Monday, January 25, 2010

“ये झूठ इतना खूबसूरत क्यूँ होता है?” (चर्चा हिन्दी चिट्ठों की)

अंक : 134

चर्चाकार : डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"

ज़ाल-जगत के सभी हिन्दी-चिट्ठाकारों को डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक""

का सादर अभिवादन!

आइए “चर्चा हिन्दी चिट्ठों की” में कुछ महत्वपूर्ण चिट्ठों की ओर

आपको ले चलता हूँ!


शेफाली पाण्डेय, हल्द्वानी (उत्तराखण्ड)

मास्टरनी-नामा

परिवर्तन की सुखद बयार
कई सालों के बाद कानपुर जाना हुआ तो स्टेशन पर उतरते ही सुखद अनुभूति हुई| सबसे पहले नज़र पड़ी जगह -जगह रखे हुए बड़े-बड़े कूड़ेदानों पर जिन पर 'परिवर्तन' लिखा हुआ था| जानने की उत्सुकता बढ़ी कि यह कौन सी संस्था है जो सरकारी प्रयासों से इतर शहर व स्टेशन………


nadeem

कोतुहल

ये झूठ इतना खूबसूरत क्यूँ होता है? त्रिवेणी की कोशिश!
यूँ बरसते हैं उसकी आँखों से आंसू,जैसे सीप से मोती निकलकर बिखर रहे हों,!!!
……………………….
ये झूठ इतना खूबसूरत क्यूँ होता है?….

हे प्रभु ये तेरा पथ

जैन:प्राचीन इतिहास-10
गतांक से आगे........महावीर की संघ-व्यवस्था और उपदेश -महावीर भगवान् ने अपने अनुयायियों को चार भागों में विभाजित किया-मुनि, आर्यिका, श्रावक और श्राविका। प्रथम दो वर्ग गृहत्यागी परिव्राजकों के थे और अन्तिम दो गृहस्थों के। यही उनका चतुर्विध-संघ कहलाया।…

इस तरह उड़ान भरते हैं हौसले
कभी लोगों से ताने सुनने वाले विकलांग ने दिया मूक-बधिर बच्चों को मजबूत सहारापैरों और एक आंख से नि:शक्त धन्नाराम पुरोहित के बारे में गांव के लोग कहा करते थे कि यह बेचारा जिन्दगी में क्या कर पाएगा, लेकिन आज उसी धन्नाराम ने सैकड़ों निज्शक्तजनों को धन्य कर रखा……..

अविनाश वाचस्पति

मैं लंदन नहीं गया : पर चित्र भी पहचानें (अविनाश वाचस्‍पति) - मेरे ऐसा कहते ही मेरे सुर में मिलाने सुर बहुत मिल गए इतने सुर सुने हम अंदर तक दहल गए। मैं लंदन नहीं गया परंतु कविता जी का सान्निध्‍य पा गया यह सब नेट का कम...

युवा दखल

हैप्पी बर्थडे टू मी!! - ( वेरा के बनाये तमाम कम्प्यूटर चित्रों में से एक) *आज पूरे पैंतीस साल हो गये!* पापा बार-बार फोन हाथ में ले बधाई देने की हिम्मत जुटा रहे होंगे। मां ने श...

ज़िन्दगी

प्यार , प्यार होता है -----------शरीरी नही होता - प्यार , प्यार होता है शरीरी नही होता क्यूँ प्यार का एक ही अर्थ लगाती है दुनिया प्यार बहन से, माँ से, पत्नी से , प्रेमिका से , बेटे से , बेटी से भी होता है म..

हिन्दी साहित्य मंच

बसंत --- (डा श्याम गुप्त ) - गायें कोयलिया तोता मैना बतकही करें , कोपलें लजाईं , कली कली शरमा रही | झूमें नव पल्लव, चहक रहे खग वृन्द , आम्र बृक्ष बौर आये, ऋतु हरषा रही| नव कलियों पै हैं,...

