Friday, December 18, 2009

"एक इंसान हूँ मैं तुम्हारी तरह -" (चर्चा हिन्दी चिट्ठों की)


अंक : 113

ज़ाल-जगत के सभी हिन्दी-चिट्ठाकारों को डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"" का सादर अभिवादन! 

आज "चर्चा हिन्दी चिट्ठों की"  की प्रस्तुत हैः-
आप निम्न लिंकों पर जाकर अपने मन की टिप्पणी दीजिए-
हृदय गवाक्ष एक इंसान हूँ मैं तुम्हारी तरह - हरिश्चंद्र श्रीवास्तव जी पूर्णतः दृष्टिहीन हैं। उनकी दवा के पर्चे पर देखकर मुझे पता चला कि उनकी उम्र ७० वर्ष है, अन्यथा मुझे तो ५५ ही लगती थी। और इसके बाव...
शब्दों का सफर जल्लाद, जल्दबाजी और जिल्दसाजी - [image: fansi] कि सी को जान से मार डालनेवाला *हत्यारा* कहलाता है, किन्तु न्याय के अन्तर्गत मृत्युदण्ड पाए व्यक्ति को मौत के हवाले करनेवाले को *जल्लाद* कहते...
"राज ब्लागर के पिछले जन्म के" खुशदीप ने उगलवाया ताऊ की शादी का राज - पिछले अंक मे आपने पढा था कि खुशदीप ने ताऊ को पिछले जन्म में लेजाकर सवाल पूछना शुरु किया. ताऊ अब अपने पिछले जन्म मे जब वो झंडू सियार था वहां पहुंच गया. अब... 
गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष ये रही मेरी 250 वीं पोस्‍ट .. आप सभी पाठकों का बहुत बहुत शुक्रिया !! - यदि आप अभी मेरी प्रोफाइल खोलकर देखे , तो आपको 'गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष' में कुल 279 पोस्‍ट दिखाई पडेंगे , पर सही समय या संपादन के अभाव में सारी पोस्‍टें प्राकशि...
मैं छोटे, बड़े सभी को सही सम्मान दूँगा - वो स्कूल के आफ़िस के सामने, अन्य बच्चों के साथ, फ़र्श पर बैठा अपनी मां के आ कर उसे ले जाने का इंतज़ार कर रहा था। मुझे उसकी आँखों से दो बूँद आँसू ढुलकते दिखाई ...


एलबर्ट पिंटो को गुस्सा क्यों आता है?..........घुघूती बासूती - क्या पता क्यों आता था? मैंने तो यह फिल्म देखी नहीं । परन्तु जब जब किसी के गुस्से के बारे में देखती, सुनती, पढ़ती हूँ तो इस फिल्म का नाम याद अवश्य आ जाता है। ग...
कुमाउँनी चेली मज़े का अर्थशास्त्र .... - * जब भी वो मुझसे टकराती है मुझे याद दिलाना नहीं भूलती कि मैं कितने मज़े में हूँ. मैं ईश्वर के इस खेल को समझ नहीं पाती हूँ , मेरे लिए जो एक अमूर्त वस्तु ...
जानना नहीं चाहेंगे आप संस्कार शब्द का गूढ़ रहस्य? एक ऐसा शब्द जो सिर्फ भारत में ही पाया जाता है... :- महफूज़ - अभी थोड़े दिन पहले की बात है, किसी ने मुझ से पूछा था कि ' संस्कार कि इंग्लिश बताईये?' मुझे मालूम नहीं था, मैंने कहा कि देखकर बताता हूँ. सही कहूँ तो संस्...
Albelakhatri.com है किसी के पास कोई जवाब इस सवाल का ? - बचपन से सुनता आया हूँ कि गरजने वाले बादल कभी बरसते नहीं हैं । लेकिन आज तक किसी ने ये नहीं बताया कि क्यों नहीं बरसते हैं ? आज मेरी समझ में तो आ गया ...
KNKAYASTHA INSIDE-OUT जाने क्यूँ... - जाने क्यूँ... तन पर ओढी मायूसी की चादर उतारकर बेरंग जमाने पर रंग उडाने का जी नहीं करता!जाने क्यूँ... फुलझडी जलाकर रौशनी की बूंदे पसरे अंधकार पर छिडकने का ज..

