Friday, December 11, 2009

रुपा गधेडी पर डोरे डालने को शेर बना किश्शू गधेडा (चर्चा हिन्दी चिट्ठो की )

नमस्कार ..पंकज मिश्रा आपके साथ……आपके पोस्टो की चर्चा लेकर……और प्रणाम आज के युवा टिप्पणी कार श्री मान जी को जिनकी उमर ६८ साल बतायी गयी है..

चर्चा की शुरुआत करते है ताऊ के पोस्ट से जो कि लिक्खे है अरे सत्यानाशी ताऊ..मैने तेरा क्या बिगाडा था?

 

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रुपा गधेडी पर डोरे डालने को शेर बना किश्शू गधेडा

मोहल्ले के लौंडे लपाडे यानि किश्शू टाईप के लौंडे गधे तो घर के आसपास चक्कर काटा ही करते थे. कोई मौका ही ढूंढते रहते थे कि चम्पा भाभी उनको कोई काम बतादे और वो उसी बहाने रुपा से दो बातें ही करलें. और इनमे भी किश्शू गधे ने अपने थोबडे पर शेर का नकली चेहरा लगा रखा था.. लोगों को और खासकर जवान गधियों को आकर्षित और इंप्रेस करने के लिये..और गांव वालों मे एक दो लोग उसके जैसा जहीन किसी को नही मानते थे..क्योंकि उन मुर्खों के बीच एक दो शब्द अंग्रेजी के भी झाड लिया करता था. यानि अंधों मे काणा राजा था.. पर था निहायत और खालिश गधेडा ही.. पर चम्पा भाभी ने दुनियां देखी थी. इन लौंडो की क्या बिसात कि रुपकला की तरफ़ नजर भी उठा कर देख ले.

पी.सी.गोदियाल जी बता रहे है जोकर के बारे मे कविता के माध्यम से …लिखते है कि ..

godiyaal saahab   याद तो होगा आपको
वह सर्कस का जोकर,
तमाम कलाकारों के मध्य,
एक अजीबो-गरीब किरदार,
मकसद सिर्फ़ और सिर्फ़
दर्शकों को हंसाना,
उनका मनोरंजन करना,
और खुद की शख्सियत
सर्कस के जानवरों से भी कम ।

 

अपने शास्त्री जी कविता लिखने की मशीन है ….दिन भर मे दो कविताये तो जरूर रहती है फ़िर भी कुछ लोग कहते है शास्त्री जी कवित्त कहा है …लो पढ लो आज भी कवित्त…

"कोई नही सुनता पुकार" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

 image मानवाधिकार
कोई नही सुनता पुकार
आयोग है
राजनीति का शिकार
कहने पर प्रतिबन्ध
सुनने पर प्रतिबन्ध
खाने पर प्रतिबन्ध
पीने पर प्रतिबन्ध

ग्यान दर्पण नाम से जाहिर है तो काम भी बराबर है…आज फ़िर ग्यान की बातें ग्यान दर्पण पर कि namebench के साथ करें DNS Server सर्च---रतन सिह: शेखावत जी

image दरअसल बिना कोई तुलना करने वाले औजार के हम यह पता नहीं लगा सकते कि हमारी वर्तमान डीएनएस सेवा ठीक है या गूगल की | यदि हमें कोई एसा तुलना करने वाला औजार मिल जाए तो हम गूगल डीएनएस सर्विस व अपने इन्टरनेट सेवा प्रदाता की डीएनएस सर्विस की तुलना कर जो ज्यादा बढ़िया है उसे इस्तेमाल कर सकते है |

बबली जी जा रही है छुट्टी पर पूरे एक महिने के लिये और दे गयी है आपको और सबको अभी से नये साल की शुभकामनाये….बबली जी आपको भी हमारी तरफ़ से शुभकामनाये..

शरद कोकास बता रहे है आज पुरातत्ववेत्ता मे एक पुरातत्ववेत्ता की डायरी-दसवाँ -दिन – दो..

