Thursday, September 17, 2009

कौन सुनेगा 'दास्ताँ' तेरा ये किस्सा पुराना प्यार का( चर्चा हिन्दी चिट्ठो की )

नमस्कार , आदाब .
रमजान के इस पाक महीने में अल्लाह आपको सेहत शोहरत के बरक्कत दे यही कामना है .
http://www.wakeupcaller.com/images/ramajan_special_banner1.jpg

चलते है अपने चर्चा की तरफ पूरे जोशो खरोश के साथ .
आइये सबसे पहले सुनते है आकाशवाणी लखनऊ की भेट मीनू खरे के साथ !!!My Photo
गीत सुनने के लिए यहाँ क्लिक करे निवेदन है.

अब दूसरी तरफ गार्गी गुप्ता है लोरी के साथ !
सो जा ......सो जा ......हो सो जा
राजदुलारे .......सो जा .....हो सो जा .......
तेरी चंदा जैसी माता
तेरे पिता है विधाता
और तू है सब की आँखों का तारा
सो जा ......सो जा ......हो सो जा
राजदुलारे .......सो जा .....हो सो जा .......

ऐसी मौत को आप क्या कहेगे कि मौत भी उसकी मौत पर रोये

महफूज साहब कुछ बेवफा कमबख्त की बात कर रहे है आप पढ़ लो जी हम काहे लिखे यहाँ ?My Photo

सावधान रहेगे संगीता जी धन्यवाद बताने के लिए , आप भी पढिये और जानिए

सोचता हूँ, आज अगर रामधारी की माई फाईव स्टार होटल में इस्तेमाल होने वाले
इन टॉयलेट पेपर्स को देखती तो जरूर अपने बेटे को इंटेलेक्चुअल, गुणी और
हाई क्लास का मानती औऱ कहतीमेरा बेटा फाईव स्टार वाले बडे बडे लोगों की
तरह रहता है………. है कोई मेरे बेटे के बराबरी का पूरे गाँव में :)My Photo सतीश पंचम जी ,

जिस प्रेम में प्रतिदान न हो


फिर उसे अवदान क्यों हो ?

जब हो कोई पाषाण निष्ठुर
My Photo

भावना का दान क्यों हो ?


प्यार में यार कितना प्यारा लगता है इसके ऊपर बहूत खूब लिखा जा चुका है और दिन प्रतिदिन लिखाभी जा रहा है आज लिखे है सुधीर जी ने .
जिनके लिए बदनाम हुए, वो किस्से हमारे आम करे जाते हैं
कोई तो सिखाओ यारों उन्हें सलीका इश्क के इज़हार का
My Photo
रकीबों के इस शहर में सबकी हैं हर किसी से अदावत
कौन सुनेगा 'दास्ताँ' तेरा ये किस्सा पुराना प्यार का





तकनीक आशीष भाई के ब्लॉग पर ~~~~
क्या आपको रोमन लिपि में लिखी ऐसी मेल मिलती हैं, जो हिन्दी भाषा में होने
के बावजूद बेगानी लगती है। मुझे भी मिलती हैं और मैं उन्हें रोमन में
पढ़ने की बजाय देवनागरी में बदलकर पढ़ना पसंद करता हूं\

बच्चो का मनोविज्ञान समझना कोई आसान बात नहीं
है | उनका स्वभाव .उनकी
रुचियाँ और उनके शौक यदि हर माता पिता समझ ले तो बच्चों के दिल तक आसानी
से पहुंचा जा सकता है | बहुत सी ऐसी बातें होती है जिनको समझने के लिए कई
तरकीब ,कई तरह के मनोविज्ञानिक तरीके हैं जिस से बच्चो को समझ कर उनके
स्वभाव को समझा जा सकता है | एक मनोवेज्ञानिक ने इसी आधार पर बच्चे के
व्यक्तितव को समझने के लिए उनके लिखने के ढंग ,पेंसिल के दबाब और वह रंग
करते हुए किस किस रंग का अधिक इस्तेमाल करते हैं ..के आधार पर विस्तार
पूर्वक लिखा है ...माता पिता के लिए इस को जानना रुचिकर होगा ...

दुनिया की सबसे दुखी औरत होती हैं

पर कमज़ोर नहीं होती
वह जोरो से रेडियो चलाते


पड़ोसी से लेकर

लापरवाह डॉक्टर तकMy Photo

सबसे लड़ सकती हैं

उसे जरा सा भी शक हो जाये

मैली चादर ओढ़ के कैसे द्वार तुम्हारे आऊँ
हे पावन परमेश्वर मेरे मन ही मन शरमाऊँ
तुमने मुझको जग में भेजा निर्मल देके काया
आकर के संसार मैं मैंने इसको दाग लगाया
जनम जनम की मैली चादर कैसे दाग छुडाऊँ

मेरे कैलेंडर की
चिड़िया का
एक पंख
रोजाना टूट जाता है
और मैंMy Photo
उसे सहेज कर
डायरी में छुपा लेता हूँ

सदियों से मैं तो यूँ ही चलती रही हूँ
चलते-चलते मैं कभी थकती नही हूँ
बहना ही मेरा जीवन चलना ही नियति है
बंजारन की बेटी हूँ मैं तो ये चली




9 comments:

Arvind Mishra said...

चिट्ठा चर्चा ईस्टमैन कलर में!

हिमांशु । Himanshu said...

रंग-बिरंगे चिट्ठों की बेहतर चर्चा । प्रविष्टियों की झलक देखना सुखकर है । आभार ।

संगीता पुरी said...

अच्‍छे पोस्‍टों का संकलन किया है !!

Udan Tashtari said...

ये बढ़िया रही चर्चा एक अलग अंदाज में.

ताऊ रामपुरिया said...

बिल्कुल अभिनव चर्चा.

रामराम.

दिगम्बर नासवा said...

AAPKI AAJ KI CHARCHA BHI LAJAWAAB HAI ... ACHHA SANKLAN HAI CHITTHON KA .......

महफूज़ अली said...

Thank you pankaj......... gud collections.......

Pappu said...

are janab kya charcha karte hain aap !!
bahut badhiya...

मीनू खरे said...

धन्यवाद पंकज जी . एकाएक यहाँ आना बहुत सुखकर लगा.

पसंद आया ? तो दबाईये ना !

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