अंक : 129 चर्चाकार : डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" ज़ाल-जगत के सभी हिन्दी-चिट्ठाकारों को डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"" का सादर अभिवादन! आज “चर्चा हिन्दी चिट्ठों की” में बिना किसी लाग-लपेट के कुछ महत्वपूर्ण चिट्ठों की ओर आपको ले चलता हूँ! ज्योति बसु चले गए। ९५ साल की उम्र। उम्र के आखिरी पड़ाव तक सियासी सक्रियता। पश्चिम बंगाल से केंद्र की राजनीति में धुरी बने रहने वाले वे आखिरी मुख्यमंत्री साबित हुए। एक राज्य की ज़मीन में मजबूती से पांव गड़ाए ज्योति बाबू दिल्ली में धर्मनिरपेक्षता की राजनीति से पहले कांग्रेसवाद के खिलाफ गोलबंदी को सक्रिय करने वाले नेताओं में से रहे। संयुक्त मोर्चा का प्रयोग कई नाकामियों से निकलता हुआ यूपीए सरकार में आकर परिपक्व हुआ। अब सीपीएम केंद्र सरकार के साथ नहीं है,लेकिन पांच साल तक सरकारी की नीतियों पर उसका राजनीतिक प्रभाव गज़ब का रहा। इतना सख्त रहा कि मनमोहन सिंह अपनी आर्थिक नीतियों के कारण नहीं बल्कि सामाजिक नीतियों के कारण दुबारा सत्ता में आए। ये सीपीएम की दूसरी बड़ी ऐतिहासिक गलती थी। न्यूक्लियर डील पर इतनी घोर कम्युनिस्ट लाइन ली कि उस धुरी से बाहर ही छिटक गई जो उनके दम पर ही घूम रही थी। ज्योति बसु न्यूक्लियर डील के समर्थन में थे। प्रकाश करात नहीं थे। लेकिन तब शायद एक पार्टीमैन के नाते ज्योति बसु ने अपनी हैसियत का बेज़ा इस्तमाल नहीं किया। बल्कि इस बार भी पार्टी के नेताओं की बात मान ली।…………. | ताऊजी डॉट कॉम खुल्ला खेल फ़र्रुखाबादी (174) : आयोजक उडनतश्तरी - बहनों और भाईयों, मैं उडनतश्तरी इस फ़र्रुखाबादी खेल में आप सबका हार्दिक स्वागत करता हूं. जैसा कि आप जानते हैं कि आज मैं आयोजक के बतौर यह अंक पेश कर रहा हूं...
लगी झूमने फिर खेतों में
कुहू-कुहूकर कोयल सबको मधुरिम गीत सुनाती!
फूलों के चेहरों पर खिलकर मुस्काहट सज जाती!! मस्त पवन के साथ महककर झूम उठी हरियाली! पीपल के पत्तों ने मिलकर ख़ूब बजाई ताली!!.. ....
| अंधड़ ! तू निश्चिन्त रह, तू मेरा हिन्दुस्तान है ! - आज लोभ का मारा इन्सान, बन बैठा हैवान है, पर तू व्यग्र न हो, तू तो मेरा हिन्दुस्तान है ! माना कि कलयुग अपने चरम पे है, पर पाप-पुण्य तो अपने करम पे है, सतपुर.. | ज़ख्म मत करो ऐसा ........... - मैं कोई वस्तु नही क्यूँ मेरी बोली लगाते हो दुनिया की इस मंडी में क्यूँ खरीदी बेचीं जाती हूँ कभी धर्म के ठेकेदारों ने मेरी बलि चढ़ाई है कभी समाज के ठेकेदारों ... | अंतर्मंथन आइये निवेदन करें गूगल वासियों से , की भई, कम से कम भारत में तो इसे बंद मत करिए। - *चिकित्सा है पेशा, समाज सेवा जिम्मेदारी * *फोटोग्राफी का शौक, हंसना हँसाना है जिंदगी हमारी। * नए साल में हमने यही सोचा था की अब सारी पोस्ट इन्ही चार विषय.. | गीत-ग़ज़ल रन्ज न रखना तुम दिल में - ** *दुनिया को इधर उधर तुम कर लेना पर रन्ज न रखना तुम दिल में , मेरे लिए कह पाते नहीं जब ज़ज्बात दिल के तुम नज़रों की भाषा पढ़ लेना तोहफों की कीमत आँकों मत जो.. | वीर बहुटी - संजीवनी **इन्विट्रो फर्टेलाईजेशन* जैसे अविष्कार ने आज कल जिस तरह एक व्यापार का रूप ले लिया है,जैसे कि कुछ लोग तो सही मे औलाद चाहते हैं इस लिये कोख किराये पर.. | भीगी गज़ल हमको भी समझ फूल या पत्थर नहीं आते - हमको भी समझ फूल या पत्थर नहीं आते दुश्मन की तरह दोस्त अगर घर नहीं आते नज़दीक बहुत गर रहे, बन जाओगे आदत ये सोच के, मिलने तुझे अक्सर नहीं आते जिस दिन से मै... | हास्यफुहार आज का स्पेशल - *आज का स्पेशल* एक होटल में उस दिन के मेनू में *आज का स्पेशल* के नीचे बड़े बड़े अक्षरों में लिखा था *अंगूर-कद्दू सब्जी*। फाटक बाबू ने नया आइटम देख सो.. | अनवरत जब इतिहास जीवित हो उठा - 1976 या 77 का साल था। मैं बी. एससी. करने के बाद एलएल.