Saturday, January 16, 2010

विवेक जी ,खुशदीप जी . बवाल जी औरअनिल पुसादकर जी के पोस्ट की विशेष चर्चा (चर्चा हिन्दी चिट्ठो की )

नमस्कार ...पंकज मिश्रा आप सब के बीच .
चर्चा कर्म में इस समय लापरवाही बरत रहा हु . अपने निजी व्यस्तताओं के चलते ..लेकिन हमारे विवेक भाई नाराज हो गए है शायद उनके पोस्ट को काफी दिन से चर्चा में ना ले पा रहा था इसके लिए .
बवाल जी ने भी सवाल दागा है कि क्या वे उर्दू में चर्चा करते है जो उनकी पोस्ट शामिल नहीं की जा रहा है ....
खुशदीप सहगल जी भी कह रहे है , मैं कौन सा गीत सुनाऊं,जो आ जाऊं ललित चर्चा में...?
और अनिल पुसादकर जी भी कह रहे है कि मैं भी खुशदीप के साथ हूं।
तो चलिए जनाब आज इन महानुभावो के बारे चर्चा उनके बारे में पूरी जानकारी के साथ ....
सबसे पहले अनिल पुसादकर जी के बारे में ...
राजनैतिक प्रभाव और आर्थिक दबाव में कलम को दम तोड़ते देख पत्रकारिता छोड़
ब्लॉग की दुनिया में कदम रखा है। रोज मरती खबरों को जिंदा रखने की कोशिश
कर रहा हूँ। छत्तीसगढ़ के पहले मुख्यमंत्री अजीत जोगी के विधायकों के खरीद
फरोख्त प्रकरण में राजनैतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल हो जाने के बाद
लगा पत्रकार कठपुतली से ज्यादा कुछ नहीं है। लंबे अरसे तक प्रिंट और
इलेक्ट्रानिक मीडिया में काम करने के बाद महसूस हुआ कि नौकरों की कलम आजाद
नहीं रहती सो नोकरी छोड़ कलम को आजाद करा लिया है। पत्रकारिता के अलावा दस
साल तक मंदबुध्दि बालक-बालिकाओं का आश्रम भी चलाया। इसके अलावा क्रिकेट और
बास्केटबॉल संघ में भी महत्तवपूर्ण पदों पर काम किया। राजधानी के प्रेस
क्लब का तीसरी बार अध्यक्ष चुना जाने वाला पहला पत्रकार और छत्तीसगढ़
पत्रकार महासंघ का प्रदेशाध्यक्ष भी हूँ
और ब्लॉग अमीर धरती गरीब लोग से पोस्ट अंधविश्वास
क्या सिर्फ़ हिंदू धर्म मे ही है?मुख़ालफ़त क्या सिर्फ़ हिंदू मान्यता की हो
सकती है?दम है तो कभी किसी दूसरे धर्म के बारे मे भी बेबाकी दिखाओ!