खून पीकर जीने वाली एक चिड़िया रेत पर खून की बूँदे चुग रही है….

sharad jee रवीन्द्र ने कहा “ कैसे होती थी ग्लेडियेटर्स की यह लड़ाई ?” मैने कहा चलो तुम्हे वहाँ का दृश्य दिखाता हूँ । जिस तरह हमारे यहाँ स्टेडियम होता है उस तरह का होता था यह एम्फिथियेटर बीच में यह अखाड़ा जिसे एरीना कहते हैं । जिस तरह क्रिकेट देखने के लिये भीड़ इकठ्ठा होती है उस तरह की भीड़ यहाँ उपस्थित है । ठीक वैसा ही उन्माद .. शोर । साइड की दीवार  के पास एक शेड है जहाँ ग्लेडियेटर के जोड़े लड़ने के लिये प्रतीक्षारत  हैं उसके दरवाजे से एरीना का दृश्य देखा जा सकता है । मैदान के एक ओर गाने और बजाने वालों का एक समूह बैठा है जब तक लड़ाई शुरू नहीं हो जाती यह वाद्य्यंत्रों से लोगों का मनोरंजन करता रहेगा । हर जोड़े में एक थ्रेसियन है और एक यहूदी या हब्शी अफ्रिका का रहने वाला । जोड़े के दोनो ग्लेडियेटर आपस में घर परिवार की बाते कर रहे हैं जबकि उन्हे पता है कि उनमें से एक को थोड़ी देर बाद मर जाना है ।

पुलिस की करतूत सुमन की जुबानी....बप्पा महानिदेशक बेटवा घोटालेबाजपुलिस

पुलिस में भर्ती कराने के लिए पुलिस महानिदेशक ट्रेनिंग डी पि सिन्हा के पुत्र रितेश सिन्हा व बहुजन समाज पार्टी के सहारनपुर के नेता धूम सिंह के रैकेट का पर्दाफाश हुआ है। फिलहाल दोनों गिरफ्तार किए

गए हैं । उच्च स्तर के पुलिस अधिकारियों की छवि घोटालेबाज, भ्रष्टाचारी, रिश्वतखोर के रूप में आए दिन जनता के सामने प्रदर्शित होती रहती है। हमारी न्यायव्यवस्था के समक्ष अधिकांश वाद इन्ही भ्रष्टाचारियों के पर्वेक्षण में दाखिल होते है और उनके द्वारा लिखी गई बातें

वर्ष-2009 : हिन्दी ब्लॉग विश्लेषण श्रृंखला (क्रम-16)...

आईये पहले बात करते हैं रामपुरिया का हरियाणवी ताऊनामा यानि ताऊ डौट इन की । इंदौर निवासी श्री पी सी रामपुरिया का यह ब्लॉग वर्ष-२००९ के अद्भुत चिट्ठों में सर्वोपरि है , क्योंकि यह ब्लॉग अप्रत्यासित रूप से हिन्दी चिट्ठाकारी में अपना महत्वपूर्ण स्थान बना चुका है । वर्ष-२००९ में यदि सर्वाधिक पोस्ट प्रस्तुति की बात करें तो यह चिटठा सर्वाधिक अग्रणी चिट्ठों में से एक है यानि इस ब्लॉग पर वर्ष -२००९ में विश्लेषण के समय तक कुल २८९ पोस्ट डाले गए हैं जबकि वर्ष के सर्वाधिक सक्रीय चिट्ठों ( चिट्ठाजगत के अनुसार ) यथा- मानसिक हलचल, उड़न तश्तरी .... आदि पर डाले गए पोस्ट इस चिट्ठे पर डाले गए पोस्ट के आधे के आसपास है । प्रस्तुतीकरण ऐसी कि इस ब्लॉग पर जो एक बार भ्रमण कर लिया वह इस ब्लॉग का होकर रह गया । आंचलिकता की ओट से झांकते हुए ताऊ ने अपनी सम्मोहक भाषा शैली से पाठकों को वर्ष -२००९ में सर्वाधिक आकर्षित किया है । वर्ग पहेली इस ब्लॉग की सबसे बड़ी विशेसता है । मेरे व्यक्तिगत विश्लेषण के आधार पर इसे वर्ष के सर्वाधिक लोकप्रिय ब्लॉग होने की संज्ञा दी जा सकती है ।