Rhythm of words...संग आना है........... - ख्वाब चाहकर भी न सो पाया रात की खुसर-फुसर में कुछ तो हुआ था शायद जरुर चाँद के घर में ! फलक की चादर से गिरे कल कुछ तारे जमीन पर आकर जैसे बिखरे से थे सारे मैं...
परी हूं मैं यहाँ, बस यूँ ही रहने दो मुझे मेरे ही ख्यालों में
"परी हूँ मैं" हाँ परी ही तो हूँ ,हूँ पर अपने ही कुछ खयालो में
घबराई सकुचाई तनहा हूँ ,किस्मत के अनसुलझे सवालों में !
आफताबी रेशम से बुनती हूँ ,लाखों सुनहरी झिलमिल ख्वाब
रहती हूँ तारों में बसे आसमानी शहर के चाँद आशियाने में !....
शब्द-शिखर एक आरती के क्रांतिकारी रचयिता...ओम् जग जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे -ओम् जग जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे, भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करें....पूजा-आराधना किसी भी देवता की की जा रही हो, ओम जय जगदीश हरे आरती हर अवसर पर ग...
ब्लॉगर विजेट : रंग बिरंगी मछलियाँ आपके ब्लॉग में - अपने ब्लॉग में लगायें रंग बिरंगी मछलियाँ जैसी की फिश अक्वेरियम में होती है । ये आपके और आपके पाठको के mouse का पीछा करती हुई सजीव सी हैं । इसे... 
झा जी कहिन पढ़ डाली पोस्टें तमाम : चर्चा सरे शाम (चिट्ठी चर्चा ) - देखते देखते ये साल भी बीतने के कगार पर है । और समय कब किसी के लिए रुका है ...रुकना भी नहीं चाहिए ,न ही हमारा ये काफ़िला रुकना चाहिए । हो सकता है कि हमारे...
तीसरा खंबा कोलकाता में अंग्रेजी बस्ती : भारत में विधि का इतिहास-20 मुगल शासन से 1634 में प्राप्त व्यापार की अनुमति के आधार पर ईस्ट इंडिया कंपनी बंगाल में व्यापार कर सकती थी। लेकिन करीब सोलह वर्ष बाद 1650 में हुगली नदी के क...
कवि योगेन्द्र मौदगिल आंखों में..... सपनों का अहसास, जरूरी आंखों में. लम्हा-लम्हा प्यास, जरूरी आंखों में. कस्में-वादे, हया-वफ़ा, रिश्ते-नाते, कदम-कदम विश्वास, जरूरी आंखों में. आएगा, लौट...
अज़दक जै जमरुदपुर, जै ज्‍यूरिख़ *नई बात नहीं हुई.* यह अक्‍सर होता है. कि खोजने निकले थे पेंसिल, कलम लेकर घर आए. तो कौन पेंसिल खोजने निकले थे अब यह प्रासंगिक नहीं, किताब की शक्‍ल में जो ...
मानसी मैं छोटे, बड़े सभी को सही सम्मान दूँगा वो स्कूल के आफ़िस के सामने, अन्य बच्चों के साथ, फ़र्श पर बैठा अपनी मां के आ कर उसे ले जाने का इंतज़ार कर रहा था। मुझे उसकी आँखों से दो बूँद आँसू ढुलकते दिखाई ...
देशनामा अपने तो अपने होते हैं...खुशदीप ब्लॉगिंग का फीलगुड पोस्ट पाइपलाइन में पड़ी हैं...एक दिन पहले ब्रॉडबैंड महाराज की वजह से उस पोस्ट का बैंड बज गया था...सोच रहा हूं शनिवार को छुट्टी है...इसलि..
नुक्कड़ बचत खाते से ज्यादा ब्याज कैसे प्राप्त करें, स्वीप इन जमा खाता एक बेहद उम्दा रास्ता... बचत खाता तो सबके पास होते हैं और सभी लोग उसका उपयोग करते हैं। परंतु बचत खातेमें कितनी रकम रखना चहिये और कितनी उसमें से निकालनी चाहिये इस पर कभी भी सोच नहीं ...
उपस्थित प्रेमी वैम्पायर के बहाने प्रेम पर कुछ बिखरा सा इन दिनों दो फ़िल्में देखी। सीक्वल।पहली थी ट्वाईलाईट जिसकी डीवीडी मुझे एक सहकर्मी मित्र ने दी जिनका बेटा हाल ही में विदेश से लौटा था। और दूसरी थी न्यू मून ज...
रचनाधर्मिता नज़्म - मेरी गुर्बत को मत नापो मेरी गु़र्बत को मत नापो मुझे गु़र्बत से मत नापो मैं जीवन की सही पहचान रहना चाहता हूँ मेरी सनदों को मत नापो मुझे सनदों से मत नापो मैं अपने अह्द में ईमान रहना ..
मोहल्ला अलग भोजपुरी राज्य का गठन क्यों नहीं हो सकता???? बिहार और उत्तर प्रदेश के राजनेताओं द्वारा समय-समय पर भोजपुरी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किए जाने की मांग उठायी जाती रही है, लेकिन केंद्र स...
