Thursday, December 03, 2009

कभी खुशी कभी गम !! चर्चा हिन्दी चिट्ठो की !!!

नमस्कार ,  पंकज मिश्रा ..आपके साथ बीच मे लगभग बीस दिन आप सबसे दूर रहा..इसी बीच काफ़ी कुछ ब्लागजगत मे नया हो गया …..ताउ जी ने अपनी पहेली की पचासवी पोस्ट भी प्रकाशित कर दिये..अजय भाई की बुलबुल की तबियत के बारे मे भी सुना …शरद कोकाश जी के मित्र के लडके के देहान्त के बारे मे भी सुना …..

रही बात मेरी तो मै आप सबको बता दु मै अपने घर छुट्टी पर गया था …उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले…..सोचा था कि डा. अरविन्द मिश्रा जी से भी मिलकर अपने आप को धन्य करुगा…और जैसे ही घर जाने के लिये टिकट निकाला था सबसे पहले हेमन्त भाई को बताया था और यह तय हुआ था कि किसी एक दिन जौनपुर मे मुलाकात होगी …मगर नही हो सकी….अफ़सोस है इस बात का…डा. मिश्रा जी के यहा तय हुआ था कि बनारस मे सभी नजदिकी ब्लागर जिसमे मै,हिमान्शु भाई.और हेमत भाई शामिल थे भेट होना तय हुआ लेकिन दैविय गती मेरे जीजा जी के बडे भाई साहब का उसी दिन देहान्त होने की वजह से बैठक रद्द कर दी गयी …अब वापस फ़िर से आ गया हु अपने उसी जगह पर जहा से गया था..मन मे ढेर सारे अवसाद लिये हुए…लेकिन एक बात आज एक ट्र्क पर पढा जिन्दगी रही तो फ़ि मिलेगे!!!बस यही बात पढकर कुछ हिम्मत जगी है देखिये कब कहा और कैसे भेट होती है आप सबसे….

दुसरी बात मै तहे दिल से धन्यवाद देना चाहता हु हमारे पिता समान श्री मान रूपचन्द शास्त्री जी को जिन्होने हमारे अनुपस्थिति मे इस मन्च को जगाये रखा …धन्यवाद शास्त्री जी ह्र्दय से!!!!!!

अब चलते है चर्चा की तरफ़…शुरुआत ताऊ जी के ही पोस्ट से करुगा…ताऊ ने एक पोस्ट लिखी थी  सांड तो लड अलग भये : बछडे भये उदास ठीक उसके बाद दो सांड पैदा हो गये थे..आज ताऊ जी ने एक सवाल किया है जवाब आप सबको देना है…ताऊ, करवा ले न्याय तेरे ब्लाग पंचों से ही.... !

imageहमने कहा कि - इसमे समझने जैसी कोई बात ही नही है. जैसे गीदड जब दूसरे गीदडों को हूआं..हूआं..हूआं..हूआं.. करते सुनता है तो उसकी भी इच्छा हो ही जाती है हुआं..हुआं... करने की, तो यह संभव ही नही है कि ब्लागर सम्मेलन हो और ताऊ उसमे जाये और रिपोर्टिंग नही करे? ऐसा हो सकता है क्या?
और जब हम रिपोर्टिंग करेंगे...फ़िर कोई ब्लडी.. हेल...कहेगा...फ़िर कोई खुल्ला या बंधा सांड..और सुर्पणखां ताऊ के पीछे दौडायेगा...

 

अब आगे चलते है डा. अरविन्द मिश्रा जी के ब्लाग पर ..मिश्रा जी ने लिखा है एक चतुर नायिका है विदग्धा!

नाimage यिका प्रत्यक्षतः तो प्रिय को मना कर रही है कि वे ना आये मगर मिलन के  इतने सुन्दर अवसर को हाथ से न जाने का चतुराई भरा संकेत निमंत्रण भी वह दे रही है -"आज तो मैं निपट अकेली ,डरी सहमी सी ,क्लांत सी हूँ " .प्रकारांतर से यह  मिलन का एक पावरफुल आमंत्रण ही तो  है ! प्रगटतः  उसके शब्द मिलन की मनाही कर रहे हैं, मगर सच में वह कह रही है ,

"आ जाओ न प्रिय  आज मिलन का सुनहरा मौका है  ..."