परिकल्पना के विश्लेषण के आधार पर इस श्रेणी का दूसरा ब्लॉग है - हिन्दी ब्लॉग टिप्स । यह मूलत: तकनीकी चिटठा है और अपनी सम्मोहक शैली के साथ तकनीकी ज्ञान बांटने की दिशा में सर्वाधिक अग्रणी चिटठा होने का गौरव हासिल किया है । यह चिटठा वर्ष के सर्वाधिक चर्चित तकनीकी चिट्ठों में अग्रणी है । हिन्दी चिट्ठाकारी में इसे अद्भुत ब्लॉग इसलिए भी कहा जा सकता है कि इसके अनुसरनकर्ताओं की संख्या अन्य हिन्दी ब्लॉग की तुलना में सबसे ज्यादा यानी ६९४ है । ताऊ डौट इन के तरह इस ब्लॉग के भी सर्वाधिक पाठक हैं । सबसे बड़ी बात तो यह है कि यह चिट्ठा वर्ष -२००९ में काफी महत्वपूर्ण जानकारियों के साथ -साथ हिन्दी चिट्ठाकारों को मार्गदर्शन देने का काम किया है । यह चिटठा पूरे वर्ष तक चिट्ठाजगत की रैंकिंग में भी टॉप -४० चिट्ठों में से एक रहा है । इस ब्लॉग को मेरी कोटिश: शुभकामनाएं !

इस श्रेणी का तीसरा ब्लॉग है -युनुस खान का रेडियो वाणी । यह विविध भारती मुंबई के उद्घोषक युनुस ख़ान का का हिंदी चिट्ठा है । इस ब्लॉग की सबसे बड़ी विशेषता है कि इसके माध्यम से संगीत को केंद्र में रखकर लोगों तक अपनी बात पहुँचाने का मंच प्रदान किया जाता है। इस ब्लॉग में संगीतकारों, यूनुस के पसंदीदा कलाकारों तथा संगीत से ही जुड़ी तमाम अद्भुत जानकारियाँ मौजूद हैं। वर्ष-२००९ में कई कलाकारों और संगीत से जुड़ी तमाम जानकारियों से हमें समय-समय पर रू-ब-रू कराता रहा है - ‘रेडियोवाणी’। प्रस्तुतीकरण और सज-सज्जा में यह ब्लॉग अद्भुत ही नहीं अद्वितीय भी है ।

इस श्रेणी का चौथा ब्लॉग है -शब्दों का सफर । अजित वडनेरकर का हिन्दी भाषा और शब्दों के ऊपर छवियुक्त चिट्ठा।शब्द की तलाश और व्युत्पत्ति को लेकर भाषा विज्ञानियों का क्या है ? ...उसे आसान भाषा में छोटे-छोटे आलेखों में सबसे साझा करने की कोशिश है श्री अजित वाडनेकर के इस ब्लॉग में ।यह कोशिश हिन्दी चिट्ठाकारी के लिए किसी वरदान से कम नही है । मेरा मानना है कि हिन्दी का सबसे समृद्ध और श्रमसाध्य ब्लॉग है यह । बहुत शोधपरक, उपयोगी और महत्वपूर्ण जानकारियाँ दी गई है इस ब्लॉग के माध्यम से इस वर्ष ।हिंदी में इतनी संलग्नता के साथ ऐसा परिश्रम करने वाला शायद ही कोई और चिट्ठाकार होगा , ऐसा मेरा मानना है ।

इस श्रेणी का पांचवा ब्लॉग है -हिमांशु का सच्चा शरणम जो गंभीर चिंतन पर आधारित हिन्दी ब्लॉग जगत में सर्वाधिक सक्रीय चिट्ठों में से एक है । इसकी लोकप्रियता का पैमाना भी अत्यन्त ही अद्भुत है । अपने बारे में हिमांशु का कहना है, कि चलते रहते हैं कि चलना है मुसाफिर का नसीब सोचते रहतें हैं किस ओर किधर के हम हैं । सहज शब्दों में सारगर्भित बातें करना इस चिट्ठे कि सबसे बड़ी विशेषता है । यह चिटठा वर्ष के सर्वाधिक लोकप्रिय चिट्ठों में से एक है ....आशा कि जा रही है कि आने वाले वर्ष में यह चिटठा एक नया मुकाम बनाने में अवश्य कामयाब होगा ।

