्यक्ति का चयन, जो निरपेक्ष भाव से ब्लॉग जगत की सेवा में लगा हुआ है।इस दुनिया में तरह-तरह के लोग हैं। कुछ ऐसे हैं, जो कुछ न करते हुए भी बहुत कुछ पाने की हसरत पाले रहते हैं, वहीं कुछ ऐसे भी हैं, जो सब कुछ करने के बावजूद स्वयं को सामने नहीं लाना चाहते। हालाँकि दूसरी श्रेणी के लोग दुनिया में बहुत कम हैं,........‘‘मेरी गैया’’ (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”)मेरी गैया बड़ी निराली, सीधी-सादी, भोली-भाली। सुबह हुई काली रम्भाई, मेरा दूध निकालो भाई। हरी घास खाने को लाना, उसमें भूसा नही मिलाना। उसका बछड़ा बड़ा सलोना, वह प्यारा सा एक खिलौना। मैं जब गाय दूहने जाता, वह अम्मा कहकर चिल्लाता। सारा दूध नही दुह लेना,
एक ज़रूरी ऐलान: सुनो...सुनो...सुनो...बा' अदब....बा' मुलाहिज़ा...होशियार...मल्लिका -ऐ-ब्लॉग "स्वप्न मञ्जूषा शैल 'अदा' विश्व की पहली हिंदी ब्लोग्गर और महिला हिंदी ब्लोग्गर हैं.... और देखिये एक मिनी ब्लोग्गर मीट..एक बहुत अच्छी बात पता चली है.... तमाम रिसर्च करने के बाद यह साबित हुआ है कि विश्व कि पहली महिला हिंदी ब्लोग्गर .... स्वप्न मञ्जूषा शैल "अदा" जी हैं.... अदा जी विश्व की पहली हिंदी ब्लोग्गर भी हैं... उनका ब्लॉग काव्य मञ्जूषा है ... जो 1995से उनके अपने डोमेन पर चालू है... और आखिरी बार सन 1998 में अपडेट हुआ था... और आज भी यह ब्लॉग है. परन्तु यह ब्लॉग किसी Indiblogger और अग्रीगेटर पर रजिस्टर नहीं है. क्यूंकि ज़रूरी भी नहीं किसी और इन्फो पर रजिस्टर हुआ जाये... अच्छा हुआ कि अदाजी का यह ब्लॉग किसी और प्लेटफॉर्म पर नहीं है... नहीं तो अब तक के Archives में चला गया होता.
जानते हो !!
जानते हो !!
जिस पल तुमने मुझे
छूआ था
मैं अंकुरा गयी
तुम्हारे प्रेम की
जडें मेरी शाखाएं
बन कर
मेरे वजूद को
वहीँ खड़ा कर गईं
जहाँ तुम्हारी
बाहों में मेरी सांसें
पत्तों की तरह
लरजती हैं
मेरे होठों के फूल
मुस्कुरा उठते हैं
मेरे होठों के फूल
मुस्कुरा उठते हैं
और उनकी ख़ुशबू
बिखर जाती हैं
तुम्हारे आस-पास
कौन रोकेगा मुझे
तुम्हारी साँसों
में उतरने से
तुम्हारे पोर-पोर में
में बसने से ?
मैं कहीं नहीं हिलूँगी
इतना जान लो तुम....
अब देते हैं चर्चा को विराम........आपको ललित शर्मा का राम-राम
.
21 comments:
बहुत अच्छी चिट्ठा चर्चा,सुभकामनायें
बढ़िया और विस्तृत चर्चा ललित जी !
सुन्दर और विस्तृत चर्चा!
बढ़िया और सुन्दर चर्चा ।
shaastri ji !
pranaam,aapse kanni nahin kati dada!
aap toh geet samraat hain aur aapke geeton ka guldasta taiyaar hona shuru ho gaya hai......
parinaam ki prateeksha karen
bahut meethe phal lagegnge is vriksh par
dhnyavaad,
mujhe shaamil karne ke liye
halaanki thoda vyast hone ke kaaran aajkal padh nahin pa raha hun so bura na maanen........
hamesha ki tarah lajabab charcha.
@अलबेला जी होली आई नही है और भांग अभी से चढ गयी भाई,
ये चर्चा मैने =ललित शर्मा ने की है।
हा हा हा होली है।:)
@अलबेला जी होली आई नही है और भांग अभी से चढ गयी भाई,
ये चर्चा मैने =ललित शर्मा ने की है।
हा हा हा होली है।:)
चर्चा के प्रति आपकी प्रतिबद्धता देखते ही बनती है । आभार चर्चा के लिये ।
बहुत अच्छी चिट्ठा चर्चा ....
bhang nahin bhai kisi ki mkohabbat karang chadha hai aur jab aadmi mohabbat me hota hai to aisi chhoti moti galtiyan ho hi jaati hain ..
ha ha ha ha
holi re holi
koi apni ho li
अच्छी चिट्ठा चर्चा.
आपकी चर्चा का कलेवर भी
दिनों-दिन निखरता जा रहा है!
--
कह रहीं बालियाँ गेहूँ की –
"नवसुर में कोयल गाता है, मीठा-मीठा-मीठा!
श्रम करने से मिले सफलता,परीक्षा सिर पर आई! "
--
संपादक : सरस पायस
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सुन्दर चर्चा,
आभार आपका!
बहुत सुंदर और बेहतरीन विस्तृत चर्चा के लिये आपका आभार.
रामराम.
बेहतरीन विस्तृत चर्चा...
sundar charcha..!!
Abhar
बेहतरीन चर्चा ...!!
ललित जी!
आपने वो कहावत सुनी है ना..
नया नौ दिन....
पुराना..
सौ दिन..
अभी तो होली की राम-राम ले लो!
@शास्त्री जी,
नया ही पुराना होता है
नौ दिन बाद
लेकिन पुराना नया नही हो सकता
सौ दिन बाद्।
होली की राम-राम आप भी स्वीकार करें।:-)
चर्चा तो बढिया है मगर हमारा जिक्र तक़ नही?क्या बात है ललित बाबू/?
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