Albelakhatri.com

पैदा तो कर दिये मज़े मज़े में लेकिन पाल नहीं पा रहा हूँ, इसलिए तुम्हें मार रहा हूँ मेरे बच्चों ! मुझे माफ़ कर देना - लायी हयात आये, क़ज़ा ले चली चले न अपनी ख़ुशी आये, न अपनी ख़ुशी चले -हाली आज का दिन बहुत भारी है मुझ पर । जिन बच्चों को बड़े शौक से मज़े मज़े ले ले..

भीगी गज़ल

अज़ीब शख़्स था, आँखों में ख़्वाब छोड़ गया - अज़ीब शख़्स था, आँखों में ख़्वाब छोड़ गया वो मेरी मेज़ पे, अपनी किताब छोड़ गया नज़र मिली तो अचानक झुका के वो नज़रें मेरे सवाल के कितने जवाब छोड़ गया पलट के आने...

स्वप्न(dream)

छिपा हुआ जो एक गुण , सिर्फ उसी को देख - छिपा हुआ जो एक गुण , सिर्फ उसी को देख झूठे धोखेबाज़ को, लानत औ धिक्कार लेनदार होवें खड़े,आकर जिसके द्वार कसमें खा , फिर जाए जो, कितना है वो नीच करिए चौराह...

भारतीय नागरिक - Indian Citizen

एलर्जी से उत्पन्न खांसी के लिये एक स्व-अनुभूत प्रयोग - मुझे एलर्जी है प्रोटीन से. अब प्रोटीन से बच पाना तो बहुत मुश्किल है. कोशिश करता हूं कि इससे बचा रह सकूं. कभी-कभी पन्द्रह-बीस दिन में सेट्रीजीन लेता हूं. इस..

चिट्ठाकार चर्चा

मिलिए अजय लाहुली से-चिट्ठाकार-चर्चा (ललित शर्मा) - अभी कुछ दिन पहले एक ब्लाग पर मेरी नजर पड़ी उसका नाम मुझे सुना हुआ लगा तो जिज्ञासा वश उस ब्लाग पर गया तो अद्भुत नजारा पाया. वह ब्लाग प्रकृति के चित्रों और न..

ललितडॉटकॉम

पापी ! तूने मुझे बेकार मरवा दिया.!! - हमारी दादी कहती थी कि इस जुबान का गलत इस्तेमाल मत करो क्योंकि इसका कुछ नहीं बिगड़ता, ये तो बोल कर अन्दर घुस जाती है और दांतों का सत्यानाश (तुडवा) करवा देती..

bhartimayank

"रविवासरीय साप्ताहिक पहेली-17" (अमर भारती) - *रविवासरीय साप्ताहिक पहेली-17 में * * * *आप सबका स्वागत है।* * * *आपको पहचान कर निम्न चित्र का* * * *नाम और स्थान बताना है।*

मानसी

ट्रैफ़िक टिकट - मेरे ड्राइविंग के कि़स्सों का ज़िक्र कर चुकी हूँ पहले। तो अब तो मैं एक्सपर्ट हो चुकी हूँ (ये और बात है कि हाइवे से अभी भी डर लगता है और पति हों साथ तो कभी .

An Indian in Pittsburgh - पिट्सबर्ग में एक भारतीय

आत्महत्या क्यों? - असुर्या नाम ते लोका अन्धेन तमसाऽऽवृताः। ताँस्ते प्रेत्याभिगच्छन्ति ये के चात्महनो जनाः॥ ईशोपनिषद के इस वचन में आत्महनन करने वालों के गहन अन्धकार में जाने क..

हास्यफुहार

इतनी बड़ी खुशी !! - इतनी बड़ी खुशी !! अपनी गांठें ढीली करने शादी की सातवीं वर्षगांठ पर ख़ुशी के मारे श्रीमती के साथ श्रीमानजी एक बड़े होटल पधारे पत्नी की नज़र साम..

शब्दों का सफर

बहुधाः 9/11 के बाद की दुनिया - [image: book review]*बाल्मीकि प्रसाद सिंह* की ताज़ा किताब को *राजकमल प्रकाशन * ने प्रकाशित किया है। मूल्य है 550 रुपए और 450 पृष्ठ है। पुस्तक की भूमिका दल...