इस श्रेणी का अगला चिट्ठा है -महाजाल पर सुरेश चिपलूनकर । राष्ट्र के पुनर्निर्माण के प्रति समर्पित यह ब्लॉग अपनी साफगोई के कारण वर्ष -२००९ में सर्वाधिक लोकप्रिय ब्लॉग की श्रेणी में अग्रणी रहा । यह ब्लॉग कई नए ब्लोगर के लिए आदर्श भी रहा है । एक ही ब्लॉग पर एक साथ सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक , फिल्मी और मनोरंजक आलेख कि प्रस्तुति इस ब्लॉग कि सबसे बड़ी विशेषता है । वैसे इनके हिन्दूवादी विचारों से कई चिट्ठाकार इनका विरोध करते हैं, किंतु उनका मानना है कि ब्लोग को एक विचारधारा पर रखकर ही आगे बढ़ा जा सकता है ।

इस श्रेणी का सातवाँ ब्लॉग है- कल्पतरु । कल्पतरू यानि कल्पनाओं का वृक्ष । ताऊ डोट इन के बाद वर्ष-२००९ में सर्वाधिक पोस्ट (२५३) डालने का सौभाग्य प्राप्त है इस ब्लॉग को । विवेक रस्तोगी का यह ब्लॉग बहुत कम समय में हिन्दी चिट्ठाकारी में अपनी सार्थक उपस्थिति के लिए जाना जाता है । सहज ढंग से मनोरंजक बातें करना इस ब्लॉग कि खास विशेषता है । साहित्य और संस्कृति कि बातें भी बड़े अनोखे ढंग से प्रस्तुत करने में महारत हासिल है इस ब्लोगर को ।

और ये है सोलहवीं नायिका ....अनुशयाना!

image नायिका भेद शास्त्र के एक लोकप्रिय लेखक हुए हैं भानुदत्त. उनके  अनुसार अनुशयाना वह नायिका है जो प्रिय मिलन में बाधा उत्पन्न हो जाने से imageउदास है और यह नायिका तीन प्रकार  की होती है !पहली तो वह जो वर्तमान के  मिलन स्थल के नष्ट हो जाने से दुखी हो जाती है और दूसरी  इस आशंका से की कालांतर में किसी भी कारण (जैसे किसी अन्य से विवाह के कारण )पूर्व प्रेमी से किसी उपयुक्त मिलन स्थल के अभाव के कारण मिलना न हो सकेगा ! और तीसरी अनुशयाना  नायिका वह जो किसी बाधा के समुपस्थित हो जाने से संकेत/ अभिसार /मिलन स्थल पर न पहुँच पाने की व्यथा से उद्विग्न हो गयी है !

ढोंगी बाबा सचिदानन्द निकला कातिल

image 28 नवम्बर की रात करीब 11 बजे बाबा कविता के घर पहुँचा और उसे समझाया। कविता के बार बार अपनी बात पर अडे रहने के बाबा ने पजले उसके सिर पर जोर से घूँसा जडा और बाद मे उसी की चुन्नी से उसका गला घोंट दिया।हत्या को लूट का मामला बनाने के लिये उसने उस के बाल बिखेर दिये और घर का सारा सामान भी बिखेर दिया।ुसके 2 मोबाईल फोन भी नष्ट कर दिये।। फिर कमरे को ताला लगा कर दूसरे दरवाजे से चला गया ।अगली सुबह छ: बजे बाबा अपने चेलों को साथ ले कर गाडी से कुरुक्षेत्र चला गया। इसके बाद वो जालन्धर और अमृतसर मे भी घूमा।। 7 दिस्मबर को जब वो नवां शहर लौटा तो पोलिस ने उसे दबोच लिया।जाँच के दौरान पोलिस लो पता चला कि  कविता का उस बाबा के पास काफी आना जाना था। बाबा कविता का भाई बना हुया था। पोलिस ने जब सबूत जुटाने शुरु किये तो सभी कडियाँ खुलती चली गयी।

An Indian in Pittsburgh - पिट्सबर्ग में एक भारतीय

image मौत का अब डर भी यारों
हो गया काफूर है
ज़िंदगी की बात ही क्या
ज़िंदगी जाने के बाद

 

जीवन में पुरूषार्थ और भाग्य.दोनों का ही अपना अपना महत्व है...............

image पांडवों की माता कुन्ती श्रीकृ्ष्ण से कहती है कि मेरा पुत्र महापराक्रमी एवं विद्वान है किन्तु हम लोग फिर भी वनों में भटकते हुए जीवन गुजार रहे हैं,क्यों कि भाग्य सर्वत्र फल देता है । भाग्यहीन व्यक्ति की विद्या और उसका पुरूषार्थ निरर्थक है ।
वैसे देखा जाए तो भाग्य एवं पुरूषार्थ दोनों का ही अपना-अपना महत्व है, लेकिन इतिहास पर दृ्ष्टि डाली जाए तो सामने आएगा कि जीवन में पुरूषार्थ की भूमिका भाग्य से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है। भाग्य की कुंजी सदैव हमारे कर्म के हाथ में होती है, अर्थात कर्म करेंगे तो ही भाग्योदय होगा। जब कि पुरूषार्थ इस विषय में पूर्णत: स्वतंत्र है ।

लड़की हंसते हुए देख रही है या देख के हंस रही है?

