आज प्रस्तुत हैं इनके ब्लॉग्स की कुछ अद्यतन प्रविष्ठियाँ- |
बगीचीहिन्दी ब्लॉगर को पद्म पुरस्कार (अविनाश वाचस्पति)क्या कोहरा कभी छंटेगाऔर उससे देश को दिखेगा हिन्दी ब्लॉगर कोई जिसे दे सकें वे पद्म पुरस्कार कोई श्री,श्रीमती,सुश्री भूषण, आभूषण,विभूषण। सब चाहेंगे उसे ही मिल जाये पर मैं चाहूंगा मिले आपको जिससे हिंन्दी ब्लॉगिंग का स्वरूप कोहरे से बाहर निकल कर चमक दमक जाये। प्रस्तुतकर्ता अविनाश वाचस्पति | झकाझक टाइम्स माननीय शैल अग्रवात जी इसकी पुष्टि कीजिएगाः क्या ये सच है? |
![]() साधक उम्मेद सिंह जी और प्रशांत उर्फ़ पीडी से एक छोटी सी मुलाकात चैन्नई मेंआज की मुलाकात का विवरण बाद में, केवल एक फ़ोटो देखिये ..साधक उम्मेद सिंह जी की कलम इस मुलाकात के लिये - प्यारी सी यह सुबह, सार्थक भी लगती कुछ ज्यादा. विवेक के संग प्रशान्त पाया, लिये अर्थ तात्विक सा. लिये अर्थ तात्विक सा, चर्चा खुद की और जगत की. ब्लाग पे क्या लिखते, क्यों लिखते? सारी बातें मन की. कह साधक यह मुलाकात तीनों को याद रहेगी. सार्थक भी लगती कुछ ज्यादा, यह सुबह प्यारी सी. | पिताजीशुरूआत से संपन्न होने तक का सफरस्मृति गीत / शोक गीतयाद आ रही पिता तुम्हारी संजीव 'सलिल' तेताला"ललित की कविता का स्वंयवर” (शास्त्री “मयंक”)प्रियवर अविनाश वाचस्पति”तेताला” पर चर्चा करने के लिए आपके समक्ष हाजिर हूँ- यदि आपको अपनी हिन्दी सुधारनी है तो “हिंदी का शृंगार नवसुर में कोयल गाता है |
माँ !विश्व में माँ के योगदान को लोगों के समक्ष रखने वाला एक चिट्ठा!!मेरी माँनये ज़माने के रंग में,पुरानी सी लगती है जो| aage बढने वालों के बीच, पिछङी सी लगती है जो| गिर जाने पर मेरे, दर्द से सिहर जाती है जो| चश्मे के पीछे ,आँखें गढाए, हर चेहरे में मुझे निहारती है जो| खिङकी के पीछे ,टकटकी लगाए, मेरा इन्तजार करती है जो| सुई में धागा डालने के लिये, हर बार मेरी मनुहार करती है जो| तवे से उतरे हुए ,गरम फुल्कों में, जाने कितना स्वाद भर देती है जो| मुझे परदेस भेज ,अब याद करके, कभी-कभी पलकें भिगा लेती है जो| मेरी खुशियों का लवण, mere जीवन का सार, मेरी मुस्कुराहटों की मिठास, merii आशाओं का आधार, मेरी माँ, हाँ मेरी माँ ही तो है वो| | अविनाश वाचस्पतिकीबोर्ड का खटरागीआइये दिल्ली की झांकी यहां पर देखें : गणतंत्र दिवस पर नहीं दिखाई जा रही है>> मंगलवार, २६ जनवरी २०१०![]() किसी भी लिंक पर क्लिक करें किसी भी लिंक पर पढ़ें पर टिप्पणी देने में कंजूसी न बरतें टिप्पणी सभी पर दें क्योंकि असली झांकी तो टिप्पणियां ही होती हैं option=com_content&task=view&id=125">अलबेला खत्री डॉट कॉम मोलतोल डॉट इन आखर कलश हरिभूमि |