Albelakhatri.com है किसी के पास कोई जवाब इस सवाल का ? -बचपन से सुनता आया हूँ कि गरजने वाले बादल कभी बरसते नहीं हैं । लेकिन आज तक किसी ने ये नहीं बताया कि क्यों नहीं बरसते हैं ? आज मेरी समझ में तो आ गया ..
चोखेर बाली अब निडर हूं पिछले एक साल से लगातार संघर्ष चलता रहा । मां ने आैर मैंने कहां कहां धक्के नहीं खाये ।बहुत ने हौसला बढा़या, यहां जिन साथियों ने हिम्मत दी उससे भी बल मिला । ...
Hindi Blog Tips क्या आप अपनी सारी टिप्पणियां पढ़ना चाहेंगे? -आज ब्लॉग सर्फ़िंग के दौरान अचानक श्रीश पाठक 'प्रखर' जी की इस पोस्ट पर नज़र पड़ी- *मेरी सारी टिप्पणियां इकठ्ठी हो सकती हैं क्या...?* पोस्ट पढ़कर पता चला कि ...
सच्चा शरणम् सौन्दर्य लहरी ’सौन्दर्य-लहरी’ संस्कृत के स्तोत्र-साहित्य का गौरव-ग्रंथ व अनुपम काव्योपलब्धि है । आचार्य शंकर की चमत्कृत करने वाली मेधा का दूसरा आयाम है यह काव्य । निर्गु...
मेरी छोटी सी दुनिया पता नहीं, प्रोसेसर स्लो है या हार्ड डिस्क फुल? आज सुबह ऑफिस जाने की हड़बड़ी में था तभी देखा कि पापा जी का फोन आ रहा है.. और इससे पहले भी तीन बार उनका फोन आ चुका था जिसका मुझे पता नहीं चल सका.. उन्होंने बत...
Hindi Science Fiction प्लैटिनम की खोज - एपिसोड : 74 ‘‘चिन्ता मत करो। तुम्हारा सामान लेकर भी कोई तुम्हारे जैसा वैज्ञानिक नहीं बन सकता।’’ शमशेर सिंह ने प्रोफेसर के कंधे पर हाथ रखकर कहा। रामसिंह अब आराम से खर्र...
देसी पंडितजी Innovation In India This NYT story by Vikas Bajaj on anxiety over the slow pace of innovation in India covers all the usual suspects - bureaucracy, corruption, years of stifli...
कस्‍बा qasba पोपुलर प्रेस का आगमन यूरोप की १८४८ की क्रांति पर एक किताब पढ़ रहा था। Jonathan Sperber की। इस किताब के एक हिस्से में पत्रकारिता पर भी चर्चा है। कैसे १८४८ की क्रांति के दौरान यू..
अमीर धरती गरीब लोग आखिर मिल ही गया जवाब शशिकपूर के सवाल का,अमिताभ को! आपको फ़िल्म दीवार मे शशिकपूर का वो हिट डायलाग तो याद है ना जिस पर अमिताभ खामोश रह जाते हैं,जी हां वही ………………मेरे पास मां है।इस का जवाब ढूंढते-ढूंढते लगभग ती..
mera samast सर्दी से बचाव इन आलेखों में पूर्व विद्वानों द्वारा बताये गये ज्ञान को समेट कर आपके समक्ष सरल भाषा में प्रस्तुत करने का छोटा सा प्रयत्न मात्र है .औषध प्रयोग से पूर्व किस..
मुझे कुछ कहना है आल्मोस्ट सिंगल ये उस किताब का नाम है जो इन दिनों मैं पढ़ रही हूं, चेतन भगत की सारी किताबें खत्म करने के बाद इस बार कुछ नया ट्राय किया जाए के मूड में यह किताब उठा लाई। ह...
नारी डॉ अनुराग शुक्रिया ..... अच्छे कि चर्चा पढने वाले ही करते हैं चिटठा चर्चा कि ये पोस्ट चुनी हुई प्रविष्टियों का संकलन हैं । डॉ अनुराग ने इस पोस्ट मे अपनी पसंद को जाहिर किया हैं , पसंद उन ब्लॉगर कि पोस्ट जो महिला हैं आप...
यही है वह जगह पत्रकारिता पर ऑनलाईन पुस्तिका : महादेव देसाई -१९३६ में गुजरात साहित्य परिषद के समक्ष परिषद के पत्रकारिता प्रभाग की रपट महादेव देसाई ने प्रस्तुत की थी । उक्त रपट के प्रमुख अनुदित हिस्से इस ब्लॉग पर मैंन...
आदित्य (Aaditya) चवनप्रास चवनप्रास मेरी पसंदीदा चीजों में है.. मम्मी कहती है की सर्दी में चवनप्रास खाने से सेहत मस्त रहती है.. खांसी जुकाम भी कोसों दूर रहते है.. अब जब इतन...
कबाड़खाना छत पर शाम : कुछ छवियाँ कुछ शब्द कल शाम छत पर गपशप करते और मूँगफलियों के जरिए धूप का आनंद लेते - लेते मोबाइल से कुछ तस्वीरें ली हैं । आइए साझा करते हैं :******************************** ****...
ब्रह्माण्ड के खुलते रहस्य (३) : 