अभियान चलाना तो जाने दिजिये ये बताईये कि क्या तोड़-मरोड़ कर दिखाये जाने
वाले शराब कंपनियों के विज्ञापनो पर रोक नही लगनी चाहिये?क्या शराब
कंपनियों को अपने ब्रांड का विज्ञापन करके दूसरे उत्पादों से ज्यादा शराब
बेचने मे आप लोगों को मदद करनी चाहिये?सरकारी रोक के बावज़ूद कभी क्रिकेट
मैच के प्रायोजकों के रूप मे तो कभी किसी अन्य रूप मे शराब मे ब्राण्ड
दिखाने पर आप लोगों को जनहित मे रोक नही लगानी चाहिये?क्या इस बारे मे
अभियान नही चलाया जाना चाहिये कि शराब बनाने वाली कंपनी दूसरे कई उत्पादों
के लिये भले ही एक ही नाम रखे मगर शराब के लिये सिर्फ़ एक ब्राण्ड का उपयोग
करे और उसे दिखाये जाने पर प्रतिबंध लगे?ये सब आप लोग कर ही नही सकते
क्योंकि शराब कण्डोम और गर्भनिरोधक गोलियों के विज्ञापनो से होने वाली
मोटी कमाई से ही तो चैनल चल रहा है
अब आगे चलते है बवाल जी के ब्लॉग पर
बवाल जी के बारे में लिखा है कि नाम से उजागर है .
!! लाल और बवाल --- जुगलबन्दी !! ब्लॉग से एक पोस्ट चचा लुक़्मान ज़िंदाबाद : बवाल का सलाम
चोटों पे चोट खाना, खाकर वो भूल जाना
मुझे मुआफ़ करते करते, अल्लाह बन न जाना
एहले ज़बाँ का मुझको, वो इल्म ना हो शायद
तेरी कहन को लेकिन, हूँ जानता निभाना
अब आगे है .विवेक रस्तोगी जी
The ultimate goal of life should "Back to Godhead"
और चर्चा इनके ब्लॉग कल सूर्यग्रहण था और ग्रहण का पहला प्रकोप हमारी शर्ट पर निकला, तो शायद हम बच लिये… “बांके बिहारी लाल की जय”
वैसे भी मन तो शंकालू ही होता है सोचा कि चलो ग्रहण की शुरुआत हो चुकी है
अपने ऊपर अब बेटा दिनभर के लिये तैयार हो जाओ, पता नहीं दिन कैसा जाने
वाला है। फ़िर क्या था ऑटो से उतरे वापिस घर आये और शर्ट बदल कर वापस चल
दिये। क्योंकि अपनी तो पहले की हिस्ट्री भी खराब है ग्रहण के दिनों की,
हाँ यह पहला सूर्य ग्रहण था और अभी तक जितने भी बड़े बदलाव या नुक्सान हुए
थे वो चंद्र ग्रहण से हुए थे। हो सकता है कि हम खुद ही उस समय लापरवाह हो
गये हों और हमारी शर्ट फ़ट गयी हो।
और ये है खुशदीप बाबू ..
बन्दा 15 साल से कलम-कंप्यूटर तोड़ रहा है
और चर्चा इनके ब्लॉग देशनामा के पोस्ट की
क्या आप अपने बच्चों को अच्छी तरह जानते हैं...खुशदीप
कोल्हापुर का दशरथ पाटिल, मुंबई के माटुंगा में बीकॉम फर्स्ट इयर की छात्रा शिवानी सेठ, विरार में दसवीं का छात्र सूरज, नासिक की प्रियंका और धनश्री पाटिल....कई
नाम हैं खुदकुशी करने वाले छात्र-छात्राओं की फेहरिस्त में...अकेले
महाराष्ट्र मे पिछले 12 दिन में 25 युवा उम्मीदें दम तोड़ चुकी हैं...क्या
बच्चों में आगे निकलने की होड़ का चेहरा इतना ख़ौफनाक हो गया है कि बच्चों
को दबाव सहने की जगह खुदकुशी में ही छुटकारा नज़र आने लगा है...ऐसी स्थिति
लाने के लिए ज़िम्मेदार कौन है...आज ज़रा बच्चों की दिनचर्या पर ज़रा नज़र
दौड़ाइए...स्कूल में पढ़ाई, ट्यूशन में पढ़ाई, घर पर पढ़ाई...और अगर
रिलेक्स होने के लिए थोड़ा ब्रेक लेते हैं तो कंप्यूटर, टीवी या वीडियो
गेम...और किसी काम के लिए घर से बाहर निकलना तक नहीं...आउटडोर खेलने के
लिए जाएं तो जाएं कहां...कहीं पार्क बचे ही नहीं...और अगर कहीं हैं भी तो
वहां इतनी बंदिशें लगा दी जाती हैं कि बच्चे उन्हें दूर से ही राम-राम कर
लेना बेहतर समझते हैं...
लिखने का कोई बेहतर समय नहीं था यह हमारे लिए लेकिन बस बैठे बैठे सोचा क्यों ना आप सबके शिकायत को कम कर दिया जाय .आशा है आप हमारे परेशानियों को समझते हुए गाहे बगाहे हमसे हो रही भूल को क्षमादान देगे.
इसी के साथ नमस्कार


23 comments:

हिमांशु । Himanshu said...

अब तो शिकायत दूर हो जानी चाहिये ।
उल्लेखनीय़ चिट्ठाकारों की चर्चा है यह । सुन्दर ।
धन्यवाद ।

महेन्द्र मिश्र said...