नायिका उपभेद में आगे हम क्रिया विदग्धा की भी चर्चा करेगें !

आगे है हिमान्शु भाई एक समुचित कविता लेकर …..क्या दूर सुहृद ! प्रियतम ! निराश चित्कार रहा अम्बर अन्तर (गीतांजलि का भावानुवाद)

निद्रा विरहित पट खोल सुहृद मैं तिमिर बीच झाँकता रहा
विस्मितMy Photo विस्फारित नयन खोल खोजता तुम्हारा पंथ कहाँ ?
कुछ भी न सूझ पड़ता आगे हो कहाँ तिमिर में मित्र प्रवर -
क्या दूर सुहृद ! प्रियतम ! निराश चित्कार रहा अम्बर अन्तर

मसि तममय किस सरि के तट पर, किस उद्वेलित वन-कोने मेंMy Photo
किस गहन धुंध में तुम विलीन हो गये स्वयं को खोने में
क्या मुझ तक आने का ताना बाना बुनते हो पंकिल कर -
क्या दूर सुहृद ! प्रियतम ! निराश चित्कार रहा अम्बर अन्तर ।

पी सी गोदियाल जी की बात भी जायज है …क्या इस देश में गरीब अब अपनी बेटी की शादी कर पायेगा ?

My Photoआज जिन खुले बाजार की ताकतों के बलबूते पर, वायदा कारोबारियों की मिलीभगत के चलते सोना आसमान चढ़ता जा रहा है उससे तो नहीं लगता कि आने वाले समय में इस देश में पहले ही बेरोजगारी और महंगाई की मार झेल रहा एक गरीब, अपनी बेटी के हाथ पीले कर पायेगा। आज के सोने के भावों पर नजर डाले तो अन्तराष्ट्रीय बाजार में सोना १२०० से कुछ अधिक डालर प्रति औंस( करीब तीन तोला यानि २८.३६ ग्राम) तक पहुँच गया है। इसे अगर भारतीय मुद्रा में देखे तो (१२००*४७/२.८३) करीब १९५००/- के आसपास तक सोना जा सकता है, जोकि अभी १८००० रूपये के ऊपर है। अब आप खुद सोचिये कि अगर एक गरीब व्यक्ति कुछ भी न करे और सिर्फ दो तोले सोने के साथ भी लड़के वालो को अपनी लडकी पकडाए तो ४० से ५० हजार रूपये तो उसे तब भी चाहिए।

शास्त्री जी जो बोल दे वह कविता बन जाती है और मेरे हिसाब से देखा जाये तो शास्त्री जी हर रोज एक-दो कविता लिखते पाये गये है आज शास्त्री जी ने लिखा है "मेरा भारत देश महान!" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

और साथ मे है जिन्दगी पर वन्दना जी लेकर यादों का सन्नाटा…प्रस्तुत है कुछ अंश……

image ललनाएँ सीता जैसी  हों, भरत-लखन से भाई हों, 

वीर शिवा जैसे प्रसून हों, कलियाँ लक्ष्मीबाई हों,

आजादी के परवानों का, गाँव-नगर में हो सम्मान।

अपनी कुटिया बन जाएगी सुन्दर विमल-वितान।।

यादों की सूनीMy Photo
पगडण्डी पर
जो कदम पड़ा
दूर -दूर तक
एक सन्नाटा ही
बिखरा पड़ा था
कहीं सूखे
पत्तों के नीचे
यादों का मलबा
दबा हुआ था

श्री मान रतन सिंह शेखावत जी ….जो भी जानकरी मिलती है तुरत फ़ुरत हम आप सबसे शेयर कर देते है ये नही कि जान गये तो दबा के रख ले आज बता रहे है एक्यूप्रेशर चिकित्सा पद्दति के बारे मे ……