ज्योतिष की सार्थकता

27 जनवरी के पश्चात मौसम में हल्का सा सुधार किन्तु प्रबल शीतलहर से पूर्ण मुक्ति 6 फरवरी के बाद ही......... - संसार में कोई भी व्यक्ति,पदार्थ, जीव इत्यादि आकाशमंडल में भ्रमण कर रहे ग्रहों से अछूता नहीं हैं। सभी कही न कहीं किसी न किसी रूप में इन भ्रमणशील ग्रहों की क...

अंतर्मंथन

दिल दा मामला है----- कुछ ते करो जतन----- , - दिल दा मामला है , दिल दा मामला है कुछ ते करो जतन , तौबा खुदा दे वास्ते, कुछ ते करो जतन ---- दिल दा मामला है , दिल ---दा ------है। युवा दिलों की धड़कन , गुरद...

मसि-कागद

आज का रंग कुछ अलग ही है... देखने जरूर आइये अपने मसिकागद@मशाल.कॉम पर.... दीपक मशाल.. - दोस्तों आज आपके सामने कुछेक पुरानी कवितायेँ, जो कहीं प्यार सिखाती हैं तो कहीं दोस्ती के नए आयाम बतलाती हैं और आखिरी कविता जो बताती है कि आपके कल का असर आअ...

समय के साये में

मानसिक कार्यकलाप के भौतिक अंगरूप में, मस्तिष्क - हे मानवश्रेष्ठों, पिछली बार हमने मन, चिंतन और चेतना में अंतर तथा मानसिक और दैहिक, प्रत्ययिक और भौतिक को समझने की कोशिश की थी। इस बार हम मानव चेतना की विशिष...

मोहल्ला

गायब न हो जाए पायल की झनकार! - *अरविन्द शर्मा* आठ माह की इस मासूम के सपने उम्र से भी कई बड़े हैं, मगर सपनों के आड़े आ गई है तो उसकी बीमारी। वह चहकना और जीना भी चाहती है। लेकिन यह बीमारी ...

रेडियो वाणी

ये रातें ये मौसम ये हंसना हंसाना: पंकज मलिक की सोंधी आवाज़ - बरसों पहले की बात है । लता मंगेशकर का अलबम श्रद्धांजली जारी हुआ था । शायद 1992[image: Lata Mangeshkar - Shraddhanjali Front] में । वो कैसेटों का दौर था ।..

जोग लिखी

शिक्षा और प्रलय के बीच एक रेस - अपनी मेगा बेस्टसेलर थ्री कप्स ऑफ टी (अब तक 30 लाख प्रतियां बिक चुकी हैं) में ग्रेग मॉर्टेन्सन ने पाकिस्तान के दुर्गम इलाकों में लड़कियों के लिए स्कूल बनान..

कुछ हम कहें

आगरा कैंट ( भाग 1) - मौसी के यहां से शादी का कॉर्ड आया तो हम समझ गये थे कि इस बार जाना अनिवार्य है। उत्तर भारत में शादियों का मौसम जाड़ों में ही पड़ता है और हर बार या तो छुट्टी..

देशनामा

मियांजी पधारो म्हारे ब्लॉगवुड...खुशदीप - बधाइयां जी बधाइयां...समूचे *ब्लॉगवुड *के लिए खुशियां मनाने का मौका जो आया है...आरतियां उतारो...मंगलगीत गाओ...आज हमारे बीच नया मेहमान जो आया है...नाम जानना ..

कस्‍बा qasba

रिपोर्टिंग के रिश्ते - सात साल की रिपोर्टिंग से न जाने कितने रिश्ते अरज लाया हूं। वो रिश्ते मुझे बुलाते रहते हैं लेकिन ऐसा संयोग हुआ ही नहीं कि दुबारा उस जगह या शख्स के पास लौटा ..

