Wednesday, September 16, 2009

दरिया के बगैर क़तरे की,न कोई हकीक़त न वजूद ( चर्चा हिन्दी चिट्ठो की )

नमस्कार

चर्चा हिन्दी चिट्ठो के इस अंक के साथ मै पंकज मिश्रा !
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ताऊ की शोले (एपिसोड - 6)
इस एपिसोड से बसंती का रोल कर रही हैं "अदा"
बसंती सांभा से फ़ोन पर बात करते हुये


बसंती और धन्नो लडके को मूर्ख बनाकर बाईक झपट ले गई!


सांभा
: अरे बसंती..ऐसे मत
सोचो..हम इतना परेशान हूं...सबके लिये...अब क्या करें? तुम्ही बताओ....उधर
वो कालिया अलग गिरोह बनाने की धमकी दे रहा है. इधर गिरोह के लोग इधर उधर
हो रहे हैं...गोली बारुद कुछ है नही..जो कोई शिकार करें....चारों तरफ़ से
पुलिस का शिकंजा अलग से...

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हिंदी-दिवस के अवसर पर
"सर्वोदय हिन्दी सेवी"
सम्मान से अलंकृत किया गया।
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एक मौत,मर कर मरे , तो क्या मरे आदमी है वो,जो हर पल, मर-मरकर जिया करे मौत भी हार जाती है उसके आगे जो ज़िन्दगी से मौत की ज़ंग लड़ा करे मौत क्या मारेगी उस जीवट को जो मौत को सामने देख हंसा करे हो ज़िन्दगी ऐसी आदमी की कि मौत भी ,उसकी मौत पर , रोया करे
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माना के दरिया में कई क़तरे होते हैं
पर दरिया को क्या पड़ी कि,कितने क़तरे होते हैं
दरिया के बगैर क़तरे की,न कोई हकीक़त न वजूदMy Photo
फिर भी तेवर लिए हुए,क़तरे होते हैं
मिटने का गुरुर या किस्मत कहें
ज़ज्ब-दरिया में फना,क़तरे होते हैं
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अक्सर चला जाता हूँ

अपने किनारे से चलते हुए

तुम्हारे मंझधार तक
अनजाने हीं तुम्हारे बहाव में बहते हुए ओम आर्य
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देव मंदिरों के कमनीय कला प्रस्तरों मैं
हम एक ओर जीवन की सच्ची व्याख्या और उच्च कोटि की कला का निर्देशन तो
दूसरी ओर पुरुष प्रकृति के मिलन की आध्यात्मिक व्याख्या पाते हैं | इन कला
मूर्तियों मैं हमारे जीवन की व्याख्या शिवम् है , कला की कमनीय अभिव्यक्ती
सुन्दरम है , रस्यमय मान्मथ भाव सत्यम है | इन्ही भावों को दृष्टिगत रखते
हुए महर्षि वात्सयायMy Photo
न मैथुन क्रिया, मान्मथ क्रिया या आसन ना कह कर इसे
'योग' कहा है | राकेश सिंह
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मेरे भाव कुछ भी हों ,


पर अभिव्यक्त मैं, कर पाती My Photo कुसुम ठाकुर

ऐसा क्यों होता मेरे साथ ,
यह समझ पाऊं मैं।
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निद्रा विरहित पट खोल सुहृद मैं तिमिर बीच झाँकता रहा


विस्मित विस्फारित नयन खोल खोजता तुम्हारा पंथ कहाँ

कुछ भी सूझ पड़ता आगे हो कहाँ तिमिर में मित्र प्रवर -My Photo हिमांशु



क्या दूर सुहृद ! प्रियतम ! निराश चित्कार रहा अम्बर-अन्तर
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प्रयोग यदि सही तरीके से हो ,परिणाम खुद खुद रंग दिखाने लगते हैं कुछ
ऐसा ही नजारा देखने को मिला पास के एक गांव में एक नुक्क्ड़ नाटक के
माध्यम से पर्यावरणीय जागरूकता को लेकर मंचन हो रहा था ।उसका मुख्य
उद्देश्य बुन्देलखण्ड विMy Photoन्ध्य क्षेत्र में कम से कम पांच सौ करोड़ पौधों
के वृक्षारोपण को ले कर था गांव में मन्दिर के पास अपने उद्देश्यों को
ले कर जन जागरूकता के प्रति किया गया प्रयास कहीं से कमतर प्रतीत नहीं हो
रहा था हेमंत कुमार
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उस गली में

