Saturday, January 02, 2010

पहलू में मौसम गुलाबी हुआ है ...(चर्चा हिन्दी चिट्ठों की )



अंक - 122                चर्चाकार - हेमन्त कुमार आज की चर्चा के साथ मैं हेमन्त कुमार आपके सामने हूँ । प्रस्तुत है आज की चर्चा । यह रही पहली पोस्ट - ज्ञानदत्त पाण्डेय ने आज भावी प्रधानमंत्री का स्टिंगॉपरेशन में  लिखा है कि -

"नत्तू पांड़े की माई की सख्त हिदायत थी कि उसके सुपुत्र का कोई न्यूड वीडियो न लिया जाये। उसको यह आशंका है कि इस वीडियो का (भविष्य में) नत्तू की शादी के अवसर पर ब्लैक मेल करने हेतु दुरुपयोग हो सकता है। मेरे जैसे तहलकाई के पास कोई चारा न बचा सिवाय स्टिंग ऑपरेशन (हिन्दी में क्या कहेंगे – डंक-संचालन या दंश-अभियान/दंशाभियान?) के। बाथ रूम में जब नत्तू पांड़े को नहलाया जा रहा था तो उनका खिड़की से वीडियो उतार लिया!"
गिरिजेश जी के  एक आलसी का चिट्ठा पर अरविन्द जी ने अतिथि पोस्ट दी है  - तीसरा भाग पूर्वार्द्ध : अलविदा शब्द, साहित्य और ब्लॉगरी तुम से भी..(लंठ महाचर्चा)

हान चिन्तक, दार्शनिक अरस्तू का मानना था कि मानव मात्र का अन्तिम लक्ष्य/अभीष्ट सुख की प्राप्ति है। आखिर कौन नहीं चाहता सुख। पशु-पक्षी कपि-भालू, नर-वानर, ऋषि-मुनि सभी तो सुख चाहते हैं। हाँ, यह बात दीगर है कि पशु पक्षियों में सुख की वह अनुभूति नहीं होती जैसी कि प्रकृति की श्रेष्ठतम कृति मानव में होती है। पशुओं में सुखानुभूति महज एक जैवीय ``उद्दीपन प्रतिक्रिया´´ के ही दायरे में सीमित होती है। मानव ने अपने अद्वितीय और अद्भुत सांस्कृतिक विकास की यात्रा में कई तरह के ``सुखों´´ के अन्वेषण-अनुभूति के पड़ाव तय किये हैं-सांसारिक (भौतिक) सुख, आध्यात्मिक  (मानसिक) सुख और यहाँ तक कि ``परमानन्द (सच्चिदानन्द ) तक की  प्राप्ति´´ का सुख जिसके पश्चात् फिर किसी और सुख की चाह ही नहीं रह जाती। यही मोक्ष (निर्वाण) है।
नये साल पर बोदूराम के साथ क्या हुआ पढिये पंकज मिश्रा के ब्लाग पर…..किस यु ऐन्ड योर फ़ेमिली..हैपी न्यु ईयर-बोदूरामhttp://crazywebsite.com/Website-Clipart-Pictures-Videos/New-Year-Graphics/Happy-New-Year-Party-Animals-Animation-1.gif
हुआ यु की की बोदूराम ने नए साल पर सबको मैसेज करने की सोची ..और किया भी और मैसे ज में वो लिखना चाहा कि...
WISH YOU & your family HAPPY NEW YEAR
लेकिन गलतीसे w की जगह दब गया k और हो गया
KISS you and & your family happy new year
अब तो आप समझ ही गए होगे कि कैसा बवाल हुआ होगा 
बोदूराम ने जल्दी से मेल अटैच्मेन्ट खोली और चलाया तो पहली लडकी आयी और बाय़ बाय़ की दुसरी लडकी आयी तो वेलकम की थोडी देर बाद दोनो लडकी साथ मे आती है और अपना टी शर्ट और जीन्स निकालकर हवा मे लहराकर नाचने लगती है..अब तो बोदूराम को काटो तो खून नही ..
तो दोस्तो यह तो बात हुई बोदूराम की और और मेरा तो सही ही था ..आप सबको देरी से ही सही नये साल की शुभकामनाये ...
नववर्ष के सन्दर्भ में इनके विचार देखिये - 

नया साल मुबारक: कुछ और रास्ते मिले, कुछ और रास्ते खुले...