इस पद्धति का विकास चीन में होने के कारण इसे चीनी पद्धति के रूप में जाना जाता है। लेकिन इसकी उत्पत्ति को लेकर काफी विवाद भी हैं। एक ओर जहां चीन का इतिहास यह बताता है कि यह पद्धति 2000 वर्ष पहले चीन में विकसित होकर सारी दुनिया के सामने आई। वहीं, भारतीय मतों के अनुसार आयुर्वेद में 3000 ई.पू. ही एक्यूप्रेशर में वर्णित मर्मस्थलों का जिक्र किया जा चुका है। वर्तमान में भारत और चीन के साथ ही हांगकांग, अमरीका आदि देशों में भी कई रोगों के उपचार में एक्यूप्रेशर चिकित्सा पद्धति काम में लाई जाती है।

प्राची के पार है दर्पण शाह और लिखते है एक नेनो सेकंड

बस एक मुकम्मिल image दर्द,
इस तरह कि,
कोई दर्द नहीं.
एक भंवर बना है दर्द का,
कि जिसमें खुद ही गुम है वो.
बाहर आता है,
दिखता है,
छुप जाता है.
कि जैसे था ही नहीं.
कि जैसे होगा ही नहीं.

पं.डी.के.शर्मा"वत्स" ने आज प्रस्तुत किया है मासिक राशिफल----दिसंबर 2009

मिथुन राशी:- इस महीने जिम्मेदारी बढ़ने से शुरुआत कुछ आर्थिक संकटों से भरी होगी। महीने के पहले 15 दिनों में भविष्य निर्माण संबंधी योजनाएं स्थगित होंगी। My Photoसाझे सौदे के लिए भी अभी धन खर्च करना उचित नहीं होगा। दूसरे सप्ताह के अंतिम दिनों में रोजगार प्राप्त जातकों को धन प्राप्ति अथवा पदोन्नति के प्रसंग पैदा होंगे।महीने के प्रथम अर्द्ध में परिवार में झगड़ा आपकी जिद करने की आदत के कारण हो सकता है। अत: वाणी पर और व्यवहार में नियंत्रण अवश्य रखें। नए दोस्तों से संबंध सोच-समझकर बनायें। उत्तरार्द्ध में शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगी संपत्ति का लाभ होगा। सट्टे के व्यापारी सचेत रहें अन्यथा अचानक आर्थिक हानि का सामना करना पड सकता है । विशेष तौर पर 8 से 13 तारीख तक सट्टा बाजार, शेयर मार्कीट इत्यादि से पूरी तरह से दूर रहें ।

अदा जी ने पुछा है अब कौन भला इनको सुलझाएगा ?

ये भांडा भी ,इक दिन फूट जायेगा
मत खेल अपनी साँसों से, इस तरह
कहीं दम निकल जाये, तो बहुत पछतायेगा,
और छुपे छुपे से हों, जब अक्स सारे
पूरा चेहरा भला कैसे नज़र आयेगा ?
जब गांठों के ढेर बन गए हों रिश्ते
अब कौन भला इनको सुलझाएगा ?

 

आज केलिये इतना ही अभी जबसे आया हु भरपुर आराम नही कर पाया हु….

आज इतने से काम चला ना बाप अपुन फ़िर वापस आयेगा बोले तो मुन्ना भाई का ब्लाग पढकर ऐसा बोलने लगा ..क्या मुन्ना भाई अमा ये रहा लिन्क मुन्ना भाई के ब्लाग का

ब्लाग चर्चा "मुन्ना भाई" की

अब नमस्कार !!!!

24 comments:

Udan Tashtari said...

वाह पंकज भाई..आप लौट आये..देखकर बड़ा अच्छा लगा. शास्त्री जी मस्त कमान संभाले थे. अब आप आ गये नियमित जारी रहिये. शुभकामनाएँ.

Arvind Mishra said...

स्वागतम, सुस्वागतम ,मुझे भी आपसे न मिल पाने का मलाल रहेगा!

Suman said...

nice

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

पंकज मिश्र जी शुभकामनाएँ!
आपकी अनुपस्थिति में एक दिन भी चर्चा में व्यवधान नही हुआ है!
आपको यहाँ देखकर अच्छा लगा!
अब मेरी व्यस्तताएँ कुछ कम हुईं लगती हैं।
आज से अपने सभी ब्लॉगों पर नियमित होने में
सफलता मिलेगी!