मौलिक-विज्ञानलेखनposted by कविता वाचक्नवी Kavita Vachaknavee at 
"हिन्दी भारत" - मौलिक -विज्ञानलेखन   साप्ताहिक स्तम्भ गतांक से आगे ब्रह्माण्ड के खुलते रहस्य (३) (स्थाई दशा एवं प्रसारी सिद्धान्त) विश्वमोहन तिवारी (पूर्व एयर वाइस मार्शल) स्थायी दशा सिद्धान्त (स्टडी स्टेट थ्योरी) ..










आज के लिए बस इतना ही............!


कल की चर्चा पंकज मिश्र करेंगे!















    16 comments:

    sidheshwer said...

    a good information for few good links. i like this type of posts.
    thanks sir!

    Arvind Mishra said...

    कड़ियों का संकलन प्रभूत है!

    खुशदीप सहगल said...

    इसे कहते हैं गागर में सागर, कई अच्छे लिंक एकसाथ...

    जय हिंद...

    अविनाश वाचस्पति said...

    बहुत जीवंत
    मयंक जी को देते हैं
    इस चर्चा के लिए
    हम पूरे अंक।

    ललित शर्मा said...

    shashtri ji bahut badhiya charcha, abhar

    Akanksha said...

    good info good posts linked on same place hamari post ko bhi isme aapne post kiya shukriya :)

    निर्मला कपिला said...

    बहुत अच्छी रही चर्चा बधाई

    हिमांशु । Himanshu said...

    लिंक-संयोजन हर बार की तरह बेहतर !

    ताऊ रामपुरिया said...

    बहुत बढिया शाश्त्रीजी.

    रामराम.

    दिगम्बर नासवा said...

    सुंदर चर्चा ....... बहुत से नये लिंक मिले ..........

    Shefali Pande said...

    thanx for adding my blog...

    रंजना said...

    Is vishad sundar charcha ke liye bahut bahut aabhar...

    कंचन सिंह चौहान said...

    thanks for choosin my post as title...

    सलीम ख़ान said...

    आपको नए साल (हिजरी 1431) की मुबारकबाद !!!

    सलीम ख़ान

    चंदन कुमार झा said...

    सुन्दर चर्चा !!!!!!

    मनोज कुमार said...

    बहुत बढिया शाश्त्रीजी.

    पसंद आया ? तो दबाईये ना !

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