मुस्कराता है एक बच्चा

हर शामMy Photo राजकुमार केसवानीhttp://2.bp.blogspot.com/_Z5B2qDaFrwo/SPmg-JpqsOI/AAAAAAAAAB4/_aB3M3zgTvA/s320/Swastika.png

निकलता हूं जब मैं

अपने काम पर

मैं बदली सी लहराती हूँ


मैं लतिका सी बल खाती हूँ

My Photo निर्मला जीhttp://2.bp.blogspot.com/_Z5B2qDaFrwo/SPmg-JpqsOI/AAAAAAAAAB4/_aB3M3zgTvA/s320/Swastika.png


मंद पवन का झोंका बन कर

साजन के मन बस जाती हूँ
DSC01046 लवीजाhttp://2.bp.blogspot.com/_Z5B2qDaFrwo/SPmg-JpqsOI/AAAAAAAAAB4/_aB3M3zgTvA/s320/Swastika.png

एक तरफ मैं बातें करता बरछी, तीर, कटारों कीhttp://2.bp.blogspot.com/_Z5B2qDaFrwo/SPmg-JpqsOI/AAAAAAAAAB4/_aB3M3zgTvA/s320/Swastika.png
काली का करवाल, साथ में बहते शोणित-धारों की
क्षार-क्षार करने को आतुर दहक रहे अंगारों कीMy Photo
टूट-टूट कर पल-पल गिरते सत्ता के दीवारों की

जब कभी हम किसी अजाब में आ जाते हैं
http://2.bp.blogspot.com/_Z5B2qDaFrwo/SPmg-JpqsOI/AAAAAAAAAB4/_aB3M3zgTvA/s320/Swastika.png बाहें फैलाए हुए वो ख़्वाब में आ जाते हैं ढूंढ़ते फिरते हैं हम कितने सवालों का जवाब जाने कैसे वो ख़ुदा की क़िताब में आ जाते है कोशिशें मेरी डूबने की कर गए नाक़ामयाब जाल कसमों के लिए तालाब में आ जाते हैंhttp://2.bp.blogspot.com/_Z5B2qDaFrwo/SPmg-JpqsOI/AAAAAAAAAB4/_aB3M3zgTvA/s320/Swastika.png


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10 comments:

ताऊ रामपुरिया said...

वाह ..बहुत ही सुंदर चर्चा है. डिजाईन पसंद आया.

रामराम.

हिमांशु । Himanshu said...

रंग-रंगीली सजीली चर्चा । प्रविष्टियों का चयन बेहतर है । आभार ।

Kusum Thakur said...

पंकज जी,
बहुत बहुत धन्यवाद .

ओम आर्य said...

पंकज जी
सच बहुत ही अच्छा लगा......बहुत बहुत शुक्रिया...

Arvind Mishra said...

ये तो बड़ा काम पकड़ लिया आपने !

MUMBAI TIGER मुम्बई टाईगर said...

badhiya charcha hui!
Charcha Ghar jaana-pehechana hi hai.
Mangal kamnaye

Hey Prabhu Yeh Terapanth

Nirmla Kapila said...

aaां की चर्चा तो काफी बडी है । बहुत बहुत धन्यवाद्

दिगम्बर नासवा said...

AAPKI CHARCHA LAJAWAAB HAI PANKAJ JI ......

Pt.डी.के.शर्मा"वत्स" said...

ये तो बडी मेहनत का काम है भई।
चर्चा का पहला अंक बढिया रहा!!

'अदा' said...

ham basanti bol rahein bhai.
ham aaye aap ka blog aapka blogvani ka kudrat hai
kabhi aapka fotu dekhte hain kabhi ham apna fotu dekhte hain
ha ha ha ha

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