पांचवा खम्बायह चिट्ठा चिट्ठाकारों के सम्मेलन , मिलन और उनकी गतिविधियों की सूचना के बारे में है . साथ ही ब्लॉग जगत संबंधित सूचनायें भी दी जा सकती हैं .लखनऊ की पहली औपचारिक चिट्ठाकार भिड़ण्त में आप सादर आमंत्रित हैं।ये मैं नहीं कह रहा ज़ाकिर अली रजनीश का स्नेह निमंत्रण हैये बैठका गोखले मार्ग स्थित एन0बी0आर0आई0 के गेस्ट हाउस में प्रस्तावित है और उसकी तारीख है 30 जनवरी। समय रखा गया है, शाम के 06 बजे का | ![]() पप्पू का रिसेंट फोटो देखना मत भूलियेगाSaturday, January 30, 2010![]() पप्पू ने बांध दिया बांध दिया मजा जा रहे थे सड़क सड़क लिखा देगा दीवार पर कुछ कड़क दिमाग गया पप्पू का तुरंत सरक ... पढ़ने वाला गधा लिखने वाला गधा। |
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अगले सोमवार को फिर मिलूँगा!!
15 comments:
बहुत मज़ा आया ब्लॉग जगत के दिग्गज से मिल कर ......... बहुआयामी व्यक्तित्व और विलक्षण प्रतिभा के मालिक अविनाश जी को हमारा प्रणाम .........
वाह जी! बहुत सुंदर. मुलाकात जब भी हो अच्छा लगता है.
अविनाश वाचस्पति जी से अच्छे से परिचय करवाया आपने .. बहुत अच्छा लगा मिलकर !!
अब तो अविनाश जी कहीं भी मिलें पकड़ लेगें इनको ।
AVINASH JI SE MILWANE KA SHUKRIYA.
वैसे तो बहुत कुछ जान चुका हूँ चाचा जी के बारे में पर यह प्रस्तुति भी बेहतरीन लगी इन सब के बावजूद जो सबसे बड़ी बात है वह यह की ये एक बड़े और नेक दिलवाले इंसान भी है जो हमेशा सभी की मदद करने को खड़े रहते है ..अविनाश वाचस्पति जी को सादर प्रणाम..और इस प्रस्तुति के लिए आभार..
sachmuch avinaash vachaspati hindi blog jagat ke haatimtaai hain
inse milvane ke liye aapka abhaar !
aaj avinaash ji ko neend nahin aayegi.......
samose kha kha kar time paas karenge..ha ha ha
अविनाश जी जैसे धुरंधर का यहाँ सम्यक परिचय दिया आपने । कौन नहीं पहचानता इन्हें । आभार ।
बहुत लाजवाब और विस्तृत परिचय दिया आपने. आभार.
रामराम.
अविनाश बेटा जी
जीते रहो
आपको को कोटि कोटि आशीर्वाद
गुड्डो दादी चिकागो से
अविनश जी को अभैनंदन!
आपको आभार।
अविनाश जी से मिलना सुखद अनुभव रहा, धन्यवाद
बेहतरीन....
शास्त्री जी इस चर्चा को कह सकती हूँ कि ये सार्थक चर्चा है कम से कम उस ब्लागर का पूरा परिचय और पूरी सृजन यात्रा का तो पता चलता है। लेख की सृजन यात्रा से ही रूबरू करवाने का लाभ है वर्ना लाखों लोग ब्लाग बना कर लिख रहे हैं जिसे लेखन नही कहा जा सकता। पिछली पोस्ट पर मेरी सहम्ति नही थी मैने अपना पक्ष रखा है बस। मेरा मानना है कि काम वो किया जाये जिसका पाठकों को लाभ हो। अविनाश जी के बारे मे जान कर अच्छा लगा उन्हें शुभकामनायें।
अविनाश जी से मिलना सुखद अनुभव रहा,
धन्यवाद !!!
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