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हमारे एक मित्र का एसएमएस मिला जिसमें एक जोक है। इसे हम यहां ब्लाग बिरादरी के लिए पेश कर रहे हैं।
एक सरदार अपने मित्र से: यार वह खुबसूरत लड़की मुझे काफी देर से हंसते हुए देख रही है।
मित्र- दोस्त पहले कंफर्म कर लो हंसते हुए देख रही है या देख के हंस रही है।

शत्रु मारते थे लड़कियों को लाइन और देते थे फाइन

 

चलते चलते

यादें और बातें

image यादें अंजानी
बातें, कही अनकही
यूं ही पड़ी रह जाती हैं ।
जैसे ओस की बूंदें
उतरी हों सुबह की रेशमी घास पर ।
झुर्झुरी सी होती है
जब भी कदमों के नीचे आती हैं।
या फिर बीती उम्र के सफ़ों पर
रोशनाई के कुछ कतरे ।
खामोश पडे पन्नों पर,
धूल कभी नहीं चढती ।
यादें और बातें,
दोनों बस वैसी ही तो रह जाती हैं

 

 

नमस्कार कल शास्त्री जी की बारी ....

20 comments:

अविनाश वाचस्पति said...

अच्‍छी है चर्चा

रखें सदा जारी।

मनोज कुमार said...

सार्थक शब्दों के साथ अच्छी चर्चा, अभिनंदन।

वाणी गीत said...

शानदार जानदार चर्चा ...!!!

राजकुमार ग्वालानी said...

झकास चर्चा

Rambabu Singh said...

बहुत शानदार और बेहतरीन चर्चा |

हिमांशु । Himanshu said...

बेहद खूबसूरत चर्चा । प्रभात जी की पोस्ट को पूर्णतः प्रस्तुत करना उनके उल्लेखनीय़ श्रम का स्वीकार व आभार है उन्हें ।
चर्चा का धन्यवाद ।

Suman said...

nice

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन said...

बहुत खूब चर्चा!

राजीव तनेजा said...

बढिया चिट्ठाचर्चा

मुकेश कुमार तिवारी said...

पंकज जी,

बढिया चर्चा व्यापक और विस्तृत भी।

मुकेश कुमार तिवारी

रंजन said...

मस्त..

पी.सी.गोदियाल said...

बहुत खूब पंकज जी, शुक्रिया !

Hiral said...

बहुत अच्छी और विस्त्रूत चर्चा, मेरी ब्लोगपोस्ट को शामिल करने के लिये आभार।

पं.डी.के.शर्मा"वत्स" said...

भई पंकज जी, सुबह सुबह {वैसे तो अब दोपहर हो चुकी है :)} बहुत ही विस्तृ्त एवं आनन्ददायक चर्चा पढने को मिल गई....
धन्यवाद्!

अर्शिया said...

Ye shama Jalti rahe.

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शानदार रही लखनऊ की ब्लॉगर्स मीट
नारी मुक्ति, अंध विश्वास, धर्म और विज्ञान।

बी एस पाबला said...

बढ़िया, स्टायलिश
जारी रखें

बी एस पाबला

शरद कोकास said...

अच्छा हुआ आपने चर्चा कर दी वरना हमारा ब्लॉग तो ब्लॉगवाणी की तकनीकी समस्या की बलि चढ़ गया था

दिगम्बर नासवा said...

विस्तृ्त चर्चा पंकज जी .......

रवीन्द्र प्रभात said...

बेहतरीन चर्चा...जारी रखें !

निर्मला कपिला said...

pपंकज जी धन्यवाद देर से आने के लोये माफी चाहती हूँ।चर्चा अच्छी लगी

पसंद आया ? तो दबाईये ना !

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