भाई अनिल पुसदकर . और भाई खुशदीप और आपने हमारे भाई बबाल जी के बारे में रोचक चर्चा की . भाई बबाल जी तो हमारे हीरा है बस जरुरत है उन्हें तहेदिल से समझने की . बढ़िया चर्चा .....

महेन्द्र मिश्र said...

भाई अनिल पुसदकर . और भाई खुशदीप और आपने हमारे भाई बबाल जी के बारे में रोचक चर्चा की . भाई बबाल जी तो हमारे हीरा है बस जरुरत है उन्हें तहेदिल से समझने की . बढ़िया चर्चा .....

संगीता पुरी said...

चारो चिट्ठाकारों के बारे में चर्चा कर आपने अच्‍छा काम किया .. अजय जी तो इनकी शिकायत से नाराज ही हो गए !!

ललित शर्मा said...

पंकज जी-
ये चार वाली चर्चा बढिया रही।
आभार

Suman said...

nice

खुशदीप सहगल said...

वेरी स्मार्ट बॉय, चार लायन खुश हुए...रॉबर्ट इसे हमारे मडआइलैंड वाले डैन पर ले जाकर मोना से सोना दिलवा दिया जाए...

जय हिंद...

Mishra Pankaj said...

@ Khushadeep Ji
:)
very nice dialog !
Really & thanks, all of you for your Love!'


Best Regards,
Pankaj Mishra

खुशदीप सहगल said...

राबर्ट, हमने सिर्फ मोना से सोना कहा है, मोना के साथ सोना नहीं...

जय हिंद...

मनोज कुमार said...

Achchhi charcha.

संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari said...

हमसे हो रही भूल को क्षमादान देगे
भाई जी मेरा आपसे परिचय आपके ब्लाग और टिप्पणियो से ही है और इन्हे पढने के बाद मुझे लगता है कि यह शब्दांश आपके स्वाभाविक मानस से नही निकला है.

संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari said...

चारो ब्लागरथियो की चर्चा के लिये बहुत बहुत धन्यवाद.

Arvind Mishra said...

वाह कितनी नयी नवेली सी लग रही है आज की चर्चा

काजल कुमार Kajal Kumar said...

ये भी अच्छा है कि कुछ गिने चुने ब्लाग ही सही...चर्चा में तो लिए गये.

गिरीश बिल्लोरे 'मुकुल' said...

चौपाई चर्चा के लिए आभार ब्रिगेडियर झक्कास लिखतें हैं

ताऊ रामपुरिया said...

वाह आखिर सारे लटके झटके सीख लिये.:)

रामराम.

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

सुन्दर चर्चा!

डॉ. मनोज मिश्र said...

सुन्दर चर्चा....

Udan Tashtari said...

एक ठो सवाल हम भी वहाँ दाग देते तो ठीके न रहता...आज फोटूआ चिपकी होती यहाँ...हा हा!!

बहुत सही चर्चा...बढ़िया है लगे रहिये!!

Mishra Pankaj said...

@ udan tastari ji
kahiye to abhi chep dete hai saahab ji !

बवाल said...

प्रिय पंकज जी,
बहुत बहुत आभार आपका हमें चर्चा में स्थान देने के लिए। कभी कभी हमारा भी मन हो जाता था आप सब के साथ आनंद उठाने का। बस इसीलिए दिल्लगी कर ली थी आपसे। पर फिर भी आपने हमारा मान रखा और सबसे बढ़कर हमारे उस्ताद चचा लुक़्मान जी को याद किया इससे बढ़कर हमारे लिए बड़ी बात कुछ नहीं हो सकती। बहुत बहुत आभार आपका इस सुन्दर और अपनेपन से भरी चर्चा के लिए।
महेन्द्र मिश्रा जी तो हरदिल अज़ीज़ हैं ही। इस चर्चा में और इसकी टिप्पणियों में शामिल सभी अहबाबों को हमारा सलाम।

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

सोमवार का दिन मेरी चर्चा का होता है!
कल सोमवार की चर्चा मैं ही लगा रहा हूँ!

दिगम्बर नासवा said...

सुन्दर चर्चा... पंकज जी ......

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