बी कर रहा था। उन्हीं दिनों राजस्थान प्रशासनिक सेवा के लिए पहली और आखिरी बार प्रतियोगी परीक्षा में बैठा.. | अज़दक संगीन, रंगीन - कहानी के कितने गहीन रंग. सोचता है आदमी, अचकचाए, असमंजस के तार पर सवार देखने निकलता है बनी-बुनी जाती होगी कहानियों की शराब, खिली खिली बहार. इतनी आसानी से कु... | यही है वह जगह कॉमनवेल्थ गेम्स : गुलामी और लूट का तमाशा : सुनील - आजाद भारत के लिए यह एक शर्म का दिन था। २९ अक्टूबर २००९ को आजाद और लोकतांत्रिक भारत की निर्वाचित राष्ट्रपति सुश्री प्रतिभा पाटील अगले राष्ट्रमंडल खेलों के प.. | नारी वाईटनिंग क्रीम गोरा बनाए के नुक्सान - रंग को लेकर लोग मे बहुत भ्रांतिया हैं । गोरे रंग को हमेशा से खूबसूरती का पैमाना माना जाता रहा हैं और सांवला और काला रंग बदसूरत । ये सोच केवल हमारे देश मे ह... | दुबे जी DOOBE JI  | सम्मानित ब्लॉगर मित्रों! मेरी दृष्टि में चर्चा का अर्थ चिट्ठों को आप तक पहुँचाना ही होता है! यह कार्य मैंने पूरी निष्ठा से कर दिया है। आप इनको पढ़िए और अपनी राय टिप्पणियों के माध्यम से दीजिए! धन्यवाद सहित- डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक” आपका
यह चर्चा कल 18 जनवरी को प्रकाशित होनी थी परन्तु टाइम जोन ठीक न होने के कारण शैड्यूल में न जाकर प्रकाशित हो गई है। | |
22 comments:
naya praaroop sundar laga sir...
shukriya Milan' kahani logon tak pahunchaane ke liye..
Jai Hind...
एक नये कलेवर में बहुत अच्छी चर्चा।
बहुत सुंदर चर्चा.
हर चीज बहुत सुंदर। गेट अप, सेट अप सब कुछ। वाह!
बहुत सटीक चर्चा
आनन्द आया....
सुन्दर संकलन सुन्दर चर्चा
वाह बहुत सुंदर चर्चा शास्त्री जी ये सबसे संभव नहीं है
अजय कुमार झा
बहुत बढ़िया चर्चा
एक नये कलेवर में बहुत अच्छी चर्चा
बहुत बढिया चर्चा, शास्त्री जी
आभार
बहुत सुंदर रही शास्त्री जी आप की चर्चा
शाश्त्री जी आज तो चर्चा म्ह कीले ही गाड दिये. घणी जोरदार.
रामराम.
"मयंक जी
चाहे किसी भी कलेवर में चर्चा करें
और चाहे किसी भी मंच पर -
उसमें नव्यता और गांभीर्य
स्वयं प्रभावशाली हो जाते हैं!"
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"सरस पायस" पर प्रकाशित
डॉ. देशबंधु शाहजहाँपुरी की कविता को
इस चर्चा में स्थान देने के लिए आभार!
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ओंठों पर मुस्कान खिलाती,
कोहरे में भोर हुई!, मिलत, खिलत, लजियात ... ... .
संपादक : सरस पायस
बहुत बेहतरीन चर्चा.
दुखद समाचार।
श्री ज्योति बसु जी को श्रृद्धांजलि एवं उनकी आत्म की शांति के लिए प्रार्थना।
उनके अवसान से एक युग की समाप्ति हुई।
बहुत बहुत बधाई शास्त्री जी पहले की तरह ही एक सुंदर चिट्ठा चर्चा..धन्यवाद!!
नए रंग रूप की चिटठा चर्चा से बहुत सारे अच्छे लिंक मिले ...
प्रविष्टि शामिल करने का भी बहुत आभार ....!!
nice.
कामरेड़ ज्योति बसु को लाल सलाम
बहुत सुंदर चर्चा शास्त्री जी
बेहद खूबसूरत चर्चा । आभार । ढंग से संकलित किया है ।
अच्छी चर्चा!
हमेशा की तरह सुन्दर चर्चा की आपने शास्त्री जी। प्रणाम।
इस नए कलेवर में 'गागर में सागर' भर दिया है आपने !
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