Ratan Singh Shekhawat said...

बहुत बढ़िया ! आते ही मस्त चर्चा कर डाली ! शुभकामनाएँ |

खुशदीप सहगल said...

पकंज भाई,

ईश्वर आपके जीजाजी और परिवार वालों को दिवंगत से बिछुड़ने का दुख सहने की शक्ति प्रदान करे...

चर्चा हमेशा की तरह बढ़िया...

जय हिंद...

जी.के. अवधिया said...

हमेशा की तरह सुन्दर चर्चा!

ललित शर्मा said...

पंकज जी, सुंदर चर्चा, ईश्वर इस दुख की घड़ी मे आपको एंव आपके जीजाजी के परिवार को यह दारुण दुख सहन करने की असीम शक्ति दे।

हिमांशु । Himanshu said...

वाह ! आप पुनः सक्रिय ! चर्चा देखकर अच्छा लगा । आभार ।

निर्मला कपिला said...

वाह पकज जी आज नेट खोलते ही लगा कि बलागजगत मे लिछ खास खुशी की लहर है तो देखा कि पंकज जी वापिस लौट आये हैं यही वजह है चर्चा मे भी अलग सा रंग है बधाई

Meenu Khare said...

पंकज जी स्वागत !सुस्वागत!!! आपकी वापसी बहुत ही सुखद लगी. दुख की घड़ियों में पूरा ब्लॉगर परिवार आपके साथ है.

मनोज कुमार said...

अच्छी चर्चा।

अनिल कान्त : said...

चर्चा देखकर अच्छा लगा

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ said...

गम्भीर मुददों के साथ गम्भीर चर्चा भी।
--------
अदभुत है हमारा शरीर।
अंधविश्वास से जूझे बिना नारीवाद कैसे सफल होगा?

पी.सी.गोदियाल said...

बहुत सुन्दर भाई साहब !

पं.डी.के.शर्मा"वत्स" said...

आपको पुन: सक्रिय देखकर अच्छा लगा....बाकी चर्चा तो हमेशा की तरह बढिया ही है !

ताऊ रामपुरिया said...

आपका आना बडा सुखद लगा आपके जीजा जी के बडे भाई साहब के देहान्त की कहब्र से म बडा व्यथित हुआ. ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दे.

आपकी अनुपस्थिति मे शाश्त्रीजी ने वाकई कमाल का काम किया, कहीं भी ऐसा नही लगा कि चर्चा मंच पर सूना पन है. शाश्त्रीजी के रुप मे आपको एक बहुत ही समझदार और अनुभवी सखशियत का आशीर्वाद मिल गया है जो आपके इस मंच को सफ़लता की नई मंजिलों की तरफ़ लेजायेगा.

बहुत शुभकामनाएं.

रामराम.

ताऊ रामपुरिया said...

भूल सुधार :-

कहब्र से म बडा व्यथित हुआ = खबर से बडा व्यथित हुआ

पढा जाये!

दिगम्बर नासवा said...

पंकज जी ..... बहुत अच्छा लगा आपको दुबारा ब्लॉग पर देख कर ......... ईश्वर अओको और आपके जीजा जी को दुख सहने की शक्ति दे .......... आज की चर्चा बहुत अच्छी रही ...........

चंदन कुमार झा said...

वापसी की शुभकामनायें । सुन्दर चर्चा ।

महेन्द्र मिश्र said...

भाई पंकज जी बीस दिनों के पश्चात वापसी पर आपका स्वागत है . चर्चा बढ़िया लगी.

बी एस पाबला said...

पारिवारिक जिम्मेदारियां निभा, वापसी पर आपका स्वागत है

बी एस पाबला

राज भाटिय़ा said...

इस दुख की घडी मै हम आप्के संग है, आप के जीजा जी के परिवार को भगवान इस दुख को सहने की शक्ति दे

'अदा' said...

Are Pankaj ji hamne to aapko bahut dino ke baad dekha hai...aapka swaagat hai...
charcha bahut sahi rahi aapki...
ham sabhi aapke saath hain...bas yahi kahna chate hain..

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