एक दिन अचानक मुहँ बिरायेगा आयना, चांदी के तार झलकेंगे कपास की खेती में बदलने से पहले, तुम फिर फ़िराक में रहोगे, अभी भी पकड़ में है वक़्त, कुछ और दिन के लिए मुब्तिला कर दोगे खुद की तलाश. वक़्त के बदलते घोड़े की घुड़सवारी नहीं करोगे, उसकी थापों की थाह लोगे, तब जब वों एक फासले तक गुजर चुकी होंगी. फिर सुनोगे उसे एक भूली तान के भ्रम में, या किसी आहट के अंदेशे में। दुनिया बदलने की खुमारी में डूबे तुम, एक कोने दुबके रहे और उतनी देर में बदल गया है दुनिया का धरातल, कुछ वैसे नहीं जैसे चाहा था तुमने, जैसा अंदेशा था दन्त कथाओं में, जैसी उम्मीद कायम थी कत्लो-गारद की भरी पिछली सदी में.

 खुशदीप जी का ब्लॉग देशनामा लाया है खास - नये साल पर दो करोड़ के ठुमके का चोंचला...खुशदीप


लो जनाब आ गया 2010 भी...आधी रात को माहौल देखना था...ऐसे जैसे घड़ी की सुइयां बारह पर पहुंचेंगी तो न जाने क्या कुछ अनोखा हो जाएगा...देवदूत आसमां से नीचे उतर आएंगे...देवदूत तो क्या उतरते हां गले से गैलन के गैलन सोमरस ज़रूर उतर रहा था..चलिए आपको नए साल के तीन अक्स दिखाता हूं...आप सोचिएगा कौन से अक्स के करीब हैं या कौन से अक्स का दर्द करीब से जानना चाहते हैं...
ताऊ जी के ब्लॉग पर पहुँचिये -ओम पराया माल गटक जा भैरु..गटक गटक भैरु..


प्रिय बहनों और भाईयो, नये साल मे आपका हार्दिक स्वागत है. पिछला साल कल ही तो बीता है. हर साल बीतते बीतते हम कुछ बुरी बातें छोडने का संकल्प लेते हैं. कुछ अच्छी बातें अपनाने का संकल्प करते हैं. पर अगर मैं आपको इमानदारी से कहुं तो मानवीय मन ऐसा है कि कहीं टिक नही पाता. यानि जिसका जैसा स्वभाव पड गया वो उसी के अनूरुप व्यवहार करता है. यानि ले देके वही रामदयाल और वही गधेडी.
धीरू जी की शुभकामनायें कबूलिये, और कहनी सुनिये -हे २००९ तुम जाते जाते महंगाई ,आतंक को भी अपने साथ ले जाओ . नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाये

ना ना करते हुए भी २००९ में १०० पोस्ट  पूरी हो गयी दरबार की . यह कोई उपलब्धि तो नहीं लेकिन मेरी निरंतरता है .  क्योकि मुझ पर ठप्पा लगा है कोई काम मैं लग कर नहीं कर सकता . बहुत से सपने मेरे पिता ने मेरे लिए देखे होंगे लेकिन मैं भी समझता हूँ आज तक मैं खरा उतरा नहीं . साल दर साल हर नए साल पर प्रतिज्ञा करता हूँ कसम खाता हूँ . लेकिन आज तक पहले हफ्ते में ही सारी कसमे खा जाता हूँ और प्रतिज्ञा तो याद भी नहीं रहती .
एक प्यारी कविता नये साल का स्वागत करती हुई मनोज जी के ब्लॉग से -आ गया है साल नूतन


आ गया है साल नूतन, ख़ुशियों की सौगात लेकर,
करें इसका मिलके स्वागत जोश और ज़ज़्बात लेकर।

याद मन में अपने कर लें, मुस्कुराते बीते कल को
उम्र-भर रोना नहीं, बिगड़े हुये हालात लेकर।