लिखो यहाँ वहां

कलाकार एक चेतना से परिपूर्ण सत्ता है - घुमकड़ी का शौक रखने वाले और कला साहित्य में खुद को रमाये रखने वाले रोहित जोशी ने यह साक्षात्कार विशेषतौर इस ब्लाग के लिए भेजा है। हम अपने इस युवा साथी के ...

नया ठौर

हो- हो- हो - *कार्टूनिस्ट पवन ने पिछले दिनों टीवी शो -राज पिछले जन्म का- और नये साल के मौक़े पर कुछ कार्टून बनाए थे। देखिये और मजा लीजिये। हां, कार्टून पर क्लिक करके...

ज़ब द्वारे पे आये है तो टिपिया के जाइये न!!!

बिना टैक्स वाली हंसी आज देख लीजिये !!

Murari Pareek

किलोमीटर से नहीं चलूंगा [सप्ताह का कार्टून] - अभिषेक तिवारी

रचनाकार परिचय:-

अभिषेक तिवारी "कार्टूनिष्ट" ने चम्बल के एक स्वाभिमानी इलाके भिंड (मध्य प्रदेश्) में जन्म पाया। पिछले २३ सालों से कार्टूनिंग कर रहे हैं। ग्वालियर, इंदौर, लखनऊ के बाद पिछले एक दशक से जयपुर में राजस्थान पत्रिका से जुड़ कर आम आदमी के दुःख-दर्द को समझने की और उस पीड़ा को कार्टूनों के माध्यम से साँझा करने की कोशिश जारी है....

ताऊजी डॉट कॉम

खुल्ला खेल फ़र्रुखाबादी (181) : आयोजक उडनतश्तरी

बहनों और भाईयों, मैं उडनतश्तरी इस फ़र्रुखाबादी खेल में आप सबका आयोजक के बतौर हार्दिक स्वागत करता हूं.

नीचे का चित्र देखिये और बताईये कि ये कौन है?



आज की चर्चा यहीं सम्पन्न होती है!

21 comments:

काजल कुमार Kajal Kumar said...

समग्र चर्चा. आभार.

राजकुमार ग्वालानी said...

बहुत ही बेहतरीन चर्चा

मनोज कुमार said...

अच्छी चर्चा!

Udan Tashtari said...

बाप रे, इतनी विस्तृत चर्चा...कितनी मेहनत की. वाकई काबिले तारीफ!!

अविनाश वाचस्पति said...

सुंदर और मन भावन
मन मानस को तरावट देने वाली चर्चा।

Suman said...

nice

Vivek Rastogi said...

अच्छी चर्चा

खुशदीप सहगल said...

बेहतरीन लिंक का पता देता चर्चा का अद्भुत पर्चा...

आभार...

जय हिंद...

डॉ. मनोज मिश्र said...

अच्छी चर्चा,
आभार...

ललित शर्मा said...

बहुत ही बढिया चर्चा-आभार

निर्मला कपिला said...

अच्छी चर्चा आभार्

पं.डी.के.शर्मा"वत्स" said...

अति सुन्दरम चर्चा....
आप इस बेहद श्रमसाध्य कार्य को कितनी बाखूबी से निभा रहे हैं!!
आभार्!

वन्दना said...

bahut hi badhiya charcha rahi.

दिगम्बर नासवा said...

अच्छी चर्चा .......

ताऊ रामपुरिया said...

बहुत शानदार चर्चा.

रामराम.

Shefali Pande said...

bahut vistaar se kee charcha achchhe lagee..dhanyavaad...

राज भाटिय़ा said...

बहुत सुंदर चर्चा जी

लाल और बवाल (जुगलबन्दी) said...

लाजवाब चर्चा

अपूर्व said...

इतनी विस्तृत और गंभीर चर्चा के लिये आभार

दीपक 'मशाल' said...

silsilewar khoobsoorati ki mishal hain aapki charchaen sir..
गणतंत्र दिवस की शुभकामनायें....
जय हिंद... जय बुंदेलखंड...

निर्मला कपिला said...

अच्छी चर्चा श्य्भकामनायें

पसंद आया ? तो दबाईये ना !

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