आओ नज्मों में मिला लें, सबसे मीठी प्रेम-भाषा,
हो ग़ज़ल कामिल हर शै, क़लम और दावात लेकर।
नये वर्ष की चर्चा लेकर महेन्द्र जी आये हैं कुछ संकल्पों की याद दिलाने - चिट्ठी चर्चा : चलो हम नए वर्ष के प्रथम दिन को संकल्प दिवस बना लें हम


नया साल नई उम्मीदे लेकर आता है . दिमाग में नई सोच पुराने विचार कुछ नयापन लेकर और ढेरो आशाये लेकर आता है तो स्वाभाविक है की वर्ष २०१० में कुछ नया कर गुजरने की लालसा जरुर होती है . समाज के उत्थान का संकल्प ले. विकलांगो की सेवा करें . कठोर परिश्रम करे . नैतिक विकास का संकल्प ले आदि आदि .. " चलो हम नए वर्ष के प्रथम दिन को संकल्प दिवस बना लें हम " " एक नये संकल्प-सोच से पुरातन पंथो को बदलने का बीड़ा उठा लें हम "
गोदियाल जी का नये साल का सबसे मारक प्रश्न है यह !तू ब्लॉगर क्यों हुआ !


एक बार पुन: सभी को नववर्ष की मंगलमय कामनाये ! चलो नए साल की शुरुआत की जाये इस भोंडी सी गजल के साथ;
ठण्ड पूछती है कुर्ते से, तू पुलओवर क्यों हुआ, अरुणोदय को निहारना इतना, सोबर क्यों हुआ ! इस शरद-ऋतु में नव-वर्ष की प्रथम बेला पर, दिल्ली का जर्रा-जर्रा,फौगी से फौगर क्यों हुआ !

एक और बड़ा सा प्रश्न सुन लीजिये -ऐ नए साल बता , तुझ में नयापन क्या है ?
अपने ही घर आते हुए जाने क्यों इतनी झिझक हो रही है, वही घर वाही लोग वहीदोस्त पता नहीं कहाँ , क्या नया है? लेकिन फिर भी आज दिल चाहा , अपने दोस्तों के नज़दीक जाने का, और देख लीजिये, हम आगये,
दूरी क्यों रही, ये वजह ना ही पूछें तो अच्छा है. कुछ अपना चेहरा नज़र आएगा ,कुछ अपने ही लोगों के बदसूरत चेहरे दिखाई देंगे, सो क्यों न इस बात को यहीं छोड़ दिया जाए......
जैसा कि आप अवगत ही हैं कि सकारात्मक ब्लॉगिंग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 20 श्रेणियों हेतु प्रस्तावित 'संवाद सम्मान' का आयोजन किया जा रहा है। इस हेतु ब्लॉग जगत के प्रतिष्ठित 25 लोगों से नॉमिनेशन मांगे गये थे। इस सम्बंध में साथियों द्वारा दिये गये सुझाव के अनुसार ऑनलॉलन नॉमिनेशन भी आज से शुरू किया जा रहा है।
दूसरा है अलबेला जी का यह निर्णय -ब्लोगर मित्र अपना कीमती मत दें और स्वयं चुनें ब्लोगर 2009 और टिप्पणीकार 2009 के लिए सही नाम


मुझे ये बताते हुए बड़ा आनन्द है कि आगामी 24-25 अप्रेल 2010 को सूरत में एक विराट सांस्कृतिक समारोह में वर्ष 2009 के लिए हिन्दी ब्लॉग जगत की दो ऐसी हस्तियों को वार्षिक सम्मान से सम्मानित किया जाएगा जिन्होंने अपनी रचनाओं और टिप्पणियों से हिन्दी ब्लोगिंग को आगे बढ़ाया तथा लोकप्रिय बनाया । इस सन्दर्भ में पहला सम्मान उस सक्रिय ब्लोगर को भेन्ट किया जाएगा जिसने वर्ष भर अपनी लेखनी चलाई और सार्थक लेखन किया । सम्मान्य ब्लोगर को रूपये 25 हज़ार नकद, सम्मान-पत्र एवं शाल-श्रीफल भेन्ट किये जायेंगे

       

ल्लाह ने अपने आखिरी नबी, मुह्म्मदुर्रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम पर अपना आखिरी पैगाम कुरआन शरीफ़ नाज़िल किया था। कुरआन शरीफ़ जो सारी इन्सानियत के लिये नाज़िल हुआ है, जो रहम और बरकत की किताब है। अगर आपको एक मुस्लमान की ज़िन्दगी क्या होती है देखनी है तो आप नबी करीम मुह्म्मदुर्रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की ज़िन्दगी से अच्छी मिसाल दुनिया में कोई नही है।
अदा जी के ब्लॉग पर गुलाबी मौसम के बारे में -
पहलू में मौसम गुलाबी हुआ है सासों में सुर्ख़ी सी छाने लगी है पतझड़ की पाती सावन की केहुनी इशारों की दुनिया बुलाने लगी है वो बूटों में सजता है तारों में रचता शै अनजानी शक्ल जानी लगी है बातों की पायल किस्सों के झूमर गीतों की दुनिया गुनगुनाने लगी हैं
सीमा जी के ब्लॉग कुछ कवितायें कुछ हैं गीत से -आने दो खुशियों से भरे नए साल को

सभी दोस्तों ,आदरणीयों को नववर्ष की हार्दिक शुभकामनायें । मन से निकल दो सब मैल को, मलाल को । आने दो खुशियों से भरे नए साल को । बीती सो बात गई , अंधियारी रात गई . नव प्रभात आया है , लेकर सौगात नई । फैलने दो मन आँगन, प्यार के गुलाल को । आने दो खुशियों से भरे नए साल को ।
जाते-जाते हिमांशु के ब्लॉग पर की गयी राम जी से फरियाद नये साल पर -

ये साल में रामजी, इतनी-सी फरियाद, बना रहे ये आदमी, बना रहे संवाद। नये साल में रामजी, बना रहे ये भाव, डूबे ना हरदम, रहे पानी ऊपर नाव । नये साल में रामजी, इतना रखना ख्याल, पांव ना काटे रास्ता, गिरे न सिर पर डाल। नये साल में रामजी, करना बेड़ा पार, मंहगाई की मार से, रोये ना त्यौहार ।
खत्म करता हूँ ! 

18 comments:

Udan Tashtari said...

बहुत उम्दा और बेहतरीन चर्चा की है, हेमन्त. वाह!!

जारी रहो!!

संगीता पुरी said...

बहुत बढिया चर्चा !!

हिमांशु । Himanshu said...

सक्रिय हुए ! अच्छी बात है !
सुन्दर चर्चा ।

'अदा' said...

Hemant ji,
aapka swagat hai..
bahut badhiya rahi charcha..
aabhar..

वाणी गीत said...

सुगठित चिटठा चर्चा

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन said...

बहुत बढिया चर्चा!

Suman said...

आप को ओर आप के परिवार को नववर्ष की बहुत बधाई

राजकुमार ग्वालानी said...

लाजवाब चर्चा- नहीं छूटा कोई पर्चा

Meenu Khare said...

नववर्ष की मंगलमय कामनाये !

Arvind Mishra said...

बढियां चर्चा हेमंत जी .......आगे भी मुन्तजिर हैं हम !

ललित शर्मा said...

सुंदर चर्चा- नुतन वर्ष मंगलमय हो।

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

बढ़िया चर्चा!
बधाई!

ताऊ रामपुरिया said...

बहुत बढिया चर्चा.

रामराम.

seema gupta said...

बहुत बढिया चर्चा, नववर्ष की मंगलमय कामनाये
regards

महेन्द्र मिश्र said...

बहुत बढ़िया चर्चा . मेरी पोस्ट चर्चा के लिए आभार . नववर्ष की अनेको शुभकामनाये ...

रावेंद्रकुमार रवि said...

नया वर्ष हो सबको शुभ!

जाओ बीते वर्ष

नए वर्ष की नई सुबह में

महके हृदय तुम्हारा!

अजय कुमार झा said...

बहुत ही सुंदर और व्यापक चर्चा रही हेमंत भाई आभार

पी.सी.गोदियाल said...

बहुत उम्दा और बेहतरीन चर्चा !

पसंद आया ? तो दबाईये ना !

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